फैमिली थेरेपिस्ट बनकर मजबूत बनाएं फैमिली के आपसी संबंध

भारत में सदियों से जॉइंट फैमिली सिस्टम अर्थात संयुक्त परिवार व्यवस्था रहा है लेकिन आजादी मिलने के बाद से जब लोग अपनी हायर एजुकेशन और रोज़गार के बेहतरीन अवसरों की तलाश में अपने गांव और कस्बे छोड़कर बड़े शहरों का रुख करने लगे तो हमारे इस सदियों से चले आ रहे जॉइंट फैमिली सिस्टम में भी धीरे-धीरे बदलाव आने लगा और शहरों में न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम अर्थात एकल परिवार व्यवस्था का चलन लगातार बढ़ता ही गया. हमारे देश में लगातार बढ़ने वाले न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम के कई महत्वपूर्ण कारण हैं जैसे शहरों में छोटे मकान उपलब्ध होना, इनकम के सीमित साधन और कम आयु में ही हायर एजुकेशन और अच्छे रोज़गार के अवसर हासिल करने के लिए बच्चों का अपने पेरेंट्स से अलग किसी अन्य शहर में जाकर किसी हॉस्टल या पीजी में रहना. खैर, फैमिली चाहे जॉइंट हो या न्यूक्लियर, अक्सर हम अपने घर-परिवारों में कई छोटे-बड़े लड़ाई-झगड़ों, स्ट्रेस, डिप्रेशन और रिलेशनशिप ब्रेक-अप्स जैसी प्रॉब्लम्स और चुनौतियों का सामना करते हैं.

दुनिया-भर में पहले साइकोलॉजी और काउन्सलिंग की एक ब्रांच के तौर पर फैमिली थेरेपी या फैमिली काउन्सलिंग को शामिल किया जाता था. लेकिन 1950 के दशक से धीरे-धीरे फैमिली थेरेपी/ फैमिली काउन्सलिंग एक स्पेशलाइज्ड फील्ड के तौर पर उभरने लगी और आजकल फैमिली काउन्सलिंग/ थेरेपी का अपना स्पेशल वर्किंग एरिया है जिसके सेंटर में सिंगल फैमिली यूनिट आती है अर्थात किसी परिवार के सामने आने वाली हरेक किस्म की प्रॉब्लम्स और चुनौतियों को सॉल्व करने में फैमिली थेरेपी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है. आपको यह जानकर भी ख़ुशी होगी कि भारत में अब फैमिली काउन्सलिंग की सुविधा भी एक क्लिक पर उपलब्ध है.

फैमिली थेरेपिस्ट का परिचय

हमारे घर-परिवार में अक्सर कई छोटे-बड़े झगड़े और मन-मुटाव होते ही रहते हैं. यह एक सामान्य-सी बात है लेकिन बहुत बार इन झगड़ों और मन-मुटावों की वजह से कई घर-परिवार बिखर जाते हैं. ऐसे में, हमें एक काबिल फैमिली थेरेपिस्ट की जरूरत पड़ती है. दरअसल, ये पेशेवर ट्रेंड और क्वालिफाइड स्पेशलिस्ट्स होते हैं जो विभिन्न परिवारों के अनेक किस्म के प्रॉब्लम-रिलेटेड मैटर्स को काउन्सलिंग के जरिये सॉल्व करते हैं ताकि इन पेशेवरों के क्लाइंट्स के परिवारों में सुकून और शांति कायम हो सके. इसी तरह, ये पेशेवर किसी भी फैमिली के विभिन्न मेंबर्स के बीच अच्छे कम्युनिकेशन्स के माध्यम से आपसी समझ को बढ़ावा देते हैं ताकि सभी फैमिली मेंबर्स एक-दूसरे के साथ पूरा सहयोग करें. ये पेशेवर कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी और गोल ओरिएंटेड एप्रोच अपनाने के साथ विभिन्न टूल्स और टेक्निक्स का इस्तेमाल करके हमारे परिवार की विभिन्न इमोशनल, बिहेवियरल, साइकोलॉजिकल, मन-मुटाव, लड़ाई-झगड़ों और इकनोमिक कंडीशन से संबंधित सभी प्रॉब्लम्स को समुचित तरीके से सॉल्व करने का प्रयास करते हैं. फैमिली में हुई सडन डेथ, क्रोनिक इलनेस, एक्सीडेंट, ट्रॉमा और शॉक से किसी फैमिली के मेंबर्स को अच्छी तरह निपटने में ये पेशेवर अपना पूरा सहयोग देते हैं.

