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इतिहास

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बुद्ध की विभिन्न मुद्राएं एवं हस्त संकेत और उनके अर्थ

Feb 13, 2017

बुद्ध के अनुयायी, बौद्ध ध्यान या अनुष्ठान के दौरान शास्त्र के माध्यम से विशेष विचारों को पैदा करने के लिए बुद्ध की छवि को प्रतीकात्मक संकेत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। भारतीय मूर्तिकला में, मूर्तियाँ देवत्व का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करती है, जिसका मूल और अंत धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

कौन-कौन से ब्रिटिशकालीन कानून आज भी भारत में लागू हैं

Jan 30, 2017

अंग्रेजों ने भारत पर लगभग 200 सालों के शासन दौरान इस देश को अपनी सहूलियत के हिसाब से चलाने के लिए कई कानून बनाये| इन सभी कानूनों का मकसद सिर्फ भारत से संसाधनों को लूटने और इस लूट को रोकने के लिए उत्पन्न होने वाले विद्रोहों को दबाने के उपाय किये गए थे | इस लेख में ऐसे ही कुछ अनैतिक और स्वार्थ से भरे कानूनों के बारे में बताया गया है|

जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण

Dec 15, 2016

जैन धर्म ने गैर-धार्मिक विचारधारा के माध्यम से रूढ़िवादी धार्मिक प्रथाओं पर जबरदस्त प्रहार किया| जैन धर्म लोगों की सुविधा हेतु मोक्ष के एक सरल, लघु और सुगम रास्ते की वकालत करता है| यहाँ हम जैन धर्म, महावीर की शिक्षाएं और जैन धर्म के प्रसार के कारणों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण

Dec 14, 2016

सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार पर आधारित थी| कृषि कार्य हड़प्पाकालीन शहरों के आसपास के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्र में किया जाता था, जहाँ से शासक वर्ग भविष्य में उपयोग हेतु कृषि अधिशेष को लाकर धान्यकोठारों में जमा करते थे| यहाँ हम सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

संगम युग के प्रमुख राजवंशों का संक्षिप्त विवरण

Dec 13, 2016

संगम युग का कालक्रम तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से चौथीं शताब्दी ईस्वी तक था और इस युग को संगम युग इसलिए कहा जाता है क्योंकि उस समय कवियों और विद्वानों का एक परिषद् था जिसे संगम कहा जाता था| यहाँ हम संगम युग के प्रमुख राजवंशों का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

बौद्ध धर्म, बुद्ध की शिक्षा, बौद्ध संगीति और बौद्ध धर्म में गिरावट के कारणों का संक्षिप्त विवरण

Dec 12, 2016

बौद्ध धर्म स्वभावतः नास्तिक है और वह लौकिक उन्नति और अवनति में विश्वास करता है| यहाँ हम बौद्ध धर्म का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जिससे छात्रों एवं बौद्ध धर्म के बारे में जानने को इच्छुक व्यक्तियों को बौद्ध धर्म, बुद्ध की शिक्षा, बौद्ध धर्म के प्रसार और भारतीय संस्कृति पर इसके योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त होगी|

बिहार का प्राचीन इतिहास

Dec 8, 2016

बिहार का प्राचीन इतिहास का विस्तार मानव सभ्यता के आरंभ तक है। साथ ही यह सनातन धर्म के आगमन संबंधी मिथकों और किंवदंतियों से भी संबद्ध है। यहां, हम 'प्राचीन बिहार के इतिहास' पर पूर्ण अध्ययन सामग्री दे रहे हैं जो उम्मीदवारों को बीपीएससी और अन्य राज्य स्तर की परीक्षाओं जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की राह को आसान कर देगा।

