एक्सपर्ट स्पीक – पब्लिक स्पीकिंग में कैसे बनें माहिर ?

एक अमरीकी लेखक, लेक्चरर और सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, पब्लिक स्पीकिंग, कॉर्पोरेट ट्रेनिंग और इंटरपर्सनल स्किल्स से संबद्ध कोर्सेज के डेवलपर, डेल कार्नेजी ने एक बार कहा था – ‘ पब्लिक स्पीकिंग के स्टूडेंट्स मुझसे हमेशा पूछते हैं कि, “मैं ऐसे डर और घबराहट को कैसे जीत सकता हूं जो मुझे ऑडियंस के सामने जड़ या लकवाग्रस्त बना देते हैं?”

लेखक का जवाब अक्सर यह होता था – ‘क्या आपने ट्रेन की विंडो से बाहर देखते समय इस बात पर कभी ध्यान दिया है कि कुछ घोड़े रेल-ट्रैक के पास चरते हैं और वे बहुत तेजी से गुजरती हुई ट्रेन को एक बार भी रूककर नहीं देखते हैं. जबकि रेल-ट्रैक के ठीक दूसरी तरफ जिस समय ट्रेन गुजर रही होती है तो किसी किसान की वाइफ अपने डरे हुए घोड़े को बड़ी मुश्किल से शांत रखती है?.’

आप किसी ऐसे घोड़े का क्या इलाज करेंगे जो कारों से डरता हो – उसे किसी ऐसे सुनसान जंगल/ स्थान पर ले जाकर चरायेंगे जहां वह कभी स्टीम-ईंजन्स या ऑटोमोबाइल्स नहीं देख सकेगा या फिर, उस घोड़े को किसी ऐसी चरागाह में लेकर जायेंगे जहां वह अक्सर शोर करने वाले व्हीकल्स की आवाज सुनकर  डरता रहेगा?

खुद को डर और शर्मीलेपन से छुटकारा दिलवाने के लिए आप इस ‘हॉर्स-सेंस’ का इस्तेमाल करें. जितनी बार भी संभव हो, आप ऑडियंस के सामने जायें जिससे जल्दी ही आप का डर तथा शर्म गायब हो जायेग.

आप कभी भी स्टेज पर जाने के डर को कैसे दूर करें? विषय के बारे में लेख या किताबें पढ़कर अपने स्टेज से संबद्ध डर से छुटकारा प्राप्त नहीं कर सकते हैं. कोई किताब शायद आपको बेहतरीन सलाह दे कि, पानी में खुद को कैसे बचाकर या संतुलित रखें? लेकिन देर-सवेर ही सही आपको ही पानी में उतरना होगा. आपको तैरना सीखने के लिए पहले तैरना पड़ेगा. पानी में डुबकी मारना ही इसका एकमात्र तरीका है.  

क्यों?

बढ़िया पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स करियर गोल्स और अपने कार्य-स्थल में सफलता प्राप्त करने का एक अनिवार्य हिस्सा हैं. चाहे हम किसी ग्रुप डिस्कशन में भाग ले रहे हों, कोई इंटरव्यू दें, ऑडियंस के सामने कुछ पेश करें, ऑनलाइन मीटिंग या किसी टीम मीटिंग में बातचीत करें, हमें समय-समय पर पब्लिक के सामने बोलना ही पड़ेगा. पब्लिक स्पीकिंग के दौरान हमारा व्यवहार हमारी प्रोफेशनल इमेज को निखारता या बिगाड़ देता है. लोग हमारे बारे में जो सोचते हैं, उस सोच पर इसका बहुत असर पड़ता है. यही कारण है कि ज्यादा लोगों के सामने बोलते समय हम काफी सचेत रहते हैं.

स्टैट्स

जनसंख्या के लगभग 10 प्रतिशित लोग ही पब्लिक स्पीकिंग में रूचि लेते हैं. यह ग्रुप लोगों के काफी बड़े समूह के सामने बोलते समय बिलकुल भी डरता और घबराता नहीं है.

अन्य 10 प्रतिशत लोग वास्तव में डरते हैं. ये वे लोग होते हैं जो पब्लिक स्पीकिंग के विचार से ही शारीरिक तौर पर जड़ता महसूस करने लगते हैं.

बाकी बचे हम लोग – लगभग 80 प्रतिशत – बहुत चिंतित हो जाते हैं, पेट में एंठन महसूस करते हैं, पब्लिक स्पीकिंग से पहली रात ठीक से सो नहीं पाते हैं – लेकिन हमें पता है कि हम पब्लिक स्पीकिंग में सफल रहेंगे.  