फैमिली थेरेपिस्ट के पेशे के लिए जरुरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन्स और एलिजिबिलिटी

अब हमारे मन में यह प्रश्न उठता है कि एक फैमिली थेरेपिस्ट का करियर शुरू करने के लिए स्टूडेंट्स के लिए कौन-सी डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना अनिवार्य होता है?.....तो हमारे देश के कई प्रमुख कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स स्टूडेंट्स को काउन्सलिंग, साइकोलॉजी और फैमिली थेरेपी से संबंधित विभिन्न कोर्सेज करवाते हैं. इस पेशे के लिए कैंडिडेट ने किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी या काउन्सलिंग की संबद्ध फील्ड में बैचलर डिग्री हासिल करने के बाद मास्टर डिग्री जरुर हासिल की हो. ये पेशेवर अपने क्लाइंट्स के परिवार को उनकी सभी तरह की प्रॉब्लम्स को मूल रूप से समझने और फिर उन प्रॉब्लम्स के प्रैक्टिकल सॉल्यूशन्स तलाश करने में पूरी सहायता करते हैं.

भारत में काउंसलिंग में करियर: एक बेहतरीन ऑप्शन

फैमिली थेरेपिस्ट इन इंस्टीट्यूशन्स से कर सकते हैं एजुकेशनल कोर्सेज

हमारे देश के कई कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स काउन्सलिंग और साइकोलॉजी से संबंधित विभिन्न डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज करवाते हैं. नीचे भारत के प्रमुख इंस्टीट्यूशन्स की एक लिस्ट पेश है:

  • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज, मुंबई
  • गोवा यूनिवर्सिटी, गोवा
  • महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक
  • महात्मा ज्योति राव फूले यूनिवर्सिटी, जयपुर
  • कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र
  • SGT यूनिवर्सिटी, गुड़गांव
  • अवधेश प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश
  • गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ एजुकेशनल साइकोलॉजी एंड गाइडेंस, जबलपुर

फैमिली थेरेपिस्ट के लिए जरुरी हैं ये स्किल्स

हरेक काम और पेशे में कामयाबी हासिल करने के लिए कुछ स्किल्स जरुरी होते हैं और फैमिली थेरेपिस्ट का पेशा भी इस फैक्ट का अपवाद नहीं है. इस पेशे में कामयाब होने के लिए इन पेशेवरों के पास ये स्किल्स जरुर होने चाहिए:

  • बिलिंगुअल और मल्टी-लिंगुअल स्किल से मिलता है इस पेशे में बहुत फायदा.
  • अच्छे कम्युनिकेशन स्किल के साथ-साथ बातचीत करने का तरीका हो प्रभावी.
  • एक्टिव लिसनिंग एबिलिटी, मल्टी-टास्किंग और क्रिटिकल थिंकिंग हैं बहुत जरुरी.
  • पेशेंट को लेकर सेंसिटिव, इम्पार्शल और पेशेंस वाला रवैया भी है बहुत महत्वपूर्ण.
  • छोटे, आसान लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने में हों एक्सपर्ट.
  • प्रॉब्लम सॉल्विंग एटीट्यूड और मैनेजमेंट स्किल्स.
  • फैमिली और होम एनवायरनमेंट में लोगों के बिहेवियर को समझने में हों कुशल.
  • रिलेशनशिप प्रॉब्लम्स को समझकर सॉल्व करने में हों सक्षम.
  • डाइवोर्स, डेथ, एक्सीडेंट, बीमारी या इकनोमिक मैटर्स में अपने क्लाइंट्स को उपयोगी गाइडेंस दें.
  • किसी फैमिली में मौजूद डिस्प्यूट्स और साइकोलॉजिकल इश्यूज़ से निपटने में हों एक्सपर्ट.

