मौसम विशेषज्ञ बनकर दें मौसम की सटीक पूर्व-सूचना

हमारे देश में मिनिस्ट्री ऑफ़ अर्थ साइंसेज, भारत सरकार का भारत मौसम विज्ञान विभाग नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर देश और दुनिया के मौसम और जलवायु अर्थात क्लाइमेट की सभी गतिविधियों की निगरानी करके मौसम और क्लाइमेट में आने वाले सभी बदलावों के बारे में सटीक पूर्व-सूचना और चेतावनी जारी करता है. दरअसल मौसम विज्ञान या मेटीरिओलॉजी अपने देश सहित पृथ्वी के एटमोस्फियर एलेमेंट्स की साइंटिफिक स्टडी है जिसमें किसी स्थान, देश या विश्व के वेदर और क्लाइमेटिक कंडीशन्स का विशेष तौर पर अध्ययन किया जाता है ताकि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के बारे में पहले से ही सटीक पूर्व-सूचना जारी की जा सके. अब, हम सब यह तो अच्छी तरह से जानते हैं कि मौसम का हमारे जीवन के हरेक क्षेत्र पर सीधा असर पड़ता है जैसेकि, आंधी और तूफान आने के टाइम पर किसान अपने खेतों में बीज नहीं बो सकते हैं. इसी तरह, मछुआरे या फिशरमेन समुद्र में जाल डालकर तूफान के समय मछली नहीं पकड़ सकते हैं. ये दोनों आम लोगों की जिंदगी के ऐसे उदाहरण हैं जिनसे हमें अपने रोजमर्रा के जीवन पर मौसम का सीधा असर साफ़ तौर पर दिखाई देता है. आजकल ग्लोबल वार्मिंग, सुनामी, ओजोन लेयर जैसे ग्लोबल इश्यूज़ पर भी हमारे क्लाइमेट और मौसम का सीधा असर देखा जा सकता है. भारत सहित दुनिया के तकरीबन सभी विकसित देशों ने मौसम विज्ञान का अध्ययन करने और सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए अपने स्पेस एरिया में सैटेलाइट्स को लॉन्च किया हुआ है. आप इसी से मानव जीवन में मौसम का महत्व और असर समझ सकते हैं.

मौसम विशेषज्ञ या मेटीरिओलॉजिस्ट

जो पेशेवर मौसम विज्ञान के विशेषज्ञ या एक्सपर्ट्स होते हैं उन्हें मेटीरिओलॉजिस्ट, एटमोस्फियरिक साइंटिस्ट, मौसम वैज्ञानिक या मौसम विशेषज्ञ के नाम से जाना जाता है. ये पेशेवर प्रमुख रूप से अपने देश या दुनिया के अन्य देशों के क्लाइमेट और मौसम के बारे में रिसर्च, स्टडी और एनालिसिस करके मौसम की सटीक पूर्व-सूचना जारी करते हैं ताकि मौसम और क्लाइमेट में आये किसी खतरनाक बदलाव की वजह से आने वाले आंधी, तूफान, बर्फबारी, ओलावृष्टि (हेलस्ट्रौम), साइक्लोन, बाढ़ों और गर्म लू आदि से लोगों के जीवन और उनकी धन-संपत्ति (मकान-दुकान), फसलों आदि की रक्षा की जा सके.

भारत में मौसम विज्ञान की फील्ड में अंडरग्रेजुएट कोर्स करने के लिए एलिजिबिलिटी

स्टूडेंट ने किसी एजुकेशनल बोर्ड से साइंस स्ट्रीम में कम से कम 50% मार्क्स के साथ अपनी 12वीं क्लास पास की हो. इसी तरह, पोस्टग्रेजुएट लेवल के कोर्स में एडमिशन लेने के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री अनिवार्य है और अपनी पोस्टग्रेजुएशन सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद स्टूडेंट्स हायर एजुकेशनल क्वालिफिकेशन्स जैसेकि, एमफिल और पीएचडी की डिग्री हासिल करने के लिए अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं.

