एक 14 साल की लड़की को उसकी खोज के लिए मिला 18 लाख का पुरस्कार, इस खोज से COVID-19 के इलाज में मिल सकती है मदद

COVID-19 महामारी के बीच एक 14 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी लड़की ने एक साइंस चैलेंज में  $25K (यानि की 18 लाख रुपये से भी ज्यादा) का पुरस्कार जीता है। इस लड़की की ये खोज COVID-19 महामारी का इलाज खोजने में एक अहम भूमिका निभा सकती है।  

Created On: Oct 27, 2020 13:38 IST
Modified On: Oct 27, 2020 18:14 IST
एक 14 साल की लड़की को उसकी खोज के लिए मिला 18 लाख का पुरस्कार
एक 14 साल की लड़की को उसकी खोज के लिए मिला 18 लाख का पुरस्कार

COVID-19 महामारी के बीच एक 14 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी लड़की ने एक साइंस चैलेंज में  $25K (यानि की 18 लाख रुपये से भी ज्यादा) का पुरस्कार जीता है। इस लड़की की ये खोज COVID-19 महामारी का इलाज खोजने में एक अहम भूमिका निभा सकती है।  

CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार Texas (Frisco) की 14 वर्षीय Anika Chebrolu ने हाल ही में  2020 3M Young Scientist Challenge और 25,000 डॉलर का पुरस्कार जीते हैं। Anika की खोज COVID-19 के इलाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

अनिका का आविष्कार in-silico विधि का उपयोग करता है जो कि SARS-CoV-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन के साथ बंध जाता है और ये खोज COVID-19 के इलाज को खोजने में अहम् भूमिका निभा सकती है।  

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अनिका ने अपना प्रोजेक्ट तब जमा किया था जब वह 8वीं कक्षा में थी और ये हमेशा से COVID-19 के इलाज को खोजने पर केंद्रित नहीं था । शुरुआत में उनका लक्ष्य in-silico विधि की मदद से ऐसे कंपाउंड की पहचान करना था जो इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रोटीन से खुद को बांध सके। लेकिन COVID-19 महामारी की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अपने मेंटर की मदद से अपने प्रोजेक्ट की दिशा बदली और फिर SARS-CoV-2 वायरस को लक्ष्य मानकर रिसर्च किया। 

अनिका का कहना है कि उनकी रिसर्च और खोज, 1918 की फ्लू महामारी और वैक्सीनेशन और एंटी-इन्फ्लूएंजा दवाओं के होने के बावजूद अमेरिका में हर साल कई लोगों की होने वाली मौतों के आकड़ो से प्रेरित है। 

3M Young Scientist Challenge की जज Dr. Cindy Moss का कहना है कि अनिका का मन बहुत जिज्ञासु है और उसने अपनी जिज्ञासा का इस्तेमाल करते हुए ये खोज की। उसका काम बहुत ही गहन अध्ययन और कई डेटाबेस की जांच पर आधारित है। उसने नई पद्धतियों को लेकर एक समझ विकसित की है और अपनी बात समझाने में भी वो माहिर हैं। 

अनिका का कहना है कि ये पुरस्कार मिलना एक सम्मान है, लेकिन उनका काम अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका कहना है कि उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि SARS-CoV-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन से खुद को बांध सकने वाला ये कंपाउंड Virologists और Drug Development Specialist की मदद से कैसे सफलता पूर्वक बन कर तैयार होता है।  हालाँकि ये इस और चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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