ये हैं वर्ष 2020 में इंडियन स्टूडेंट्स के पसंदीदा फॉरेन स्टडी डेस्टिनेशन

 

प्रत्येक वर्ष हमारे देश के लाखों स्टूडेंट्स किसी फॉरेन यूनिवर्सिटी, एजुकेशनल/ टेक्निकल/ मैनेजमेंट इंस्टीट्यूशन से हायर एजुकेशनल/ टेक्निकल/ मैनेजमेंट डिग्री हासिल करने के लिए अपनी किस्मत आजमाते हैं. वर्तमान में लगभग 8 लाख स्टूडेंट्स विभिन्न फॉरेन यूनिवर्सिटीज़ और/ या एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स में हायर स्टडीज़ कर रहे हैं और एक अनुमान के मुताबिक प्रत्येक वर्ष भारत से 3 लाख से अधिक स्टूडेंट्स किसी फॉरेन एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेते हैं. वास्तव में, जब हमारे देश के मेहनती और टैलेंटेड स्टूडेंट्स किसी फॉरेन डेस्टिनेशन में हायर स्टडीज़ के लिए जाते हैं तो उन्हें अपनी एजुकेशनल कॉस्ट के साथ अन्य कई बातों का ध्यान रखना होता है. अब जब पूरी दुनिया एक ‘ग्लोबल विलेज’ के रूप में बदल चुकी है और दुनिया के कई देश ‘ग्लोबल एजुकेशन हब’ के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं तो यह भी सामान्य-सी बात है कि देश-दुनिया में शिक्षा तो तकनीकी का हेल्दी आदान-प्रदान हो. आज हम आपके लिए इस आर्टिकल में दुनिया के कुछ ऐसे देशों के बारे में चर्चा कर रहे हैं जो फॉरेन स्टडी डेस्टिनेशन के तौर पर इंडियन स्टूडेंट्स की पहली पसंद हैं लेकिन पहले कुछ ऐसे पॉइंट्स की चर्चा करते हैं जिनका ध्यान स्टूडेंट्स को अपनी हायर स्टडीज़ के लिए फॉरेन डेस्टिनेशन चुनते समय जरुर रखना चाहिए:

फॉरेन स्टडी डेस्टिनेशन चुनने से पहले इंडियन स्टूडेंट्स के लिए विचार योग्य हैं ये जरुरी पॉइंट्स

जी हां! अगर आप एक इंडियन स्टूडेंट हैं और अपनी हायर स्टडीज़ के लिए विदेश जाना चाहते हैं तो किसी भी फॉरेन डेस्टिनेशन को चुनने से पहले आप निम्नलिखित जरुरी पॉइंट्स पर अच्छी तरह विचार करने के बाद ही कोई सूटेबल निर्णय लें. ये जरुरी पॉइंट्स निम्नलिखित हैं:  

फॉरेन यूनिवर्सिटी से डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करने के हैं कई फायदे

आइये अब दुनिया के कुछ ऐसे देशों के बारे में चर्चा करते हैं जो इंडियन स्टूडेंट्स के फेवरेट फॉरेन डेस्टिनेशन्स हैं क्योंकि इन देशों के कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़ और विभिन्न एजुकेशनल/ टेक्निकल या मैनेजमेंट इंस्टीट्यूशन्स स्टूडेंट्स को अपने परिसर में बेहतरीन एजुकेशन, रिसर्च फैसिलिटीज़, प्रैक्टिकल एप्रोच के साथ बेहतरीन फैकल्टी और एजुकेशनल अट्मोस्फियर मुहैया करवाते हैं.

एक विश्व-विख्यात एजुकेशनल और रिसर्च हब होने के बावजूद अमरीका आजकल फॉरेन स्टूडेंट्स और सिटीजन्स के संदर्भ में काफी स्ट्रिक्ट पॉलिसीस लागू कर रहा है जिसके कारण अब कई इंडियन स्टूडेंट्स कनाडा को अपने मनचाहे फॉरेन स्टडी डेस्टिनेशन के तौर पर चुन रहे हैं. वर्तमान में लगभग 45 हजार स्टूडेंट्स कनाडा में हायर स्टडीज़ हासिल कर रहे हैं. हॉस्पिटैलिटी, एनीमेशन, इंजीनियरिंग, लिबरल आर्ट्स, बिजनेस स्टडी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सेज कनाडा में इंडियन स्टूडेंट्स के फेवरेट सब्जेक्ट्स हैं. इंडियन स्टूडेंट्स के लिए कनाडा का कल्चर और एजुकेशनल/ जनरल एनवायरनमेंट काफी सेफ है. कनाडा में किफायती ट्यूशन फीस के साथ-साथ इंडियन स्टूडेंट्स को पोस्ट स्टडी वर्क परमिट और परमानेंट रेजिडेंस के भी अच्छे अवसर मिलते हैं जिस वजह से यह देश इंडियन स्टूडेंट्स की पहली पसंद बन गया है.

