बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते एयर क्वालिटी मैनेजमेंट में बढ़े करियर विकल्प, जानें टॉप कोर्सेज, कॉलेज और जॉब्स यहां  

आजकल देश के सुप्रीम कोर्ट और संसद परिसर में भी लगातार बढ़ते हुए प्रदूषण और खासकर वायु प्रदूषण की चर्चा की गूंज सुनाई दे रही है. दिल्ली को तो लोग अब गैस चैम्बर मानने लगे हैं. ऐसे में अगर आप एक हाइली क्वालिफाइड जॉब सीकर हैं और एनवायरनमेंट पॉल्यूशन से आप अपने शहर को बचाना चाहते हैं या आप हायर एजुकेशनल डिग्रीज़ हासिल करने के लिए अपना विचार बना रहे हैं तो ग्रीन सेक्टर अर्थात इको-फ्रेंडली एनवायरनमेंट के क्षेत्र में हमारे देश में आपके लिए काफी आशाजनक संभावनाएं हैं. भारत में आप एनवायरनमेंट की रक्षा और संरक्षण के लिए कई बेहतरीन डिग्री/ डिप्लोमा कोर्सेज कर सकते हैं. इसी तरह, देश में लगातार बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण आजकल ग्रीन सेक्टर में योग्य पेशेवरों के लिए बेहतरीन सैलरी पैकेज सहित कई आकर्षक करियर ऑप्शन्स/ जॉब प्रोफाइल्स भी उपलब्ध हैं. इस आर्टिकल में अब हम ग्रीन सेक्टर या एनवायरनमेंट से संबद्ध विभिन्न आस्पेक्ट्स की चर्चा करगें लेकिन सबसे पहले हम इस आर्टिकल में प्रदूषण से जुड़े एक सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक अर्थात लगातार बढ़ते हुए वायु प्रदूषण का जिक्र करते हैं.      

लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण: एक समस्या

हर साल की तरह ही इस साल दीवाली के बाद दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवा सांस लेने के लायक नहीं रही और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दिल्ली की हवा को दुनिया के सभी बड़े शहरों में सबसे ज्यादा खतरनाक बताया. भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वर्ष 2018 के एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, बीते कुछ वर्षों से दिल्ली में जनवरी से सितंबर के महीने तक आमतौर पर एयर क्वालिटी इंडेक्स मॉडरेट (101-200) रहता है जो अक्टूबर से दिसंबर महीने तक बड़े ही खतरनाक स्तर (500+) तक पहुंच जाता है और इसके प्रमुख कारण दिल्ली के पडोसी राज्यों द्वारा पराली जलाना, रोड डस्ट, वाहन प्रदूषण और सर्दी का मौसम हैं. हाल ही के दिनों में दिल्ली और NCR में सुबह और शाम को अक्सर नजर आने वाला स्मॉग दरअसल दिल्ली और NCR में लगातार बढ़ते हुए एयर पॉल्यूशन की ही एक झलक है. इस एयर पॉल्यूशन की वजह से दिल्ली वासियों को कई हेल्थ इश्यूज जैसेकि, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, एलर्जीज़, अस्थमा, खांसी-जुकाम, गले में दर्द और खराश या छाती में जकड़न महसूस हो रही है. आजकल लोगों को एंटी पॉल्यूशन फ़िल्टर मास्क लगाकर अपने घर से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है. भारत में सेंट्रल गवर्नमेंट और विभिन्न स्टेट गवर्नमेंट्स एनवायरनमेंट पॉल्यूशन और विशेष रूप से एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए अपने पुरजोर प्रयास कर रही हैं. भारतीय मौसम विभाग के लेटेस्ट अपडेट्स के मुताबिक अब लोगों को करीबन 10 दिन पहले अपने शहर के मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करवाई जायेगी.   

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प्रदूषण और वायु प्रदूषण से बचाव के क्षेत्र में मौजूद हैं ये खास करियर विकल्प

ये पेशेवर देश के विभिन्न हिस्सों की एयर क्वालिटी की निगरानी करके अपना रिसर्च वर्क और सटीक रिपोर्ट्स तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं. रोज़ाना की एयर क्वालिटी रिपोर्ट्स के आधार पर ही केंद्र और राज्य सरकारों के साथ अन्य विभिन्न संबद्ध संगठन प्रदूषण के नियंत्रण के लिए सभी जरुरी कदम उठाने के लिए नीतियां बनाते और लागू करते हैं.

