UP Board Class 10 Science Notes :control and coordination in plants and animal Part-I

Sep 8, 2017 17:54 IST

science notes on control and coordination in plants and animal
science notes on control and coordination in plants and animal

In this article we are providing UP Board class 10th Science notes on chapter 19(control and coordination in plants and animal)1st part. We understand the need and importance of revision notes for students. Hence Jagran josh is come up with the all-inclusive revision notes which have been prepared by our expert faculty.

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The main topic cover in this article is given below :

1. पादप हार्मोन्स

2. आक्सिन का कृषि में महत्त्व

3. प्रसुप्तावस्था में प्रभाव

4. जिबरेलिन्स का कृषि में महत्त्व

5. एथिलीनं का कृषि में महच्व

6. पादप हार्मोन्स

7. आँक्सिन

8. आक्सिन का उपयोग

पादप हार्मोन्स (plant hormones):

पौधों की जैविक क्रियाओं के मध्य रासायनिक समन्वयन पाया जाता है। इन रसायनों को पादप हार्मोन्स (plant hormones) कहते हैं। पादप हार्मोन्स विशेष प्रकार के जटिल कार्बनिक रासायनिक पदार्थ है जो विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं नियमन करते है, जैसे - वृद्धि, पतझड़, पुष्पन, फल निर्माण फलों का परिपक्व होना प्रसूति, अनुवर्तन गतियाँ आदि। पादप हॉमोंन्स के निम्नलिखित पाँच समूहों में बाँटा जा सकता है-

(क) आक्सिन

(ख) जिबरेलिन्स

(ग) साइटोकाइनिन्स

(घ) वृद्धिरोधक तथा

(ङ) एथिलीन गैंस|

आक्सिन का कृषि में महत्त्व (Importance of Anxins in Agriculture) :

1. अनिशेकफलन (Parthenocarpy) - आक्सिन का उपयोग करके बिना निषेचन के फल निर्माण किया जा सकता है। ये फल बीजरहित होते हैं।

2. विलगन (Abscission) - पत्तियों तथा अपरिपक्व फलों को गिरने से रोकने के लिए आकिस्न का उपयोग किया जाता है।

3. कायिक प्रवर्धन (Vegetative  propagation) - आक्सिन का उपयोग करने से कलमों (cutting) में जडे अधिक मात्रा में और शीघ्र निकल आती हैं।

4. ऊतक संवर्धन (Tissue culture) - ऊतक संवर्धन तकनीक द्वारा न्वोदभिद पादप तैयार करने के लिए आक्सिन तथा साइटोकाइनिन्स का उपयोग निश्चित अनुपात में किया जता हैं।

5. अपतृण निवारण (Weed killing) - आक्सिन जैसे 2-4D का उपयोग करके द्विबीज़पत्री जंगली पौधों को नष्ट किया जा सकता है।

6. प्रसुप्तावस्था में प्रभाव (Effect in Dormancy) - आक्सिन कलिकाओं को सुप्तावस्था में बनाए रखने में सहायता करते हैं। अत: आलू के कन्द, अदरक के प्रकन्द आदि के संचय में इनका उपयोग किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त कम ताप के प्रति प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न करने में, पुष्यों का बन्ध्यकरण रोकने में, फलों को अधिक पकाने में आक्सिन का उपयोग किया जाता हैं। आकिस्न के छिड़काव से गेहूँ, धान आदि फसलों के तने आधारीय भाग में मोटे, मजबूत हो जाते है, इससे फसलों को गिरने से रोकने में सहायता मिलती है।

जिबरेलिन्स का कृषि में महत्त्व (Importance of Auxins in Agriculture) :

1. अनिषेकफलन (parthenocarphy) को प्रेरित करते हैं।

2. बोल्टिंग प्रभाव (Bolting effect) - जिबरेलिन्स के प्रयोग से द्विवर्षी पादप एकवर्षी की तरह पुष्पन करते हैं। नाटे पौधे लम्बे हो जाते है।

3. प्रसुप्तावस्था (Dormancy) - जिबरेलिन्स के प्रयोग से कन्द, प्रकन्द आदि की प्रसुप्ति भंग हो जाती हैं। बीजों में अंकुरण शीघ्र हो जाता हैं।

4. जिबरेलिन्स के उपयोग से अंगूर के गुच्छे लम्बे हो जाते हैं। अंगूरों की लम्बाईं बढ़ जाती हैं ।

5. जिबरेलिन्स के उपयोग से नीबू सन्तरा आदि पर फल अधिक संख्या में लगते हैं।

एथिलीनं का कृषि में महच्व (Importance of Ethylene in Agriculture) :

