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ईमान रखें, सफल बनें| Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 9

“सफलता की राह पर” सीरीज़ के इस वीडियो में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी हमारे दैनिक व्यवहार में ईमान और भरोसे का महत्व समझा रहे हैं. इनके मुताबिक, अगर कोई भी  व्यकित अपने व्यक्तिगत जीवन और पेशे में दैनिक लेन-देन और कार्यव्यवहार करते वक्त सच्चाई तथा ईमानदारी को अपनाता है तो उसे समाज में सम्मान मिलने के साथ-साथ अपने पेशे में भी निरंतर सफलता मिलती है. इसके ठीक विपरीत अगर हम रोज़ाना अपना कार्यव्यवहार करते समय लोगों से छोटे-छोटे झूठ बोलते रहें तो हम पर से लोगों का भरोसा उठने के साथ-साथ हमें अपने पेशे या कारोबार में भी आशातीत लाभ और सफलता नहीं मिलते हैं. अगर हम ये छोटे-छोटे झूठ बोलने की आदत अपना लें तो आगे चलकर हम आदतन कोई बड़ा हानिकारक झूठ भी बड़ी आसानी से बोल जायेंगे क्योंकि किसी भी  इंसान को पहली बार झूठ बोलने में काफी तकलीफ़ होती है लेकिन धीरे-धीरे झूठ बोलना उस व्यक्ति के लिए आसान होता जाता है और कुछ समय बाद ऐसा व्यक्ति जाने-अनजाने बात-बात पर झूठ बोलता है फिर चाहे समाज में उस सम्मान मिले या न मिले.....लोग उसपर बिलकुल भी यकीन न करें या फिर, उसे अपने पेशे में भी इस झूठ बोलने की आदत का नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े. शिव खेर जी के मुताबिक, जो इंसान झूठ बोलता है, वह चोरी भी कर सकता है. इसलिए हमें अपने दैनिक जीवन में सच्चाई और ईमानदारीपूर्वक विचार-व्यवहार को बढ़ावा देना चाहिए.

सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो के शुरू में हमें स्विटजरलैंड की एक परामर्श लेने वाली ग्राहक कंपनी का उदाहरण दे रहे हैं. यह कंपनी भारत में साझेदारी में अपना कारोबार करती है. इस कंपनी के सीईओ ने शिव खेड़ा जी को टेलीफोन करके अपनी कंपनी के सेल्समेन को ‘सेल्स-ट्रेनिंग’ देने का अनुरोध किया ताकि कंपनी की सेल्स बढ़ सकें. शिव खेड़ा जी ने उस कंपनी के सीईओ से 2 दिन का समय मांगा ताकि वे सेल्समेन के काम करने के तौर-तरीकों की जानकारी हासिल कर सकें. ठीक 2 दिन के बाद शिव खेड़ा जी ने उस कंपनी के सीईओ से कहा कि, आपकी कंपनी के सेल्समेन को सेल्स-ट्रेनिंग की नहीं बल्कि बेसिक ट्रेनिंग की जरूरत है. इन सेल्समेन को शिष्टाचार, सभ्यता और ईमानदारी की ट्रेनिंग की जरूरत है. सीईओ ने पूछा, ‘वह क्यों?’ तब शिव खेड़ा जी ने जवाब दिया कि, बहुत बार आपके सेल्समेन की संबद्ध ग्राहकों के साथ पूर्व-निश्चित अपॉइंटमेंट्स होती हैं. ये लोग लेट हो जाते हैं और फ़ोन भी नहीं करते. ये लोग अपना काम सच्चाई और ईमानदारी से नहीं करते हैं जैसेकि, अगर ये लोग अपने क्लाइंट के पास देर से भी पहुंचें तो कभी उनसे देर होने के लिए माफ़ी नहीं मांगते हैं. न तो ये लोग अपने क्लाइंट्स को देर से पहुंचने की पूर्व-सूचना फ़ोन पर देते हैं और अगर कभी फ़ोन कर भी दें तो ट्रैफिक में फंसे होने का बहाना बना देते हैं. शिव खेड़ा जी आगे कहते हैं कि, माना ट्रैफिक जाम आजकल विश्व स्तर पर एक गंभीर मुद्दा बन चुका है और सभी लोग इस समस्या से परेशान हैं लेकिन, इनमें से अधिकतर सेल्समेन अपने क्लाइंट से मिलने के पूर्व-निर्धारित समय से केवल 2 मिनट पहले ही उनसे मिलने के लिए अपनी कंपनी से निकलते हैं. इन सेल्समेन के अंदर इतनी सच्चाई, ईमानदारी और हौसला भी नहीं है कि वे अपने देर से पहुंचने के लिए माफ़ी मांग लें और कह दें कि उन्हें निकलने में देरी हो गई थी.

