भारत में आर्कियोलॉजिस्ट बनकर रखें नेशनल हेरिटेज साइट्स को सुरक्षित

‘आर्कियोलॉजी’ में देश-दुनिया में खुदाई के बाद मिले पुराने और बहुत पुराने अवशेषों, खंडरों और अन्य सामग्री के माध्यम से अतीत के मानव जीवन के साथ पुरानी/ बहुत पुरानी मानव सभ्यताओं और संस्कृति का अध्ययन किया जाता है ताकि मानव सभ्यता के विकास क्रम को आधुनिक संदर्भ से समझा जा सके. आर्कियोलॉजी में एक्सपर्ट पेशेवर आर्कियोलॉजिस्ट कहलाते हैं. सरल शब्दों में यह मानव इतिहास का अध्ययन है.

आर्कियोलॉजिस्ट के लिए जरुरी  एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

हमारे देश में आर्कियोलॉजी में ग्रेजुएशन डिग्री कोर्स करने के लिए स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशनल बोर्ड से किसी भी स्ट्रीम में कम से कम 45 – 50% मार्क्स के साथ 12वीं पास की हो. इसी तरह आर्कियोलॉजी में पोस्टग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त कॉलेज/ यूनिवर्सिटी से कम से कम 50% मार्क्स के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो. कुछ यूनिवर्सिटीज़ एंट्रेंस एग्जाम लेकर पोस्टग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन देती हैं.

भारत में आर्कियोलॉजी से संबंधित प्रमुख एजुकेशनल डिग्री/ डिप्लोमा कोर्सेज निम्नलिखित हैं:

आपके ये शौक बन सकते हैं बेहतरीन करियर ऑप्शन जो देंगे बढ़िया कमाई

भारत में आर्कियोलॉजी से संबंधित कोर्सेज करवाने वाले प्रमुख इंस्टीट्यूशन्स

हमारे देश के तकरीबन सभी कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ और प्रमुख एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स आर्कियोलॉजी से संबंधित विभिन्न एजुकेशनल डिग्री/ डिप्लोमा कोर्सेज करवाते हैं. भारत के कुछ प्रमुख इंस्टीट्यूशन्स की लिस्ट निम्नलिखित है:

ग्रेजुएशन के बाद कुछ लोकप्रिय करियर ऑप्शंस

भारत में आर्कियोलॉजिस्ट के लिए उपलब्ध हैं ये करियर ऑप्शन्स/ जॉब प्रोफाइल्स

यहां आपके लिए आर्कियोलॉजिस्ट के पेशे से संबंधित प्रमुख करियर ऑप्शन्स/ जॉब प्रोफाइल्स का विवरण पेश हैं:

ये पेशेवरअपने  म्यूजियम और गैलरी के रखरखाव के साथ समय-समय पर एग्ज़ीबिशन्स की व्यवस्था करते हैं.

ये पेशेवर प्राचीन और अतिप्राचीन काल के दस्तावेजों के अध्ययन के साथ उन्हें सुरक्षित रखने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं.

ये पेशेवर हमारे देश की प्राचीन शहरी सभ्यताओं का अध्ययन और रिसर्च कार्य करते हैं.

ये पेशेवर अति प्राचीन काल के अवशेषों, स्मारकों और अन्य सामग्री का अध्ययन और रिसर्च संबंधी विभिन्न कार्य करते हैं.

समुद्र और पानी में पाये जाने वाले शिप्स के अवशेषों, शिलाओं और किसी भी प्रकार की संरचना के अध्ययन और रिसर्च का काम इन पेशेवरों के जिम्मे होता है. इसी तरह, समुद्र के किनारे बसी प्राचीन सभ्यताओं के बारे में भी ये पेशेवर रिसर्च करते हैं.

प्राचीन काल की सभ्यताओं और समाजों के एनवायरनमेंट पर पड़ने वाले असर का अध्ययन ये पेशेवर करते हैं.

देश के विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ में आर्कियोलॉजी विषय पढ़ाने और संबंधित रिसर्च कार्य करने का जिम्मा देश के विद्वान लेक्चरर्स और प्रोफेसर्स का है.

ये पेशेवर नष्ट हो चुके अवशेषों, मूर्तियों और अन्य सामग्री को पहले जैसा बनाने के लिए अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग करते हैं.

ये पेशेवर ज्ञानी मानव या होमोसेपियंस के पृथ्वी पर आने से पहले, यहां मौजूद विभिन्न पशु-पक्षियों और वनस्पति जगत का अध्ययन करते हैं.

ये पेशेवर पुराने समय की लिखावट का अध्ययन और विश्लेषण करते हैं ताकि तत्कालीन देश-काल की सटीक जानकारी मिल सके.

ये पेशेवर खुदाई के बाद मिले पुराने अवशेषों और स्थलों से मिट्टी और चट्टानों के सैंपल्स का अध्ययन और रिसर्च वर्क करते हैं.

ये पेशेवर देश के प्रसिद्ध लेकिन प्राचीन युद्ध के मैदानों में अपना अध्ययन और रिसर्च कार्य करते हैं.

ये पेशेवर अति प्राचीन समय के पशु-पक्षियों और मनुष्य के खान-पान, कृषि के विकास आदि का अध्ययन करते हैं.

ये पेशेवर आर्कियोलॉजी में इंजीनियरिंग प्रिंसिपल्स को अप्लाई करके अपना अध्ययन और रिसर्च करते हैं.

भारत में आर्कियोलॉजिस्ट के लिए प्रमुख जॉब प्रोवाइडर्स

भारत में आर्कियोलॉजिस्ट्स निम्नलिखित संस्थानों में जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं:

आर्कियोलॉजिस्ट का सैलरी पैकेज

हमारे देश में आर्कियोलॉजिस्ट्स को काफी आकर्षक सैलरी पैकेज मिलता है यद्यपि अन्य सभी पेशेवरों की तरह ही इन पेशेवरों के सैलरी पैकेज पर भी इनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, वर्क एक्सपीरियंस, पोस्ट और टैलेंट का असर तो पड़ता ही है. हमारे देश में आमतौर पर किसी म्यूजियम/ गैलरी ऑफिसर या क्यूरेटर, डॉक्यूमेंट स्पेशलिस्ट को 5 लाख रुपये सालाना सैलरी मिलती है और असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट को 6 लाख रुपये सालाना सैलरी मिलती है. किसी अर्कारी विभाग में सीनियर आर्कियोलॉजिस्ट को एवरेज 10 लाख रुपये सालाना का सैलरी पैकेज मिलता है. सीनियर पालिओंटोलॉजिस्ट को भी एवरेज 10 लाख रुपये का सालाना सैलरी पैकेज मिलता है. इसी तरह, हमारे देश में विभिन्न लेक्चरर्स और प्रोफेसर्स को भी आमतौर पर न्यूनतम 6 लाख रुपये से 15 लाख रुपये अधिकतम तक का सैलरी पैकेज मिलता है.

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