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भारत में फैमिली थेरेपिस्ट्स के सामने आने वाले प्रमुख इश्यूज़ या मुद्दे

हमारे देश में फैमिली थेरेपिस्ट्स को अपने क्लाइंट्स के प्रॉपर्टी या रिलेशनशिप से संबंधित कई इश्यूज़ को हैंडल करना होता है जिनमें से कुछ प्रमुख फैमिली इश्यूज़ निम्नलिखित हैं:

  • घरेलू हिंसा – मारपीट और गाली-गलौच
  • बच्चों और टीनेजर्स के व्यवहार से संबंधित प्रॉब्लम्स
  • किसी फैमिली मेंबर या मेंबर्स का प्रॉब्लमेटिक बिहेवियर
  • स्ट्रेस, डिप्रेशन और चिंता
  • फैमिली डिस्प्यूट
  • फैमिली प्रॉपर्टी डिस्प्यूट
  • मेरिटल कनफ्लिक्ट्स
  • फैमिली से संबंधित अन्य किस्म की शिकायतें
  • किसी भी किस्म की नशा संबंधी प्रॉब्लम
  • मनोरोग और इमोशनल इश्यूज़

भारत में फैमिली थेरेपिस्ट को मिलने वाला सैलरी पैकेज

हमारे देश में फैमिली थेरेपिस्ट का करियर काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये साइकोलोजिस्ट्स फैमिलीज़ के विभिन्न किस्म के डिस्प्यूट्स और प्रॉब्लम्स सॉल्व करते हैं. इस फील्ड में शुरू में किसी फ्रेश कैंडिडेट को एवरेज 3 लाख रुपये सालाना मिलते हैं और कुछ वर्षों के अनुभव के बाद ये पेशेवर एवरेज 5-7 लाख रुपये सालाना कमाते हैं. इस फील्ड में अपना क्लिनिक खोलने वाले पेशेवरों अर्थात प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स की कमाई की अधिकतम सीमा नहीं होती है. इन पेशेवरों के टैलेंट और एजुकेशनल क्वालिफिकेशन का इन्हें मिलने वाले सैलरी पैकेज पर सीधा असर पड़ता है.

करियर में कामयाबी के लिए ग्रेजुएट्स जरुर सीखें ये स्किल्स

अगर भारत में फैमिली थेरेपी और फैमिली थेरेपिस्ट के करियर की भावी संभावनाओं पर हम विचार करें तो काउन्सलिंग एक्सपर्ट्स का ऐसा अनुमान है कि लगातार बढ़ते हुए स्ट्रेस, डिप्रेशन और पारिवारिक मूल्यों के ह्रास के कारण आने वाले वर्षों में इस फील्ड का महत्व बढ़ेगा और फैमिली थेरेपिस्ट पेशेवरों के लिए भी जॉब के अवसर लगभग 25 फीसदी तक बढ़ जायेंगे. देश-दुनिया में इंटरनेट और डिजिटल प्रभाव के कारण ऑनलाइन काउन्सलिंग की मांग और अवसरों में भी अच्छा-खासा इजाफा होगा. इसलिए आजकल फैमिली थेरेपिस्ट किसी हॉस्पिटल, रेहेब्लीटेशन सेंटर, NGO या परिवार और समाज कल्याण से जुड़े विभिन्न सरकारी संगठन में जॉब करने के अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर सकते हैं.

जॉब, इंटरव्यू, करियर, कॉलेज, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, एकेडेमिक और पेशेवर कोर्सेज के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने और लेटेस्ट आर्टिकल पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर विजिट कर सकते हैं.

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