एग्जाम के तनाव से खुद को रखना हो दूर तो फॉलो करें ये रूल

हर स्टूडेंट अपने करियर को सवारने के लिए जी तोड़ मेहनत करता है लेकिन एक डर जो अच्छे से अच्छे स्टूडेंट को भी पीछे कर देता है वो डर है एग्जाम का डर |  पढ़ाई में आपकी चाहे कितनी भी दिलचस्पी हो या पढ़ने का जूनून हो लेकिन एग्जाम के वक्त अधिकांश छात्र तनाव (Stress) की स्थिति में आ ही जाते हैं | परीक्षा का थोड़ा बहुत तनाव तो Student को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है लेकिन इस तनाव की अधिकता आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है | परीक्षा को लेकर तनाव आम बात है। खासकर बोर्ड परीक्षाओं के दौरान यह तनाव छात्रों को कुछ ज्यादा ही सताता है। ऐसा नहीं है कि यह तनाव सिर्फ परीक्षा से पहले या तैयारी के दौरान ही होता है, बल्कि परीक्षा के परिणाम को लेकर परीक्षा के बाद भी छात्र एग्जामिनेशन स्ट्रेस से परेशान रहते हैं। इससे बचना जरूरी है। यहाँ हम आपको बतायेंगे के एग्जाम के डर का मुख्य कारण क्या है और इनके तनाव से कैसे बचें |

एग्जाम से पहले तनाव का कारण -

(1) पेरेंट्स से बेहतर परिणाम लाने का दवाब होना –एग्जाम का एक कारण पेरेंट्स का अपने बच्चे पर अधिक मार्क्स  लाने का दबाव डालना, जो लगभग हर स्टूडेंट के तनाव का कारण बनता है | हर माता – पिता यह चाहते है कि उनका बच्चा बहुत अच्छे मार्क्स लाये और उनका नाम रोशन करे | अच्छे मार्क्स से उसे अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल जायेगा या वो उसे कोई कोर्स कराये जिससे उसका भविष्य उज्ज्वल बने | इस तरह का दबाव बार – बार डालने से स्टूडेंट पर बहुत ज्यादा marks लाने का बोझ पड़ जाता है, जो उसको तनाव में ले जाता है |

(2) जल्दी के फेर में न पड़ें – अक्सर देखा गया है कि एग्जाम के समय हम जल्दी-जल्दी अपना टॉपिक पूरा करना चाहते हैं | अगर आपको लग रहा है कि किसी पाठ को समझने में आपको ज्यादा वक्त लग रहा है तो कोई बात नहीं। पढ़ाई में वक्त तो लगता ही है। जल्दी करने के चक्कर में आप दुविधा में पड़ने लगते हैं और फिर तनाव से ग्रस्त हो जातें हैं |

(3) अच्छे नंबर लाने का दबाव- यह दबाव हर उस स्टूडेंट को होता है जिसको अच्छे नंबर लाने होते हैं | आपने 3 इडियट्स का यह डायलॉग जरुर सुना होगा की ” खुद के Fail होने पर उतना दुःख नहीं होता है जितना दुःख अपने Best दोस्त के प्रथम आने पर होता है”. यह मनुष्य की प्रकृति है जो बिल्कुल सच है | अपनी Class में सबसे ज्यादा नंबर लाना या अपने शहर में सबसे ज्यदा marks लाना | मेरिट लिस्ट में खुद को शामिल करना, यह वह दबाव होता है जो स्टूडेंट खुद में लेता है |

(4) परीक्षा के बाद आने वाला बदलाव- पूरे साल आप पढ़ाई करते है और फिर आपको अपना पूरे साल का रिपोर्ट कार्ड  देना होता है जो की एग्जाम के रूप में आपके सामने आता है | जब परीक्षा पूरी हो जाती है तो आपको फ्री टाइम मिलता है| इस समय उन स्टूडेंट्स को कुछ भी कठिनाई नहीं होती जिन्होने पूरे आत्मविश्वास और लगन से परीक्षा दी होती है लेकिन जिस छात्र ने अच्छी तरह से पढ़कर और पूरी लगन से एग्जाम नहीं दिए होते है या जिसको अच्छा रिजल्ट आने का कॉन्फिडेंस नहीं होता वे छात्र इस समय बहुत परेशान रहते है और वे स्ट्रेस की चपेट में आते है |

परीक्षा के तनाव से कैसे बचे ?

