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महमूद गजनी द्वारा भारत पर किये गए हमलों का विस्तृत विवरण

3 days ago

महमूद गजनी “सुबुक्तगिन” का पुत्र था और उसकी नीति अपने पिता की तरह भारत पर विजय प्राप्त करना था, जिन्होंने अपने 20 साल के शासन के बाद सिंधु नदी के दूसरे ओर साम्राज्य का विस्तार किया था। महमूद गजनी एक उत्कृष्ट सेनापति और महान विजेता थाl उसने 1000-1027 ईस्वी के दौरान भारत पर 17 बार आक्रमण कियाl इनमें से सबसे महत्वपूर्ण आक्रमण 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर किया गया आक्रमण था, क्योंकि इससे महमूद गजनी को एक विशाल खजाना प्राप्त हुआ थाl

प्राचीन जनपद एवं महाजनपदों की सूची

Apr 18, 2017

जनपद और महाजनपद काल 600 ईस्वी पूर्व की राज्यव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैंl कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक परिवर्तनों के कारण महाजनपद काल के उभरने की प्रक्रिया की शुरूआत हुई थी और इसके परिणामस्वरूप इस अवधि में सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रम में बदलाव देखने को मिलता हैl इस लेख में हम प्राचीन जनपद और महाजनपदों की सूची दे रहे हैं जिससे आपको प्राचीन शासनशैली और तानाशाही स्थिति की बेहतर समझ प्राप्त होगीl

सल्तनतकाल में इस्तेमाल होने वाले प्रशासनिक और कृषि से जुड़े शब्दों की सूची

Apr 17, 2017

सल्तनतकाल मुख्य रूप से सैन्यवादी और कुलीन था और सुल्तानों के अधिकार का वास्तविक स्रोत सैन्य शक्ति थीl दिल्ली सल्तनत के शासकों को कृषि की अहमियत और तकनीकी सहायता के माध्यम से उसे बढ़ावा देने के लिए जाना जाता था, क्योंकि अनाज आंतरिक व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था, जबकि उस समय दास, नील, अफीम, मसालों और कपास से बने सामान का निर्यात किया जाता थाl इस लेख में हम सल्तनतकाल में इस्तेमाल होने वाले प्रशासनिक और कृषि से जुड़े शब्दों की सूची दे रहे हैं, जो स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी अध्ययन सामग्री हैl

चोल प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों की सूची

Apr 14, 2017

850 ईस्वी से 1200 ईस्वी के बीच दक्षिण भारत में चोल एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरे थेl इस दौरान तुंगभद्रा से आगे तक शासन करने वाले राष्ट्रकूटों और बाद में उनके उत्तराधिकारी कल्याणी के चालुक्यों के साथ उनका संघर्ष जारी रहाl चोल वंश की स्थापना विजयालय ने की थी जो पहले पल्लवों का सामंत थाl इस लेख में हम चोल प्रशासन स्थानों की सूची का विवरण दे रहे हैl

सल्तनतकालीन वास्तुकला स्थलों की सूची

Apr 12, 2017

सल्तनत काल की वास्तुकलाओं में नए सल्तनों की सौन्दर्य विरासत को प्रकट किया गया था जिसमें भारतीय-इस्लामी वास्तुकला जैसी धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष दोनों तरह की संरचनाएं शामिल थीl उदाहरण के लिए, हिन्दू मंदिरों के शिखर के विपरीत तत्कालीन मस्जिदों की प्रमुख विशेषता गुम्बद थीl इस लेख में हम सल्तनतकालीन वास्तुकला स्थलों का विवरण दे रहे हैं जिसमें हमने इमारत, स्थान और वास्तुकला की विशेषताओं को शामिल किया हैl

प्रमुख राजपूत राजवंश, उसकी राजधानी एवं संस्थापकों की सूची

Apr 11, 2017

भारत में राजपूतों का उदय हर्षवर्धन की मृत्यु और प्रतिहार साम्राज्य के विघटन का परिणाम थाl 7वीं शताब्दी से लेकर अगले 500 वर्षों तक भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर राजपूतों का प्रभुत्व रहाl उनका संबंध भारतीय उपमहाद्वीप के क्षत्रिय परिवारों से था। उन्होंने राजस्थान, सौराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में योद्धाओं, उद्यमियों और जमीनदार (भूमि मालिक) के रूप में शासन कियाl

दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत लोदी वंश का संक्षिप्त विवरण

