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MBA एजुकेशन लोन: जानिये लोन पाने के लिए ये 10 जरुरी बातें

यदि आपके पास अपने एजुकेशनल गोल्स अर्थात आपकी MBA की डिग्री आदि हासिल करने के लिए काफी धन नहीं है तो आप MBA एजुकेशनल लोन प्राप्त कर सकते हैं. कैसे? ….. इस लेख में पढ़ें.

 

Jul 29, 2019 18:38 IST
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MBA Education Loan: 10 easy steps to get access to it
MBA Education Loan: 10 easy steps to get access to it

हमारे देश भारत में आजकल MBA की पढ़ाई काफी महंगी हो चुकी है और MBA की पढ़ाई के लिए बैंको से लोन हासिल करना ठीक वैसा ही है जैसेकि कोई एंट्रेंस एग्जाम पास कर किसी अच्छे कॉलेज में अपने लिए एक सीट सुरक्षित करना. जब भी एजुकेशन लोन की बात होती है तो यह देखा गया है कि MBA के अधिकतर छात्र एजुकेशन लोन के जरिये ही अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं क्योंकि MBA की डिग्री हासिल करने के लिए स्टूडेंट्स को दिन-रात मेहनत करने के साथ-साथ आजकल लाखों रुपये भी खर्च करने पड़ते हैं. हमारे देश भारत में स्टूडेंट्स को कई लाख रुपये तक एजुकेशन लोन मिलता है. दरअसल, लोन या ऋण लेने के कुछ खतरे भी होते हैं और किसी MBA कोर्स के लिए लिया जाने वाल लोन भी इस खतरे से परे नहीं है. इस वजह से MBA करते समय या उसके बाद भी छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए सही एजुकेशन लोन का चुनाव भी अपने-आप में काफी महत्वपूर्ण है.

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यहां इस आर्टिकल में आप पढ़ सकते हैं कि सही MBA एजुकेशन लोन चुनते समय आपको कौन-सी 10 बातों पर जरुर ध्यान देना चाहिए.

MBA एजुकेशन लोन: कहां है गलती की संभावना ?

MBA एजुकेशन लोन ऐसा लोन है जिसे छात्र IIMs या भारत के विभिन्न प्राइवेट MBA कॉलेजों और प्रमुख बी-स्कूलों में अपनी मैनेजमेंट स्टडीज़ के लिए बैंको से इन्ट्रेस्ट पर ले सकते हैं. जब आप किसी ऑर्गनाइजेशन या बैंक से लोन लेते हैं तो आपको अवश्य ही उस लोन के लिए कुछ इन्ट्रेस्ट देना होगा. इसलिए लोन लेने से पहले इन्ट्रेस्ट रेट से जुडी सभी बातें छात्रों को अच्छी तरह पता होनी चाहिए ताकि उन्हें पढाई करते समय या पढ़ाई करने के बाद मुश्किलों का सामना न करना पड़े.

MBA एजुकेशन लोन से सम्बन्धित मुख्य बातें जैसे की उनके स्थगन की अवधि (मोर्टेरियम पीरियड), इन्ट्रेस्ट रेट, पुनर्भुगतान की शर्तें (रीपेमेंट रेट) आदि कई ऐसे पहलू हैं जिनके बारे में सही जानकारी नहीं होने से छात्र अपनी पढाई पूरी कर लेने के बाद परेशानी में पड़ सकते हैं. यदि छात्र समय पर अपना एजुकेशन लोन नहीं चुका पाते या फिर ईएमआई का पेमेंट नहीं कर पाते हैं तो उन्हें लोन अमाउंट पर अधिक इन्ट्रेस्ट या जुर्माना राशि का भुगतान करना पड़ता है. इससे लोन का पेमेंट और अधिक मुश्किल होता चला जाता है और छात्र इसमें उलझते चले जाते हैं.

