आईआईएम कलकत्ता के डीन, प्रोफेसर प्रशांत मिश्रा के साथ जागरण जोश का इन्टरव्यू

आईआईएम  कलकत्ता, भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक है. इस वीडियो में आईआईएम कलकत्ता के डीन (एक्सटर्नल रिलेशंस एंड न्यू इनिसिएटिव्स) प्रशांत मिश्रा यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि आईआईएम कलकत्ता एमबीए एजुकेशन में किस तरह नए मानक स्थापित कर रहा है ?  इसके साथ ही वे भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन के भविष्य के विषय में बात करते हुए यह भी बता रहे हैं कि एक बी-स्कूल से एमबीए करने वाले अभ्यर्थियों की क्या खूबियाँ होनी चाहिए तथा उनमें किस तरह के स्किल्स होने चाहिए ?

भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन का भविष्य

1960 के दशक तक मैनेजमेंट एजुकेशन ने भारत में अपनी जड़ें जमा ली थी तथा अगले दो दशकों तक इसे सामजिक विज्ञान की कैटेगरी में रखा गया था. 1990 के दशक में इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्प्यूटर साइंस ने मैनेजमेंट एजुकेशन सहित हर क्षेत्रों को प्रभावित किया. इसलिए अपने इस नए स्वरुप में आने के क्रम में मैनेजमेंट एजुकेशन ने बहुत सारे बदलाव और मंथन किए हैं. पिछले दशक में मैनेजमेंट एजुकेशन के अंतर्गत एडवांस डिजिटलीकरण और इंटरनेट टेक्नोलॉजी को महत्व दिया गया था जिसमें बिग डेटा,डेटा डेटा एनालिटिक्स और इस तरह के अन्य प्लेटफॉर्म शामिल थे.पिछले 6 दशकों के दौरान केवल वे उन्हीं संस्थाओं ने ग्रोथ किया जिन्होंने अपने सिलेबस में नए ट्रेंड्स को शामिल करते हुए उसके अनुरूप छात्रों को स्टडी कराया.

सामान्यतः नए ट्रेंड्स को स्वीकार करना तथा नए टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुए आगे बढ़ना मैनेजमेंट एजुकेशन के दिनोदिन विकसित होने की एक मुख्य वजह है. लेकिन आगे के दौर में एमबीए बहुआयामी होने जा रहा है और यह न सिर्फ सोशल साइंस और टेक्नीकल स्किल्स को कवर करेगा  बल्कि डेटा एनालिटिक्स, डिजिटलीकरण और अन्य उभरते ट्रेंड्स और उभरते क्षेत्रों को भी कवर करेगा. ये सभी फैक्टर्स  एक साथ बी-स्कूलों में पढ़ाई जाने वाले सिलेबस को स्वाभाविक रूप से सही दिशा और आकार देंगे.

मुख्य स्किल्स जिनकी तलाश बी-स्कूल्स एमबीए उम्मीदवारों में करते हैं

बी-स्कूल कठोर पाठ्यक्रम और शिक्षण प्रक्रियाओं को समझने तथा उनका सही तरीके से सामना करने के लिए छात्रों में एक निश्चित प्रतिभा की तलाश करते हैं. छात्रों के इन्ही कुछ गुणों का परीक्षण एमबीए एंट्रेंस एग्जाम के माध्यम से किया जाता है.साथ ही मैनेजमेंट के उम्मीदवारों के कम्युनिकेशन स्किल्स तथा पीपल मैनेजमेंट जैसे सोशल स्किल्स और मजबूत क्वांटीटेटिव स्किल्स आदि में माहिर मजबूत विश्लेषणात्मक क्षमता की पहचान की जाती है.इसके अतिरिक्त छात्रों के बीच अन्य विविध स्किल्स को नेविगेट करने की क्षमता और विभिन्न प्रकार के डोमेन को एकीकृत करने की क्षमता को परखने पर भी चयन प्रक्रिया के दौरान विशेष जोर दिया जाता है.

बी स्कूल्स द्वारा मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को प्रदान किये जाने वाले स्किल्स  

एमबीए संस्थानों विशेष रूप से आईआईएम मे छात्रों को अद्वितीय पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाती है तथा यह पाठ्यक्रम उनके विश्लेषणात्मक और सामाजिक कौशल को सुधारने में मदद करता है.इस काम को  विभिन्न असाइनमेंट, ग्रुप एक्टिविटीज और केस-स्टडी के माध्यम से किया जाता है. छात्र अपने विश्लेषणात्मक और सामाजिक कौशल को बढ़ाने के लिए आपस में बातचीत, डिस्कशन और डिबेट  करते हैं. इसी तरह आईआईएम ने कई नवीन शैक्षणिक अंतरालों जैसे कि केस मेथड, सिमुलेशन आदि को भी विकसित किया और अपनाया है.यह उन स्किल्स की नींव को मजबूत या निर्मित करते हैं जिनके लिए छात्र किसी विशेष कोर्स में एडमिशन लेते हैं.

