एक लीडर की पहचान | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 17

हममें से कई लोग लीडर या नेता बनना चाहते हैं और अपने पेशे या अन्य किसी संबद्ध क्षेत्र में महारत हासिल करना चाहते हैं. हम लोग अक्सर देखते हैं कि अपने कार्यक्षेत्र में माहिर या कामयाब लोगों में उच्च नेतृत्व क्षमता होती है और वे लोग अन्य लोगों को भी लगातार प्रेरित करते रहते हैं. विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि वास्तव में सफल लोग या कामयाब लीडर अपने परिवार, समाज और देश से जितना लेते हैं, उससे कहीं अधिक वापिस करते हैं अर्थात अपने परिवार, समाज और देश के उत्थान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. ऐसे ही लोग वास्तव में एक सक्षम और सुप्रसिद्ध लीडर होते हैं. इस इस वीडियो में लीडरशिप कौशल के बारे में शिव खेड़ा जी के महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत हैं:

  • बेरोज़गारी और प्रतिस्पर्धा

इस वीडियो की शुरुआत में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमसे कह रहे हैं - अक्सर आजकल सुनने में आता है कि देश में बेरोज़गारी है, बच्चे स्कूल-कॉलेजों से पढ़कर निकलते हैं और कहते हैं कि उनके लिए नौकरियां नहीं हैं और जॉब मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है. अब शिव खेड़ा जी हमें अपना कई साल पहले का अनुभव बता रहे हैं कि वे कहीं अपना मोटिवेशनल प्रोग्राम कर रहे थे और उस प्रोग्राम में 200 – 300 लोग शामिल थे जो पेशे से डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, अटॉर्नीज़, अकाउंटेंट्स, कारपेंटर्स, प्लम्बर्स, इलेक्ट्रीशियन्स आदि थे. उस प्रोग्राम के शुरू में ही शिव खेड़ा जी ने यह कहा कि, ‘जिंदगी में जैसा समय आज है, वैसा समय पहले कभी नहीं हुआ. जितना आसान आज है सफल होना, पहले कभी भी इतना आसान नहीं था सफल होना. चाहे आपका जो भी पेशा हो, आज के समय में जितना आसान है सफल होना, इससे पहले सफल होना इतना आसान कभी नहीं था.’

  • एक श्रोता का महत्वपूर्ण सवाल और शिव खेड़ा जी का समुचित उत्तर

तब श्रोताओं में से किसी सज्जन ने प्रश्न पूछा कि, ‘आप बताइये कि आजकल प्रतिस्पर्धा कैसे नहीं है?’ तब शिव खेड़ा जी ने उन सज्जन से एक सवाल पूछा जो वे इस वीडियो में हम सभी से फिर पूछ रहे हैं कि, ‘आप बताइए कि आप सड़क पर कितने ऐसे लोगों को जानते हैं जो जितने उनको पैसे मिलते हैं, उससे ज्यादा काम करने को तैयार हैं? ऐसे कितने लोग हैं?.....शायद ही कुछ लोग. ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं जो जितने पैसे उन्हें मिलते हैं, उतना काम नहीं करना चाहते हैं. दूसरा वर्ग ऐसे लोगों का है जो सिर्फ उतना ही काम करना चाहते हैं, जिससे उनकी जान छूट जाये. हमारे बीच काफी कम फीसदी में ऐसे लोग हैं जो जितना पैसा उन्हें मिलता है, उससे ज्यादा काम करने को तैयार रहते हैं.’ तब शिव खेड़ा जी ने उन सज्जन से फिर पूछा कि, ‘अगर आप उस छोटी प्रतिशत में शामिल हो तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका पेशा कौन-सा है? आप मुझे बताइए कि प्रतिस्पर्धा है कहां?’

  • अच्छे पेशेवरों की है कमी

अब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर हमें कह रहे हैं कि आज की तारीख में हमें एक अच्छा वकील नहीं मिलता, हमें एक अच्छा अकाउंटेंट नहीं मिलता, एक अच्छा कारपेंटर नहीं मिलता और एक अच्छा  प्लम्बर नहीं मिलता. फिर वे हमसे पूछते हैं कि क्या हमें जितने पैसे मिलते हैं, उससे ज्यादा काम करने के लिए हम तैयार हैं?

  • सफल लोगों की जीवनियों से मिलते हैं सटीक उदाहरण

इस वीडियो में आगे विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें कह रहे हैं कि हम ऐसे लोगों की जीवनियां पढ़ें जो सफल हुए हैं और सफलता हासिल करने के बाद उन लोगों ने अपनी सफलता को बरकरार रखने के साथ ख्याति भी हासिल की है. दरअसल, बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो सफल तो हो जाते हैं परंतु अपनी सफलता को कायम नहीं रख सकते और अपनी सफलता के शिखर से नीचे गिर जाते हैं. ऐसे लोग जो सफल हुए हैं और उन्होंने अपनी सफलता को कायम रखने के साथ प्रसिद्धी भी हासिल की है, वे सभी लोग अपने जीवन में एक सिद्धांत पर जीते हैं. वह सिद्धांत यह है कि, ‘मुझे जितना मिला है उससे ज्यादा लौटाऊंगा अपने परिवार को, जितना मिला है उससे ज्यादा लौटाऊंगा अपनी कंपनी और अपने ग्राहक को..... जितना मिला है, उससे ज्यादा लौटाऊंगा अपने समाज और अपने देश को.’

