7 IAS Officers जो अपनी जॉब छोड़कर बने Entrepreneurs

IAS को भारत के सबसे प्रतिष्ठित professions में से एक माना जाता है। हालांकि, कुछ सिविल सेवकों ने रिजाइन दे कर एक अलग राह चुनी और अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए अपने प्रभावशाली पदों को छोड़ दिया। आइए इन अविश्वसनीय अधिकारियों में से 7 पर एक नज़र डालें।

1. डॉ. सैयद सबाहत अज़ीम 

सैयद सबाहत अजीम एक डॉक्टर और पूर्व 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने अफोर्डेबल healthcare चेन Glocal Healthcare Systems लांच किया। सैयद के पिता की असामयिक मृत्यु (untimely death) के बाद अपने IAS पद से इस्तीफा दे कर जुलाई 2010 में Glocal की शुरुआत की। वह बताते हैं की "“मेरे पिता की मृत्यु अनावश्यक उपचार के कारण हुई। तब मैंने ये सोचा, अगर यह मेरे साथ हो सकता है, एक डॉक्टर और एक आईएएस अधिकारी के साथ, तो भारत के आम लोगो के साथ क्या होता होगा?" इसीलिए उन्होंने आम लोगो के उपचार के लिए सही तकनीक पर काम करना शुरू किया। उनके इस अभियान में SEBI के पूर्व चेयरमैन म. दामोदरन ने उनका काफी साथ दिया और आज दामोदरन Glocal के चेयरमैन भी हैं।   

ग्लोकल में डॉ. सैयद अपनी टीम के साथ एक प्रोटोकॉल-संचालित मॉडल के साथ काम कर रहे हैं, जहां कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से एक डॉक्टर 42 रोगों को पहचान कर उनका इलाज कर सकता है। इसमें हृदय रोग से लेकर मलेरिया तक 42 रोगों को शुरूआती जांच में ही पहचाना जा सकता है। डॉ. अजीम कहते हैं कि प्रत्येक ग्लोकल अस्पताल को 15 करोड़ रुपये में बनाया जाता है, जो कि 100 बेड के नियमित अस्पताल को बनाने की आधी लागत है।

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2. राजन सिंह 

राजन IIT कानपूर से ग्रेजुएट है और UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर वह आईपीएस अफसर बनें। उन्होंने 3 साल केरल की राजधानी थिरूवनन्तपुरम में पुलिस कमिश्नर के पद पर काम किया। हालांकि 8 साल देश की सेवा करने के बाद उन्होंने रिजाइन दे कर कॉर्पोरेट वर्ल्ड को चुना। कॉर्पोरेट जगत में कुछ बड़े नामों के लिए काम करने के बाद 2016 में उन्होंने ConceptOwl की शुरुआत की। ConceptOwl एक टीचर-लेस ऑनलाइन क्लासरूम है जिसे राजन ने छात्रों को प्रवेश परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए शुरू किया

राजन बताते है की "एक इन्वेस्टर के रूप में मैं कई entrepreneurs से मिला लेकिन जो एक बात उन्हें एक मेरे जैसे प्रोफेशनल से अलग करती थी वह थी उनकी रिस्क लेने की क्षमता। मैं जीवन में खुद को ये रिस्क लेने का मौका ना दे कर अफ़सोस नहीं करना चाहता था इसीलिए मैंने अपनी जॉब क्विट की और खुद एक Entrepreneur बना।” 

3. प्रवेश शर्मा 

 प्रवेश शर्मा 1982 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने 34 साल के एडमिनिस्ट्रेटिव करियर के बाद 2016 में Voluntary रिटायरमेंट ले कर 'सब्ज़ीवाला' नाम से एक स्टार्ट-अप शुरू किया। सब्ज़ीवाला फल और सब्ज़ियों की एक रिटेल चेन है जो किसानो को ग्राहकों तक डायरेक्ट जोड़ कर उन्हें बेस्ट प्राइस दिलाता है। मार्च 2018 में उन्होंने अपने ३ साथियो के साथ मिल कर स्टार्ट-अप की सेवाओं को KAMATAN प्लेटफार्म पर एक्सपैंड किया।                                          

कृषि और खाद्य सुरक्षा के अपने व्यापक ज्ञान का उपयोग करते हुए, प्रवेश ने एक सफल उद्यमी के रूप में अपने करियर की दूसरी पारी शुरू की।