इसलिए, यदि आप MBA करना चाहते हैं और आप MBA एजुकेशन लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए नीचे दी जा रही इन 10 बातों पर जरुर गौर करें -

1.   बाजार में उपलब्ध सभी एजुकेशन लोन्स को कम्पेयर करके उनके फायदे और नुकसान समझें

आज, कई सरकारी और प्राइवेट बैंकों के साथ नॉन बैंकिंग फायनेंशियल इंस्टीट्यूट्स अपनी शर्तों पर MBA के लिए एजुकेशन लोन देते हैं. जिन नियमों और शर्तों पर MBA एजुकेशन लोन की पेशकश की जाती है, हरेक इंस्टीट्यूट के मुताबिक एजुकेशन लोन के वे नियम और शर्तें आपस में एक-दूसरे से बिलकुल अलग होते हैं. इसलिए मार्केट में उपलब्ध सभी एजुकेशन लोन्स की जानकारी लेकर आपस में उन लोन्स को कम्पेयर करें और जिस इंस्टीट्यूट की एजुकेशन लोन पॉलिसी आपको बेस्ट लगती हो, आप उस इंस्टीट्यूट में अपने एजुकेशन लोन के लिए अप्लाई कर दें.

वास्वत में, जब आप एक बार विभिन्न एजुकेशन लोन की जानकारी इकठ्ठा कर लेते हैं तो आप आसानी से उनकी तुलना कर सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि आपकी आवश्यकता के मुताबिक सबसे सूटेबल एजुकेशन लोन कौन सा है?

2.   कोई मार्जिन मनी नहीं

अधिक एजुकेशन लोन देने वाले इंस्टीट्यूट्स ने भारत के टॉप MBA कॉलेजों और उनके MBA कोर्सेज के मुताबिक से अपने एजुकेशन लोन मैट्रिक्स तैयार किए हैं. इन लोन मैट्रिक्स के आधार पर, बैंक / एनबीएफसी यह तय करते हैं कि क्या वे पूरी MBA एजुकेशन के लिए फाइनेंस कर सकते हैं? इसमें ट्यूशन फीस के साथ-साथ अन्य एजुकेशनल एक्स्पेंसेस को भी शामिल किया जा सकता है.

अगर नहीं, तो ये बैंक आंशिक रूप से छात्र की MBA एजुकेशन के लिए फाइनेंस करेंगे और बाकी राशि के लिए मार्जिन मनी की व्यवस्था करने के लिए उधारकर्ता से पूछेंगे. हालांकि, यह स्थिति सही नहीं है लेकिन इस पर बातचीत की जा सकती है. पब्लिक सेक्टर के कई बैंक और कुछ प्राइवेट बैंक ऐसे भी हैं जो MBA एजुकेशन लोन पर मार्जिन राशि की मांग नहीं करते हैं. एजुकेशन लोन लेने के लिए छात्रों को हमेशा उस लोन के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए जिसमें मार्जिन मनी के भुगतान की आवश्यकता न पड़े.

एजुकेशन लोन देने वाले अधिकांश बैंको या उधारदाताओं की पहले से ही मार्जिन मनी के बारे में निर्धारित शर्ते होती हैं और वे इसका विवरण अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं जिन्हें स्टूडेंट्स अपना एजुकेशन लोन अप्लाई करने से पहले जरुर पढ़ लें.

3.   कोई लोन प्रोसेसिंग फी नहीं

यह बात तो सबको पता है कि अधिकांश बैंक और एनबीएफसी लोन सैंक्शन करने के लिए प्रोसेसिंग फी लेते हैं. MBA एजुकेशन लोन भी इसका अपवाद नहीं है. MBA एजुकेशन लोन की प्रोसेसिंग फी विभिन्न बैंको या ऑर्गनाइजेशन्स में अलग अलग होती है. कुछ बैंक कुल राशि का 0.5 फीसदी से लेकर 2 फीसदी तक चार्ज करते हैं जबकि कई अन्य इंस्टीट्यूट्स 5000 रुपये या उससे अधिक का फ्लैट चार्ज लेते हैं. लेकिन, यह फीस नेगोशियेबल है और बातचीत के माध्यम से इसे बैंक द्वारा माफ कराया जा सकता है. पब्लिक सेक्टर के कई ऐसे बैंक हैं जो योग्य उम्मीदवारों से प्रोसेसिंग फी नहीं लेते हैं. इसी तरह, कुछ प्राइवेट बैंक तथा एनबीएफसी भी MBA एजुकेशन लोन के लिए प्रोसेसिंग फी चार्ज नहीं करते हैं. इसलिए प्रोसेसिंग फीस के मामले में हमेशा बातचीत कर इसका समाधान तलाशें और कोशिश करें कि यह फीस आपको नहीं देनी पड़े.

