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एथिकल हैकिंग: कमाई का स्मार्ट जरिया

बढ़ती ऑनलाइन गतिविधियों के साथ हैकिंग की बढ़ती घटनाओं से देश-दुनिया के बैंकिंग सिस्टम, सरकारों के अलावा आम लोगों को भी नुकसान हो रहा है। ऐसी अवांछित गतिविधियों से बचने और इन्हें रोकने के लिए एथिकल हैकर्स मददगार साबित हो रहे हैं। तेजी से उभरते इस क्षेत्र में खुद को स्किल्ड बनाकर अच्छा करियर बनाया जा  सकता है...

पिछले दिनों बेंगलुरु के एक 20 वर्षीय युवा ने मुफ्त में राइड बुक करके उबर की साइबर सिक्योरिटी को चुनौती दी। ऐसा उसने एक नहीं कई बार किया। इसी तरह उसने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कई बार फ्री में मूवी टिकट बुक करा लिए। कंपनियों के तमाम दावों के बावजूद उस युवा ने साबित कर दिया कि उनकी साइबर सिक्योरिटी फुलप्रूफ नहीं है। इसके लिए उस युवा को पुरस्कृत किया गया। आज उस युवा की कंपनी तमाम कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी सर्विस दे रही है। ऐसा सिर्फ इन्हीं दो कंपनियों के साथ नहीं है। ऑनलाइन सर्विस देने वाली देश और दुनिया की लगभग कंपनियों और सरकारों के पोर्टल्स/वेबसाइट्स को हैकर्स आसानी से चूना लगाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उनकी साख को भी बट्टा लगाते हैं। इतना ही नहीं, सरकारों के संवेदनशील सामरिक डाटा तक चुरा लेते हैं। आइटी कंपनियों के करियर सेक्शन में एथिकल हैकर्स और साइबर सिक्योरिटी के एक्सपट्र्स के लिए हर वक्त जॉब ओपन रहती है। वहां जितने बायोडाटा जाते हैं, पर्याप्त स्किल्ड होने पर उनमें से अमूमन सभी को जॉब मिल जाती है। जो जॉब नहीं करना चाहते, वे फ्रीलांस सर्विस देकर या खुद की कंपनी बनाकर भी एथिकल हैकिंग/साइबर सिक्योरिटी की सेवाएं दे सकते हैं।

स्किल्ड इनोवेटिव प्रोफेशनल्स हर माह कमा रहे लाखों

एथिकल हैकिंग की दुनिया में अंकित फाड़िया, राहुल त्यागी, प्रणव मिस्त्री, कौशिक दत्त और विवेक रामचंद्रन जैसे कुछ ऐसे नाम हैं, जो इस फील्ड में हर महीने लाखों रुपये कमा रहे हैं। ये लोग टीसीआइएल, सैमसंग, माइक्रोसॉफ्ट, क्लॉकवर्क मोड जैसी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अंकित फाड़िया तो मोदी सरकार के 'डिजिटल इंडिया' के ब्रांड एंबेसडर रहे हैं। ये प्रोफेशनल्स क्रिमिनल हैकर्स के हर दांव को फेल करने की महारत रखते हैं। वैसे किसी भी साइबर सिक्योरिटी में ट्रेंड प्रोफेशनल को इस क्षेत्र में शुरुआत में 30 से 40 हजार रुपये तक सैलरी आसानी से मिल जाती है। पेस्केलडॉटकॉम के मुताबिक, अनुभव बढ़ने पर और नामी कंपनियों से जुड़ने पर हर महीने ये प्रोफेशनल्स  4 से 6 लाख रुपये तक सैलरी पाते हैं।

बढ़ रहे साइबर अटैक

इंटरनेट यूजर्स की बढ़ती संख्या के साथ हर चीज तेजी से ऑनलाइन होती जा रही है। लोग ऑनलाइन लेन-देन के जरिए कपड़े, किताबें और ग्रॉसरी के सामान तक खरीदने लगे हैं। इससे लोगों को घर बैठे सभी सुविधाएं तो मिल रही हैं, पर इससे साइबर अपराध से संबंधित मामले भी बढ़ रहे हैं। अमेरिका और चीन के बाद भारत में इस समय साइबर क्राइम की सबसे ज्यादा घटनाएं हो रही हैं। एक संसदीय रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन साल में 1,44, 496 साइबर अटैक की घटनाएं देश भर में दर्ज हुईं। अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 के दौरान ही करीब 22 हजार भारतीय वेबसाइट हैंकिंग के शिकार हुए, जिनमें 144 सरकारी वेबसाइट्स भी थीं।