बिहार में हुए आदिवासी विद्रोहों की सूची

Dec 7, 2016

बिहार के आदिवासी विद्रोह ज्यादातर असंगठित, स्थानीय और समय– समय पर होने वाले विद्रोह थे। ये विद्रोह मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार द्वारा आदिवासियों और आदिवासियों की जमीन के शोषण से संबंधित और बाहरी लोगों को उनकी जमीन देने से जुड़े थे। यहां, हम 'बिहार के आदिवासी विद्रोहों' की सूची दे रहे हैं। इसमें तारीख, इससे जुड़े लोगों के साथ– साथ विद्रोह की प्रकृति और उद्देश्य भी दिए जा रहे हैं।

वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण

Dec 6, 2016

आर्यों एवं वैदिक काल के बारे में जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद और वेदांग हैं| यहाँ, हम “वैदिककालीन राजनीतिक, सामाजिक एवं महिलाओं की स्थिति का संक्षिप्त विवरण” प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

बिहार के महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों का संक्षिप्त विवरण

Dec 5, 2016

प्राचीन काल के भारतीय इतिहास के दौरान 1000 वर्षों से भी अधिक समय से बिहार तो भारत में सत्ता, शिक्षण और संस्कृति के केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है।  प्राचीन भारत के ज्यादातर शक्तिशाली साम्राज्य इसी इलाके में उदित हुए। यहां हम,  'बिहार के महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों का संक्षिप्त विवरण' दे रहे हैं जो बिहार पीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के अलावा अन्य राज्यों की पीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी मददगार होंगे।

प्राचीन भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

Nov 23, 2016

प्राचीन भारत के वैज्ञानिकों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दिया है| यहाँ हम प्राचीन भारत के वैज्ञानिकों द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दिए गए बहुमूल्य योगदान का सक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्राचीन भारतीय राजवंश और उनके योगदान का संक्षिप्त विवरण

Nov 21, 2016

भारत का इतिहास बहुत व्यापक है जो कई राजवंशों के उत्थान और पतन का गवाह रहा है| यहाँ हम "प्राचीन भारतीय राजवंश और उनके योगदान” का संक्षिप्त विवरण दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्रमुख एवं लघु शिलालेखों तथा स्तंभलेखों की सूची

Nov 15, 2016

शिलालेखों में मूल रूप से राज्य को चलाने में सहायक व्यावहारिक निर्देश जैसे- सिंचाई प्रणालियों की योजना, सम्राटों के शांतिपूर्ण नैतिक व्यवहार की व्याख्या की गई थी| इन शिलालेखों की व्याख्या सर्वप्रथम ब्रिटिश पुरातत्वविद् और इतिहासकार जेम्स प्रिंसेप द्वारा की गई थी|

ऋग्वैदिक कालीन देवी एवं देवताओं की सूची

Nov 11, 2016

वैदिक लोग प्राकृतिक शक्तियों को साकार रूप में मानते थे और उन्हें “मनुष्य” और “पशु” का सृजन कर्ता के रूप में देखते थे| यहाँ हम ऋग्वैदिक कालीन देवी एवं देवताओं की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

भारत में सूफी आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण

Nov 11, 2016

“सूफी” शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द “सफा” से हुई है जिसके दो अर्थ हैं- पहला, ऐसे व्यक्ति जो ऊनी वस्त्र पहनते हैं और दूसरा, शुद्धता और पवित्रता| सूफीवाद कुरान की उदार व्याख्या, जिसे “तरीकत” कहा जाता है, के साथ जुड़ा हुआ है। शरीयत में कुरान की रूढ़िवादी व्याख्या की गई है। सूफीवाद का मानना है कि “हक” (ईश्वर) और “खलक” (आत्मा) एक ही है|

छठी शताब्दी ई.पू. के प्रमुख भारतीय गणराज्यों की सूची

Nov 8, 2016

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत में महाजनपदों के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार एवं या सिंधु घाटी में कई गणराज्यों का अस्तित्त्व था| इन गणराज्यों में, वास्तविक शक्ति जनजातीय कबीलों के हाथों में था| यहाँ हम छठी शताब्दी ई.पू. के विभिन्न भारतीय गणराज्यों की सूची दे रहे हैं जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी है|