4. रोमन सैनी 

 रोमन सैनी की  उपलब्धियों से ही उनकी सफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 16 साल की उम्र में AIIMS प्रवेश परीक्षा पास करने के साथ साथ 18 साल की उम्र में एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में अपना रिसर्च पेपर भी प्रकाशित कराया। यही नहीं, MBBS पूरा करने के बाद, उन्होंने मनोचिकित्सा में NDDTC में एक जूनियर रेजिडेंट के रूप में काम किया जिसके दौरान उन्होंने अपना पहला UPSC सिविल सेवा का एटेम्पट दे कर उसे पास भी किया। वे तब सबसे कम उम्र के IAS थे और उन्हें मध्य प्रदेश में कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था।                                                   

2016 में रोमन ने अपने सिविल सर्विसेज के पद से इस्तीफा दिया और अपने Entrepreneurial करियर की शुरुआत की। उन्होंने Unacademy नाम से एक वेबसाइट की शुरुआत की जो आईएएस उम्मीदवारों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, वेबिनार, ट्यूटोरियल और प्रेरक भाषण प्रदान करती है। रोमन का मानना  है कि कोई भी जीनियस पैदा नहीं होता है बल्कि उसकी लगन, मेहनत और परिश्रम ही उसे जीनियस बनाते हैं। 

5. विवेक कुलकर्णी 

विवेक 1979-बैच के आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने 22 वर्ष आईटी और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश की सेवा की। कर्नाटक सरकार के आईटी और जैव प्रौद्योगिकी सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के बाद, उन्होंने  अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

2005 में उन्होंने Brickwork India नाम से नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग कंपनी की सह-स्थापना की जो कि ग्लोबल कम्पनीज को वर्चुअल असिस्टेंस प्रोवाइड करती है। उनकी पत्नी कंपनी की CEO है। विवेक ब्रिकवर्क रेटिंग भी चलाते है जिसे 2007 में भारत की 5वी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के रूप में शामिल किया गया था। यह कंपनी अब तक 10,000 से अधिक कंपनियों की रेटिंग कर चुकी हैं।

6. जी. वि. राव  

52 वर्षीय जी. वी. राव एक रिटायर्ड सिविल सेवक हैं जिन्होंने CSE एस्पिरेंट्स को कोच करने के लिए विजयवाड़ा स्थित लर्निंग स्पेस एजुकेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (LSES) की स्थापना की। जहां अधिकांश कोचिंग संस्थान 50000 रुपये से 2 लाख तक फीस लेते हैं वहीँ राव सिर्फ 7999/- ही चार्ज करते हैं जिसमे स्टूडेंट को सब कोचिंग मटेरियल भी प्रोवाइड किया जाता है। राव के अनुसार, “जब मैं परीक्षा की तैयारी कर रहा था, उस दौरान कोचिंग सेंटर का  व्यावसायीकरण इतनी ऊँचाइयों तक नहीं पहुँचा था। इस व्यवसायीकरण ने अच्छी प्रतिभाओं को प्रणाली में आने से रोका है, और मैं इन खामियों को दूर करना चाहता हूं। ”इसलिए उन्होंने 2014 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (voluntary रिटायरमेंट) ली और रणनीति तैयार करने के बाद, 2017 में उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल और ऐप भी लांच किया। 

7. संजय गुप्ता 

संजय गुप्ता 1985 बैच के IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने 22 वर्ष की आयु में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की। 2002 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (voluntary retirement) लेने के बाद, संजय अडानी समूह में सीईओ (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के रूप में शामिल हुए। समूह के साथ कुछ साल बिताने के बाद, उन्होंने नीसा समूह के अंडर लक्जरी होटल, कैम्बे (Cambay) की शुरुआत की। उनकी कुछ समूह कंपनियां नीसा लीजर, नीसा इन्फ्रास्ट्रक्चर, नीसा एग्रीटेक और फूड, ओरिएंट स्पा, नीसा टेक्नोलॉजीज, नीसा फाइनेंशियल सर्विसेज, नीसा टाउनशिप और प्रॉपर्टीज और कैम्बे एसईजेड होटल हैं। उन्हें गुजरात के पहले मेट्रो रेल उद्यम (MEGA) के निर्माण के लिए चुना गया और उन्हें MEGA का Executive Chairman बनाया गया। 

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