चंदा कोचर की आईसीआईसीआई बैंक के शीर्ष पर पहुंचने की यात्रा

जब एसबीआई के साथ आईसीआईसीआई बैंक को डोमेस्टिक सिस्टेमेकली इम्पोर्टेंट बैंक डोमेस्टिक सिस्टेमेकली इम्पोर्टेंट बैंक (डी–एसआईबी) घोषित किया गया था, तो एक दशक से भी कम उम्र वाले इस बैंक का बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज एसबीआई के साथ खड़े होने पर सभी को आश्चर्य हुआ था. तब से आज तक, यह समझा गया कि बैंक अपने योग्य एमडी–सीईओ श्रीमती चंदा कोचर के सक्षम हाथों में है. इन्होंने ग्राहक सेवा श्रेणी में इस बैंक को एक सर्वश्रेष्ठ बना दिया और सभी स्तरों पर तकनीक को लागू किया. यह उनके नेतृत्व का ही कमाल है कि आज यह बैंक भारतीय बाजार में इतना अच्छा कारोबार कर रहा है.  

भारत में रीटेल बैंकिंग क्षेत्र को आकार देंतीं चंदा कोचर

चंदा कोचर का जन्म 1961 में राजस्थान में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल थे, लेकिन जब वे मात्र 13 वर्ष की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया. उसके बाद, उनका परिवार मुंबई आ गया और उन्होंने वहीं से अपना ग्रैजुएशन और पीजी किया. इन्होंने अकाउंटेंसी और कॉस्ट मैनेजमेंट में भी कोर्स किया. हालांकि उनके बचपन का सपना आईएएस अधिकारी बनने का था, लेकिन 1984 में उन्होंने बतौर प्रबंधन प्रशिक्षु आईसीआईसीआई ज्वाइन किया. उसके बाद, उन्होंने पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा और 1994 में आईसीआईसीआई बैंक की स्थापना के बाद उन्हें बैंक में कई प्रकार की जिम्मेदारियां भी दी गईं. किसी भी मामले में गो–टू ऑफिसर होने के नाते, उनके प्रयासों को स्वीकार किया गया और वे आईसीआईसीआई बैंक की पहली महिला एमडी–सीईओ बनीं.

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उनकी उपलब्धियां और किन कारणों से वे इन उपलब्धियों को हासिल कर पाईं

किसी भी मामले में गो–टू ऑफिसर होने के नाते, उनके प्रयासों को स्वीकार किया गया और वे आईसीआईसीआई बैंक की पहली महिला एमडी–सीईओ बनीं.

योग्यता के लिए कुछ सम्मान

बैंकिंग क्षेत्र के लोगों के साथ– साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण क्षेत्र के लोगों ने देश में रीटेल बैंकिंग क्षेत्र को आकार देने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया है.

श्रीमति कोचर ने पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी दृढ़ता, समर्पण और नई चीजों को सीखने की इच्छाशक्ति के साथ राह बनाई और इनके जरिए नई चुनौतियों का सामना करना शुरु किया. भारत में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक में प्रबंधन प्रशिक्षु से लेकर शीर्ष रैंक वाली अधिकारी बनने की यात्रा में वे अभूतपूर्व रही हैं. वास्तव में वे महिलाओं के साथ– साथ पुरुषों के लिए भी रोल मॉडल हैं. ऐसे सभी लोग जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करने की इच्छा रखते हैं, वे इस महिला के जीवन से सीख ले सकते हैं. एक रूढ़ीवादी और सबसे महत्वपूर्ण महिला होने के बावजूद इन्होंने कैसे ये सब प्राप्त किया, इसे समझ सकते हैं.

शुभकामनाएं।

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