Apr 10, 2017

दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत लोदी वंश भारत का पहला अफगान पश्तून राजवंश था, जिसने 1451 से 1526 ईस्वी तक शासन किया थाl इस राजवंश का उदय सैय्यद वंश के बाद हुआ था तथा यह वह समय था जब प्रशासन में सुधार, सेना को मजबूत बनाना, भूमि राजस्व के लिए मशीनरी तैयार करना, खेती का विस्तार एवं सुधार तथा लोगों के कल्याण जैसे कामों को अंजाम दिया गया थाl इस लेख में हम दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत लोदी राजवंश का सम्पूर्ण विवरण दे रहे हैंl

दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत सैय्यद राजवंश का संक्षिप्त विवरण

Apr 10, 2017

सैय्यद राजवंश की स्थापना खिज्र खान ने की थी, जो मुल्तान का राज्यपाल था और भारत में तैमूर का उत्तराधिकारी थाl इस राजवंश के चार शासकों- खिज्र खान, मुबारक, मुहम्मद शाह और आलम शाह ने 1414 से 1451 के बीच 37 वर्षों तक शासन किया थाl इस लेख में हम दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत शासन करने वाले सैय्यद राजवंश का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैंl

दिल्ली सल्तनत के दौरान किए गए सैन्य सुधारों का संक्षिप्त विवरण

Apr 7, 2017

दिल्ली सल्तनत के सुल्तान पूर्ण रूप से तानाशाह थे और उनके अधिकार का वास्तविक स्रोत सैन्य शक्ति थाl दिल्ली सल्तनत की सेना में शाही अंगरक्षक और राजधानी में रहने वाले सैनिकों के अलावा अमीरों, वलियों और इक़्तेदारों की सेवा में कार्यरत सैनिक शामिल थेl इस लेख में हम विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए दिल्ली सल्तनत के दौरान किए गए सैन्य सुधारों का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैंl

दिल्ली सल्तनत की समय-सीमा और कालक्रम

Apr 7, 2017

दिल्ली सल्तनत की स्थापना की शुरूआत मुहम्मद गौरी के आक्रमण के साथ हुई थीl वह अपने साथ बड़ी संख्या में दासों को लेकर भारत आया था और उन्हें अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया थाl 1206 ईस्वी में उसकी मृत्यु के बाद उसके तीन जनरलों, “कुतुब-उद-दीन ऐबक (उसके सेना का सेनापति), ताजुद्दीन एल्दौज (अफगानिस्तान और सिंध के बीच स्थित कारमान और खुरासान का शासक) और नासीरूद्दीन कूबाचा के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई थीl इस लेख में हम कालक्रम के अनुसार दिल्ली सल्तनत की समय-सीमा और उसके पतन के कारणों का विवरण दे रहे हैंl

10 दुर्लभ परंपराएं जो आज भी आधुनिक भारत में प्रचलित हैं

Mar 30, 2017

भारत दुनिया की सबसे पुरानी और शहरी सभ्यता अर्थात सिंधु घाटी सभ्यता का देश है। इसलिए, प्राचीन काल से लेकर आधुनिक भारत तक भारतीय समाज में विभिन्न संप्रदायों, रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और संप्रदायों का उद्भव एवं रूपांतरण होता रहा है। इनमें से कई संप्रदायों और रिवाजों का आधार धार्मिक और सामाजिक था। ये संप्रदाय और रीति-रिवाज विभिन्न क्षेत्रों और धर्मों में फैली हुई हैं। यहां, हम आधुनिक भारत की 10 अज्ञात परंपराओं का विवरण दे रहे हैं|

क्यों मुगल,मौर्यों और मराठों ने कभी दक्षिणी भारत पर आक्रमण नहीं किया?