सिन्धु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) का संक्षिप्त विवरण

Nov 4, 2016

सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया की चार प्रारम्भिक सभ्यताओं (मेसोपोटामिया या सुमेरियन सभ्यता, मिस्र सभ्यता और चीनी सभ्यता) में से एक है| यहाँ हम सिन्धु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्राचीन भारतीय पुस्तक एवं उनके लेखकों की सूची

Nov 4, 2016

हड़प्पाकालीन लोग पढना लिखना जानते थे लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है| लेकिन भारत की साहित्यिक परंपरा 300 वर्षों से अधिक पुरानी है| प्रारंभिक वैदिक काल में संस्कृत भाषा का वर्चस्व था लेकिन बाद में पाली और प्राकृत भाषा भी विकसित हुई थी| यहाँ हम प्राचीन भारत के लेखक एवं उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

गुप्त साम्राज्य: एक संक्षिप्त विवरण

Nov 3, 2016

गुप्त साम्राज्य के काल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है, क्योंकि इस काल में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला, साहित्य, तर्कशास्त्र, गणित, खगोल विज्ञान, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में व्यापक आविष्कार और खोज हुए थे जिन्होंने हिन्दू संस्कृति के तत्वों को प्रबुद्ध किया था| यहाँ हम गुप्त साम्राज्य का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

मगध साम्राज्य के उदय एवं विकास का संक्षिप्त विवरण

Nov 3, 2016

मगध साम्राज्य की उत्पत्ति उस समय हुई थी जब 6ठी शताब्दी ईसा पूर्व से 4थी शताब्दी ई.पू. तक चार महाजनपद मगध, कोशल, वत्स और अवंती एक-दूसरे के ऊपर वर्चस्व स्थापित करने के लिए संघर्ष में लगे हुए थे| अंततः मगध उत्तर भारत में सबसे शक्तिशाली और समृद्ध साम्राज्य के रूप में उभरा| यहाँ हम मगध साम्राज्य के उदय एवं विकास का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्राचीन भारतीय विद्वानों और उनके संरक्षकों की सूची

Oct 21, 2016

प्राचीन भारतीय साहित्य कई प्रसिद्ध विद्वानों द्वारा प्रभावित रहा है। इन विद्वानों में राजा, संत, ऋषि, गणितज्ञ और कला एवं साहित्य के जानकार लोग थे| यहाँ हम प्राचीन भारतीय विद्वानों एवं उनके संरक्षकों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

गुप्त राजाओं द्वारा धारण की गई उपाधियों की सूची

Oct 20, 2016

गुप्त राजवंश 275 ईसवी में सत्ता में आया था| लेकिन इस राजवंश के आरंभिक शासकों की जानकारी स्पष्ट नहीं है। इस राजवंश के पहले दो शासक श्रीगुप्त और घटोत्कच महाराज की उपाधि से संतुष्ट थे। यहाँ हम गुप्त राजाओं एवं उनकी उपाधियों की सूची दे रहे हैं जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

प्राचीन भारतीय राजा एवं उनके दरबारी कवियों की सूची

Oct 20, 2016

प्राचीन काल में कवि एवं लेखक राजाओं के दरबार में आकर्षण के केन्द्र थे| ये कवि एवं लेखक अपने काव्य एवं गद्य के माध्यम से राजा एवं दरबारियों का मनोरंजन एवं गुणगान करते थे| यहाँ हम प्राचीन भारतीय राजाओं एवं उनके दरबारी कवियों की सूची दे रहे है जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के अलावा उन पाठकों के लिए भी उपयोगी है जो भारत की सांस्कृतिक विरासत में दिलचस्पी रखते हैं|

प्रागैतिहासिक और सिंधु घाटी सभ्यता कालीन पुरातात्विक खोज एवं साक्ष्यों की सूची

Oct 19, 2016

मानव संस्कृतियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए पुरातात्विक सिद्धांत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो खुदाई के दौरान प्राप्त साक्ष्यों और निष्कर्षों की व्याख्या पर आधारित होते हैं| पुरातात्विक रिकॉर्ड के रूप में प्राचीन वस्तुओं के अलावा समकालीन कलाकृतियां भी हो सकती हैं| यहाँ हम प्रागैतिहासिक और सिंधु घाटी सभ्यता कालीन पुरातात्विक खोज एवं साक्ष्यों की सूची दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

