क्यों 9 वीं क्लास है 10 वीं क्लास से ज्यादा महत्वपूर्ण?

तकरीबन जो कुछ भी आप स्कूल में पढ़ते हैं वह आपके बोर्ड एग्जाम की तरफ ही जाता है. 10 वीं क्लास पहला ऐसा चुनौतीपूर्ण एग्जाम होता है जिसका आप सामना करेंगे. इससे आप निर्णय कर पायेंगे कि आप अपने जीवन में क्या करना चाहते हैं? इसके अलावा, इससे आपको अपने ऐसे सब्जेक्ट्स चुनने में भी मदद मिलती है जो आपको सबसे ज्यादा पसंद होते हैं. कुछ शहरों में तो स्टूडेंट्स जूनियर कॉलेज में प्रवेश करते हैं जिससे उनकी आकांक्षाओं और व्यक्तित्व को आकार मिलता है.

10 वीं क्लास के महत्व के साथ, स्टूडेंट्स अक्सर 9 वीं क्लास में पढ़ाए जाने वाली सब्जेक्ट्स को नज़रंदाज़ कर देते हैं क्योंकि आमतौर पर स्टूडेंट्स के फाइनल बोर्ड एग्जाम स्कोर में 9 वीं क्लास के स्कोर को गिना नहीं जाता है. लेकिन अगर आप एक ऐसे स्टूडेंट हैं जो अपने भावी करियर के लिए इन टॉपिक्स को वास्तव में अच्छी तरह समझना चाहता है, तो यहां आपको बताया जा रहा है कि क्यों आप अपनी 9 वीं क्लास की पढ़ाई पर भी अच्छी तरह ध्यान दें.

9 वीं क्लास तैयार करती है 10 वीं क्लास के लिए फाउंडेशन

इसके पीछे भी कारण है कि क्यों कुछ कॉन्सेप्ट्स आपको 9 वीं क्लास में पढ़ाए जाते हैं? ये कॉन्सेप्ट्स आपने बोर्ड एग्जाम के सिलेबस के लिए फाउंडेशन का काम करते हैं. पहले इन कॉन्सेप्ट्स को अच्छी तरह समझे बिना, आप अपने बोर्ड के सिलेबस को पूरी तरह से नहीं समझ सकेंगे. जब आप अपनी 10 वीं क्लास में न्यूमेरिकल प्रॉब्लम्स या जटिल थ्योरम्स को सॉल्व करेंगे तो यह आपके लिए एक रुकावट की तरह साबित होगा.

आखिर में, आपको टॉपिक्स को याद करने के लिए शायद रट्टे ही मारने पड़ें. इससे आगे चलकर, खासकर अगर आप किसी इंजीनियरिंग या मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम के लिए तैयारी करेंगे तो, आपको कोई फायदा नहीं होगा.

9 वीं क्लास का सिलेबस 11 वीं क्लास के सिलेबस के अनुकूल होता है

अगर आप एक सीबीएसई स्टूडेंट हैं तो, पहली नजर में, आपको ऐसा लग सकता है कि आपका 9 वीं क्लास का सिलेबस 10 वीं क्लास के सिलेबस से ज्यादा मिलता-जुलता नहीं है. इसी वजह से आप अपनी 9 वीं क्लास के सिलेबस को नजरअंदाज करके सीधे 10 वीं क्लास को महत्व देना चाहते हैं. लेकिन अधिकतर एजुकेटर्स के मुताबिक, सीबीएसई ने आपके 9 वीं क्लास के सिलेबस को आपकी 11 वीं क्लास के सिलेबस का आधार के तौर पर तैयार किया है. आपका 10 वीं क्लास का सिलेबस आपकी 12 वीं क्लास के लिए आधार के तौर पर काम करता है. उदाहरण के लिए, जब हम किनेमेटिक्स और लॉज़ ऑफ़ मोशन की बात करें तो, आप अपनी 9 वीं क्लास में इस टॉपिक के कॉन्सेप्ट्स और इक्वेशंस सीखते हैं और अपनी 11 वीं क्लास में आप इन्हें अप्लाई करना सीखते हैं, इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप अपनी 9 वीं क्लास में ही उक्त कॉन्सेप्ट्स को अच्छी तरह समझ लेते हैं तो आपको अपनी 11 वीं क्लास में काफी आसानी रहेगी.

