Advertisement

वो पांच चीजें जो आपके करियर की रफ्तार को धीमी कर सकती हैं

सबकुछ आदमी के जुनून पर निर्भर करता है. अगर जुनून के साथ सही दिशा में सार्थक प्रयास किया जाय तो सफलता अवश्य ही हांथ लगती है, इसमें कोई संदेह नहीं है. लेकिन करियर में बदलाव उस समय बहुत जरुरी हो जाता है जब आपको यह लगता है कि काम करने वाले जुनून की अब आपमें कमी होती जा रही है. वो आपको अब कत्तई प्रेरित नहीं कर रहा है. वर्तमान जॉब से नाखुश तथा मानसिक रूप से असंतुष्ट होने के बावजूद भी अगर आप जॉब चेंज करने के विचार मात्र से डरते हैं, तो इसका मतलब है कि आप कुछ ऐसे आतंरिक भय से ग्रस्त हैं, जो आगे चलकर आपके स्वर्णिम भविष्य के लिए घातक हो सकता है.

हमारे विशेषज्ञों ने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के जीवन का विश्लेषण किया है और उन भयों की सूची तैयार की है जिनकी वजह से प्रोफेशनल्स जॉब या करियर में बदलाव से डरते हैं.

असफल होने का भय

करियर में चेंज नहीं करने का सबसे बड़ा कारण असफल होने का भय है. अक्सर हम जुनून के साथ कार्य करने से कतराते हैं तथा कोई भी जोखिम लेना पसंद नहीं करते हैं. हमारे अवचेतन मन में बैठा असफलता का डर हमें ऐसा करने से रोकता है. हम यह सोचकर ही डर जाते हैं कि अगर उस जॉब या करियर में असफल रहा तो क्या होगा ? हम अपने ऊपर संदेह करने लगते हैं और हमें अपनी क्षमता पर भरोषा नहीं रह जाता है. लेकिन अगर हमारे अन्दर कुछ करने का जुनून है, तो हमें अपनी क्षमता पर विश्वास करना चाहिए. सीखने की कोई उम्र नहीं होती है और हम जब चाहें तब करियर में इच्छानुसार करियर चेंज कर सकते हैं. उदाहरण के लिए मानलीजिये कि आप 25 वर्षों से एक बैंकर हैं और अब कुछ पालतू जानवरों का दुकान खोलना चाहते हैं, क्योंकि इसकी इच्छा आपके दिल में बहुत अर्से से थी.अगर आपको ऐसा लगता है कि आप पालतू जानवरों को बेच नहीं पाएंगे तो आप किसी द्वारा पहले से ही बनाए गए पालतू जानवरों की दुकान पर एक केयर टेकर का कार्य कर सकते हैं. यह एक बढ़िया बिजनेस आइडिया है.

जीवन रक्षा का भय

अक्सर लोग करियर या जॉब में बदलाव के विषय में सोचते ही दिवालिया होने की सोंच से डर जाते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि अगर मैं अपना यह काम छोड़ देता हूँ तो मैं अपनी सभी जिम्मेदारियों को सही ढंग से नहीं निभा पाउँगा.

लेकिन याद रखिये यदि आप अपने इस भय से बाहर निकलकर आगे बढ़ने की सोंचे तो जीवन रक्षा का कोई न कोई नया साधन अवश्य ही मिल जाता है तथा आपके परिवारवाले भी इसमें सहयोगी साबित होते हैं. कई ऐसे इंटरप्रेन्योर हैं जिन्होंने अपने करियर में बदलाव किये तथा आगे चलकर बहुत सफलता अर्जित की. इसका ज्वलंत उदाहरण है, प्रसिद्ध लेखक चेतन भगत. उन्होंने अपनी पत्नी के कहने पर एक निवेश बैंकर के धंधे को छोड़कर लेखन का पेशा अपनाया और उनके सफलता की कहानी सबको पता है.

