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एक्सपर्ट स्पीक : डिसिजन मेकिंग – डाउट होने पर क्या करें?

एक बार कोई बच्चा अपने पिता के साथ किसी कैंडी स्टोर में गया. वह इतनी सारी कैंडीज़ देखकर काफी हैरान हुआ और उसने अपने-आप से पूछा “मैं कौन-सी कैंडीज़ लूं?”

उसके पिता ने कहा, “चलो बेटा, हमारे पास सारा दिन नहीं है.”

“ये सब मुझे पसंद हैं. रुको, ये सब मुझे पसंद हैं.”

वह आगे बढ़ता रहा, कैंडीज़ के पैकेट उठाता और फिर वापस रख देता. लेकिन वह कोई भी कैंडी पैकेट चुन नहीं सका.

“जल्दी करो बेटा, जो कैंडी पैकेट लेना है, ले लो, हमें जल्दी जाना है.” उसके अधीर पिता ने कहा.

घबराकर बच्चा पूरे कैंडी स्टोर में इधर-उधर दोड़ने लगा. उसकी आंखें एक कैंडी शेल्फ से दूसरे शेल्फ में देख रही थीं, लेकिन सभी कैंडी पैकेट्स बहुत अच्छे थे और बच्चा कोई निर्णय नहीं ले सका.

आख़िरकार, उसके पिता थक गए और अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उस कैंडी स्टोर से खाली हाथ ही बाहर चले गये. बच्चे की आंखों में आंसू थे. वह सारी कैंडीज़ लेना चाहता था लेकिन एक भी कैंडी नहीं ले सका क्योंकि वह कोई एक कैंडी पैकेट नहीं चुन सका.

हम सभी इस बच्चे की तरह हैं और यह संसार एक बड़ा कैंडी स्टोर है.

डिसिजन मेकिंग या निर्णय लेना हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है. हमें जीवन के हरेक मोड़ पर कई किस्म के निर्णय लेने होते हैं. असल में, हमें प्रत्येक क्षण या मिनट कोई न कोई निर्णय लेना पड़ता है जैसे कुछ सरल निर्णय - क्या खाना है?  या फिर, क्या पहनना है?......और कुछ जटिल निर्णय जैसे,  कौन-सा करियर या फाइनेंशल ऑप्शन चुनें?.

हमारे पास आजकल ढेरों ऑप्शन्स मौजूद हैं. लेकिन अगर हम अपने करियर, एजुकेशन, रिलेशनशिप्स, इन्वेस्टमेंट्स या अन्य महत्वपूर्ण मामलों के संबंध में कोई निर्णय नहीं लेते तो हम खाली हाथ ही रह जायेंगे.

बहुत बार हमें गलत निर्णय लेने से डर लगता है. अक्सर लोग यह कहते हैं कि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय उन्हें काफी मुश्किल होती है. कई लोग निर्णय लेना टालते रहते हैं और उस संबंध में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए काफी सर्च करते हैं या चाहते हैं कि अन्य लोग उन्हें संबद्ध निर्णय के लिए कोई अच्छी राय दें.

हम रोज़ाना सैकडों निर्णय लेते हैं. बहुत से निर्णय लेना काफी आसान होता है. लेकिन कई निर्णय काफी मुश्किल, तनावयुक्त या उक्त दोनों किस्म के हो सकते हैं.

अब, क्योंकि हमें बहुत ज्यादा निर्णय लेने पड़ते हैं और इन निर्णयों का असर हमारे काम के परिणाम, लागतों, समय, भावनाओं और रिलेशनशिप्स पर पड़ता है, इसलिए हम कैसे निर्णय लेते हैं?.....यह बेहद महत्वपूर्ण है. इसलिए, उचित निर्णय लेना सीखना हमारे विकास के सबसे महत्वपूर्ण आस्पेक्ट्स में से एक है.

निर्णय लेना एक ऐसी प्रोसेस है जिसके तहत आपको अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दो या दो से अधिक संभावित विकल्पों में से उचित विकल्प को चुनना होता है.

एक समुचित और व्यवस्थित प्रोसेस आपकी उचित निर्णय लेने में सहायता कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपने सभी महत्वपूर्ण कारकों और समस्याओं पर ध्यान देकर एक उपयुक्त निर्णय लिया है जिसका नतीजा आपकी इच्छा के अनुसार अच्छा निकलेगा.

आइये एक उदाहरण के माध्यम से निर्णय लेने की इस प्रोसेस को और ज्यादा अच्छी तरह समझते हैं:

हाल ही में मैं किसी क्लाइंट को कोचिंग दे रही थी जो अपने प्रोफेशनल करियर में एक क्यूए लीड के तौर पर काफी अच्छा काम कर रहा था. लेकिन वह सोचता था कि उसका रुझान कोडिंग में है और इसलिए वह बिजनेस के डेवलपमेंट साइड में काम करना चाहता था. वह कन्फ्यूज्ड था कि क्या उसे इस 30 वर्ष की आयु में और क्यूए में 6 वर्ष के अनुभव के साथ अपने पेशे में बदलाव करना चाहिए?