इंडियन स्टूडेंट्स के लिए अमरीका हमेशा से ही एक फेवरेट स्टडी डेस्टिनेशन रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण इंटरनेशनल लेवल पर कई वर्षों से इसकी हार्वर्ड, स्टेनफोर्ड और प्रिन्सटन जैसी टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटीज़ हैं. वर्तमान में तकरीबन 1.4 लाख इंडियन स्टूडेंट्स अमरीका की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ रहे हैं. यहां इंडियन स्टूडेंट्स आमतौर पर बिजनेस मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, साइंस, सोशल साइंस और मैथ्स से संबंधित विभिन्न कोर्स स्ट्रीम्स और डिग्री कोर्सेज में एडमिशन लेते हैं. अमरीका में आजकल स्टूडेंट्स को हायर ट्यूशन फीस के साथ-साथ पोस्ट स्टडी वर्क परमिट और परमानेंट रेजिडेंस के मामले में भी दिक्कतें पेश आ रही हैं.

एक अनुमान के मुताबिक, इंडियन स्टूडेंट्स अमरीका और इंग्लैंड के बाद ऑस्ट्रेलिया को पूरी दुनिया में तीसरे स्थान पर सबसे पसंदीदा फॉरेन स्टडी डेस्टिनेशन के तौर पर चुनते हैं. दरअसल, ऑस्ट्रेलिया की कई यूनिवर्सिटीज़ दुनिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज़ में शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ में अधिकतर इंडियन स्टूडेंट्स मैथ्स, कंप्यूटर साइंस, सोशल साइंस, इंजीनियरिंग, हेल्थ एजुकेशन और बिजनेस मैनेजमेंट से संबंधित विभिन्न डिग्री कोर्सेज में एडमिशन लेते हैं. यहां स्टूडेंट्स को परमानेंट रेजिडेंस को लेकर ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती है.

स्टडी कोर्स चुनने से पहले इन पॉइंट्स पर जरुर ध्यान दें

इस देश में ऑक्सफ़ोर्ड और कैंब्रिज जैसी विश्व-प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज़ हैं और आजकल हमारे देश के 25 हजार से अधिक स्टूडेंट्स यहां के विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ रहे हैं. इंग्लैंड की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ एलिजिबल और टैलेंटेड स्टूडेंट्स को बेहतरीन स्कॉलरशिप्स ऑफर करती हैं जिनके तहत  इंडियन स्टूडेंट्स को आंशिक या पूरी कोर्स फीस के भुगतान से छूट मिलती है. इंडियन स्टूडेंट्स इंग्लैंड की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ में अधिकतर इंजीनियरिंग, सोशल साइंस, फाइन आर्ट्स, एप्लाइड साइंसेज, और लाइफ साइंसेज में एडमिशन लेते हैं. इंग्लैंड में किफायती ट्यूशन फीस के साथ स्टूडेंट्स को 2 वर्ष का  पोस्ट स्टडी वर्क परमिट मिल जाता है.

जर्मनी में इस समय लगभग 12 हजार इंडियन स्टूडेंट्स ह्युमनिटीज़, फाइन आर्ट्स, एप्लाइड साइंसेज, मैथ्स, कंप्यूटर साइंसेज, इंजीनियरिंग और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे सब्जेक्ट्स में हायर एजुकेशन हासिल कर रहे हैं. जर्मनी में एजुकेशनल कॉस्ट काफी कम है और कई कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ स्टूडेंट्स से ट्यूशन फीस भी नहीं लेते हैं लेकिन यहां स्टूडेंट्स को बेहतरीन शिक्षा मुहैया कारवाई जाती है. जर्मनी में फॉरेन स्टूडेंट्स को 18 महीने का पोस्ट स्टडी वर्क परमिट मिलता है.

सिंगापुर में अक्सर इंडियन स्टूडेंट्स विभिन्न मैनेजमेंट कोर्सेज करने के लिए जाते हैं क्योंकि यहां मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स के लिए बेहतरीन प्लेसमेंट ऑप्शन्स हैं. इसके अलावा, स्टूडेंट्स यहां बैंकिंग एंड फाइनेंस, इंजीनियरिंग, लॉ और कंप्यूटर साइंस से संबंधित विभिन्न कोर्सेज में एडमिशन लेते हैं. सिंगापुर का स्टडी वीज़ा आसानी से मिलता है लेकिन यहां की एजुकेशनल कॉस्ट हाई है. यहां परमानेंट रेजिडेंस के अवसर भी काफी कम हैं और स्टूडेंट्स को अपना कोर्स पूरा करने के तुरंत बाद 12 महीने के पास के लिए अप्लाई करना पड़ता है जो स्टूडेंट्स को काफी मुश्किल लगता है. यहां की लिविंग कॉस्ट भी अपेक्षाकृत हाई है.

चीन हमारा पडोसी देश है और यहां बेहतरीन मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें आजकल भारत के लगभग 7 हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं. यहां फॉरेन नेटिव्स इंग्लिश मीडियम में एजुकेशन हैसल कर सकते हैं और चीन में एजुकेशनल कॉस्ट अन्य देशों की तुलना में कम है इसलिए वर्तमान में लगभग 17 हजार इंडियन स्टूडेंट्स चीन की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ में हायर स्टडीज कर रहे हैं. यहां के प्रसिद्ध एजुकेशनल कोर्सेज में मेडिसिन, इंजीनियरिंग, सोशल साइंसेज और बिजनेस मैनेजमेंट को शामिल किया जा सकता है. चीन में स्टूडेंट्स को परमानेंट रेसिडेंट्स के मामले में बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं आती है और ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद यहां फॉरेन स्टूडेंट्स वर्क वीज़ा के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

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