नए माहौल से तालमेल न बैठा पाने का डर

करियर या जॉब में बदलाव न करने की मंशा के पीछे जो सबसे बड़ा डर होता है- नए माहौल में अपने आप को कम्फर्टेबल नहीं समझने का डर. साथ ही नए वातावरण से ताल मेल बैठा पाउँगा या नहीं इस बात का भय व्यक्ति को आगे बढ़ने नहीं देता है. यह बात सही है कि नए जगह का वातावरण, संस्कृति, स्थान, लोग सभी अलग होते हैं लेकिन उनसे ताल मेल बैठाना उतना मुश्किल नहीं होता जितना कि आप सोंचते हैं.

जो लोग थोड़े असामाजिक या अंतर्मुखी होते हैं उनको आम तौर पर यह भय बहुत सताता है. लेकिन यह स्वीकार करके कि हो सकता है प्रारंभिक दौर में थोड़ी बहुत मुश्किलें आयें लेकिन बाद में सबकुछ ठीक हो जायेगा, यह भय स्वतः ही समाप्त हो जायेगा. चूँकि आप स्वेच्छा से अपना करियर बदलना चाहते हैं, इसलिए आपको खुश रहना चाहिए तथा अपनी सफलता के प्रति आशान्वित होना चाहिए. यदि आपके पास करियर की कोई योजना है, तो उसके अनुरूप कुछ ऐसे कार्यकर्ताओं की एक संभावित टीम बनाएं, जो आपके साथ जुड़ने और कार्य करने के लिए तैयार हों. इससे आपको नए माहौल में एडजस्ट करने में परेशानी नहीं होगी.

ऑफिस पॉलिटिक्स का भय

लोगों के प्रबंधन से जुड़े कार्य में लगे शोधकर्ताओं द्वारा किये गए अनुसन्धान से पता चलता है कि करियर पथ की परवाह किये बिना ऑफिस की आतंरिक राजनीति को समझना तथा उसके अनुरूप कार्य करना सफलता के मुख्य कारणों में से एक कारण है. वास्तव में कुछ कर्मचारियों ने तो अपनी राजनितिक कौशल के कारण ही जीवन में अद्भुत सफलता हासिल की है. अर्थात जब करियर में आगे बढ़ने की बात सामने आती है, तो कार्यालय की राजनीति को समझना बहुत जरुरी होता है. इसमें रूचि नहीं लेने तथा इसे नहीं समझ पाने के कारण भी कभी कभी लोग करियर या जॉब में चेंज करने से डरते हैं. लेकिन एक बात और ध्यान रखना चाहिए वो यह है कि राजनीति में अधिक सक्रिय होने से इसका गलत प्रभाव भी पड़ सकता है तथा इससे आपकी सृजनशीलता प्रभावित हो सकती है. अतः हमेशा सोच समझकर जरुरत और प्रोग्रेस के हिसाब से कार्यालय की राजनीति में भाग लें.

नौकरी छुटने का भय (एफओओबीओ)

बढ़ते प्रद्योगिकी और यंत्रीकरण के कारण ज्यादातर कार्य मशीनों से संपन्न होने की वजह से नौकरी छुटने का  भय कई कर्मचारियों विशेषकर इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वालों के लिए चिंता का एक कारण बन गया है.

गार्टनर ने भविष्यवाणी की है कि 2025 तक सॉफ़्टवेयर, रोबोट और स्मार्ट मशीन द्वारा एक-तिहाई नौकरियों की जगह ले ली जाएगी.

इस समस्या के समाधान के लिए दो आसान तरीके अपनाइए जो आपको हमेशा इस भय से दूर रखेंगे. पहला नौकरी के नवीनतम ट्रेंड के अनुरूप हमेशा अपने आप को अपडेटेड रखें. दूसरा किसी ऐसे उद्योग की तरफ जाएं जहाँ आपके स्किल से जुड़े कार्य बहुत लम्बे समय तक होने की संभावना हो.

करियर या जॉब में चेंज करना एक एक जोखिम भरा फैसला हो सकता है लेकिन निश्चित रूप से इसके अपने अलग फायदे भी होंगे. अतः अगर आपमें ऊपर दिए गए भय में से कोई भी भय है तो उसे दूर कीजिये और आसानी से एक नए पहल की ओर अपना कदम बढ़ाएं. सफलता अवश्य ही आपके कदम चूमेगी.

Advertisement

Related Categories

Advertisement