ये पेशेवर हमारी पृथ्वी के नेचुरल एनवायरनमेंट को कायम रखने के लिए इको-फ्रेंडली टेक्नोलॉजीज़ अपनाने के साथ पोल्यूशन कंट्रोल के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

ये पेशेवर लोगों को एनवायरनमेंट के प्रति जागरूक करते हैं ताकि लोग अपने आस-पास फैलने वाले प्रदूषण को रोकने में सहयोग देकर एनवायरनमेंट के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं. ये पेशेवर लोगों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान और प्रदूषण को रोकने के कारगर तरीकों की जानकारी देते हैं.  

ये हैं वर्ष 2019 में सूटेबल करियर ऑप्शन चुनने के लिए महत्वपूर्ण परामर्श

ये पेशेवर मुख्य रूप से वाटर/ सोल/ फ़ॉरेस्ट कंजर्वेशन और प्रिजर्वेशन के कार्य करते हैं और एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

ये पेशेवर व्हीकल एनर्जी एनालिसिस के माध्यम से एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए स्मार्ट चार्जिंग जैसे ऑप्शन्स के लाभ बताते हैं.

ये पेशेवर ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए इलेक्ट्रिकल व्हीकल सॉफ्टवेयर डिज़ाइन और डेवलप करते हैं ताकि व्हीकल्स के इन नए डिज़ाइन्स से व्हीकल पॉल्यूशन को कम किया जा सके.

ये पेशेवर एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने के लिए और प्रदूषण की समस्या के स्थाई समाधान के लिए इको-फ्रेंडली टेक्नीक्स विकसित करते हैं.

ये पेशेवर एनर्जी के नॉन-कन्वेंशनल तरीकों जैसेकि सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, बायो फ्यूल्स को बढ़ावा देने के लिए नई टेक्नोलॉजी को विकसित करने और इस्तेमाल करने से संबंधित कामकाज देखते हैं.

ये पेशेवर विभिन्न कंपनियों और दफ्तरों में रोज़ाना होने वाले काम-काज और प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े रिस्क या खतरों से कंपनी और कर्मचारियों की रक्षा करते हैं.

इन पेशेवरों का प्रमुख काम विभिन्न उद्योगों में होने वाले प्रोडक्शन को इको-फ्रेंडली बनाना है ताकि हमारा एनवायरनमेंट सुरक्षित रहे.

सफलता के लिए जरूरी है सॉफ्ट स्किल

प्रदूषण और वायु प्रदूषण से बचाव: प्रमुख एजुकेशनल कोर्सेज और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

भारत में स्टूडेंट्स के लिए ग्रीन सेक्टर या एनवायरनमेंट की फील्ड से संबंधित विभिन्न एजुकेशनल कोर्सेज और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया निम्नलिखित हैं:

करियर में सफलता के लिए कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के कुछ आसान उपाय

भारत के ये टॉप एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स करवाते हैं विभिन्न कोर्सेज

आप निम्नलिखित एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स से एनवायरनमेंट की फील्ड से संबंधित विभिन्न डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज कर सकते हैं:

पर्यावरण प्रदूषण से बचाव और सुरक्षा: सैलरी पैकेज

भारत में इस फील्ड में किसी फ्रेशर को अपने करियर की शुरुआत में इस फील्ड में एवरेज 3-4 लाख रुपये सालाना मिलते हैं और कुछ वर्षों के अनुभव के बाद ये पेशेवर एवरेज 6-8 लाख रुपये सालाना तक कमा सकते हैं. ग्रीन सेक्टर से संबंधित MBA प्रोफेशनल्स को शुरू में ही किसी बड़े कॉर्पोरेट हाउस या MNC में एवरेज 8-10 लाख सालाना का सैलरी पैकेज मिल जाता है. यहां बड़ी नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों के साथ ही विभिन्न इंस्टीट्यूशन्स में इन पेशेवरों को अपने टैलेंट और एजुकेशनल स्किल्स के मुताबिक बेहतरीन सैलरी पैकेज मिलता है.

जॉब, इंटरव्यू, करियर, कॉलेज, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स, एकेडेमिक और पेशेवर कोर्सेज के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने और लेटेस्ट आर्टिकल पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर विजिट कर सकते हैं.

 

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