इसके अलावा, आप यह भी याद रखें कि आपके 12 वीं क्लास के सीबीएसई बोर्ड एग्जाम्स आपकी 11 वीं क्लास और 12 वीं क्लास के सिलेबस पर आधारित होते हैं. इसलिए, आपके लिए यह बेहतर रहेगा यदि आप अपनी 9 वीं क्लास को अभी नज़रंदाज़ न करें ताकि बाद में आपको अपने कॉम्पीटिटिव एग्जाम्स के लिए उक्त टॉपिक्स को ज्यादा प्रेशर से न पढ़ना पढ़े.

9 वीं क्लास में आपको अपने भावी करियर ऑप्शन्स के बारे में एक झलक मिल जाती है

यह समझने के लिए आप अपनी भावी जीवन में क्या बनना चाहते हैं?.....आपकी 9 वीं क्लास एक मील का पत्थर है. यह वह समय है जब आप अपने इंटरेस्ट्स का मूल्यांकन करते हैं और अपने भविष्य के लिए रास्ता चुनते हैं. इसलिए अपनी 9 वीं क्लास में हरेक सब्जेक्ट और अन्य एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज जैसेकि, इंग्लिश, फिजिक्स, मैथ्स, वॉलीबॉल, डिबेट और इलोक्यूशन/ भाषण आदि पर फोकस करें. जब आप अपना कोर्स चुनेंगे तो इससे आपको एक बेहतर आधार मिलेगा.

अगर आप अपनी 10 वीं क्लास में केवल अच्छे मार्क्स लेने पर ही ध्यान देंगे तो, आपके मार्क्स तो अच्छे आ जायेंगे लेकिन जब अपने इंटरेस्ट्स को जाहिर करने की बात आपके सामने आएगी तो आप पूरी तरह से असमंजसपूर्ण स्थिति में पड़ जायेंगे.

सारांश

आपकी 9 वीं क्लास असल में आपकी रेगुलर स्कूल लाइफ और आपकी मैच्योरिटी के बीच एक महत्वपूर्ण ब्रिज है ताकि आप अपने भविष्य को आकार देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय ले सकें. यद्यपि आपके 9 वीं क्लास के मार्क्स आपके वास्तविक बोर्ड एग्जाम्स में गिने नहीं जायेंगे, तो भी हरेक लम्हे को एंज्वाय करें और वर्तमान में जीयें क्योंकि यह समय फिर कभी भी वापस नहीं आएगा.

लेखक के बारे में:

मनीष कुमार ने वर्ष 2006 में आईआईटी, बॉम्बे से मेटलर्जिकल एंड मेटीरियल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. उसके बाद इन्होंने जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, यूएसए से मेटीरियल्स साइंस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की और फिर इंडियन स्कूल फाइनेंस कंपनी ज्वाइन कर ली, जहां वे बिजनेस स्ट्रेटेजीज एंड ग्रोथ के लिए जिम्मेदार कोर टीम के सदस्य थे. वर्ष 2013 में, इन्होंने एसईईडी स्कूल्स की सह-स्थापना की. ये स्कूल्स  भारत में कम लागत की के-12 एजुकेशन की क्वालिटी में सुधार लाने पर अपना फोकस रखते हैं ताकि क्वालिटी एजुकेशन सभी को मुहैया करवाई जा सके. वर्तमान में ये टॉपर.कॉम के प्रोडक्ट – लर्निंग एंड पेडागोजी विभाग में वाईस प्रेजिडेंट हैं.

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