संदेह के घेरे में भारत मॉरीशस शिक्षा समझौता

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जनवरी 2014 में मॉरीशस के संघ शिक्षा आयोग (टेक) और भारत के केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के माध्यम से एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) के मध्य हुए शिक्षा समझौते पर संदेह जताया है. यूजीसी की आपत्ति के पीछे एआईयू- टेक के बीच 2013 में  हुए समझौते में दोनों देशों के किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होना है.

क्या था समझौते में?
टेक और एआईयू के मध्य हुए वाले समझौते के अनुच्छेद 12 के अनुसार, दोनों देशों को एक दूसरे की शैक्षिक डिग्रियों को अपने–अपने देशों में मान्यता देनी थी. इसके अतिरिक्त इस समझौते में परस्पर शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी शामिल था.

क्या था पुराना समझौता ?

एआईयू और टेक के बीच एक अन्य समझौता वर्ष 2010 में पाँच वर्षों के लिए हुआ था और उसका नवीनीकरण वर्ष 2015 में प्रस्तावित था. उपरोक्त समझौते को बिना कोई कारण बताए तीन वर्षों के बाद ही रद्द कर दिया गया और एक नये समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

वर्ष 2014 में सिक्किम स्थित एक निजी भारतीय विश्वविद्यालय ‘ईआईआईएलएम’ के मॉरीशस कैंपस को यूजीसी ने बंद करने का आदेश दिया था, परंतु टेक द्वारा ‘ईआईआईएलएम’ को लगातार अपना कैंपस चलाने की छूट दी गई थी. उल्लेखनीय है कि ईआईआईएलएम का एक कैंपस मॉरीशस में भी है और यह सुनील जेठा (मॉरीशस के संघ शिक्षा मंत्री के भाई हैं) द्वारा संचालित है.

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