  • प्रतिस्पर्धा है कहां?

इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें आगे समझा रहे हैं कि हम सभी लोग अगर यह सोच अपना लें कि हमें जितना मिला है, उससे ज्यादा लौटायेंगे अपने परिवार, समाज और देश को......तो फिर यह प्रतिस्पर्धा है कहां?? यह एक सोच और जीने का तरीका है जिससे प्रतिस्पर्धा नहीं रहती. ऐसे लोग खुद दुनिया के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए लायक बन जाते हैं, उनके लिए तो फिर प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है.   

  • शिव खेड़ा जी का व्यक्तिगत उदाहरण

अब इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमारे सामने अपना उम्दा उदाहरण रखते हुए ‘परमात्मा का शुक्रिया’ अदा कर रहे हैं और हमें बता रहे हैं - उन्हें नहीं लगता कि पिछले 30 वर्षों में उनके दफ्तर से कभी भी कॉर्पोरेट बिजनेस में काम मांगने के लिए एक फ़ोन कॉल की गई हो. खेड़ा जी के मोटिवेशनल कार्यक्रमों के लिए पिछले 30 सालों से उनके दफ्तर में कॉर्पोरेट ग्राहकों की तरफ से ही फ़ोन कॉल्स आई हैं. फिर वे हमसे पूछ रहे हैं कि, आखिर क्यों उनके ग्राहक उन्हें ही विभिन्न मोटिवेशनल कार्यक्रमों के लिए बुलाते हैं? क्या वे अन्य लोगों से ज्यादा पढ़े-लिखे और क्वालिफाइड हैं? बिलकुल नहीं. वे बता रहे हैं कि उन्होंने तो दसवीं भी पास नहीं की है. ऐसे में, क्या वे सबसे काबिल हैं? .....बिलकुल नहीं. कई लोग उनसे बहुत ज्यादा क्वालिफाइड हैं.

  • ग्राहकों के प्रति शिव खेड़ा जी की प्रतिबद्धता

अब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें अपनी ‘सफलता का राज़’ बताते हुए यह कह रहे हैं कि, उनके ग्राहक उन्हें इसलिए हायर करते हैं क्योंकि वे अपने ग्राहकों के प्रति कभी 100 फीसदी नहीं, बल्कि हमेशा 200 फीसदी प्रतिबद्ध रहते हैं. वे फिर हमसे पूछ रहे हैं कि ‘मुझे बताइए – प्रतिस्पर्धा कहां है?’ दरअसल, लोग सफल तो होना चाहते हैं लेकिन सफल होने के लिए तैयारी की कीमत नहीं चुकाना चाहते हैं. बस यही सच्चाई है.

  • देश के बारे में पूछे गए सवाल का सटीक जवाब

इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमसे आगे कह रहे हैं कि जहां तक देश के बारे में सवाल है तो इस संदर्भ में स्वामित्व या मिल्कियत के उदाहरण पर विचार किया जा सकता है. हम अक्सर देखते हैं कि कई लोग बड़े गर्व से यह बोलते हैं कि वे एक ‘पार्टी मैन’ (दल के सदस्य) हैं. अब इसमें कोई दोराय नहीं कि, किसी भी दल के प्रति निष्ठा या वफादारी रखना बहुत जरूरी है. लेकिन हम यह भी देखते हैं कि, किसी दल में कई लोग गलत काम कर रहे हैं या फिर, उस दल के नेता गलत काम कर रहे हैं.....तो भी ऐसे लोग अपने दल से ही चिपके रहते हैं और बड़े गर्व से यह कहते हैं कि वे एक ‘पार्टी मैन’ हैं. दुःख की बात तो यह है कि देश में ‘पार्टी मैन’ तो कई लोग हैं लेकिन ‘कंट्री मैन’ खत्म हो गये हैं. आजकल हमें कोई ‘कंट्री मैन’ ही नहीं दिखता है. हमें यह जरुर सोचना चाहिए कि हमारी निष्ठा किसके साथ होनी चाहिए? .....अपने देश के साथ या किसी दल-विशेष के साथ.

  • अपने सिद्धांतों के प्रति निष्ठा रखना है जरुरी

अब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमसे कह रहे हैं कि, ‘कई लोग यह कहते हैं कि वे अमुक लीडर के प्रति निष्ठावान हैं. अब आप ही सोचिए कि आपकी निष्ठा किसी लीडर के साथ होनी चाहिए या फिर अपने सिद्धांतों के साथ होनी चाहिए? आज मैं आपका नेता हूं और आप मेरे प्रति निष्ठावान हैं......कल को अगर ऐसा कोई लीडर चरस-गांजा बेचने लगता है, देश को बेचने लगता है..... तो क्या आपकी निष्ठा तब भी उस लीडर के प्रति होनी चाहिए?’  आपकी निष्ठा तो वास्तव में अपने सिद्धांतों और उसूलों के प्रति होनी चाहिए. इसलिए हमें यह जरुर समझाना चाहिए कि ‘हम लोग कर क्या रहे हैं?’.....तभी हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कामयाब हो सकेंगे.

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