1 यह सामान्यतया पुष्पन का संदमन करती है, लेकिन अनन्नास (pineapple) में पुष्पन को प्रेरित करती हैं।

2 एथिलीन फलों को पकाने में सहायक गैस हार्मोन्स हैं।

पादप हार्मोन्स (plant Hormonses) :

ये विशेष प्रकार के जटिल कार्बनिक रासायनिक पदार्थ है जो प्राय: तने या जड़ के शीर्ष पर बनते है और पौधे के विभिन्न भागों में पहुँचकर विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियन्त्रण तथा नियमन करते है जैसे वृद्धि, कोशिका दीर्घीकरण, ऊतक विभेदन, पुष्पन, फल निर्माण, बीज तथा भूमिगत कन्द, प्रकन्द है घनकन्द आदि की प्रसुप्ति। पादप हॉमोंन्स के पाँच समूहों में बाँट लेते हैं - आंक्सिन जिबरेलिन्स, साइटोंकाइनिन्स, वृद्धिरौधक, एथिलीन आदि।

1. आँक्सिन (Auxins):

वे पदार्थ है जो प्ररोह की कोशिकाओं में दीर्घीकरण (elongation) प्रक्रिया को प्रेरित करते हैं। इसके अतिरिक्त आँक्सिन अनेक क्रियाओं को भी प्रभावित करते हैं। अब प्राकृतिक रूप में पौधे के अन्दर मिलने वाले आँविसन्स के अतिरिक्त समान व्यवहार व रासायनिक संरचना वाले संश्लेषित पदार्थ ज्ञात है, जिनका कृत्रिम रूप से उपयोग किया जा सकता हैं।

उदाहरण – IAA = Indole – 3 – Acetic Acid.

-NAA =- Naphthalene Acetic Acid

2-4D = 2-4Dichlorophenoxy Acetic Acid.

आक्सिन का उपयोग (Application of Auxins):

(1) वृद्धि दर (growth rate) पर प्रभाव डालते है, क्योंकि ये कोशिकीय दीर्घीकरण (elongation) को प्रेरित करके वृद्धि-दर पर प्रभाव डालते हैं।

(2) अनुवर्तन गति (tropic movements) - प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण आदि के प्रभाव से जड़ व तनों में होने वाली अनुवर्तन क्रियाएँ आकिस्न्स की सान्द्रता से नियन्त्रित होती हैं। आक्सिन की सान्द्रता तने में वृद्धि दर को प्रेरित करती है और जड़ में वृद्धि का संदमन करती है|

(3) शीर्ष प्रमुखता या प्रभाविता (Apical dominance) - तने के शीर्ष पर उपस्थित वर्धी कलिका से बनने वाले पादप हॉर्मोन कक्षस्थ कलिकाओं की वृद्धि को बाधित करते हैं। "शीर्ष कलिका को काटकर हटा देने से पाशव्रीय कलिकाएँ शीघ्रता से वृद्धि करने लगती हैं।

(4) ऊतक विभेदन के लिए आँक्सिन्स का उपयोग बागवानी में किया जाता है, उदाहरण के लिए - लगाई जाने वाली कलम को यदि आंक्सिन के घोल में पहले से ही डूबा लिया जाए तो उसमें जड़े शीघ्र व अधिक निकलती हैं।

(5) अनिषेकफलन (parthenocarpy) के लिए आँक्सिन्स को पुष्पन के पश्चात् पौधों पर छिडका जाता है|  अनिषेकफल (parthenocarpic fruits) बीजरहित (seedless) होते है क्योंकि इनका निर्माण बिना निषेचन के होता है।

(6) पतियों, फलों आदि का विलगन (abscission) रोकने के लिए आक्सिन्स का उपयोग किया जाता है।

(7) अपतण निवारण (weed killing) के लिए 2-4D जैसे आंविसन्स का उपयोग किया जाता है। इससे एकबीजपत्री फसल से द्विबीज़पत्री जंगली पादप नष्ट किए जा सकते हैं।

(8) प्रसुप्तावस्था में प्रभाव (effect in dormancy) - आक्सिन्स कलिकाओं की वृद्धि में अवरोध उत्पन्न करते है अत: आलू आदि के समय के संचय के समय इनका उपयोग लाभकारी है।

इस प्रकार कृषि, बागवानी, उद्यान विज्ञान आदि में आक्सिन्स का प्रयोग अनेक प्रकार से उपयोगी है।

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