4.   इन्ट्रेस्ट रेट स्ट्रक्चर की अच्छी तरह जांच करें

MBA एजुकेशन लोन एक ऐसा लोन है जिस पर आपको लोन इन्ट्रेस्ट देना पड़ता है. सभी बैंक अपना बेस रेट निर्धारित करते हैं और उसी रेट पर किसी को लोन देते हैं. MBA एजुकेशन लोन बैंको द्वारा निर्धारित बेस रेट पर ही दिया जाता है. इसके इन्ट्रेस्ट की अंतिम दर बैंक या फाइनेंस करने वाली कंपनी की नीति के आधार पर बेस रेट से अधिक या कम हो सकती है.

आमतौर पर बैंक एजुकेशन लोन पर इन्ट्रेस्ट रेट अपने बैंक के  बेस रेट + इन्ट्रेस्ट के एक्स्ट्रा रेट को मिलाकर लेते हैं. स्टूडेंट्स को अपने MBA एजुकेशन लोन के लिए अप्लाई करने से पहले बैंको के बेस रेट तथा उनके द्वारा निर्धारित रेट, इन दोनों की अच्छी तरह से छानबीन कर लेनी चाहिए.

5.   मोरेटोरियम पीरियड में इन्ट्रेस्ट रेट

आम तौर पर MBA के लिए एजुकेशन लोन एक ग्रांट के साथ प्रदान किया जाता है और मोरेटोरियम पीरियड में इन्ट्रेस्ट रेट नहीं लिया जाता है. अगर स्पष्ट शब्दों में कहें तो लोन लेने वाले उम्मीदवार को मोरेटोरियम पीरियड में किसी तरह का इन्ट्रेस्ट पे नहीं करना पड़ता है. लेकिन सिर्फ इसलिए कि आपको इस पीरियड के दौरान ऋण चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक इसके लिए आपको ब्याज नहीं लेगा.

आमतौर पर मोरेटोरियम पीरियड में MBA स्टडी की पीरियड और ग्रेस पीरियड को शामिल किया जाता है. कभी कभी गलती से बैंक कर्मचारी इस अवधि के लिए भी इन्ट्रेस्ट रेट लगा देते हैं. इसलिए छात्रों को हमेशा इस बात को लेकर सचेत रहना चाहिए तथा अपने सिस्टम तथा पूरे लोन प्रोसेस में मोरेटोरियम पीरियड का ख्याल रखना चाहिए तथा यह चेक करना चाहिए कि उनका बैंक इस दौरान तो किसी तरह का इन्ट्रेस्ट नहीं ले रहा है.

6.   फ्लोटिंग इन्ट्रेस्ट रेट चुनना है सही विकल्प

बैंक निश्चित इन्ट्रेस्ट रेट या फ्लोटिंग इन्ट्रेस्ट रेट पर लोन की अवधि बढ़ाते हैं. छात्रों को हमेशा फ्लोटिंग इन्ट्रेस्ट रेट को ही वरीयता देनी चाहिए और उसी का चयन करना चाहिए क्योंकि यह लॉन्ग टर्म में फायदेमंद साबित हो सकता है. MBA एजुकेशन लोन पर फ्लोटिंग इन्ट्रेस्ट रेट का मतलब है कि बेस रेट में परिवर्तन के आधार पर इन्ट्रेस्ट रेट की दर संशोधित की जाएगी. अर्थात यदि बेस रेट कम हो गई है, तो एजुकेशन लोन पर इन्ट्रेस्ट की प्रभावी रेट भी नीचे आ जायेगी. इसलिए, छात्रों को हमेशा एक ऐसे एजुकेशन लोन को पसंद करना चाहिए जो फ्लोटिंग इन्ट्रेस्ट रेट पर दिया जाये.  

