भारतीय बैंकिंग इंडस्ट्री की रोल मॉडल: अरुंधति भट्टाचार्य

देश के सबसे बड़े व्यावसायिक ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक की पहली महिला अध्यक्ष बनने के बाद सुर्खियों में आईं थी अरुंधति भट्टाचार्य. लेकिन यही वह बात नहीं है जो आज तक मुख्य रूप से पुरुषों का गढ़ कहे जाने वाले इंडस्ट्री में उन्हें अलग बनाता है. बैंकिंग के लिए भविष्य के विजन ने उन्हें दूसरों से अलग बनाया है. उन्होंने अतीत के मानदंडों का अनुसरण नहीं किया बल्कि भविष्य में अधिक से अधिक प्रतिष्ठा हेतु रास्ते बनाए.

अरुंधति भट्टाचार्यः महान व्यक्तित्व

208 वर्ष पुराने ऋणदाता की पहली महिला बॉस ने कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय  से अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है. जैसा कि वे बताती हैं, उनके शिक्षक हमेशा यही चाहते थे कि वे कुछ ऐसा करें जिसमें उनकी प्रतिभा का और रचनात्मकता का उपयोग हो सके. इसलिए, बैंकिंग कभी भी उनका लक्ष्य नहीं था. लेकिन 1977 में, जब उन्होंने देखा कि उनके सभी मित्र एसबीआई पीओ का एप्लीकेशन फॉर्म भर रहे हैं, तो उन्होंने भी भर दिया और अंतिम सूची में जगह बनाई. इसके बाद, उन्होंने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और भारत में सबसे प्रतिष्ठित बैंक की सर्वोच्च बॉस बनीं.

एसबीआई को नई उंचाईयों पर ले गईं: नए क्षेत्रों को अपनाया

एसबीआई की अध्यक्ष बनने के बाद अरुंधति भट्टाचार्य के लिए काम खत्म नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने एसबीआई को दुनिया के सबसे अच्छे बैंकों में से एक बनाने के लिए अपने दो वर्ष के कार्यकाल में बहुत प्रयास किए और अन्य सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक के एसबीआई में नए विलय प्रस्ताव के  साथ एसबीआई शीर्ष 50 अंतरराष्ट्रीय बैंकों की सूची में शामिल हो जाएगा. इसलिए, क्या चीजें हैं जो उन्हें अलग बनाती हैं?

एसबीआई की वर्तमान अध्यक्ष के पास विजन है और उनमें उसे प्रयोग में लाने की हिम्मत भी है. यही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है. महिला होने के नाते, मुंबई में एसबीआई के प्रधान कार्यालय में कोने के प्रतिष्ठित कमरे पर कब्जा करना आसान नहीं है लेकिन उन्होंने इससे भी कहीं अधिक कर के दिखायाः एक बेहतर एसबीआई के लिए, आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर बैंकिंग अनुभव के लिए. सच में, वे न सिर्फ महिलाओं के लिए बल्कि समग्रता में देखें तो नेताओं के लिए भी रोल मॉडल हैं.

Trending Now

भारत की सबसे शक्तिशाली महिला बैंकर्स

Related Categories

Also Read +
x