(1) तैयारी पर ध्यान दें - अच्छी तरह सभी पेपर्स की तैयारी करना एग्जाम स्ट्रेस को कम करता है। इसलिए यदि आपकी तैयारी ठीक ढंग से नहीं हो रही हो, तो फिर से रुटीन बनाएं, ताकि सभी विषयों को ठीक से कवर किया जा सके। यदि 10 दिन का समय है और 20 टॉपिक्स पढ़ने हैं तो प्रतिदिन 2 टॉपिक्स को कवर किया जा सकता है। ध्यान रखें कि दिनभर के 24 घंटों में से 18 या 20 घंटे पढ़ने का अव्यावहारिक टाइम टेबल बनाने की भूल बिलकुल न करें। हद से हद 12 घंटे का रोज पढ़ने का समय रखें । इसमें भी बीच-बीच में आराम जरूरी है।

(2) अपना स्टडी प्लान बनाएं – हर स्टूडेंट के पढ़ाई करने का समय अलग-अलग होता है किसी को सुबह उठ कर पढ़ना अच्छा लगता है किसी को शाम में पढ़ना और कोई रात में पढ़ना चाहता है, इससे कोई फर्क नही पड़ता के आप किस समय पढ़ रहें हैं | बस आपको उस समय पढ़ना चाहिए जब आप पढ़ाई के प्रति सहज रहें और सही तरीके से पढ़ें | ऐसा रुटीन कतई न बनाएं जिसे आप कर ही न सकें या जिसके अनुसार तैयारी करने का आपके पास समय ही न हो। समय यदि कम हो तो सेलेक्टिव स्टडी से भी फायदा होता है | आपको अपनी परीक्षा के शेड्यूल के अनुसार अपने पढ़ाई का टाइम-टेबल  बनाना होगा | किस तरह पढ़ना है उसे  पहले से ही प्लान कर लें और फिर उस योजना के तहत दिनचर्या का हर हाल में पालन करे | अगर आपने बेहतर टाइम मेनेजमेंट बनाई है तो इससे एग्जाम की तैयारी में सहूलियत होती है, जिससे आपको तनाव भी नहीं होगा |

(3) परिणाम को लेकर तनाव न लें  - परीक्षा खत्म होने के बाद भी रिजल्ट को लेकर तनाव बना रहता है।  आपको यह सोचकर खुश होना चाहिए कि आपने अपनी तरफ से पूरी मेहनत की। यदि रिजल्ट आशा के अनुरूप नहीं आता, तो भी यह सोचना चाहिए कि यह कोई अंतिम एग्जाम नहीं है और इस सोच के साथ बिल्कुल फ्रेश मन से आगे की प्लानिंग करनी चाहिए। तभी आप सफल होंगे।

(4) सकारात्मक सोच रखें - किसी भी डर को सकारात्मक सोच से दूर किया जा सकता है | सकारात्मक सोच आपको रिलैक्स रखता है और आप बेहतर ढंग से पढ़ाई करने में समर्थ हो पाते हैं। इसलिए पॉजिटिव सोच रखना बहुत जरुरी है | यह आपको नेगेटिव सोच से तो बचाएगा ही साथ ही साथ आपको पढ़ाई के तनाव से भी दूर रखेगा |

(5)  पर्याप्त नींद लें - अच्छी नींद भी जरूरी है। ठीक से न सोने से तनाव वैसे ही बढ़ जाता है। परीक्षा के दौरान भी कम से कम 7 घंटे की नींद जरुर लें आप नींद से किसी भी प्रकार का समझौता