भारत में मौसम विज्ञान से संबंधित प्रमुख कोर्स स्पेशलाइजेशन्स

अन्य सभी एजुकेशनल फील्ड की तरह ही इस फील्ड में भी स्टूडेंट्स अपनी 12वीं क्लास पास करने के बाद अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, डॉक्टोरल लेवल के डिग्री कोर्सेज के साथ डिप्लोमा कोर्स भी कर सकते हैं. स्वाभाविक तौर पर कोई टॉप लेवल करियर ज्वाइन करने के लिए स्टूडेंट्स या कैंडिडेट्स के पास हायर एजुकेशनल क्वालिफिकेशन जैसेकि पोस्टग्रेजुएशन या पीएचडी की डिग्री होनी चाहिए. हमारे देश में  मौसम विज्ञान की फील्ड में स्टूडेंट्स निम्नलिखित विषयों में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं:

  • एग्रीकल्चरल मेटीरिओलॉजी
  • एविएशन मेटीरिओलॉजी
  • क्लाइमेटोलॉजी
  • एरोलॉजी
  • एरोनोमी
  • एप्लाइड मेटीरिओलॉजी
  • डायनामिक मेटीरिओलॉजी
  • सिनोप्टिक मेटीरिओलॉजी
  • एटमोस्फियरिक साइंस एंड एस्ट्रोफिजिक्स
  • अर्थ एंड एटमोस्फियरिक साइंस
  • एटमोस्फियरिक साइंस
  • सैटेलाइट मेटीरिओलॉजी एंड वेदर इन्फॉर्मेटिक्स

भारत में मौसम विज्ञान से संबंधित एजुकेशनल कोर्सेज करवाने वाले प्रमुख इंस्टीट्यूशंस

भारत में आप मौसम विज्ञान से संबंधित विभिन्न अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज इन प्रमुख एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस से कर सकते हैं:

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस, बैंगलोर
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटीरिओलॉजी, पुणे
  • शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर
  • आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्नम
  • सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी, पुणे
  • एविएशन मेटीरिओलॉजी साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च काउंसिल, कोयम्बटूर
  • पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला
  • MS यूनिवर्सिटी, बड़ोदा

भारत में मेटीरिओलॉजिस्ट्स का जॉब प्रोफाइल

हमारे देश में ये पेशेवर विभिन्न क्षेत्रों के मौसम की स्थिति को एनालाइज करके आने वाले दिनों में मौसम की कैसा रहेगा? .....इसकी पूर्वसूचना जारी करते हैं. इन पेशेवरों को एटमोस्फियरिक साइंटिस्ट्स के तौर पर जाना जाता है. आजकल इंटरनेट, डिजिटलीकरण और सैटेलाइट की मदद से ये पेशेवर कुछ दिन पहले ही मौसम में आने वाले खतरनाक बदलावों जैसेकि, आंधी, तूफान, साइक्लोन, लू या तेज़ गर्म हवाएं चलने की सटीक पूर्वसूचना जारी कर देते हैं ताकि लोगों के जान-माल की समय रहते रक्षा की जा सके.  हमारे देश में मेटीरिओलॉजिस्ट्स के काम के मुताबिक निम्नलिखित प्रमुख जॉब प्रोफाइल्स हैं:

  • मेटीरिओलॉजिस्ट्स – ये पेशेवर किसी भी क्षेत्र, राज्य या देश के क्लाइमेट और वेदर कंडीशन्स का अध्ययन और समीक्षा करके आने वाले मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाते हैं ताकि किसी तूफान, आंधी, साइक्लोन या बाढ़ आदि आने से पहले ही चेतावनी जारी करके प्रभावित क्षेत्र के लोगों की जान और माल को समय रहते बचाया जा सके.
  • रिसर्च मेटीरिओलॉजिस्ट्स – ये पेशेवर क्लाइमेट और वेदर पैटर्न्स का अध्ययन करके क्लाइमेट और वेदर कंडीशन्स से संबंधित डाटा को इन्टरप्रेट करते हैं ताकि किसानों, कारोबारियों, ट्रेवलर्स, फिशरमेन्स, बोटमेन्स, नेविगेटर्स और एविएटर्स आदि को मौसम की मार से बचाया जा सके. ये पेशेवर अपने रिसर्च वर्क में ग्रीन हाउस इफेक्ट्स की भी जांच करते हैं.  
  • फिजिकल मेटीरिओलॉजिस्ट्स – ये पेशेवर एटमोस्फियर के फिजिकल नेचर अर्थात लैंड एरिया स्ट्रक्चर, केमिकल कम्पोज़ीशन ऑफ़ लैंड, एयर और टेम्परेचर आदि के इफेक्ट्स को स्टडी करते हैं तथा एनवायरनमेंट पोल्यूशन के निपटने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
  • इंडस्ट्रियल मेटीरिओलॉजिस्ट्स – जी हां! हमारे देश में ये पेशेवर आजकल इंडस्ट्रीज़ से संबंधित एनवायरनमेंटल पोल्यूशन को रोकने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.  

