इलेक्शन एनालिस्ट: क्वालिफिकेशन, करियर और जॉब प्रोफाइल

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव प्राप्त है. हमारे देश में इस साल लोक सभा के इलेक्शन 11 अप्रैल, 2019 से 19 मई, 2019 तक कुल 7 चरणों में आयोजित किये जायेंगे और नतीजे 23 मई, 2019 को घोषित किये जायेंगे. अब जब पूरे देश में इस समय इलेक्शन की सरगर्मियां हैं, ऐसे में अगर आपको आने वाले इन इलेक्शनों में एक इलेक्शन एनालिस्ट के तौर पर काम करना हो तो आप काफी उत्साहित होंगे. लेकिन आपको अपने काम और जिम्मेदारी को लेकर कुछ तनाव भी तो जरुर होगा क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्शन है तो जाहिर-सी बात है कि आपकी जिम्मेदारी भी काफी अधिक होगी. आप कैसे एक सफल इलेक्शन एनालिस्ट के तौर पर इस इलेक्शन के माहौल में अपना करियर शुरू कर सकते हैं? इस पेशे के लिए आपके पास कौन-सी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन होनी चाहिए? इस पेशे का जॉब प्रोफाइल क्या है? आइये चर्चा करें:

अपने देश में एक इलेक्शन एनालिस्ट के पेशे की अहमियत समझने के लिए सबसे पहले हम भारत के कुछ नामचीन इलेक्शन एनालिस्ट्स का जिक्र कर रहे हैं जैसेकि, प्रन्नॉय रॉय, विनोद दुआ, जीवीएल नरसिम्हा राव, योगेन्द्र यादव और रंजित चिब आदि. ये लोग ऐसे इलेक्शन एनालिस्ट हैं जो लगातार कई वर्षों से भारत के जनरल इलेक्शन्स में लोगों को इलेक्शन के नतीजे घोषित होने से पहले ही जनता के रुझान की जानकारी देने के लिए काफी रिसर्च वर्क करते रहे हैं और अपने काम के जरिये इन पेशेवरों ने अपनी एक अलग पहचान कायम कर ली है.

भारत में इंडियन टेलीविज़न के शुरुआती दिनों से ही प्रन्नॉय रॉय, जो अब एनडीटीवी के को-फाउंडर हैं, को इंडियन सेफ़ोलॉजी का जनक माना जाता है. यह वास्तविक तौर पर कहा जा सकता है कि भारत में सेफ़ोलॉजी अर्थात इलेक्शन एनालिसिस की शुरुआत प्रन्नॉय रॉय ने ही की है, किसी अन्य व्यक्ति को इसका गौरव नहीं दिया जा सकता है. लेकिन आजकल जब टीवी और रेडियो के अलावा भी विभिन्न सोशल मीडियाज में भी इलेक्शन की सरगर्मियां महसूस की जा सकती हैं तो इलेक्शन एनालिसिस का महत्व अपने-आप समझ में आ जाता है.

इलेक्शन एनालिस्ट के पेशे के लिए जरुरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशन बोर्ड से आर्ट्स के विभिन्न विषयों – राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र और भूगोल – सहित अपनी 12वीं क्लास पास करने वाले स्टूडेंट्स जिन्होंने राजीति से जुड़े निम्नलिखित विभिन्न विषयों में किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन/ पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो:

  • बीए/ एमए – पोलिटिकल साइंस
  • बीए/ एमए – सोशियोलॉजी
  • बीए/ एमए – स्टैटिस्टिक्स
  • पीएचडी – पोलिटिकल साइंस.

महत्वपूर्ण जानकारी: पिछले कुछ वर्षों से हमारे देश की कुछ प्रमुख यूनिवर्सिटीज ने सेफ़ोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्सेज शुरू किये हैं ताकि इस पेशे में एक्सपर्ट्स की बेहतरीन टीमें तैयार हो सकें.

इलेक्शन एनालिस्ट का जॉब प्रोफाइल

वास्तव में इलेक्शन एनालिस्ट अपने संबंधित क्षेत्र, राज्य या पूरे देश के स्तर पर विभिन्न पिछले इलेक्शनों के नतीजों के साथ ही मौजूदा इलेक्शन के लिए विभिन्न प्रमुख क्षेत्रीय, राज्य और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रति जनता-जनार्दन के रुझान और अन्य संबंधित जानकारियों का बड़ी ही बारीकी से विश्लेषण करके, इलेक्शन संपन्न हो जाने के बाद और इलेक्शन के नतीजे घोषित किये जाने से पहले अपने पूर्वानुमान रेडियो, टीवी और आजकल तो विभिन्न सोशल मीडिया साधनों के जरिये लोगों के सामने रखते हैं. ये पेशेवर इलेक्शन नतीजे घोषित हो जाने के बाद होने वाली राजनीतिक सरगर्मियों पर भी खुलकर चर्चा करते हैं जैसेकि कौन-कौन से राजनीतिक दल आपस में समझौता कर सकते हैं? देश के प्रधानमंत्री कौन बन सकते हैं? अगर किसी भी दल को जनरल इलेक्शन में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो फिर कौन से प्रमुख लीडर्स देश के प्रधानमंत्री बनने के संभावित उम्मीदवार होंगे?. आजकल देश के विभिन्न राजनीतिक दल भी इनकी सेवायें लेते हैं क्योंकि इन राजनीतिक दलों को भी जनता के रुझान की महत्वपूर्ण जानकारी इलेक्शन एनालिस्ट्स के विभिन्न इलेक्शनों से संबंधित रिसर्च वर्क और इलेक्शन एनालिसिस से प्राप्त होती है. ये पेशवर विभिन्न राजनीतिक दलों के पोलिटिकल एडवाइजर के तौर पर भी काम करते हैं.     

इलेक्शन एनालिस्ट का सैलरी पैकेज

चूंकि इस पेशे का महत्व देश में समय-समय पर होने वाले इलेक्शन्स के दौरान ही पता चलता है इसलिए इस पेशे के लिए कोई निश्चित सैलरी पैकेज निर्धारित नहीं है. इलेक्शन के दिनों में ये पेशेवर विभिन्न प्रोजेक्ट्स के आधार पर अपनी सेवाएं काफी बढ़िया इनकम पर ऑफर करते हैं. लेकिन बड़े मीडिया हाउसेज इलेक्शन के दिनों में इन पेशेवरों को विभिन्न इलेक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए लाखों रुपये तक अदा करते हैं. इन पेशेवरों की लोकप्रियता और कार्य-अनुभव के मुताबिक विभिन्न इलेक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए इन्हें विभिन्न पैकेजेज पर हायर किया जाता है.

इलेक्शन एनालिस्ट के पेशे के लिए संभावित एम्पलॉयमेंट प्रोवाइडर्स

  • टीवी चैनल्स/ रेडियो 
  • न्यूज़पेपर्स/ न्यूज़ मैगजीन्स 
  • रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन्स
  • राजनीतिक दल
  • पार्लियामेंट
  • मार्केट रिसर्च
  • फ्रीलांसिंग

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