UP Board Class 10 Science Notes : Classification of elements, Part-II

Nov 10, 2017 10:12 IST

sci notes on classification of elements
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In this article you will get UP Board class 10th Science notes on Classification of elements second part. Here we are providing each and every notes in a very simple and systematic way. Many students find science intimidating and they feel that here are lots of thing to be memorised. However Science is not difficult if one take care to understand the concepts well.The main topic cover in this article is given below :

आवर्त सारणी मेँ आयतों के चार मुख्य लक्षण निस्तलिखित है-

(1) आवर्त सारणी में पहले लघु आवर्त में केवल दो तत्व क्रमश: हाइड्रोजन और हीलियम हैँ जिसके कारण इस आवर्त को अति लघु आवर्त कहते हैं। आवर्त सारणी के दूसरे व तीसरे लघु आवतों में आठ-आठ तत्व हैं। इन द्वितीय व तृतीय आवर्तों के कुछ तत्वों में विकर्ण सम्बन्ध है, अर्थात् विकर्ण के सिरों पर स्थित दोनों तत्वों के गुणों में समानता होती है।

classification of elements notes

(2) आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त के तत्व प्रारूपिक तत्व (typical elements) कहलाते हैं| ये तत्व अपने –अपने समूह के प्रतिनिधि के रूप में होते हैं| सोडियम, मैग्नीशियम, एलुमिनियम, सिलिकन, फास्फोरस, सल्फर तथा क्लोरिन प्रारूपिक तत्व कहलाते हैं| ये तत्व उस समूह की संयोजकता तथा विद्युत् – रासायनिक लक्षणों को प्रकट करते हैं तथा दोनों उपसमूहों के मध्य सेतु तत्व (Bridge elements) का कार्य करते हैं | ये तत्व किसी एक उपसमूह किसी एक उपसमूहों के तत्वों से अधिक समानता रखते हैं; जैसे-

classification of elements

प्रथम समूह में सोडियम उपसमूह A की क्षार धातुओं से अधिक समानता तथा उपसमूह B की सिक्का धातु से कम समानता रखता है।

(3) आवर्त सारणी में अन्तिम चार आवर्त दीर्घ आवर्त कहे जाते हैं। चौथे तथा पाँचवे आवर्तों में  प्रत्येक में 18, 18 तत्व हैं। छठे आवर्त में 32 तथा सातवाँ आवर्त अपूर्ण (Incomplete period) है।

(4) चौथे, पाँचवें तथा छठे आवर्तों में प्रत्येक में ही तत्वों की दो श्रेणियों (पहली सम तथा दूसरी विषम) हैं। सम श्रेणी में 8 तथा विषम श्रेणी में 7 तत्व है । इन दोनों श्रेणियों के मध्य में शेष 3 तत्व एक – ही स्थान पर व्यवस्थित किए गए है। इस आधार पर तीनो दीर्घ आवर्तों में; सम तथा विषम श्रेणियों में कुल मिलाकर 9 तत्वों को व्यवस्थित किया गया है । ये 9  तत्व संक्रमण तत्व (transitional elements) कहे जाते हैं। इन तत्वों की प्रमुख विशेषताएँ - विभिन्न संयोज़कता प्रदर्शित करना , अनुचुम्बकीयता दर्शाना ,उत्प्रेरकता का गुण होना तथा रंगीन संकर (complex) आयनों का निर्माण करना आदि है। आवर्तों में इनका विवरण निम्नवत है-

classfication of elements

मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के गुण :

मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के प्रमुख गुण निम्नलिखित है-

1 . तत्वों के सरल अध्ययन में उपयोग - इस सारणी में अब तक ज्ञात लगभग 116 तत्वों का ज्ञान तथा सुविधापूर्ण अध्ययन किया जाना सम्भव हुआ है। अब इस सारणी में 7 आवर्त तथा 9 वर्ग है जिसके कारण किसी तत्व विशेष का अध्ययन करने से ही उस वर्ग के सभी तत्त्वों वह अध्ययन सरल हो जाता हैं क्योकि एक ही वर्ष में उपस्थित सभी तत्वों के गुणों में पारस्परिक समानता होती है।