रिक्रूटर्स बी-स्कूल्स ग्रेजुएट्स में किन गुणों की तलाश करते हैं ?  

रिक्रूटर्स या इंडस्ट्री द्वारा सामान्यतः मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स के बीच तीन प्रमुख स्किल्स की खोज की जाती है -

  • समस्या को सुलझाने का स्ट्रांग स्किल्स
  • ज्ञान की मजबूत नींव
  • जटिल वातावरण यानी अच्छे सामाजिक और लोगों के मैनेजमेंट स्किल्स को नेविगेट करने की क्षमता

 बी-स्कूल्स में पढ़ाई के दौरान इन गुणों को इस तरह से विकसित कर दिया जाता है कि वे जब इंडस्ट्री में शामिल होते हैं तो इसके लिए वे मानसिक तथा शारीरिक रूप से तैयार रहते हैं. केस स्टडीज और प्रोजेक्ट वर्क के जरिये वे अपने अनुभव को और नया आयाम देते है. इसलिए अद्वितीय शिक्षण पद्धति और टेक्नीकल टूल्स की मदद से बी- स्कूल्स उम्मीदवारों को एक परफेक्ट प्रोफेशनल के रूप में तैयार करते हैं.

इंडस्ट्री इंटरैक्शन बनाम केस स्टडीज बनाम क्लासरूम लेक्चर्स

पिछले कुछ वर्षों में बी-स्कूलों ने विभिन्न शिक्षण मॉडल विकसित किए और अपनाए हैं और यह मैनेजमेंट एजुकेशन के विभिन्न पहलुओं में छात्रों को प्रशिक्षित करने में मदद करते हैं और उन्हें एक प्रोफेशनल मैनेजर के रूप में विशेष स्किल हासिल करने में मदद करते हैं. आमतौर पर बी-स्कूलों में उपयोग किए जाने वाले तीन प्रमुख शैक्षणिक उपकरण हैं

  • इंडस्ट्री इंटरैक्शन
  • केस स्टडी / केस मेथड
  • क्लासरूम लेक्चर्स

विशेष रूप से सैद्धांतिक पहलुओं से निपटने और छात्रों के बीच नई प्रबंधन अवधारणाओं को पेश करने के दौरान, जहां गहन ज्ञान की आवश्यकता होती है, कुछ विषयों और डोमेन के लिए क्लासरूम लेक्चर्स मॉडल बहुत योग्य शैक्षणिक उपकरण साबित हुआ है.अपनी संश्लेषण क्षमता को बढ़ाने के लिए डेटा तथा इनफॉर्मेशन  पर काम करने में सक्षम होना चाहिए. आपको दूसरों की बात पर बहस करने के साथ साथ दूसरों की बात सुनने में भी सक्षम होना चाहिए. अपने स्वयं के दृष्टिकोण की आलोचना को स्वीकार करने तथा सभी की बात को सुनकर एक निश्चित समाधान तक पहुँचने की क्षमता भी मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के अंतर्गत होनी चाहिए. इस दौरान केस स्टडी मेथड बहुत कारगर सिद्ध होती है.

इंडस्ट्री इंटरैक्शन भी बी-स्कूल की शैक्षणिक संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है क्योंकि वे कक्षा में सबसे अधिक समकालीन, वास्तविक जीवन के अनुभवों को समझने में मदद करते हैं और उन इंटरैक्शन से उम्मीदवार आज की दुनिया में घट रही घटनाओं के आधार पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में सक्षम होते हैं.

इसलिए, ऊपर सूचीबद्ध सभी तीन उपकरणों का अलग अलग सन्दर्भों में प्रयोग किया जाता है. इनमें से किसी को भी  मैनेजमेंट एजुकेशन के सन्दर्भ में वरीयता या प्राथमिकता नहीं दी जा सकती है.

ये सभी उपकरण मैनेजमेंट एजुकेशन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित हैं और इसलिए इन सभी का बी-स्कूल की शैक्षणिक संस्कृति में अपना विशिष्ट स्थान है.