Mar 8, 2017

भारत के उस भाग को "दक्षिण भारत" के नाम से जाना जाता है, जहां द्रविड़ भाषाएं बोली जाती हैंl इसमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य शामिल हैंl इस क्षेत्र का अधिकांश भाग कई बार मौर्यों, दिल्ली सल्तनत और मुगलों के अधीन रहा हैl मूल रूप से जो छोड़ दिया गया था वो केरल और दक्षिणी तमिलनाडु है। अब सवाल यह उठता है कि उत्तर भारत की तरह इन साम्राज्यों का विस्तार दक्षिण भारत में क्यों नहीं हो पायाl

योग विचारधारा: प्राचीन भारतीय साहित्य दर्शन

Mar 1, 2017

दो मुख्य सत्ताओं का समन्वय ही योग विचारधारा का शाब्दिक अर्थ है और योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत मूल यूजा (YUJA) जिसका अर्थ है एक-दुसरे को जोड़ना या एकजुट करना, से हुई है | मानव यौगिक तकनीकों के शारीरिक प्रयोग तथा ध्यान का प्रयोग कर मुक्ति को प्राप्त कर सकता है और इस तरह पुरुष प्रकृति से पृथक हो जाता है | इस लेख में योग और उसकी विचारधाराओं के बारे में अध्ययन करेंगे |

गंधार, मथुरा और अमरावती शैलियों में क्या अंतर होता है

Feb 27, 2017

मूर्ति कला की तीन प्रमुख शैलियों अर्थात गंधार, मथुरा और अमरावती शैली का विकास अलग-अलग स्थानों पर हुआ है | गंधार शैली का विकास आधुनिक पेशावर और अफगानिस्तान के निकट पंजाब की पशिचमी सीमाओं में 50 ईसा पूर्व से लेकर 500 ईस्वी तक हुआ| मथुरा शैली का विकास पहली और तीसरी शताब्दी ई .पू के बीच की अवधि में यमुना नदी के किनारे हुआ और भारत के दक्षिणी भाग में, अमरावती शैली का विकास सातवाहन शासकों के संरक्षण में कृष्णा नदी के किनारे हुआ था | इस लेख में इन शैलियों के बीच के अंतर का अध्ययन करेंगे |

हड़प्पा सभ्यता: कला और वास्तुकला एक नज़र में

Feb 23, 2017

भारतीय कला और वास्तुकला विकास पर निर्भर करती है और इसके पीछे कई कहानियां है| इस लेख में हड़प्पा सभ्यता की कला और वास्तुकला के बारे में जानेंगे और देखेंगे की कैसे इन कलाओं का उदभव हुआ, कहा से हुआ आदि |

ताजमहल के बारे में 13 रोचक तथ्य

Feb 21, 2017

ताजमहल का निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में 32 मिलियन रुपये खर्च करके बनवाया था| इसका निर्माण 1632–53 के बीच हुआ था| इस लेख में ताजमहल के उन अनजाने तथ्यों के बारे में बताया गया है जो कि बहुत कम लोगों को पता हैं|

बुद्ध की विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ

Feb 13, 2017

बुद्ध के अनुयायी, बौद्ध ध्यान या अनुष्ठान के दौरान शास्त्र के माध्यम से विशेष विचारों को पैदा करने के लिए बुद्ध की छवि को प्रतीकात्मक संकेत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। भारतीय मूर्तिकला में, मूर्तियाँ देवत्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है, जिसका मूल और अंत धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

कौन-कौन से ब्रिटिशकालीन कानून आज भी भारत में लागू हैं

Jan 30, 2017

अंग्रेजों ने भारत पर लगभग 200 सालों के शासन दौरान इस देश को अपनी सहूलियत के हिसाब से चलाने के लिए कई कानून बनाये| इन सभी कानूनों का मकसद सिर्फ भारत से संसाधनों को लूटने और इस लूट को रोकने के लिए उत्पन्न होने वाले विद्रोहों को दबाने के उपाय किये गए थे | इस लेख में ऐसे ही कुछ अनैतिक और स्वार्थ से भरे कानूनों के बारे में बताया गया है|

जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण

Dec 15, 2016

जैन धर्म ने गैर-धार्मिक विचारधारा के माध्यम से रूढ़िवादी धार्मिक प्रथाओं पर जबरदस्त प्रहार किया| जैन धर्म लोगों की सुविधा हेतु मोक्ष के एक सरल, लघु और सुगम रास्ते की वकालत करता है| यहाँ हम जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण

Dec 14, 2016

सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी| कृषि कार्य हड़प्पाकालीन शहरों के आसपास के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्र में किया जाता था, जहाँ से शासक वर्ग भविष्य में उपयोग हेतु कृषि अधिशेष को लाकर धान्यकोठारों में जमा करते थे| यहाँ हम सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

संगम युग के प्रमुख राजवंशों का संक्षिप्त विवरण

Dec 13, 2016

संगम युग का कालक्रम तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से चौथीं शताब्दी ईस्वी तक था और इस युग को संगम युग इसलिए कहा जाता है क्योंकि उस समय कवियों और विद्वानों का एक परिषद् था जिसे संगम कहा जाता था| यहाँ हम संगम युग के प्रमुख राजवंशों का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

