भारत में एपिडेमियोलॉजिस्ट का करियर और योग्यता

आजकल भारत सहित पूरी दुनिया में कोविड 19 अर्थात कोरोना वायरस का संकट मंडरा रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोविड 19 को एपिडेमिक अर्थात महामारी का दर्जा दे दिया है. यह एक चिंताजनक विषय है कि इन दिनों पूरी दुनिया में लाखों मरीज़ कोविड 19 से जूझ रहे हैं और इस महामारी से मरने वालों की संख्या हर रोज़ बड़ी तेजी से बढ़ रही है. इन दिनों हमारे देश के साथ-साथ पूरी दुनिया के लोग एपीडेमियोलॉजिस्ट के करियर का महत्त्व समझ सकते हैं. अगर आप भी एपीडेमियोलॉजी की फ़ील्ड में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं तो इस आर्टिकल में आपके लिए भारत में एपीडेमियोलॉजी की फ़ील्ड से संबंधित एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, जॉब प्रोफाइल्स और सैलरी पैकेज सहित सारी जरुरी जानकारी दी जा रही है.

एपीडेमियोलॉजी क्या है?

यह पब्लिक हेल्थ की एक ऐसी ब्रांच है जिसमें किसी भी एरिया या देश की पॉपुलेशन में तेज़ी से फ़ैल रही किसी भी बीमारी या रोग के बारे में समय रहते पता लगाकर उसकी रोकथाम के पूरे इंतजाम किये जाते हैं. इस फील्ड में किसी भी एपिडेमिक के तेज़ी से होने वाले फैलाव का अनुमान लगाने के लिए मैथ्स के प्रोबेबिलिटी और स्टेटिस्टिक्स का इस्तेमाल किया जाता है.

एपिडेमियोलॉजिस्ट का पेशा और जॉब प्रोफाइल

ये पेशेवर संबद्ध एरिया या देश में रहने वाले विशाल जन-समूह के सभी हेल्थ इश्यूज़ को सुधारने के लिए जरुरी काम करते हैं और अपने एरिया में रहने वाले लोगों के बीच किसी भी बीमारी की पहचान, फैलाव और रोकथाम के लिए जरुरी सभी संभव उपाय और रिसर्च वर्क करते हैं ताकि जल्दी से जल्दी किसी भी बीमारी को महामारी बनने से रोका जा सके या फिर, महामारी को रोक कर लोगों की हेल्थ और वेल्थ की रक्षा की जा सके. इन पेशेवरों के काम को मुख्य तौर पर दो वर्गों – रिसर्च फील्ड और क्लिनिकल फील्ड – में बांटा जाता है. ये पेशेवर संक्रामक रोगों, पुरानी बीमारी, एनवायरनमेंटल हेल्थ, जेनेटिक डिजीज, बायो-टेररिज्म और नेचुरल डिजास्टर की स्थिति में लोगों को हर तरह से सुरक्षित रखने के लिए अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं. इस फील्ड में अपना करियर शुरू करने के लिए इन पेशेवरों के पास एपीडेमियोलॉजी या संबद्ध स्ट्रीम में मास्टर डिग्री जरुर होनी चाहिए.

भारत में एपिडेमियोलॉजी की फील्ड से संबद्ध विभिन्न एजुकेशनल कोर्सेज और एलिजिबिलिटी

हमारे देश में साइंस (फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी) के साथ किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से 12वीं पास स्टूडेंट्स बीएससी और अन्य संबद्ध अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन ले सकते हैं. इसी तरह, एपीडेमियोलॉजी की फ़ील्ड में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज के लिए स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से कम से कम 55 फीसदी मार्क्स के साथ साइंस या संबद्ध स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो और एमफिल तथा पीएचडी के लिए स्टूडेंट्स के पास अच्छे मार्क्स सहित पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. एपीडेमियोलॉजी की फ़ील्ड से संबंधित प्रमुख एजुकेशनल कोर्सेज निम्नलिखित हैं:

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एपिडेमियोलॉजी की फील्ड में भारत के टॉप एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स

स्टूडेंट्स भारत में निम्नलिखित प्रमुख एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स से एपिडेमियोलॉजी की फील्ड से संबंधित विभिन्न एजुकेशनल कोर्सेज कर सकते हैं:

भारत में एपीडेमियोलॉजी की फ़ील्ड से जुड़े प्रमुख करियर विकल्प/ जॉब प्रोफाइल्स

हमारे देश में एपीडेमियोलॉजी की फ़ील्ड में पेशेवर निम्नलिखित जॉब्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं:

ये हैं कुछ अन्य करियर विकल्प/ जॉब प्रोफाइल्स  

भारत में एपिडेमियोलॉजिस्ट का सैलरी पैकेज

हमारे देश में इन पेशेवरों को इनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और वर्क एक्सपीरियंस के मुताबिक सैलरी मिलती है और शुरू में ये पेशेवर 20 हजार – 45 हजार रुपये मासिक सैलरी लेते हैं. जो एपिडेमियोलॉजिस्ट्स फार्मास्यूटिकल या मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में काम करते हैं, उन्हें काफी आकर्षक सैलरी पैकेज मिलता है.

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भारत में एपिडेमियोलॉजिस्ट पेशेवर यहां कर सकते हैं अप्लाई

भारत में ये पेशेवर निम्नलिखित रिक्रूटिंग इंस्टीट्यूशन्स में अपने लिए सूटेबल जॉब तलाश सकते हैं:

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जॉब, इंटरव्यू, करियर, कॉलेज, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, एकेडेमिक और पेशेवर कोर्सेज के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने और लेटेस्ट आर्टिकल पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर विजिट कर सकते हैं.

 

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