न करे | नींद का मनुष्य के स्वस्थ रहने से घर सम्बन्ध है | आप किसी भी स्वस्थ व्यक्ति से पूछ ले आपको यह जरुर पता चल जायेगा की जो व्यक्ति स्वस्थ होता है वह अपनी नींद पूरी लेता है | मानसिक काम की अधिकता के दौरान न सिर्फ आराम बल्कि नींद की भी पर्याप्त जरुरत होती है |

(6) तुलना कभी नहीं करें – अक्सर ऐसा होता है की हम एग्जाम के समय दोस्तों से तुलना करने लगते हैं कि उसने कितना पढ़ा या नही |  सभी के काम करने का तरीका अलग होता है| इसलिए आप अपने दोस्‍तों से खुद की तुलना करते हैं तो याद रहे कि आपके हाथ बस निराशा ही आएगी |जो भी करना है उसे करने में अपना 100 पर्सेंट दें | कई बार ऐसा होता है कि हम अपनी क्षमता से आगे के प्‍लान बना लेते हैं | इसलिए सबसे पहले अपनी क्षमता को पहचाने और फिर नए अच्छे तरीके से तैयारी करें |

(7) शांत स्थान का चुनाव करें - अगर आपका पढ़ाई का माहौल अच्छा होगा तो तनाव भी आपसे दूर रहेगा | परीक्षा के दिनों में आपका पढ़ाई के लिए ऐसा माहौल होना चाहिए, जहाँ आपको किसी भी प्रकार की बाधा न आये |आप किसी अलग कमरे में पढ़ाई कर सकते है जहाँ कोई और न हो | आप टेलीविज़न की आवाज और म्यूजिक से तथा अन्य किसी भी प्रकार के शोर – शराबे से दूर रहे जिससे आपको कोई अवरोध न हो |

(8) पेरेंट्स भी दें सहयोग- परीक्षा के दिनों में अक्सर माता-पिता छात्रों को नसीहत देते हैं और अच्छा नंबर लाने के लिए दबाव डालते हैं। जो माता-पिता हर समय पढ़ो-पढ़ो की रट लगाए रहते हैं, उन्हें इन दिनों अपने बच्चे का तनाव कम करने में मदद करनी चाहिए न कि जरूरत से ज्यादा उम्मीद पाल कर उनके तनाव को बढ़ाना चाहिए। माता-पिता अगर बच्चों पर विश्वास जताएंगे और उनका सही मार्गदर्शन करेंगे, तो छात्र तनाव से निजात पाकर परीक्षा दे पाएंगे।

(9) मनोरंजन भी है जरूरी - जिस तरह परीक्षा के दिनों में पढ़ाई जरूरी है उसी तरह दिमाग को थोंडा रिलैक्स देने के लिए मनोरंजन भी जरूरी है। पंढाई करते-करते जब थक जाएं तो आप थोड़ी देर खेल-कूद के लिए समय निकाल लें। चाहें तो थोड़ी देर पार्क में टहल आएं, कोई आउटडोर गेम्स खेल लें। अगर घर के बाहर जाने का मन नहीं तो कोई कामेडी फिल्म देख सकते हैं या गेम्स खेल सकते हैं। खेल के लिए थोंडा समय निकालें। परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए यह जरूरी है। लगातार पढ़ाई बोझ की तरह लगने लगती है। इसलिए थोंडा समय खेल-कूद और मनोरंजन को भी दें ताकि पढ़ाई करने में दिल लगे।

निष्कर्ष - ये तमाम ऐसे सुझाव हैं जो छात्र को बोर्ड परीक्षा के दौरान होने वाली समस्याओं से निजात दिला सकते हैं और अच्छे नंबर प्राप्त करने के लिए तैयार करते हैं। यह मान कर चलें कि यदि आप एग्जाम के समय दिए गए टिप्स के अनुसार पढ़ाई करते हैं तो आप बिना तनाव के अपने एग्जाम की तैयारी काफी अच्छी तरह कर सकते हैं |

 

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