भारत के प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक एवं उसके निर्माणकर्ताओं की सूची

Oct 18, 2016

कला हमारी संस्कृति की एक बहुमूल्य विरासत है। जब हम कला के बारे में बात करते हैं तो हमारा तात्पर्य वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला से होता है| यहाँ हम भारत के प्राचीन ऐतिहासिक स्मारकों एवं उसके निर्माणकर्ताओं की सूची दे रहे हैं जो UPSC-prelims, SSC, State Services, NDA, CDS, and Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है|

दिल्ली सल्तनत: कला, शिक्षा और व्यापार

Sep 19, 2016

दिल्ली सल्तनत या सल्तनत-ए-हिन्द/सल्तनत-ए-दिल्ली 1210 से 1526 तक भारत पर शासन करने वाले पाँच वंश के सुल्तानों के शासनकाल को कहा जाता है। दिल्ली सल्तनत पर राज करने वाले पाँच वंशों में चार वंश मूल रूप से तुर्क थे जबकि अंतिम वंश के शासक अफगान थे। इस लेख में हम सल्तनतकालीन कला, शिक्षा और व्यापार से संबंधित जानकारी दे रहे हैं|

चोल काल में निर्मित मंदिरों की सूची

Aug 31, 2016

चोलकालीन मंदिरों का निर्माण चोल साम्राज्य के महान राजाओं द्वारा किया गया था| ये मंदिर सम्पूर्ण दक्षिण भारत के अलावा भारत के पड़ोसी द्वीपों पर भी फैले हुए हैं। इन मंदिरों में 11वीं और 12वीं शताब्दी में निर्मित तीन मंदिर दरासुरम का एरावतेश्वर मंदिर, गांगेयकोंडचोलपुरम के मंदिर और तंजौर का बृहदेश्वर मंदिर प्रमुख हैं|

शहीद भगत सिंह ने क्यों कहा कि "मैं नास्तिक हूँ"

Aug 13, 2016

भगत सिंह का जन्म सितम्बर 1907 में पंजाब में हुआ था और सैंडर्स की हत्या के आरोप में दोषी पाये जाने के कारण 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गयी थी | उन्होंने 5,6 अक्टूबर 1931 को लाहौर के सेंट्रल जेल से एक धार्मिक आदमी को जवाब देने के लिये एक निबंध लिखा था जिसने उनके ऊपर नास्तिक होने का आरोप लगाया था |  भगत सिंह की उम्र उस समय 23 वर्ष की थी|

जहाँगीर ने ऐसा ना किया होता तो भारत अंग्रेजों का गुलाम कभी ना बनता

Aug 10, 2016

1615 में जहांगीर के दरबार (मुगल सम्राट) में सर थॉमस रो की भारत यात्रा ने अंग्रेजों के लिए भारत में व्यापार के दरवाज़े खोल दिए, लेकिन जानने योग्य यह है कि भारतीय भूमि पर ऐसा क्या हुआ जिससे इस तुच्छ तथ्य ने जहांगीर के कदमो को भारतीय इतिहास में एक दिलचस्प झलक बना दी।  

जानें चाय का इतिहास जिसका सेवन आप रोज़ करते है !

Aug 9, 2016

चाय पीने का इतिहास 750 ईसा पूर्व से है आम तौर पर भारत में चाय उत्तर-पूर्वी भागों और नीलगिरि पहाड़ियों में उगायी जाती है। टी को चाय के नाम से भी जाना जाता है और भारत में हर जगह यह प्रसिद्ध है, आप इसे विभिन्न चाय की दुकानों और रेलवे प्लेटफॉर्म आदि में देख सकते हैं और यह आसानी से उपलब्ध हो जाती है।आज भारत दुनिया में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक है।

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