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कक्षा 12वीं के बाद फाइनेंस तथा अकाउंटेंसी में करियर विकल्प

फाइनेंस और अकाउंटेंसी में करियर वाणिज्य छात्रों के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है. छात्र बिजनेस स्टडीज तथा वाणिज्य स्ट्रीम में अर्थशास्त्र के बारे में पढ़ते हैं. हालांकि, अकाउंटेंसी इस स्ट्रीम के मुख्य विषय में से एक है. तथा फाइनेंस और अकाउंटेंसी में करियर केवल वाणिज्य छात्रों के लिए ही सीमित नहीं है; इसे विज्ञान, आर्ट्स या ऑनर्स स्ट्रीम के छात्र भी कर सकते हैं, जिन्हें फाइनेंस और अकाउंटेंसी में रूचि हो.

छात्रों को अकाउंटेंसी और फाइनेंस में डिग्री लेने के लिए अपने मौलिक ज्ञान को विकसित करना अति आवश्यक है.

फाइनेंस और अकाउंटेंसी में करियर स्कोप:

अकाउंटेंसी और फाइनेंस में करियर वास्तव में प्राइवेट या पब्लिक सेक्टर दोनों में ही अकाउंटेंसी और फाइनेंस प्रोफेशनल तथा स्पेशलिस्ट की आवश्यकता होती है.

बीमा और अकाउंटेंसी फर्मों, निवेश बैंकिंग उद्योग, कराधान और कानून इत्यादि में अकाउंटेंसी और फाइनेंस प्रोफेशनल की मांग दिन प्रति दिन बढ़ रही है.

इस क्षेत्र में कई करियर विकल्प हैं जैसे कि:

  • चार्टर्ड एकाउंटेंट
  • फाइनेंशियल एनालिस्ट
  • Actuarial वैज्ञानिक
  • बैंकर
  • आयकर विशेषज्ञ
  • रिस्क एनालिस्ट
  • स्टॉक-ब्रोकर्स
  • अर्थशास्त्री और फ़ॉरकास्टिंग
  • ऑडिटर्स

आइए अब हम उन पाठ्यक्रमों को विस्तार में जाने जो अकाउंटेंसी और फाइनेंस में करियर बनाने में सहायक साबित होंगी-

1. चार्टर्ड अकाउंटेंसी:

चार्टर्ड अकाउंटेंसी 12वीं कक्षा के बाद अकाउंटेंसी और फाइनेंस में करियर बनाने के लिए सबसे बेहतर विकल्प में से एक है. यह एक ऐसा प्रोफेशनल कोर्स है जिसके लिए छात्रों को निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है. यह कोर्स चार्टर्ड एकाउंटेंट एक्ट 1949 के तहत चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) संस्थान द्वारा शुरू किया गया था. जो छात्र 12वीं कक्षा के बाद चार्टर्ड एकाउंटेंसी में करियर बनाना चाहते हैं, वे इस पाठ्यक्रम का स्तर, योग्यता और करियर स्कोप यहाँ समझ सकते हैं.

सीए फाउंडेशन कोर्स:

 

सीए कोर्स का पहला स्तर सीए फाउंडेशन कोर्स है तथा छात्र कक्षा 12वीं पास करने के बाद इस फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं. सीए सीपीटी की परीक्षा वर्ष में दो बार यानी जून और दिसंबर में होती है जोकि फाउंडेशन कोर्स में पंजीकृत छात्रों के लिए आयोजित की जाती है.

सीए इंटरमीडिएट:

सीपीटी कोर्से में क्वालीफाई होने के बाद छात्र सीए इंटरमीडिएट कोर्स कर सकते हैं. इसके अलावा, जिन छात्रों ने कम से कम 55% के साथ वाणिज्य में स्नातक किया है उन्हें सीपीटी परीक्षा नहीं देनी पड़ती है, यानी वे सीधे सीए आईपीसीसी में प्रवेश ले सकते हैं. आईपीसी कोर्स की परीक्षा वर्ष में दो बार यानि की मई और नवंबर में आयोजित की जाती है. सीए आईपीसी योग्य छात्र चार्टर्ड एकाउंटेंसी के अगले स्तर के लिए प्रवेश ले सकते हैं.

सीए फाइनल:

सीए की इंटरमीडिएट स्तर की परीक्षा में योग्यता प्राप्त करने वाले छात्र सीए फाइनल के पाठ्यक्रम में आगे बढ़ने के पात्र होते हैं. सीए फाइनल के पाठ्यक्रम की योग्यता के बाद, छात्रों को योग्य चार्टर्ड एकाउंटेंट माना जाता है और वे अब इस क्षेत्र में अपना सफल करियर बना सकते हैं.

योग्यता:

  • वे छात्र जिन्होंने स्टेट या नेशनल एजुकेशन बोर्ड से कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की शिक्षा प्राप्त की है.
  • छात्रों ने जून या दिसंबर सत्र के अनुसार अंतिम पंजीकरण तिथियों से पहले सीपीटी परीक्षा के लिए अपना पंजीकरण करवा लिया हो.

कास्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA):

इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट मैनेजमेंट एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई), जिसे पहले इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) के रूप में जाना जाता था, यह तीन स्तरों पर कास्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट का पाठ्यक्रम प्रदान करती है यानी सीएमए फाउंडेशन, सीएमए इंटरमीडिएट और सीएमए फाइनल कोर्स.

योग्य छात्रों को CMA कोर्स करने के लिए सबसे पहले सभी स्तरों को क्वालीफाई करना आवश्यक है:

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योग्यता:

वे छात्र जिन्होंने स्टेट या नेशनल एजुकेशन बोर्ड जोकि ICMAI से recognised हो, उससे कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की शिक्षा प्राप्त की हो.

बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com): 12वीं के बाद कॉमर्स में तीन साल का ग्रेजुएशन करना चाहते हैं तो बीकॉम एक अच्छा ऑप्शन है. इस डिग्री की मदद से आप अकाउंटिंग फाइनांस, ऑपरेशंस, टेक्सेशन और दूसरे कई फील्ड्स में अपना करियर बना सकते हैं. बीकॉम में स्टूडेट्स को गुड्स अकाउंटिंग, अकाउंट्स, प्रोफिट एंड लॉस और कंपनी कानून की जानकारी दी जाती है. बीकॉम एक तरह से आपके करियर का पहला स्टेप है.

योग्यता:

जिन छात्रों ने न्यूनतम क्वालीफाइंग अंकों के साथ किसी भी स्ट्रीम में अपनी कक्षा 12वीं की शिक्षा पूरी की है वह B.Com में एडमिशन लेने के योग्य होते हैं.<