मैथ्स मैजिक को समझकर दूर भगाएं मैथ्स फोबिया

मैथ्स – यह विषय जैसा सुनने में भयावह और मुश्किल लगता है वैसा वास्तव में है नहीं. यह बात सही है कि बहुत लोगों को इस सब्ज्केट के नाम से ही डर लगता है लेकिन वास्तविकता तो यह है कि जीवन के हर क्षेत्र में मैथ्स की समान उपयोगिता है. स्कूल की पढ़ाई के बाद भी अन्य सब्जेक्ट्स जैसे फिजिक्स और केमेस्ट्री में भी मैथ्स की जरुरत पड़ती है. मैथ्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि एक बार आपकी रूचि इस सब्जेक्ट में हो जाय तथा यह आपकी समझ में अच्छी तरह से आ जाय तो यह बहुत ही स्कोरिंग सब्जेक्ट है. अगर सही मायनों में देखें तो यह अन्य विषयों की अपेक्षा आसान है बस समझ और रूचि का फेर है.

एक एक्सपर्ट की तरह मैथ्स को टैकल करने के कुछ आसान टिप्स

अधिक से अधिक प्रैक्टिस करें

मैथ्स में माहिर होने का एकमात्र उपाय इसका अधिकतम से अधिकतम प्रैक्टिस करना है. इसके लिए सबसे पहले आप इसके कॉन्सेप्ट को समझें और फिर जितना अधिक से अधिक हो सके उसका प्रयास करें. डे वन से ही इसकी प्रैक्टिस करना शुरू कर दें. इससे एग्जाम आते आते आप सभी कॉन्सेप्ट्स को अच्छी तरह से समझ लेंगे. अगर कभी कभी ऐसा संभव नहीं हो पाता है तो इसके लिए चिंतित होने की जरुरत नहीं है लेकिन बेहतर यही होगा की आप अपनी प्रैक्टिस को निरंतर बनाये रखें

एग्जाम्पल्स को सॉल्व करें

अपनी शुरुआत कभी भी किसी जटिल सवाल को सॉल्व करने से नहीं करें.यदि आपने अभी अभी कोई चैप्टर समाप्त किया है और उसके जटिल सवालों को हल करना शुरू कर दिया, तो हो सकता है कि आप गलत उत्तर दें और इससे हतोत्साहित हो जाएं. इससे हो सकता है कि आप मैथ्स से नफरत करने लगें. इसलिए सबसे पहले टेक्स बुक में दिए गए एग्जाम्प्ल्स को सॉल्व करें. लेकिन क्वेश्चंस को हल करने से पहले उसका उत्तर नहीं देखें. साथ ही अपने सभी स्टेप को भी मिलाएं न कि सिर्फ अपने उत्तर को. जब आपके सभी स्टेप्स सहीं हों तो आप अब सिंपल सवालों को सॉल्व करें और उसके बाद फिर कठिन सवालों को.

अपने सभी डाउट्स क्लियर करें

मैथ्स के सवालों को हल करते समय कोई डाउट होने पर सबसे पहले उसे सही तरीके से समझते हुए दूर करने की कोशिश करें. डाउट को छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश हरगिज मत कीजिये. किसी भी टॉपिक से जुड़े डाउट को आप जितना जल्दी हल करते हैं उतना ही आपकी उस टॉपिक पर पकड़ मजबूत बनती है. आप अपने डाउट्स को दूर करने में अपने टीचर,फ्रेंड या ऑनलाइन एप्स की मदद ले सकते हैं.

सभी फॉर्मूला को नोट डाउन करके रखें

आप अधिकांश समय ज्यादातर चीजों को अपने मेमोरी में कलेक्ट करके रखते हैं. लेकिन कभी कभी यह अवचेतन मन में होने के कारण पूरी तरह से याद नहीं आता है. इसलिए आपने देखा होगा अक्सर लोग फ़ॉर्मूला तथा डायग्राम को अपने टेबल के सामने लगाकर रखते हैं. आप भी अगर संभव हो सके तो सभी फ़ॉर्मूला को नोट डाउन करके रखें और जरुरत पड़े तो अपने स्टडी रूम या टेबल पर चिपका कर रखें ताकि हमेशा आपकी नजर उस पर पड़ती रहे.

फ़ॉर्मूला की व्युत्पति (डिराइवेशन) को समझें

परीक्षा के हिसाब से फ़ॉर्मूला को सीधे सीधे रटने की बजाय उसकी व्युत्पति को समझें. इसे समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन एक बार उसकी व्युत्पति को समझ गए तो समझ लीजिये जिंदगी भर के लिए उसपर आपकी पकड़ बहुत मजबूत हो गयी और अब आप उससे जुड़े हुए किसी भी तरह के सवाल को आसानी से हल कर सकते हैं. आपको हमेशा फ़ॉर्मूला रटने की नहीं बल्कि उसके पीछे के लॉजिक को समझने की जरुरत है. उदहारण के लिए आपको सिर्फ फ़ॉर्मूला सीखने और नंबर रिप्लेस करना सीखने की बजाय यह जानना चाहिए कि क्यों गति केवल दुरी और समय का कार्य हैं ? यदि आप इसे सिर्फ सीखते या रटते हैं तो हो सकता है कि बाद में आप इसे भूल जाएं लेकिन अगर आपका कॉन्सेप्ट क्लियर हो गया तो इसे आजीवन याद रखना संभव होगा.

बेसिक्स को हमेशा ध्यान में रखें

मैथ्स में सबसे जरुरी होता है बेसिक्स को ध्यान में रखना. यहां तक ​​कि यदि आप जेईई के लिए अध्ययन कर रहे हैं, तो आपको 12 से लेकर 9 वीं क्लास तक के सभी बेसिक्स को ध्यान में रखना होगा तभी आप उसेक प्रश्न पत्र को हल कर पाएंगे.गणित में अधिकांश अध्याय पिछले अध्याय पर आधारित होते हैं.यदि आपकी बेसिक्स उतनी मजबूत नहीं है तो आप पिछले साल के सवालों को हल करते समय सभी बेसिक्स को पुनः सीखने और समझने का प्रयास करें.

आप इन दिए गए उक्तियों का पालन कर अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बना सकते हैं तथा मैथ्स के जादू को समझ कर अपने मैथ्स फोबिया को बड़ी आसानी से दूर कर सकते हैं. अब आपके लिए मैथ्स के साथ दोस्ती करने का वक्त आ गया है.

लेखक के बारे में:

मनीष कुमार ने वर्ष 2006 में आईआईटी, बॉम्बे से मेटलर्जिकल एंड मेटीरियल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. उसके बाद इन्होंने जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, यूएसए से मेटीरियल्स साइंस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की और फिर इंडियन स्कूल फाइनेंस कंपनी ज्वाइन कर ली, जहां वे बिजनेस स्ट्रेटेजीज एंड ग्रोथ के लिए जिम्मेदार कोर टीम के सदस्य थे. वर्ष 2013 में, इन्होंने एसईईडी स्कूल्स की सह-स्थापना की. ये स्कूल्स  भारत में कम लागत की के-12 एजुकेशन की क्वालिटी में सुधार लाने पर अपना फोकस रखते हैं ताकि क्वालिटी एजुकेशन सभी को मुहैया करवाई जा सके. वर्तमान में ये टॉपर.कॉम के प्रोडक्ट – लर्निंग एंड पेडागोजी विभाग में वाईस प्रेजिडेंट हैं.

 

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