क्या बीटेक करने के बाद एमबीए करना जरुरी है ?

बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर की डिग्री आजकल मास्टर लेवल के कोर्सेज में सर्वाधिक मांग वाली डिग्रियों में से एक है. लगभग सभी एकेडमिक पृष्ठभूमि के छात्र देश के टॉप बी-स्कूलों में से एक में अपना सीट सुरक्षित करना चाहते हैं. कॉमन एडमिशन टेस्ट या कैट देश में सबसे लोकप्रिय मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस परीक्षा में उपस्थित उम्मीदवारों में से अधिकांश इंजीनियरिंग के छात्र होते हैं. अब सवाल यह उठता है कि एक बीटेक स्टूडेंट एमटेक करने की बजाय एमबीए क्यों करना चाहते हैं और अगर उन्हें एमबीए ही करना था तो फिर बीटेक क्यों किया ? वस्तुतः बीटेक करने के बाद एमबीए करने के बहुत सारे फायदे हैं. आइये उन फायदों में से कुछ को जानने की कोशिश करते हैं.

इस सन्दर्भ में पहला तर्क यह दिया जा सकता है कि ग्रेजुएशन लेवल पर बीटेक डिग्री और पोस्ट ग्रेजुएशान लेवल पर एमबीए की डिग्री प्राप्त करने से छात्रों को टेक्निकल और प्रोफेशनल दोनों ही क्षेत्रों का ज्ञान हो जाता है तथा इनसे जुड़े स्किल्स डेवेलप होते हैं. तो यह स्पष्ट ही है कि अगर किसी के पास प्रोफेशनल और टेक्निकल नॉलेज दोनों ही हो तो निश्चित रूप से मार्केट में उनकी डिमांड ज्यादा होगी.

बीटेक या एमबीए के बाद काम?

ऐसे कुछ उम्मीदवार हैं जो मैनेजमेंट प्रोग्राम में एडमिशन लेने से पहले कुछ व्यावहारिक कार्य अनुभव प्राप्त करना पसंद करते हैं. वे एक मैनेजमेंट प्रोग्राम को आगे बढ़ाने और अपने बिजनेस मैनेजमेंट स्किल्स को विकसित करने से पहले ग्रेजुएशन लेवल के क्षेत्र में अनुभव हासिल करने के लिए एक या दो साल काम करना पसंद करते हैं.वास्तव में  यह एक बहुत ही व्यवहारिक विकल्प प्रतीत होता है क्योकि जब उम्मीदवार अपनी मैनेजमेंट की  डिग्री के पूरा होने के बाद नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं तो उनके पास दो अलग-अलग पृष्ठभूमि में काम करने तथा दो अलग अलग स्किल्स में निपुणता के साथ काम करने के कुछ व्यावहारिक कार्य अनुभव होते हैं. साथ ही वे इससे अपने एमबीए की फीस को बिना किसी परेशानी के भर सकते हैं.

एक इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले स्टूडेंट्स किसी ऐसे स्पेशलाइजेशन का चुनाव कर सकते हैं जिनसे उन्हें दोनों ही फील्ड के जरुरी स्किल्स की जानकारी हो जाय. इसके लिए उन्हें ऐसे  कॉलेजों और पाठ्यक्रमों को शॉर्टलिस्ट करना होगा जो उनकी प्रोफ़ाइल को बढ़ाने में उनकी मदद कर सकते हों. देश में अच्छे एमबीए संस्थानों की कोई कमी नहीं है, हालांकि सभी कॉलेज में सभी स्पेशलाइजेशन की पढ़ाई नहीं होती है. तो स्टूडेंट्स अपनी जरूरतों के अनुरूप यह पता करें कि उनके लिए कौन सा कॉलेज सर्वश्रेष्ठ है ?

आज के समय में मैनेजमेंट की डिग्री करने के कुछ फायदे यहां दिए गए हैं

सैलरी में बढ़ोतरी

एमबीए गेजुएट्स की सैलरी औसतन 70 000 रूपये  (सरकारी संस्थानों या गैर-लाभकारी संस्थाओं ) से लेकर 120,000 (कंसल्टेंसी,फायनांस या हेल्थ) तक होती है.इस मामले में, 2-3 वर्षों में  कोई भी स्टूडेंट अपनी शिक्षा में किए गए निवेश को कवर कर सकता है. एक अनुमान के अनुसार किसी टॉप एमबीए कॉलेज से एमबीए करने पर औसतन 110,000 अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं.

 

करियर के सर्वश्रेष्ठ अवसर

एमबीए ग्रेजुएट्स के पास सीनियर मैनेजमेंट पोस्ट पाने का बेहतर और उच्च अवसर होता है. इस तरह की स्थिति एक उच्च सैलरी दिलाती है लेकिन इसके साथ ही अधिक जिम्मेदारी के साथ और अत्यधिक समय तक काम भी करना पड़ता है.

बेस्ट कार्पोरेट नेटवर्किंग

एमबीए के स्टूडेंट्स के पास नेटवर्किंग का बहुत अच्छा अवसर होता है. उनके कोर्सेज तथा प्रोजेक्ट के दौरान उन्हें अपने साथियों (भविष्य के वरिष्ठ प्रबंधकों), शिक्षकों और कर्मचारियों (आमतौर पर, महान अनुभव वाले शक्तिशाली व्यापारिक लोगों) के साथ मिलने तथा उनके साथ बात चित या काम करने का मौका मिलता है. इतना ही नहीं अपने कॉलेज के पूर्व छात्रों और प्रमुख पदों पर आसीन प्रसिद्द प्रोफेशनल्स के साथ भी इनका नेटवर्क होता है.

नए स्किल्स तथा नॉलेज अर्जित करना

बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर करते समय छात्रों को उनके कम्फर्ट जोंन से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया जाता है. साथ ही उन्हें यहां नवीनतम मैनेजमेंट टेक्नीक्स को लागू करने और लगातार उनके अभ्यासों और दृष्टिकोणों का परीक्षण करना सीखाया जाता है. बीटेक के बाद एमबीए करने से स्टूडेंट्स को उन सभी चैनलों की जानकारी होती है जिनसे वे अपने स्किल्स तथा नॉलेज में सुधार ला सकते हैं या और वृद्धि कर सकते हैं.

कॉर्पोरेट वर्ल्ड को देखने का बेहतर नजरिया

जैसा कि पहले ही उल्लेख किया गया है कि एमबीए कोर्स करने वाले प्रोफेशनल स्टूडेंट्स प्रोफेशनल्स और कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होते हैं तथा कई नवीनतम समस्याओं को सुलझाना होता है. इससे बिजनेस वर्ल्ड की गहरी समझ और इस माहौल में थोड़े से बदलावों के प्रति संवेदनशीलता आदि की व्यापक समझ होती है. इसलिए बीटेक के बाद एमबीए करने वाले प्रोफेशनल्स न एक मैनेजर के रूप में सफल होते हैं बल्कि अन्य नियोक्ताओं के लिए भी वे बहुत लाभदायक एम्पोलॉयी साबित होते हैं.

ऊपर कुछ ऐसे कारकों की चर्चा की गयी है जिससे यह पता चलता है कि किस तरह बीटेक के बाद एमबीए करना बहुत फायदेमंद रहता है. बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिगी के बाद करियर के कई अवसर मिलते हैं जिससे स्टूडेंट्स के प्रोफेशनल लाइफ में गति और रोमांच बना रहता है.

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