जानिये एमबीए करने से पहले बीबीए करना क्यों है जरुरी ?

पिछले दशक से प्रोफेशनली सफल होने के लिए एमबीए की डिग्री एक अनिवार्य आवश्यकता सी बनती जा रही है. अच्छी सैलरी, आकर्षक जॉब प्रोफाइल, करियर में विकास के बहुत सारे अवसर आदि के कारण एमबीए कोर्स की मांग अन्य कोर्सेज के वनिस्पत बहुत ज्यादा है. एमबीए एक पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम है जिसे ग्रेजुएशन की डिग्री के बाद किया जाता है. वैसे तो किसी भी विषय में ग्रेजुएशन करने के बाद एमबीए में एडमिशन लिया जा सकता है लेकिन बीबीए करने के बाद एमबीए करना हमेशा बहुत अधिक फायदेमंद रहता है.बिजनेस मैनेजमेंट के लिए बीबीए एक ग्रेजुएशन लेवल का एकेडमिक प्रोग्राम है. मैनेजमेंट फील्ड में करियर बनाने को लेकर सीरियस स्टूडेंट्स बीबीए में एडमिशन लेते हैं. बीबीए कोर्स करने से मैनेजमेंट साइंस के क्षेत्र में एक आकर्षक करियर के शुरुआत की नींव रखी जाती है.बीबीए करने के बाद एमबीए करने में बहुत आसानी होती है तथा मैनेजमेंट के फंडामेंटल फैक्ट्स की जानकारी भी हो जाती है. आइये हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्यों एमबीए करने से पहले बीबीए करना बहुत जरुरी होता है ?

1. एमबीए के लिए परफेक्ट फाउंडेशन

मैनेजमेंट का फील्ड अन्य शैक्षणिक फील्ड से बहुत अलग है, इसलिए इसके लिए एक ठोस नींव की आवश्यकता होती है ताकि इससे जुड़े मौलिक बातों को आसानी से जाना जा सके. मैनेजमेंट के सिद्धांतों तथा बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की मौलिक बातें आगे चलकर मैनेजमेंट के जटिल कॉन्सेप्ट को समझने में बहुत सहायक होती हैं.भारत के सभी टॉप कॉलेज जहाँ बीबीए का कोर्स उपलब्ध है, मैनेजमेंट के कॉन्सेप्ट तथा उसके फंडामेंटल्स को ध्यान में रखते हुए ही बीबीए का सिलेबस तैयार करते हैं. इससे आगे चलकर एमबीए करते समय मैनेजमेंट के कॉन्सेप्ट को समझने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है तथा भविष्य में प्रैक्टिकली भी इसका बहुत फायदा होता है.

2. डायनेमिक कोर्स करिकुलम

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि जब  मैनेजमेंट  छात्रों के लिए अगले चरण यानी एमबीए की डिग्री के लिए तैयार होने की बात आती है तो भारत में बीबीए कॉलेजों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है.ये कॉलेज मैनेजमेंट ग्रेजुएट छात्रों की जरूरतों के अनुरूप अधिक शैक्षिक कार्यक्रम विकसित करने के लिए बहुत समय, पैसा और एफर्ट लगाते हैं. बीबीए कोर्स का सिलेबस मैनेजमेंट की अवधारणाओं और सिद्धांतों को पूरी तरह से छात्रों को समझाने के लिए आवश्यक सैद्धांतिक और व्यावहारिक स्किल्स के बीच एक बेहतर तालमेल बैठाते हुए स्थानीय बाजार (भारत केंद्रित) के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर मौजूदा बाजार के रुझानों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है.इससे उन्हें अपने बीबीए प्रोग्राम्स को संशोधित करने में मदद मिलती है ताकि वे प्रजेंट समय के लिए अधिक अनुकूल हो सकें तथा साथ ही भविष्य के लिए एक बहुत ही मजबूत नींव रख सकें.

