हमेशा डिमांड में रहने वाला प्रोफेशन : लेक्चररशिप

वस्तुतः टीचिंग एक ऐसा पेशा है जिसका चार्म भूत,भविष्य और वर्तमान हर समय एक समान ही रहता है. यही एक ऐसा पेशा है जिसमें मंदी की मार या फिर इसकी डिमांड कम नहीं हो सकती है. अगर मनुष्य के रूप में पैदा हुए तो ज्ञान के लिए शिक्षा जरुरी और सही शिक्षा के लिए शिक्षक या लेक्चरर की  अनिवार्य आवश्यकता है और इसे कोई नकार नहीं सकता है.

भारत आदि काल से ही शिक्षा को महत्व देने वाला देश रहा है, तभी तो वैदिक काल से अध्ययन अध्यापन में रत लोगों को उपाध्याय कहा गया और उन्हें समाज में एक सम्माननीय स्थान दिया जाता था. भारतीय समाज में शिक्षा के महत्व का ज्वलंत उदाहरण विश्व में ख्यातिप्राप्त नालंदा,विक्रमशिला और तक्षशिला विश्वविद्यालय आदि हैं. 

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस तरह प्राचीन काल में लोग अध्ययन के लिए दूसरे देशों से हमारे देश भारत में आते थे उसी तरह आज भी यह शिलशिला बरकरार है. आज भी बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी तथा साउथ के कई यूनिवर्सिटीज में अध्ययन के लिए विश्व के कोने कोने से लोग आते हैं तथा अपनी रूचि और प्रतिभा के आधार पर डिग्री हासिल कर पूरे विश्व में अपना एक मुकाम हासिल करते हैं. विशेषकर रिलिजन और कल्चरल स्टडीज के क्षेत्र में. वैसे आजकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी भारत की शिक्षा प्रणाली निरंतर प्रगतिशील है.इसलिए एक लेक्चरर का प्रोफेशन आज भी बहुत डिमांड में है. एक लेक्चरर को अच्छी सैलरी के साथ साथ अपने समाज तथा लोगों के बीच रिस्पेक्ट की दृष्टि से देखा जाता है.

एक लेक्चरर बनने के लिए अपनी मास्टर डिग्री के बाद नेट एग्जाम क्लियर करने के उपरांत एमफिल और पीएचडी करने की जरुरत होती है. नेट एग्जाम पास करने के बाद उम्मीदवार किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज में लेक्चरर बनने के पात्र होते हैं लेकिन सीनियर बनने तथा असोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी करना अनिवार्य होता है.

अपने विषय से संबंधित मैक्सिमम किताबें पढ़ना और नई जानकारियों को आत्मसात कर छात्रों को समझाना,एक कुशल लेक्चरर के तौर पर अपने आप को स्थापित करने के लिए अति आवश्यक होता है. इसके लिए आपके मन में पढ़ने तथा उसे दूसरे को समझाने का पैशन एवं धैर्य का होना बहुत जरुरी है. यह उसी परिस्थिति में संभव है जब आप अपने विषय से जुड़े सभी नवीनतम जानकारियों से अपडेट रहें. छात्रों की समस्याओं को समझने तथा उसे सुलझाने का हर संभव प्रयत्न करें. इससे छात्र आपके प्रति सहज हो पाएंगे. 

बहुत महत्वपूर्ण होता है यह पद 

किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में अध्यापन की पूरी जिम्मेवारी लेक्चरर समुदाय पर ही होती है. इसलिए अध्ययन-अध्यापन और शोध कार्यों में गहन दिलचस्पी रखने वाले लोगों को ही हमेशा लेक्चरर नियुक्त किये जाने का प्रयास किया जाता है. अगर सामान्य शब्दों में कहें तो छात्रों को विषय की गुत्थियों को समझने तथा रहस्यों को समझाने एवं विषयों के प्रति लगाव विकसित करने की जिम्मेदारी विशेष रूप से लेक्चरर की होती है.

हमें एक बात यह भी हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि समय समय पर नए पाठ्यक्रमों के अनुसार नई अवधारणाओं को सिलेबस में शामिल किया जाता है. इन नए विषयों को छात्रों को पढ़ाने से पहले लेक्चरर को स्वयं भी इसकी तैयारी करने में वक्त लगाना पड़ता है तथा मानसिक रूप से तैयार होना पड़ता है. इतना ही नहीं, नए पाठ्यक्रम तैयार करना, छात्रों को आवश्यक नोट्स प्रदान करना , ट्यूटोरियल क्लास देना तथा उनके नोट्स की जांच करना आदि भी अध्यापन के अलावा इनके दैनिक कार्यकलापों का एक अनिवार्य हिस्सा होता है.

