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विद्यालयों के लिए मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य : सीबीएसई

Rishi Sonwal

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सभी सीबीएसई विद्यालयों के लिए मान्यता प्राप्त करने की अनिवार्यता के संबंध में एक परिपत्र जारी किया है. विद्यालयों से अनिवार्य रूप से मान्यता प्राप्त करने के लिए कहा गया है, जिसके लिए वे सीबीएसई की वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करना शुरू कर सकते हैं.

वर्ष 2011 के अंत में सीबीएसई ने विद्यालयों को मान्यता प्रदान करने और उनकी रेटिंग करने की एक प्रणाली लांच की थी, जिसका स्वरूप स्वैच्छिक था. किंतु एक प्रायोगिक परियोजना के बाद अब सीबीएसई द्वारा इसे सभी विद्यालयों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है. 

परिपत्र में उप सचिव (एफिलियेशन) श्री यू.सी. बोध ने विद्यालयों को लिखा है, "सभी एफिलियेटेड विद्यालयों के प्रमुखों के ध्यान में यह बात लाई जाती है कि उनके लिए हर पाँच वर्ष में मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है. ऐसा शिक्षा की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए किया गया है."    

विद्यालयों को 55,000 रुपये का एफिलियेशन-शुल्क देना होगा. श्री बोध ने कहा कि मान्यता प्राप्त कर लेने के बाद विद्यालयों को एक 'स्थायी रूप से एफिलियेटेड' का दर्जा मिल जाएगा.  

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मान्यता प्राप्त करने के लिए विद्यालयों को सीबीएसई की वेबसाइट पर 'फॉर्म ऑफ़ इंटेंट' भरना होगा. विद्यालय गुणवत्ता मूल्यांकन और मान्यता योजना (एसक्यूएएएस) कही जाने वाली इस मान्यता-प्रक्रिया के तीन चरण हैं, जिनमें से पहला चरण आंकड़ों के समर्थन में प्रासंगिक साक्ष्यों के साथ ऑनलाइन आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना है.   

समकक्ष मूल्यांकनकर्ता दल (पीएटी) या एजेंसी द्वारा आंकड़ों के सत्यापन और समर्थक साक्ष्यों के एकत्रीकरण के लिए विद्यालय का दौरा करने से दूसरा चरण पूरा होता है. यहाँ एजेंसी से तात्पर्य सीबीएसई द्वारा फील्ड-विजिट और विद्यालय के आंकड़ों के सत्यापन के लिए नियुक्त की जाने वाली निजी फर्मों से है. और, पीएटी में तीन सदस्य होंगे, जो विद्यालयों के वे प्रधानाचार्य होंगे, जिन्हें केंद्रीय बोर्ड ने मान्यता प्रदान करने के लिए मूल्यांकनकर्ताओं के रूप में प्रमाणित किया हो.    

तीसरे और अंतिम चरण में पीएटी/एजेंसी द्वारा आवेदक विद्यालय को मान्यता प्रदान करने के संबंध में सीबीएसई को रिपोर्ट प्रस्तुत करना शामिल है.

मान्यता प्रदान करने के संबंध में अंतिम निर्णय सीबीएसई द्वारा लिया जाएगा.

मान्यता प्राप्त करने की तैयारी करने और उससे संबधित महत्त्वपूर्ण पहलुओं के संबंध बोर्ड क्षेत्रीय स्तर पर अभिमुखता-कार्यशालाएँ आयोजित कर रहा है.

"इस तरह के कार्यक्रमों का विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा. विद्यालयों को सलाह दी जाती है कि वे इस संबंध में किसी निजी एजेंसी की मदद न लें. बोर्ड अपने सभी एफिलियेटेड विद्यालयों को अपने गुणवत्ता और उत्कृष्टता संबंधी आयामों की समीक्षा के लिए मान्यता संबंधी कवायद में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है," श्री बोध ने परिपत्र में कहा है.  

परिपत्र के अनुसार, मान्यता प्राप्त करना विद्यालयों के इसलिए अनिवार्य है, क्योंकि यह विद्यालयों को 'स्थायी रूप से एफिलियेटेड' की गारंटी देगा और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ और अन्य विवरण सार्वजनिक करके पारदर्शिता बढ़ाएगा. साथ ही, मान्यता प्राप्त करने से विद्यालयों को अन्य विद्यालयों के साथ तुलना करके अपनी शक्तियों और कमजोरियों का पता लगाने में मदद मिलेगी.

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