कैसे?

अच्छी खबर यह है कि, बहुत अच्छी तैयारी और प्रैक्टिस करने से, आप अपनी घबराहट पर काबू पा लेंगे और बहुत बढ़िया परफॉर्म करेंगे. एक बढ़िया पब्लिक स्पीकर के तौर पर, आप अपना यश बढ़ा सकते हैं, अपना आत्म-विश्वास बढ़ा सकते हैं और आपको अपने लिए तरक्की के अनगिनत अवसर मिल सकते हैं. 

पब्लिक स्पीकिंग का महत्व समझ लेने के बाद, आइये एक बेहतरीन स्पीकर बनने के लिए स्ट्रेटेजीज की चर्चा करें:

पब्लिक स्पीकिंग से पहले, आपको यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि आप क्या कहना चाहते हैं और फिर आप अपनी स्पीच के अनुसार अपने कॉन्टेंट या विषयवस्तु की व्यवस्था करें.

  1. स्पष्टता – अच्छी स्पीच एक पेंसिल की तरह होती है, इस स्पीच में प्वाइंट या मुख्य मुद्दा अवश्य होना चाहिए. आपको पता होना चाहिए कि आप क्या कहना चाहते हैं और आप अपनी ऑडियंस को क्या मेसेज देना चाहते हैं?. इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि आपके लिए यह जानकारी क्यों इतनी जरुरी है?
  2. व्यवस्था – स्कूल में, हमें लेटर लिखने के फॉर्मेट के बारे में पढ़ाया जाता था जहां लेटर की सटीक ओपनिंग, बॉडी और कनक्लूजन होते थे. इसी तरह हमें बोलते समय भी अपने विचार 3 हिस्सों में व्यक्त करने चाहिए.

स्पीच ड्राफ्ट करने के बाद,

  1. स्पीच से पहले अच्छी तैयारी और प्रैक्टिस करें. अपनी बॉडी लैंग्वेज पर पूरा ध्यान दें. सीधे खड़े हों, अच्छे आई कॉन्टेक्ट के साथ अपने चेहरे पर मुस्कान बनाये रखें. स्पीच देते समय आवाज का उतार-चढ़ाव बढ़िया होना चाहिए. अगर आपको प्रेजेंटेशन देनी है तो पॉवर प्वाइंट के इस्तेमाल में कुशलता प्राप्त कर लें. स्पीच देते समय जहां भी जरुरी लगे पॉजेज का इस्तेमाल अवश्य करें.

स्पीच देते समय,

  1. अपनी ऑडियंस को उचित तरीके से बिज़ी रखें. इससे आप एक स्पीकर के तौर पर अकेलापन महसूस नहीं करेंगे और आपको तुरंत सुकून महसूस होगा. अपनी बॉडी लैंग्वेज और अन्य महत्वपूर्ण क्राइटेरिया जैसेकि, आई कॉन्टेक्ट, सही जगह पर रुकना, गैस्चर्स आदि का ध्यान रखें जिन पर आपने प्रैक्टिस के दौरान ध्यान दिया था.
  2. अगर आपको घबराहट हो रही है तो आप एक गहरी सांस लें.
  3. खुद पर और श्रोताओं पर गहरा असर डालने के लिए आप सकारात्मक रवैये से सोचें. इससे आपका डर कम होगा और आपका आत्म-विश्वास भी बढ़ेगा. 

क्या आपको यह बहुत आसान नहीं लगता है?

इस बात को स्वीकार करें और यह उम्मीद करें कि, विशेष रूप से अपनी स्पीच के पहले कुछ मिनटों के दौरान आप काफी घबराहट महसूस करेंगे. अपने उद्देश्य पर ही अपना फोकस रखें और आपकी तैयारी कमाल कर दिखाएगी.

एक्सपर्ट के बारे में:

सुश्री पीयूष महाजन एक सर्टिफाइड लाइफ कोच और सॉफ्ट स्किल्स फैसिलिटेटर हैं. उनके पास जियो स्पेशल इंडस्ट्री में काम करने का 11 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. यहां इन्होंने सीनियर डाटा स्पेशलिस्ट के तौर पर काम किया है. अपने दिल की आवाज को सुनते हुए, उन्होंने डाटा स्पेशलिस्ट का उक्त  प्रोमिसिंग करियर छोड़ दिया और लाइफ स्किल्स कोच बनने का फैसला किया.

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