यहां निर्णय लेने की वह प्रोसेस पेश है जिसकी मैंने उस क्लाइंट को सिफारिश की थी –

1. प्रॉब्लम की पहचान

2. ब्रेनस्ट्रोमिंग या विचार-विमर्श

3. पक्ष और विपक्ष की अच्छी तरह से जांच करना

4. प्रायोरिटीज

5. एनालिसिस

6. चयन या विकल्प का चुनाव

  1. पहचान करें कि आप यह बदलाव क्यों चाहते हैं? आप इस बदलाव से क्या पाना चाहते हैं? क्या आप कई इंटरनल या एक्सटर्नल फैक्टर्स की वजह से यह बदलाव लाना चाहते हैं?
  2. एक जगह बैठकर सभी पहलुओं पर अच्छी तरह विचार करें खासकर तब, जब यह आपके करियर/ जॉब से संबद्ध हो. वर्तमान जॉब-रोल में आप क्या पाने के काबिल हैं? अपने वांछित करियर में आपको सैलरी, काम की किस्म और काम के घंटे आदि के संबंध में क्या हासिल होगा? अगर आप अपना मौजूदा करियर इसलिए बदलना चाहते हैं कि आप अपने मौजूदा काम से खुश नहीं हैं तो फिर, तब क्या होगा अगर आपको अपने नए जॉब रोल में भी वैसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़े? अगर यह आपकी इच्छा है तो आप नए स्किल्स सीखने के लिए कितना समय निकाल सकेंगे?
  3. पक्ष और विपक्ष के आस्पेक्ट्स की पहचान करें और अच्छी तरह जांच-पड़ताल करें. यहां ‘स्वॉट एनालिसिस’ (SWOT) आपकी काफी मदद करेगा.  
  4. ब्रेन-स्टोर्मिंग के बाद वापिस अपनी लिस्ट देखें और अपने लिए सबसे महत्वपूर्ण 5-7 आइटम्स चुनें.
  5. हरेक ऑप्शन को एनालाइज करें जैसेकि नए काम के लिए आपको कितनी मेहनत करनी पड़ेगी, इस करियर का आप पर और आपके परिवार पर क्या असर होगा? इसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लें और जरुरी कदम उठायें.
  6. जो जानकारी अभी तक आपने इकट्ठी की है उस जानकारी के आधार पर आप अब एक उचित निर्णय ले सकेंगे जिसका पूरा श्रेय उक्त निर्णय लेने की प्रोसेस को जाता है.    

उक्त सभी स्टेप्स को फ़ॉलो करने के बाद, आमतौर पर यह साफ़ हो जाता है कि आपके लिए कौन-सा ऑप्शन सबसे ज्यादा उपयुक्त रहेगा. चाहे आप अपने मौजूदा जॉब प्रोफाइल में ही काम करते रहने का निर्णय लें या फिर आप अपनी इच्छा के अनुसार अपने करियर में बदलाव लायें...अब यह निर्णय लेना आपके लिए काफी सरल होगा. अगर आप अपने करियर में बदलाव चाहते ही हैं तो फिर आप इसके लिए क्या कदम उठाएंगे?

किसी भी व्यक्ति या ऑफिस की टीम्स के सामने आने वाली किसी प्रॉब्लम या किसी भी स्थिति के अनुसार इस प्रोसेस में बदलाव किया जा सकता है.

अंत में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप अपने जीवन में कौन-सा निर्णय ले रहे हैं? .....उक्त स्टेप्स को फॉलो करें ताकि आप अपने लिए एक सबसे ज्यादा उपयुक्त निर्णय ले सकें. याद रखें कि किसी भी निर्णय के संबंध में जो दुविधा या तनाव आप महसूस कर रहे हैं, वह केवल तभी तक रहेगा जब तक कि आपने किसी ऑप्शन को नहीं चुना है. एक बार कोई अंतिम निर्णय लेने के बाद आप खुद को काफी रिलैक्स्ड और तनावमुक्त महसूस करेंगे.

एक्सपर्ट के बारे में:

सुश्री पीयूष महाजन एक सर्टिफाइड लाइफ कोच और सॉफ्ट स्किल्स फैसिलिटेटर हैं. इनके पास जियो स्पेशल इंडस्ट्री में काम करने का 11 वर्षों से ज्यादा अनुभव है. यहां इन्होंने सीनियर डाटा स्पेशलिस्ट के तौर पर काम किया है. अपने दिल की आवाज को सुनते हुए, इन्होंने अपना डाटा स्पेशलिस्ट का  प्रोमिसिंग करियर छोड़ दिया और लाइफ स्किल्स कोच बनने का फैसला किया.

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