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इस मोटिवेशनल वीडियो में शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि सिर्फ पहला झूठ बोलना ही मुश्किल होता है. उसके बाद दूसरा, तीसरा और चौथा झूठ बोलना लगातार आसान होता जाता है और आख़िरकार ये छोटे-छोटे झूठ बोलने वाला व्यक्ति एक झूठा और बेईमान व्यक्ति बन जाता है और बात-बात पर आदतन झूठ बोलने लगता है. अगर किसी व्यापारिक रिश्ते की शुरुआत ही झूठ से हो तो वह रिश्ता या कारोबार कब तक चल सकता है?  

सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें इस वीडियो में आगे समझ रहे हैं कि जो लोग झूठ बोलते हैं, अक्सर वे चोरी भी करते हैं. झूठ बोलने वाले लोग अपनी सफाई यह कहकर देते हैं कि वे तो सिर्फ छोटे-छोटे झूठ ही बोलते हैं और बड़ी चीज़ या गंभीर मसला होगा तो सच बोलेंगे लेकिन उन्हें झूठ बोलने की इतनी आदत हो जाती है कि समय आने पर ऐसे लोग बड़ा झूठ भी बोलते हैं. दरअसल, ऐसे लोगों को झूठ बोलने का अभ्यास हो जाता है. शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि, ‘अभ्यास से निपुणता नहीं आती है, अभ्यास से वही स्थाई हो जाता है जिस चीज़ का हम अभ्यास करते हैं.’

अब शिव खेड़ा जी हमें मुंबई के ललित होटल में ठहरने के अपने व्यक्तिगत उदाहरण से सच्चाई और ईमानदारी के महत्व के बारे में समझा रहे हैं. वे कह रहे हैं कि, उनके होटल कक्ष में उनके बिस्तर के साथ एक छोटी मेज़ पर एक छोटी-सी डिजिटल घड़ी रखी थी जिसके साथ एक बड़ा-सा साइनबोर्ड रखा था और उस साइनबोर्ड पर लिखा था कि, ‘यह  घड़ी होटल की संपत्ति है.’ शिव खेड़ा जी ने सोचा कि आखिर होटल वालों ने यह साइनबोर्ड क्यों लगाया है? आखिर होटल वाले ऐसा लिखने के लिए क्यों मजबूर हुए?.....क्या उस होटल कक्ष में ठहरने वाले लोगों को नहीं पता कि यह घड़ी होटल की संपत्ति है? लोग क्यों गलती से वह आइटम या सामान अपने साथ ले जायें जो उनका है नहीं? क्या यह चोरी नहीं है? जो व्यक्ति किसी फाइव स्टार होटल में एक रात ठहरने का 15 हजार रुपये किराया दे सकता है क्या वह गरीब है? ऐसा इंसान जो अरबपति है और होटल खरीद सकता है क्या उसे गलती से होटल का छोटा-मोटा सामान अपने साथ लेकर जाना चाहिए? लोग अपने साथ होटल के तौलिये, चादर, चम्मच, शैम्पू, क्रीम या फिर अन्य छोटा-मोटा सामान ले जाते हैं और फिर अपने बच्चों को बड़ी शान से वे होटल आइटम्स दिखा कर कहते हैं कि वे फलां नाम के शानदार होटल में ठहरे थे.....अरे ऐसे लोगों को तो जेल में होना चाहिए.

इस वीडियो में शिव खेड़ा जी हमें आगे कह रहे हैं कि, 19 अप्रैल, 2013 को पूरे विश्व में चर्चित एक रिपोर्ट के मुताबिक, होटल का सामान चोरी करने में भारतीय पर्यटक (टूरिस्ट) पूरी दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं. इसमें कुछ भी गर्व करने लायक नहीं है. हमें होटल में ठहरने के दौरान भी ईमानदारी से व्यवहार करना चाहिए ताकि हमारी बेईमानी और चोर करने की वजह से हमारे देश की गरिमा भी मिट्टी में न मिल जाए.

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