भारत में होमियोपैथी की फील्ड में है करियर का शानदार स्कोप

भारत सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों में आजकल होमियोपैथी एक अति लोकप्रिय मेडिकल स्ट्रीम बन चुकी है और पूरे विश्व में करोड़ों लोग होमियोपैथी को आजकल अपनी मेडिसिन के तौर पर अपना रहे हैं. भारत में होमियोपैथी का महत्व महात्मा गांधी के इन शब्दों से समझा जा सकता है:

ट्रीटमेंट के किसी भी अन्य प्रकार की तुलना में होमियोपैथी विभिन्न रोगों के ज्यादा व्यापक प्रतिशत का ईलाज करती है और बेशक यह ज्यादा सुरक्षित होने के साथ-साथ काफ़ी किफायती है.

होमियोपैथी का परिचय

होमियोपैथी एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धि है जिसे वर्ष 1796 में ‘सैमुअल हैनमैन’ ने शुरू किया था. होमियोपैथी का मौलिक सिद्धांत "ईलाज की तरह" थ्योरी पर आधारित है, जिसमें यह दावा किया गया  है कि एक ऐसा एलिमेंट है जो किसी हेल्दी व्यक्ति में बीमारी के लक्षणों का कारण बनता है. इसलिए, बीमार लोगों को वैसे ही किस्म के लक्षणों से ठीक किया जा सकता है. होमियोपैथी की सबसे खास बात यह है कि यह दवाई किसी भी व्यक्ति के ईलाज के लिए उसके शरीर की प्राकृतिक प्रणाली को एक्टिव कर देती है.

होमियोपैथी: भारत में करियर स्कोप

बीते वर्षों में, होमियोपैथी मेडिसिन्स की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ी है जिसका श्रेय इस फील्ड में लगातार जारी रिसर्च कार्य को जाता है. इससे स्टूडेंट्स के लिए भी करियर के अवसरों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है.

भारत और विदेशों में इस फील्ड में जॉब्स के शानदार अवसर मौजूद हैं क्योंकि आजकल लोग ऐसी मेडिकल केयर चाहते हैं जिसके कोई साइड-इफेक्ट्स या दुष्प्रभाव नहीं हों. एक सुप्रशिक्षित और अनुभवी होमियोपैथिक प्रैक्टिशनर विभिन्न प्राइवेट और सरकारी होमियोपैथिक हॉस्पिटल्स में एक मेडिकल ऑफिसर के तौर पर भी काम कर सकता है.

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होमियोपैथी में डिग्री प्राप्त करने के बाद पेशेवर अपने क्लिनिक शुरू कर सकते हैं और अपनी लाइसेंस्ड होमियोपैथी मेडिकल शॉप्स भी खोल सकते हैं. होमियोपैथी डॉक्टर्स अपनी पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के बाद रिसर्च कार्य से जुड़े कॉलेजों में प्रोफेसर्स और टीचर्स के तौर पर भी काम कर सकते हैं. कोई बीएचएमएस अर्थात बैचलर ऑफ़ होमियोपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी डिग्री होल्डर, कुछ वर्षों के कार्य-अनुभव के बाद, अपनी फार्मेसी भी खोल सकता है.

इतने अधिक करियर ऑप्शन्स के साथ जो स्टूडेंट्स होमियोपैथी को एक करियर ऑप्शन के तौर पर चुनते हैं, उनके लिए आजकल ढेरों करियर ऑप्शन्स मौजूद हैं. 

होमियोपैथी: भारत में उपलब्ध हैं ये प्रमुख कोर्सेज

होमियोपैथी में करियर शुरू करने के लिए, स्टूडेंट्स को बायोलॉजी को एक अनिवार्य विषय के तौर पर लेने के साथ साइंस स्ट्रीम में अपनी 12 वीं क्लास पास करनी होती है. अपनी 12 वीं क्लास पास करने के बाद स्टूडेंट्स होमियोपैथिक मेडिसिन में ग्रेजुएट लेवल का प्रोग्राम अर्थात बैचलर ऑफ होमियोपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी या बीएचएमएस चुन सकते हैं. भारत की विभिन्न यूनिवर्सिटीज से एफिलिएटेड कई होमियोपैथी इंस्टीट्यूट्स यह प्रोग्राम ऑफर करते हैं. बीएचएमएस प्रोग्राम 5 वर्ष और 6 महीने की अवधि का कोर्स है जिसमें 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप भी शामिल है. बीएचएमएस कोर्स के दौरान, स्टूडेंट्स को होमियोपैथी मेडिसिन के प्रिंसिपल्स उनकी प्रैक्टिकल अप्रोच के साथ सिखाये जाते हैं.   

बैचलर ऑफ होमियोपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएचएमएस)

पोस्टग्रेजुएशन लेवल पर, कोई भी स्टूडेंट एमडी होमियोपैथी या डॉक्टर ऑफ मेडिसिन के तहत होमियोपैथी प्रोग्राम पढ़ सकता है. इस कोर्स की अवधि 3 साल है जिसमें 1 वर्ष की रेजिडेंशियल कैंपस ट्रेनिंग भी शामिल है. एमडी होम्योपैथी प्रोग्राम का फोकस सेमिनारों, ग्रुप डिस्कशन्स, क्लिनिकल मीटिंग्स और जरनल क्लब के माध्यम से इन-सर्विस ट्रेनिंग देने पर होता है. इस कोर्स की अवधि के दौरान, स्टूडेंट्स को एक थीसिस या डेजरटेशन अवश्य सबमिट करना होता है.

होमियोपैथी में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी होमियोपैथी)

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 भारत में इन टॉप एंट्रेंस एग्जाम्स को पास करने के बाद करें बीएचएमएस कोर्स

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लेवल्स पर बीएचएमएस में एडमिशन विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम्स के माध्यम से दिया जाता है. कुछ प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम्स निम्नलिखित हैं:  

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भारत के टॉप होमियोपैथी इंस्टीट्यूट्स

कई गवर्नमेंट से मान्यताप्राप्त कॉलेज अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लेवल पर होमियोपैथी में डिग्री कोर्सेज ऑफर करते हैं. कुछ ऐसे टॉप होमियोपैथी कॉलेज, जो क्वालिटी स्टडी फैसिलिटी, फैकल्टी और करिकुलम की गारंटी देते हैं, आपकी सहूलियत के लिए उन कॉलेजों की लिस्ट नीचे दी जा रही है:

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होमियोपैथी: भारत में होमियोपैथी की फील्ड में मिलने वाला सैलरी पैकेज

बीएचएमएस डिग्री होल्डर अपने करियर के शुरू के फेज में रु. 25000/- से रु. 30000/- प्रतिमाह तक कमा सकता है. लेकिन कार्य अनुभव बढ़ने के साथ-साथ ये पेशेवर रु. 50000/- से रु.60000/- प्रतिमाह तक कमा लेते हैं. अगर ये पेशेवर समाज में अपनी अच्छी प्रतिष्ठा बना लें तो ये अपना क्लिनिक शुरू कर सकते हैं और फिर, इनकी अधिकतम कमाई की कोई निश्चित सीमा नहीं रहती है. अगर आप मेडिसिन की इस फील्ड में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं और ट्रेडिशनल एमबीबीएस कोर्सेज के बेहतर विकल्प खोज रहे हैं तो आप इस वीडिओ में उपलब्ध सूचना पर विचार कर सकते हैं. ‘होमियोपैथी में करियर’ आपकी तलाश का शायद ऐसा उत्तर है जिसे आप खोज रहे हैं. 

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