जानिए लॉ में करियर बनाने के विशेष टिप्स यहां

देश-दुनिया में अब फौजदारी और दीवानी मामलों के साथ ही साइबर क्राइम्स से जुड़े मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं. इसी तरह, टैक्स और जीएसटी को लेकर भी साधारण लोगों को लीगल एक्सपर्ट्स की सेवाओं की जरूरत अक्सर पड़ती ही रहती है. बेशक, हमारे देश सहित पूरी दुनिया में लॉ की विभिन्न फ़ील्ड्स में जॉब या प्राइवेट प्रैक्टिस की संभावनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. ऐसे में, अगर आप भी भारत के ऐसे ही यंगस्टर्स में से एक हैं जो लॉ की किसी फील्ड में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को जरुर बड़े ध्यान से पढ़ें क्योंकि यहां हम आपके लिए लॉ की विभिन्न फ़ील्ड्स में करियर शुरू करने के लिए समुचित जानकारी पेश कर रहे हैं.

लॉ: आपके लिए बेहतरीन करियर ऑप्शन

लॉ एक ऐसा प्रोफेशन है जिसके लिए धैर्य और लॉजिकल स्किल्स आवश्यक होते हैं. लॉ में, सफलता चंद दिनों में ही नहीं मिल जाती है क्योंकि इसके लिए काम के प्रति पूरी लगन और एक सफल लॉयर बनने के लिए प्रतिबद्धता बहुत आवश्यक हैं. अगर कोई व्यक्ति अपने करियर की शुरुआत में किसी सीनियर लॉयर/ काउंसेल के अधीन ट्रेनिंग प्राप्त करे तो उसके लिए अपना लक्ष्य प्राप्त करना काफी आसान हो जाता है. फ़्लूएंट कम्युनिकेशन स्किल्स और सीमित समय के भीतर संबद्ध केस को सही तरीके से एनालाइज और समझने/ समझाने की काबिलियत लॉयर्स के लिए जरुरी शर्तें हैं. इसलिए, लॉ को एक करियर ऑप्शन के तौर पर चुनने से पहले हरेक व्यक्ति को इन प्वाइंट्स पर अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए.

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भारत में उपलब्ध लॉ कोर्सेज और एडमिशन के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

अब, जब आप एक लॉयर बनना चाहते हैं, तो आइये जानें कि लॉ में अपना करियर शुरू करने के लिए आप कौन-कौन से विभिन्न कोर्सेज कर सकते हैं?

लॉ में डिप्लोमा कोर्सेज

विभिन्न डिप्लोमा कोर्सेज की अवधि 1 वर्ष होती है और इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबिलिटी 12वीं क्लास पास या किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. लॉ में निम्नलिखित महत्वपूर्ण लॉ कोर्सेज किये जा सकते हैं:

स्टूडेंट्स और पेशेवरों के लिए ये हैं NPTEL के ऑनलाइन कोर्सेज

लॉ: बैचलर डिग्री कोर्सेज

बैचलर ऑफ़ लॉज़ (एलएलबी)

एलएलबी कोर्स करने के लिए 2 ऑप्शन्स उपलब्ध हैं. पहला ऑप्शन 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है और इस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. दूसरा ऑप्शन अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स के लिए 5 वर्ष की अवधि का इंटीग्रेटेड कोर्स है.

बैचलर ऑफ़ लॉज़ (एलएलबी) (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स)

यह एक 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है जिसके तहत 6 सेमेस्टर शामिल होते हैं और इस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है.

लॉ: मास्टर डिग्री कोर्सेज

मास्टर ऑफ़ लॉ (एलएलएम)

ये कोर्स 1 वर्ष या अधिक वर्षों की अवधि का हो सकता है जिसमें 4 या अधिक सेमेस्टर्स हो सकते हैं. इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, स्टूडेंट्स के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से कम से कम 50% मार्क्स के साथ एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए.

भारत में लॉ कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए प्रमुख एंट्रेंस टेस्ट्स

किस लॉ कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, स्टूडेंट्स को निम्नलिखित एंट्रेंस टेस्ट्स में से कोई एक टेस्ट पास करना होता है. ये टेस्ट्स राष्ट्रीय और राज्य के लेवल्स पर आयोजित किये जाते हैं.