बौद्ध धर्म, बुद्ध की शिक्षा, बौद्ध संगीति और बौद्ध धर्म में गिरावट के कारणों का संक्षिप्त विवरण

Dec 12, 2016

बौद्ध धर्म स्वभावतः नास्तिक है और वह लौकिक उन्नति और अवनति में विश्वास करता है| यहाँ हम बौद्ध धर्म का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जिससे छात्रों एवं बौद्ध धर्म के बारे में जानने को इच्छुक व्यक्तियों को बौद्ध धर्म, बुद्ध की शिक्षा, बौद्ध धर्म के प्रसार और भारतीय संस्कृति पर इसके योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त होगी|

बिहार का प्राचीन इतिहास

Dec 8, 2016

बिहार का प्राचीन इतिहास का विस्तार मानव सभ्यता के आरंभ तक है। साथ ही यह सनातन धर्म के आगमन संबंधी मिथकों और किंवदंतियों से भी संबद्ध है। यहां, हम 'प्राचीन बिहार के इतिहास' पर पूर्ण अध्ययन सामग्री दे रहे हैं जो उम्मीदवारों को बीपीएससी और अन्य राज्य स्तर की परीक्षाओं जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की राह को आसान कर देगा।

बिहार में हुए आदिवासी विद्रोहों की सूची

Dec 7, 2016

बिहार के आदिवासी विद्रोह ज्यादातर असंगठित, स्थानीय और समय– समय पर होने वाले विद्रोह थे। ये विद्रोह मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार द्वारा आदिवासियों और आदिवासियों की जमीन के शोषण से संबंधित और बाहरी लोगों को उनकी जमीन देने से जुड़े थे। यहां, हम 'बिहार के आदिवासी विद्रोहों' की सूची दे रहे हैं। इसमें तारीख, इससे जुड़े लोगों के साथ– साथ विद्रोह की प्रकृति और उद्देश्य भी दिए जा रहे हैं।

वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण

Dec 6, 2016

आर्यों एवं वैदिक काल के बारे में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद और वेदांग हैं| यहाँ, हम “वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण” प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

बिहार के महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों का संक्षिप्त विवरण

Dec 5, 2016

प्राचीन काल के भारतीय इतिहास के दौरान 1000 वर्षों से भी अधिक समय से बिहार तो भारत में सत्ता, शिक्षण और संस्कृति के केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है।  प्राचीन भारत के ज्यादातर शक्तिशाली साम्राज्य इसी इलाके में उदित हुए। यहां हम,  'बिहार के महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों का संक्षिप्त विवरण' दे रहे हैं जो बिहार पीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के अलावा अन्य राज्यों की पीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी मददगार होंगे।

प्राचीन भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

Nov 23, 2016

प्राचीन भारत के वैज्ञानिकों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दिया है| यहाँ हम प्राचीन भारत के वैज्ञानिकों द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दिए गए बहुमूल्य योगदान का सक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्राचीन भारतीय राजवंश और उनके योगदान का संक्षिप्त विवरण

Nov 21, 2016

भारत का इतिहास बहुत व्यापक है जो कई राजवंशों के उत्थान और पतन का गवाह रहा है| यहाँ हम "प्राचीन भारतीय राजवंश और उनके योगदान” का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्रमुख एवं लघु शिलालेखों तथा स्तंभलेखों की सूची

Nov 15, 2016

शिलालेखों में मूल रूप से राज्य को चलाने में सहायक व्यावहारिक निर्देश जैसे- सिंचाई प्रणालियों की योजना, सम्राटों के शांतिपूर्ण नैतिक व्यवहार की व्याख्या की गई थी| इन शिलालेखों की व्याख्या सर्वप्रथम ब्रिटिश पुरातत्वविद् और इतिहासकार जेम्स प्रिंसेप द्वारा की गई थी|

ऋग्वैदिक कालीन देवी एवं देवताओं की सूची

Nov 11, 2016

वैदिक लोग प्राकृतिक शक्तियों को साकार रूप में मानते थे और उन्हें “मनुष्य” और “पशु” का सृजन कर्ता के रूप में देखते थे| यहाँ हम ऋग्वैदिक कालीन देवी एवं देवताओं की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

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