बी-स्कूल रैंकिंग में आईआईएम कलकत्ता का लगातार बेहतर प्रदर्शन

आईआईएम कलकत्ता विभिन्न स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा सम्मानित विभिन्न रैंकिंग में भाग लेता है. संस्थान रैंकिंग और मान्यता को बहुत महत्व देता है. फलतः यह भारत का एकमात्र बी-स्कूल है जिसे अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से ट्रिपल मान्यता प्राप्त है.

  • एएसीएसबी
  • ईक्यूयूआईएस
  • एएमबीए

आईआईएम कलकत्ता की उपस्थिति इंटरनेशनल लेवल पर दर्ज कराने के लिए यह इंस्टीट्यूट अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में भी भाग लेता है.

विश्वस्तरीय मैनेजमेंट एजुकेशन प्रदान करने के लिए इस इंस्टीट्यूट की प्रतिबद्धता के कारण इसके प्रयासों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा भी मान्यता मिली है.

न केवल भारत में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अद्वितीय पाठ्यक्रम, लर्नेड फैकल्टी , छात्रों के अनुभव, सही वातावरण और बुनियादी ढांचे, पुस्तकालय, हॉस्टल आदि की सुविधा जैसे कारक इस इंस्टीट्यूट को एक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट बनाने में मदद करते हैं. आईआईएम कलकत्ता कैम्पस में रहने वाले छात्रों तथा डे स्कॉलर्स सभी को सही रोजगार मुहैया कराने में भरपूर मदद करता है. यह इंस्टीट्यूट रिसर्च वर्क पर भी बहुत ज्यादा फोकस करता है. इसके लिए फैकल्टी तथा स्टूडेंट्स दोनों ही मैनेजमेंट एजुकेशन से जुड़े सार्वजनिक नीति, आर्थिक नीति से सम्बंधित समकालीन मुद्दों तथा अत्याधुनिक रिसर्च में संलग्न रहते हैं.

किसी भी तरह की प्रतियोगिता में शीर्ष पर पहुँचने के लिए निश्चित रूप से बहुत अधिक प्रयास की आवश्यकता होती है लेकिन शीर्ष पर होना आपके अधिकतम प्रयास को दर्शाता है.आईआईएम कलकत्ता एक इंस्टीट्यूट के रूप में इस तथ्य के प्रति बहुत जागरूक है और बाहरी मूल्यांकन और प्रतिक्रिया के आधार पर अपने आप को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने के लिए एक निश्चित डोमेन पर काम करता है.

आईआईएम कलकत्ता का फ्यूचर विजन

आईआईएम कलकत्ता ने आने वाले दिनों में अपने लिए निम्नलिखित प्राथमिकताएं तय की हैं:

  1. अंतर्राष्ट्रीयकरण: आईआईएम कलकत्ता फिलहाल जिस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विद्यमान है, उससे  बहुत अधिक आगे बढ़ना चाहता है. यह बी-स्कूल अपनी भौगोलिक सीमाओं से परे अपने शैक्षणिक पदचिह्न का विस्तार करना चाहता है.
  2. फैकल्टी स्ट्रेंथ : यह इंस्टीट्यूट अपनी फैकल्टी स्ट्रेंथ को बढ़ाना चाहता है. अब तक इस बी-स्कूल में 90 फैकल्टी मेम्बर्स हैं हालांकि, कोर डिग्री क्षेत्र के साथ-साथ एग्जीक्यूटिव एजुकेशन और रिसर्च जैसे अन्य क्षेत्रों में अपने कार्यों का विस्तार करने के लिए इस इंस्टीट्यूट को गुणवत्ता पर समझौता किए बिना अपनी फैकल्टी स्ट्रेंथ को बढ़ाना होगा.
  3. एग्जीक्यूटिव एजुकेशन : एग्जीक्यूटिव एजुकेशन भी एक और प्राथमिकता है जिस पर बी स्कूल्स मुख्य रूप से फोकस करते हैं.आज भी आईआईएम  कलकत्ता काम करने वाले अधिकारियों की सतत शिक्षा जरूरतों को पूरा करने वाला एक अग्रणी संस्थान है. आईआईएम कलकत्ता लॉन्ग डिस्टेंस और टेक्नोलॉजी इनेबल्ड कार्यकर्मों  के लिए भी एक पायनियर इंस्टीट्यूट है. यह इंस्टीट्यूट अपने इन प्रोग्राम्स का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करना चाहता है,खासकर पड़ोसी देशों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे देशों में.