2. परमाणु भार ज्ञात करने मे उपयोग - मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी कई तत्त्वों के गलत परमाणु भारों के सही करने में उपयोगी सिद्ध हुईं है। जैसे-: 1869 से पहले बेरिलियम का परमाणु भार 13.5 माना जाता था क्योकि बेरिलियम के कुछ गुण विकर्ण सम्बन्ध द्वारा Al के स्थान पाए जाते जिसके कारण बेरिलियम को त्रिसंयोज़क माना गया। इसके आधार पर उसका परमाणु भार तुल्यांकी भार 4.5 की सहायता से 13.5 माना गया।

  परमाणु भार = तुल्यांकी भार × संयोज़कता

        = 4.5 × 3 = 13.5

इस परमाणु भार के आधार पर बेरिलियम का स्थान मेण्डेलीफ आवर्त सारणी में कार्बन (12.011) के बाद तथा नाइट्रोजन (14.007) से पहले आना चाहिए, परन्तु इनके बीच में कोई स्थान न होने के कारण मेण्डेलीफ ने इसके परमाणु भार के सही किया। Mg के साथ गुणों में समानता के आधार पर इसे द्विसंयोज़क माना; अत: इसका परमाणु भार = 4.5 × 2 = 9 निकाला। इस परमाणु भार के आधार पर उसे Li (6.939) के बाद तथा B (10.81) से पहले समूह II में रखा गया। इस प्रकार मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी गलत परमाणु भारों को सही करने में उपयोगी सिद्ध हुई।

3. नए तत्वों को खोज में उपयोग- मेण्डेलीफ ने अपनी मूल सारणी में नए तत्वों के लिए कई रिक्त स्थान छोड दिए थे। ये रिक्त स्थान उन तत्वों से सम्बंन्धित्त थे जिनकी खोज तब तक नहीं हुई थी।

बाद में जब इन नए तत्वों की खोज हुईं तो ज्ञात हुआ कि उनके गुण मेण्डेलीफ द्वारा वर्णित गुणों के लगभग समान थे। स्कैण्डियम (44.96), गैलियम (69.72) तथा जर्मेनियम (72.59) इसके उदाहरण हैं। इस प्रकार मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी से नए तत्वों की सोज तथा अनुसन्धान में सहायता मिली है।

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मेण्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी के दोष :

मेंपडेलीफ की आवर्त सारणी के प्रमुख दोष निस्तलिखित हैं-

1. हाइड्रोजन का स्थान - इस सारणी में हाइड्रोजन को प्रथम समूह में क्षार धातुओं के साथ उनके समान धन-विद्युती गुण के कारण तथा सप्तम समूह में हैलोजेन के साथ उनके समान ऋण - विद्युती गुण के कारण दो स्थानों पर रखा गया है, परन्तु हाइड्रोजन को दोनो समूहों (प्रथम तथा सप्तम) में रखा जाना दोषपूर्ण है ।

2. असमान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखना - इस सारणी मेँ तत्वों को गुणों की समानता के आधार पर एक साथ रखा गया है, फिर भी कुछ तत्व ऐसे है जिनके गुणों में असमानताएं हैं। दूसरे शब्दों में, कुछ तत्व भिन्न - भिन्न गुणों वाले होते हुए भी एक समूह में रखे गए है, जैसे -I - A के "तत्वों (क्षार धातुएँ) तथा 1-B  के तत्वों (सिक्का धातुएँ) को एक हो समूह में रखा गया है, जबकि इनके गुणों में भिन्नता है।

3. समान गुणों वाले तत्वों को भिन्न-भिन्न समूहों में रखना -  मेंपडेलीफ की आवर्त सारणी में समान गुण वाले तत्वों" को भिन्न-भिन्न स्थानो पर रखा गया है, जैसे - Pt(195.09) तथा Au(1 96.97) के गुणों में समानताएँ है, फिर भी उन्हें आठवें तथा पहले समूह में भिन्न-भिन्न रखा गया हैं। इसके अतिरिक्त कॉपर व पारा, बेरियम व लेड इत्यादि के गुण समान होते हुए भी उन्हें भिन्न – भिन्न समूहों में रखा गया हैं|

4. भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखना - मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में कुछ भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखा गया है, जैसे- ,

(i) कोबाल्ट (परमाणु भार = 58.93), निकिल (परमाणु भार = 58.71) से पहले रखा गया हैं।

(ii) टेल्यूरियम (परमाणु भार =127.6), आयोडीन (परमाणु भार = 126.9) से पहले रखा गया है।

मेण्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में इस प्रकार के परिवर्तन मेण्डेलीफ के मूल आवेर्त नियम के विपरीत है।

5. दुर्लभ मृदा तत्वों का स्थान - दुर्लभ मृदा तत्वों के रासायनिक गुणों में समानताएं है, परन्तु इनके परमाणु भार भिन्न हैं। फिर भी इन 14.14 तत्त्वों को तीसरे उपसमूह 13 (छठे आवर्त) में एक साथ रखा गया है जो उचित नहीं है।

6. समस्थानिकों का स्थान - समस्थानिकों तथा समभारिकों की, खोज से यह स्पष्ट हो गया कि तत्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु भार नहीं होता। समस्थानिकों के परमाणु भार भिन्न होते है परन्तु उनके गुण समान होते हैं। समभारिकों के परमाणु भार समान होते है, परन्तु उनके गुण भिन्न होते हैं। अत: मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में समस्थानिकों का स्थान निश्चित नहीं हैं।

7. आठवें समूह के तत्वों को तीन उर्ध्वाधर स्तम्भों में रखा जाना।

UP Board Class 10 Science Notes : Classification of elements, Part-I

मेण्डेलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा मूल आवर्त सारणी की विसंगतियों का निराकरण -

आधुनिक आवर्त नियम के आधार पर मेण्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में पाई जाने वाली अनेक विसंगतियाँ दूर हो गई। इनका विवरण निम्नलिखित है|

1. हाइड्रोजन का स्थान - हाइड्रोजन परमाणु पहले समूह के तत्वों की भांति एक इलेक्ट्रॉन खोकर तथा सातवें समूह के तत्वों की भांति एक इलेवट्रॉन ग्रहण करके संयोजन करता है; अत: इसको प्रथम तथा सातवें समूह में रखना न्यायोचित है।

2. दुर्लभ मृदा तत्वों का स्थान - समी मृदा तत्वों को एक ही स्थान पर रखा गया है, क्योकि इन सभी तत्वों के गुणों में समानताएँ है।

3. समस्थानिकों का स्थान - एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होता है, अत: इन्हें एक ही स्थान पर रखा जाना उचित है।

4. भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखना - परमाणु भार के आधार पर जो भारी तत्व हल्के तत्व से पहले आते है, उनका स्थान परमाणु क्रमांक के आधार पर उचित है; जैसे - आर्गन (Ar) का परमाणु भार 89.84 तथा परमाणु क्रमांक 18 है, अत: इसे पोटैशियम (K) परमाणु भार 39.1 तथा परमाणु क्रमांक 19 से पहले रखना न्यायसंगत है।

5. असमान त्तत्वों को एक ही समूह में रखना - मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में 1-A के तत्वों (क्षार धातुएँ) तथा I-B के तत्वों (सिक्वग़ धातुएं) को एक ही समूह में रखा गया है, जबकि इनके गुणों में भिन्नता पाईं जाती है। आधुनिक आवर्त सारणी में 1-A के तत्व और 1-B के तत्व पृथक - पृथक माने गए हैं तथा इन्हें परस्पर दूर रखा गया है।

6. अक्रिय गैंसों के लिए स्थान - मेण्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं था। आधुनिक आवर्त सारणी में परमाणु क्रमाक के बढ़ते क्रम में इन तत्वों के लिए उपयुक्त स्थान मिल जाता है।

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