भारत में यूनिवर्सिटीज तथा कॉलेजों की स्थिति

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में देश में कुल 867 विश्वविद्यालय विद्यमान हैं. इनमें 47 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 389 राज्य विश्वविद्यालय, 124 डीम्ड यूनिवर्सिटीज तथा 307 निजी यूनिवर्सिटीज हैं. इनके अलावा कई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भी हैं. एक सामान्य अनुमान के अनुसार इनके अतिरिक्त 40 हजार से अधिक कॉलेज भी देश के विभिन्न प्रांतों में विद्यमान हैं. इस विशाल एजुकेशन सिस्टम में लाखों की संख्या में लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं, जिनका दायित्व यहां अध्ययनरत छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना मात्र है. लेक्चरर तथा प्रोफेसर के पद के लिए प्रति वर्ष हजारों की संख्या में रिक्तियों पर  नियुक्ति की जाती है.

एकेडमिक क्वालिफिकेशन
लेक्चररशिप के लिए काफी कठिन कॉम्पिटीशन के दौर से आवेदकों को गुजरना पड़ता है. इसमें मास्टर्स डिग्री का होना, नेट परीक्षा में पास होना आदि सर्वाधिक महत्वपूर्ण शर्तें हैं. यूजीसी की तरफ से नेट परीक्षा वर्ष में दो बार (जून और दिसंबर) में आयोजित की जाती है. इस परीक्षा में मुख्य तौर पर अभ्यर्थी द्वारा चुने गए विषय तथा टीचिंग व रिसर्च एप्टिट्यूड पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं तथा इसके माध्यम से प्रत्याशियों की शिक्षण क्षमता एवं उनके द्वारा चुने गए विषय की जानकारी, बुनियादी समझ आदि का मूल्यांकन किया जाता है.

नेट एग्जाम के लिए विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात

अक्सर हम देखते हैं कि नेट परीक्षा देने वाले छात्र पेपर-1 को बहुत हल्के में लेते हैं और सारा समय पेपर-2 की तैयारी में ही लगा देते हैं लेकिन यह बिल्कुल ही गलत सोंच है. पेपर-1 के 100 अंक तथा पेपर 2 के 200 अंक होते हैं एवं पहला पेपर क्वालिफाइंग होता है इसलिए उस पर भी समान रूप से फोकस करना चाहिए.

नेट परीक्षा का प्रारूप

केंद्र सरकार के ह्यूमन रिसोर्स मिनिस्ट्री के अधीन कार्यरत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), नई दिल्ली द्वारा वर्ष में दो बार नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) का आयोजन किया जाता है. आम तौर पर जून और दिसंबर माह में साल में दो बार इस परीक्षा का आयोजन किया जाता है. इस परीक्षा में उपस्थित होने के लिए मास्टर्स डिग्री के स्तर पर कम से कम 55 प्रतिशत अंक अवश्य होने चाहिए. इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य देश की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अध्यापन और शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए न्यूनतम शैक्षिक मानदंडों को सुनिश्चित करते हुए लेक्चरर पदों के लिए उपयुक्त प्रत्याशियों का चयन करना है. ह्यूमेनिटिज सब्जेक्ट्स, सोशल साइंसेज, कंप्यूटर साइंस, एनवायर्नमेंटल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक साइंस आदि कई विषयों के लिए इस परीक्षा का संचालन किया जाता है. विज्ञान विषयों के लिए यूजीसी-सीएसआईआर-नेट का आयोजन यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन द्वारा किया जाता है.

नेट की तैयारी करते समय विशेष रूप से गौर करने योग्य तथ्य

रोजगार के अवसर

हमारे देश में स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों/कॉलेजों में लेक्चरर की नियुक्तियां प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर की जाती हैं. केंद्र सरकार के फर्स्ट क्लास गैजेटेड ऑफिसर पद के समकक्ष ही लेक्चरर के शुरुआती वेतनमान और अन्य भत्ते होते हैं. देश में हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की स्थापना के बाद तो युवाओं के लिए नेट परीक्षा पास करने के बाद लेक्चरर के रूप में करियर संवारने के अवसरों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि देखने को मिली है. इस फील्ड में आगे चलकर अनुभव और प्रोमोशन के आधार पर प्रोफेसर के पद तक भी बहुत आसानी से पहुंचा जा सकता है.

कम्फर्टेबल जॉब
 लेक्चररशिप की सबसे अच्छी और बड़ी राहत दिलाने वाली बात यह है कि दिन भर में तीन-चार क्लासेज ही पढ़ाने की बाध्यता होती है. इसके बाद के समय का उपयोग फैकल्टी लिखने-पढ़ने अथवा शोध कार्य में लगा सकते हैं.यही नहीं, अधिकांश यूनिवर्सिटीज में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह होने के कारण सप्ताहांत में दो दिनों का अवकाश भी मिल जाता है. इनकी रिटायरमेंट की उम्र सामान्य तौर पर 62 वर्ष है, जबकि 3 वर्ष और एक्सटेंशन का भी प्रावधान इसमें शामिल है. सर्विस के दौरान पीएचडी करने के लिए वेतन सहित स्टडी लीव का भी प्रावधान है.अन्य जॉब की तुलना में कम तनाव युक्त और आकर्षक जॉब है.

 अतः अगर पठन पाठन में आपकी रूचि है तो लेक्चरशिप का जॉब वाकई आपके लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहेगा और आजीवन इसके लाभों को लुत्फ़ उठाते हुए आरामदायक जीवन बीता सकते हैं.

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