3. एमबीए स्पेशलाइजेशन सब्जेक्ट्स की समझ

एमबीए उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है मास्टर डिग्री लेवल पर किसी भी मैनेजमेंट विषय में स्पेशलाइजेशन करना. ऐसे छात्र जिन्होंने बीबीए नहीं किया है, मार्केट या कॉलेज में उपलब्ध स्पेशलाइजेशन में से किसी एक का चुनाव करते समय  दुविधा की स्थिति में आ जाते हैं. मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट की पूर्व समझ के बिना, एमबीए के छात्रों ने जिन्होंने बीबीए नहीं किया है, अक्सर बाजार के रुझानों के आधार पर अपने लिए गलत स्पेशलाइजेशन का चुनाव कर बैठते हैं. लेकिन जब बाद में सीरियस स्टडी की बात आती है तब जाकर कई मैनेजमेंट छात्रों को यह पता चल पाता है कि वास्तव में इस सब्जेक्ट या स्पेशलाइजेशन में उनकी रूचि या इच्छा नहीं थी वे तो कुछ और ही करना चाहते थे. वहीं दूसरी तरफ, जिन छात्रों ने बीबीए किया है, वे विभिन्न एमबीए स्पेशलाइजेशन की अधिक समझ रखते हैं और इससे आगे चलकर स्टडी करते समय उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती है.

 

4. कार्पोरेट वर्ल्ड में एंट्री

मैनेजमेंट एजुकेशन को कॉर्पोरेट और बिजनेस वर्ल्ड  में किसी भी छात्र के पहले चरण के रूप में देखा जाता है. ऐसा कहा जा रहा है कि, बीबीए मैनेजमेंट साइंस के क्षेत्र में एक प्रारंभिक शैक्षिक कार्यक्रम है, यह बिजनेस वर्ल्ड के विषय में एक व्यापक दृष्टिकोण की पेशकश करता है. यह छात्रों को बिजनेस एथिक्स, कॉर्पोरेट प्रिंसिपल और भारत के अतिरिक्त ग्लोबल लेबल पर बिजनेस करने के लिए जरुरी स्किल्स तथा इसके प्रिंसिपल्स की सम्पूर्ण जानकारी हासिल करने में बहुत मददगार साबित होता है.छात्रों को उनके बीबीए कोर्स सिलेबस के हिस्से के रूप में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और कॉर्पोरेट मैनेजमेंट की व्यावहारिक दुनिया की समस्याओं को सरलता से समझाने का प्रयास किया जाता है.इस दौरान मैनेजमेंट में हायर एजुकेशन की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक बैकग्राउंड तैयार किया जाता है.

5. पहले से ही मैनेजमेंट के विषयों का अनुभव

ये ऊपर पहले ही बताया जा चुका है कि बीबीए कॉलेज मैनेजमेंट ग्रेजुएट छात्रों की जरूरतों के अनुरूप एजुकेशनल प्रोग्राम विकसित करने के लिए बहुत समय, पैसा और एफर्ट लगाते हैं. बीबीए कोर्स का सिलेबस मैनेजमेंट की अवधारणाओं और सिद्धांतों को पूरी तरह से छात्रों को समझाने के लिए आवश्यक सैद्धांतिक और व्यावहारिक स्किल्स के बीच एक बेहतर तालमेल बैठाते हुए स्थानीय बाजार (भारत केंद्रित) के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर मौजूदा बाजार के रुझानों को ध्यान में रखते हुए ही तैयार किया जाता है. लगभग सभी बीबीए प्रोग्राम्स में इंटर्नशिप उनके 3 साल के कार्यक्रम के अनिवार्य घटक के रूप में होती हैं. इसलिए, बीबीए कोर्स मैनेजमेंट उम्मीदवारों को एमबीए प्रोग्राम्स की आगामी चुनौतियों से निबटने में सक्षम बनाती हैं. इसके अतिरिक्त बीबीए छात्रों के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रवेश स्तर की नौकरियों और इंटर्नशिप की तलाश करने के लिए एक अच्छा बेस प्रदान करता है.

अतः निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि बीबीए, एमबीए में एडमिशन लेने वाले छात्रों  तथा मैनेजमेंट के छात्रों के लिए कार्पोरेट वर्ल्ड तथा बिजनेस वर्ल्ड में प्रवेश  करने का प्रथम चरण होता है. इससे छात्र एमबीए के लिए आवश्यक नॉलेज,एक्सपीरीएंस और स्किल्स हासिल करते हैं.विभिन्न बी-स्कूलों द्वारा निर्धारित बैलेंस्ड सिलेबस तथा यूनिक टीचिंग मेथड यह सुनिश्चित करता है कि बीबीए एमबीए उम्मीदवारों के लिए एक सही कदम है.

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