प्रोग्रामिंग पर हो अच्छी कमांड

पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने बहुत ज्यादा डिजिटाइजेशन करने की कोशिश की है। बहुत सारे लोग जो पहले मोबाइल देखते भी नहीं थे, अब उनके पास स्मार्ट मोबाइल है। भीम एप, यूपीआइ, पेटीएम आने से पेमेंट का तरीका भी पूरी तरह से बदलने लगा है। इसके साथ ही साइबर फ्रॉड का लेवल भी बढ़ रहा है। पहले केवल कॉल फ्रॉड हुआ करते थे या एटीएम कार्ड स्वाइप होते थे, लेकिन अब तो लोग सीधे आपके एकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। ऐसे में यह सब रोकने के लिए सबको साइबर एक्सपर्ट की जरूरत पड़ रही है। जैसे-जैसे कंपनियां डिजिटाइज हो रही हैं, उन पर भी यह दबाव बन रहा है कि वे अपने सिस्टम को सिक्योर रखें। दरअसल, सिक्योरिटी एक्सपट्र्स हमेशा डिफेंसिव तरीके से काम करते हैं, जो यह देखते हैं कि उनके सिस्टम में लूपहोल्स कहां-कहां हैं, उसे वे ढूंढ़ते हैं। जागरूकता बढ़ने से युवा अब इस इंट्रेस्टिंग फील्ड में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। हालांकि एक अच्छा हैकर बनने के लिए एक अच्छा प्रोग्रामर होना जरूरी है।

मोहित साहू
को-फाउंडर ब्लू बेनियन टेक्नोलॉजीज

कुशल पेशेवरों की मांग

अधिकतर लोग हैकिंग को सिर्फ एक चोरी वाला पेशा समझते हैं, लेकिन अब ऐसे पेशेवर लोगों की मांग बढ़ रही है जो हैकिंग और इसके खतरों को अच्छी तरह समझते हैं। ये लोग हैकिंग के सारे दांवपेंच जानने के कारण उसके खतरों का मुकाबला करने में काफी सक्षम होते हैं। यह कुछ उसी तरह से है, जैसे लोहे से लोहे को काटा जाता है। हैकर्स के इरादों को उन्हीं की शैली में जवाब देने वालों को ‘एथिकल हैकर्स’ के नाम से जाना जाता है यानी आइटी के ऐसे पेशेवर जो साइबर सिक्योरिटी के लिए जवाबदेह होते हैं। एक अनुमान के अनुसार, डाटा चोरी और साइबर फ्रॉड की लगातार बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए देश को हर साल करीब 77 हजार साइबर विशेषज्ञ चाहिए। लेकिन मार्केट में ऐसे विशेषज्ञ पर्याप्त संख्या में नहीं हैं।

प्रमुख संस्थान

  • इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, मुंबई http://iisecurity.in
  • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, http://ignou.ac.in
  • इंडियन स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग, बेंगलुरु www.isoeh.com
  • सर्टिफाइड एथिकल हैंकिंग, ईसी काउंसिल, बेंगलुरु https://cert.eccouncil.org

जॉब्स के बेशुमार मौके

एथिकल हैकर्स के लिए पहले की तुलना में आज जॉब्स के अवसर अधिक हैं। तकरीबन हर छोटी-बड़ी कंपनी के आइटी डिपार्टमेंट में ऐसे प्रोफेशनल्स रखे जा रहे हैं। इसके अलावा, लॉ फम्र्स, बैंक, टेलीकॉम कंपनीज, पुलिस विभाग तथा शैक्षिक संस्थानों में भी साइबर एक्सपर्ट की सेवाएं ली जा रही हैं।

कोर्स एवं योग्यता

एथिकल हैकिंग/साइबर सिक्योरिटी कोर्स के लिए किसी खास योग्यता की आवश्यकता नहीं है। 10वीं/12वीं के बाद यह कोर्स किया जा सकता है, जो छह माह से लेकर एक साल की अवधि के हैं। आगे चलकर इसी फील्ड में एडवांस कोर्स भी किया जा सकता है।

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