7.   मोरेटोरियम पीरियड के दौरान रीपेमेंट

यदि MBA स्टूडेंट अपने मोरेटोरियम पीरियड के दौरान ही अपने MBA एजुकेशन लोन का पेमेंट करने में सक्षम हों तो वे इन्ट्रेस्ट रेट को कम करने के लिए संबंधित बैंक के साथ बातचीत कर सकते हैं क्योंकि  कुछ बैंक MBA छात्रों के लिए इस इन्ट्रेस्ट रेट को 0.25% से 1% तक कम करने के लिए तैयार हो जाते हैं. इन्ट्रेस्ट रेट में कमी छात्रों के वित्तीय बोझ को काफी कम कर सकती है. इसलिए, छात्रों को हमेशा मोरेटोरियम पीरियड के दौरान लोन का पेमेंट करने की कोशिश करनी चाहिए.

8.   वर्क एक्सपीरिएंस का उठायें फायदा   

अगर भारत के किसी टॉप MBA कॉलेज में एडमिशन लेने की बात हो तो वहां आपका वर्क एक्सपीरिएंस बहुत काम आ सकता है. यह आपके लिए एक असेट सिद्ध हो सकता है. क्या आपको पता है कि यदि आपके पास वर्क एक्सपीरिएंस है तो बैंक आपको एजुकेशन लोन के इन्ट्रेस्ट रेट पर कुछ रियायत भी देते हैं?. इसके लिए ऐसे छात्र जिनके पास वर्क एक्सपीरिएंस हो, वे बैंक से बातचीत करके अपना इन्ट्रेस्ट रेट कुछ कम (0.25% से 0.50% के बीच ) करा सकते हैं. इसलिए MBA एजुकेशन लोन लेते समय अपने वर्क एक्सपीरिएंस का भरपूर लाभ उठायें.

9.   महिला स्टूडेंट्स को मिलती हिया इन्ट्रेस्ट का बेहतर रेट

भारत के टॉप MBA कॉलेजों, विशेष रूप से IIMs में जेंडर डायवर्सिटी को ध्यान में रखते हुए महिला स्टूडेंट्स को एडमिशन के दौरान बहुत सारे मामलों में छुट प्रदान की जाती है. जिन महिला स्टूडेंट्स ने टॉप MBA कॉलेजों में अपनी सीट सुरक्षित कर ली हैं, उन्हें MBA एजुकेशन लोन के इन्ट्रेस्ट, मोरेटोरियम पीरियड तथा अन्य टर्म के मामलों में रियायत प्रदान की जाती है.

10. रीपेमेंट टर्म

एजुकेशन लोन के लिए रीपेमेंट टर्म स्टूडेंट्स के एजुकेशन लोन के मोरेटोरियम पीरियड के अंत में शुरू होती है. आमतौर पर, लोन की राशि और लोन प्रोडक्ट के अन्य नियमों और शर्तों के आधार पर पुनर्भुगतान अवधि 1 वर्ष - 9 वर्ष तक हो सकती है. दरअसल, MBA के छात्र भी जल्द ही लोन के चक्र को समाप्त करने के लिए कम समय की रीपेमेंट टर्म को पसंद करते हैं. लेकिन, छात्रों को यह समझना चाहिए कि एजुकेशन लोन के लिए भुगतान किया जाने वाले इन्ट्रेस्ट रेट पर इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है और इसलिए, लम्बे समय तक इसका भुगतान फायदेमंद साबित हो सकता है.

इसी तरह, कई बैंक कम इन्ट्रेस्ट रेट के साथ कम रीपेमेंट टर्म को ज्यादा बढ़ावा देते हैं. इसलिए, यह निर्धारित करने के बाद कि कौन सा विकल्प लंबे समय तक अधिक फायदेमंद होगा, पुनर्भुगतान अवधि पर स्टूडेंट्स को अपने हिसाब से सही निर्णय लेना चाहिए.

आजकल MBA एजुकेशन के लिए एजुकेशन लोन, छात्रों की विशेष जरुरत बन गया है. लेकिन, इससे पहले एजुकेशन लोन से संबंधित सभी पहलुओं को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है और इस आर्टिकल में दिए गए सभी 10 स्टेप्स, इस कार्य में आपकी बहुत मदद करेंगे. भारत में MBA एजुकेशन से जुड़े अन्य सभी जरुरी फैक्ट्स की जानकारी के लिए आप www.jagranjosh.com/mba पर लॉग इन करें.

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