छात्रों और फैकल्टी के बीच सम्बन्ध

अगर आईआईएम कलकत्ता के कैम्पस कल्चर की बात की जाय तो यहाँ अधिकांशतः बहुत ही कॉलेजियल (सौहार्द पूर्ण) माहौल रहता है. इस इंस्टीट्यूट ने कामों के पदानुक्रम की एक अनूठी अवधारणा विकसित की है, जिसमें सहयोगियों को अपने शैक्षणिक जीवन में और बेहतर करने के लिए एक बहुत ही स्वस्थ प्रतियोगिता रखना होता है या उसका सामना करना पड़ता है.

इसी तरह, जब फैकल्टी और छात्र संबंधों की बात आती है, तो शिक्षक के रूप में आईआईएम  कलकत्ता की फैकल्टी  खुद को छात्रों के हित का संरक्षक मानते हैं. वे छात्रों की चिंताओं को महसूस कर उसके बारे में सोचते हैं और इससे  उनके बीच विश्वास जन्य सम्बन्ध विकसित होता है.

मैनेजमेंट के उम्मीदवारों को सलाह

एमबीए के उम्मीदवारों को अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित होना चाहिए. साथ ही यह बात उनके दिमाग में पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए कि वे मैनेजमेंट एजुकेशन के फील्ड में क्यों आना चाहते हैं ?  

चूँकि मैनेजमेंट एजुकेशन की मांग बहुत हद तक पारंपरिक शैक्षणिक डोमेन की तुलना में बिलकुल अलग है और इसकी अपेक्षाएं काफी हद तक यूनी-डायमेंशनल हैं.मैनेजमेंट में एडमिशन लेने के बाद, छात्रों को ज्ञान की बढ़ोत्तरी के लिए विविध आयामों के जरिये ज्ञान हासिल करना होता है तथा उनका प्रयोग भी भिन्न भिन्न परिस्थितियों में भिन्न भिन्न रूपों में करना पड़ता है. इसके अंतर्गत सामाजिक विज्ञान से लेकर क्वांटीटेटिव स्किल्स, फायनांस और नवीनतम तकनीकी से जुड़े विकास शामिल हैं. यह वह जगह है जहां विभिन्न डोमेन को एकीकृत करने और विभिन्न स्किल्स को सीखने की क्षमता को उजागर करने का प्रयास किया जाता है.

साथ ही मैनेजमेंट उम्मीदवार में एक सॉलिड नॉलेज फाउंडेशन का होना अत्यंत ही आवश्यक है. अपना मैनेजमेंट एजुकेशन पूरा करने के दौरान और उसके बाद भी स्ट्रांग एनालिटिकल स्किल उम्मीदवार के करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. स्ट्रांग एनालिटिकल स्किल के लिए क्वांटीटेटिव स्किल्स और सोशल स्किल्स पर बहुत अच्छी पकड़ की आवश्यकता होती है. अगर किसी कारणवश ये गुण स्वाभाविक रूप से उम्मीदवारों में विकसित नहीं है तो वे इसे अपनी एमबीए एजुकेशन के दौरान थोड़े से प्रयास से विकसित कर सकते हैं. लेकिन यदि उम्मीदवारों में ये गुण पहले से ही हैं तो उन्हें इसे और परिवर्धित करने का मौका मिलता है तथा इससे उन्हें अपने करियर में अच्छे अवसर मिलते हैं.

विशेषज्ञ के बारे में:

प्रशांत मिश्रा आईआईएम कलकत्ता के डीन (एक्सटर्नल रिलेशंस एंड न्यू इनिसिएटिव्स) हैं. आईआईएम कलकत्ता में एक फैकल्टी के रूप में वे मार्केटिंग मैनेजमेंट,मार्केटिंग रिसर्च,सर्विस मार्केटिंग, रीटेल मैनेजमेंट और कंज्यूमर विहैवियर जैसे विभिन्न कोर्सेज पढ़ाते हैं. आईआईएम कलकत्ता से पहले उन्होंने पीआईएमआर इंदौर, (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय), निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (निरमा यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) और एनएमआईएमएस  मुंबई में पढ़ाया है. उन्होंने कस्टमर ओरिएंटेशन ऑडिट्स से शुरू होने वाले विभिन्न प्रकार के डोमेन जैसे ब्रांड स्ट्रेटेजी, मार्केट मैपिंग, बिक्री प्रक्रिया में सुधार आदि में  सरकारी,सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए कंसल्टेंसी का कार्य भी किया है.

 

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