भारत में मेटीरिओलॉजिस्ट्स के लिए प्रमुख जॉब प्रोवाइडर्स

भारत में मौसम विज्ञान से संबंधित सभी प्रमुख सरकारी विभाग यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) के माध्यम से सूटेबल और हाइली क्वालिफाइड कैंडिडेट्स को रिक्रूट करते हैं. अगर आप भारत में मौसम विज्ञान से संबंधित किसी फील्ड में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो आप निम्नलिखित प्रमुख संस्थानों में अपने लिए किसी सूटेबल जॉब प्रोफाइल के लिए अप्लाई कर सकते हैं:

  • इंडिया मेटीरिओलॉजी डिपार्टमेंट
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटीरिओलॉजी
  • मेटीरिओलॉजिकल रिसर्च सेंटर्स
  • एग्रीकल्चरल प्लानिंग डिपार्टमेंट
  • डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी
  • इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च  
  • इंडियन एयरफोर्स
  • इंडियन नेवी 
  • मेटीरिओलॉजिकल टूल्स मैन्युफैक्चरिंग फर्म्स
  • स्पेस एप्लीकेशन सेंटर
  • नेशनल रिमोट सेनिंग एजेंसी
  • डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन
  • इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन
  • टीवी चेनल्स/ न्यूज़ चेनल्स/ न्यूज़ एजेंसीज़
  • स्पोर्ट्स फेडरेशन्स
  • एयरलाइन कंपनीज़
  • एनवायरनमेंट और वेदर कंडीशन्स से संबंधित फ़ील्ड्स में काम करने वाले NGOs.
  • स्काईमेट वेदर सर्विसेज

भारत में मौसम विज्ञान की फील्ड में एक्सपर्ट्स को मिलता है ये सैलरी पैकेज

हमारे देश में किसी मेटीरिओलॉजिस्ट को शुरू में 40 हजार – 50 हजार रुपये मासिक सैलरी मिलती है और कुछ वर्षों के वर्क एक्सपीरियंस के बाद ये पेशेवर 60 हजार रुपये का आकर्षक सैलरी पैकेज प्राप्त करते हैं. इस फील्ड में प्रोफेशनल्स के सैलरी पैकेज पर उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन्स के साथ ही वर्क एक्सपीरियंस और संबंधित संस्थान के सैलरी स्लैब्स का भी सीधा असर पड़ता है.

अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं और हरेक मौसम आपको अपनी तरफ आकर्षित करता है.....आप पहले से ही यह जानने में काफी रूचि रखते हैं कि आज बारिश होगी या आंधी आयेगी या फिर, गर्मी के दिनों में दिल्ली या अन्य किसी शहर का अधिकतम तापमान कितना रहेगा? आप आंधी, तूफान, बाढ़ और साइक्लोन से भी लोगों की जान और माल की रक्षा करना चाहते हैं.....तो फिर एक मौसम विशेषज्ञ या मेटीरिओलॉजिस्ट का करियर आपके लिए एक सूटेबल करियर ऑप्शन साबित हो सकता है.

जॉब, करियर, इंटरव्यू, एजुकेशनल कोर्सेज, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के बारे में लेटेस्ट अपडेट्स के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर नियमित तौर पर विजिट करते रहें.

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