एंट्रेंस एग्जाम का नाम

कंडक्टिंग ऑथोरिटी

सीएलएटी (क्लैट)

18 एनएलयूज के द्वारा रोटेशनल बेसिस पर आयोजित

एलएसएटी इंडिया

लॉ स्कूल एडमिशन काउंसिल (एलएसएसी)

एलएटी (लैट)

इलाहाबाद विश्वविद्यालय

जेएमआई लॉ एंट्रेंस एग्जाम

जामियामिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय

आईपीयू सीईटी

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआईपीयू)

आईएलआई कैट

इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट

डीयू एलएलबी एंट्रेंस एग्जाम

फैकल्टी ऑफ़ लॉ, दिल्ली विश्वविद्यालय

बीएचयू यूईटी लॉ

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

एआईएलईटी

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू), नई दिल्ली

एआईबीई

बार काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली

 

भारत के प्रमुख लॉ कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़

आपको अब तक विभिन्न लॉ कोर्सेज और इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए आवश्यक एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के बारे में काफी जानकारी मिल चुकी है. आईये अब हम भारत के टॉप लॉ कॉलेजों के निम्नलिखित नाम जानते हैं:

क्रिएटिव लोगों के लिए कुछ बेहतरीन जॉब ऑप्शन्स

लॉ: करियर प्रोस्पेक्टस

लॉ पेशेवर विभिन्न संगठनों में लीगल एडवाइजर के तौर पर भी काम कर सकता है, कॉलेजों में पढ़ा सकता है, एनजीओज के साथ काम कर सकता है और विभिन्न न्यूज़पेपर्स या टेलीविज़न चैनल्स में एक रिपोर्टर के तौर पर काम करना अन्य आकर्षक करियर ऑप्शन्स हैं.

लॉ ग्रेजुएट्स के लिए करियर के बेशुमार अवसर मौजूद हैं. लॉ में बैचलर डिग्री कोर्स करने के बाद, लॉ पेशेवर किसी कॉर्पोरेट फर्म में एक बिजनेस लॉयर के तौर पर काम कर सकता है या किसी कोर्ट में एक वकील के तौर पर भी प्रैक्टिस कर सकते हैं. कोई लॉ ग्रेजुएट विभिन्न लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित एंट्रेंस एग्जाम्स पास करने के बाद एक जज भी बन सकता है. कुछ वर्षों के बढ़िया कार्य अनुभव के बाद, लॉ ग्रेजुएट्स पब्लिक प्रॉसीक्यूटर, सोलिसिटर जनरल या विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों में भी काम कर सकते हैं. ये पेशेवर विभिन्न प्राइवेट और पब्लिक संगठनों के लिए एक लीगल एडवाइजर के तौर पर भी काम कर सकते हैं. लॉ ग्रेजुएट्स विभिन्न एकेडेमिक्स, टेलीविज़न चैनल्स और एनजीओज में भी टीचर्स और कंसलटेंट्स के तौर पर काम कर सकते हैं.

लॉ: भारत में उपलब्ध जॉब के अवसर

लॉ में अपनी डिग्री प्राप्त करने के बाद स्टूडेंट्स निम्नलिखित पेशेवरों के तौर पर काम कर सकते हैं:

भारत में लॉ की फील्ड में मिलने वाला सैलरी पैकेज

लॉ ग्रेजुएट्स जो किसी कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू करना चाहते हैं, वे जिस एडवोकेट के पास काम कर रहे हैं, उस एडवोकेट के लेवल के मुताबिक इन लॉ ग्रेजुएट्स को रु. 5000/- से रु. 45000/- तक मासिक स्टाइपेंड मिल सकता है. जो लोग लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग के साथ काम कर रहे हैं, वे रु. 25000/- से रु. 55000/- तक मासिक कमा सकते हैं. लॉ को एक अच्छे सैलरी पैकेज वाला पेशा माना जाता है जिसमें कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की जा सकती है बशर्ते स्टूडेंट्स के पास सही स्किल-सेट तथा किसी प्रसिद्ध कॉलेज से लॉ की डिग्री हो.

बेहतर करियर ऑप्शन चुनने के आसान तरीके

जॉब, इंटरव्यू, करियर, कॉलेज, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, एकेडेमिक और पेशेवर कोर्सेज के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने और लेटेस्ट आर्टिकल पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर विजिट कर सकते हैं.

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