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विज्ञान की राह पर बढ़ो इंडिया

विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए स्कूलों से ही बच्चों-किशोरों को प्रेरित-प्रोत्साहित करने की जरूरत होती है। इसके लिए पैरेंट्स और टीचर्स दोनों की जिम्मेदारी है। बच्चों की दिलचस्पी बढ़ाने और साइंटिस्ट बनने की ओर ‘किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना’ सरकार की एक अच्छी पहल है, जिसका लाभ उठाया जाना चाहिए...

बीते 8-10 सालों में विज्ञान की पढ़ाई को लेकर तस्वीर काफी बदली है। प्राइमरी और मिडिल लेवल पर विज्ञान शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। बच्चे भी शोध की तरफ बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान में आगे आ रहे हैं। सरकार भी नए अनुसंधान पर काफी खर्च कर रही है, ताकि मानव कल्याण और सामाजिक-राष्ट्रीय हित में साइंस के प्रोजेक्ट्स पर शोधकार्य को बढ़ावा दिया जा सके। केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी की ‘किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना’(केवीपीवाई) ऐसी ही एक योजना है, जो 11वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में रिसर्च के लिए स्कॉलरशिप देती है।

...ताकि विज्ञान में लें रुचि

जर्मनी, जापान अपेक्षाकृत छोटे देश हैं, लेकिन उनके शोधकर्ताओं-वैज्ञानिकों को अब तक सैकड़ों नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं। इनकी तुलना में देखें तो हमारे देश को अब तक गिने-चुने नोबेल ही मिले हैं। अब जबकि हम दुनिया की सर्वाधिक युवा आबादी वाले देश हैं, तो हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को विज्ञान में रुचि लेने, इनोवेशन करने के लिए भरसक प्रोत्साहित करना चाहिए। मेरा मानना है कि बच्चे में बचपन से ही विज्ञान के प्रति रुचि जगाने-बढ़ाने में माता-पिता की बड़ी भूमिका हो सकती है।

डॉ. डी.के.सिन्हा, विज्ञान के प्रसारक और प्रिंसिपल, जागरण पब्लिक स्कूल, नोएडा

केवीपीवाई का उद्देश्य

'किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना’(केवीपीवाई) की शुरुआत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा 1999 में की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रतिभावान छात्रों की खोज कर उन्हें मूलभूत विज्ञान में अनुसंधान करने और करियर बनाने लिए प्रोत्साहित करना है। इस फेलोशिप के अंतर्गत चयनित छात्र-छात्राओं को पूर्व-पीएचडी स्तर तक छात्रवृत्ति एवं आकस्मिक अनुदान प्रदान किया जाता है। इस साल केवीपीवाई में चयन के लिए एग्जाम 4 नवंबर को आयोजित होगा। भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु इस परीक्षा का आयोजन करेगा।  

देश में वैज्ञानिकों की श्रेणियां

इसरो, सीएसआइआर और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसे संस्थान हों या फिर सोशल साइंस, मेडिसिन जैसे क्षेत्र, इन सब जगहों पर वैज्ञानिक अपनी सेवाएं देते हैं, जो बी, सी, डी, ई, एफ जी जैसे कई कैटेगरी में होते हैं। शुरुआत में वैज्ञानिकों को बी कैटेगरी पर नियुक्ति मिलती है, फिर आगे उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर यह कैटेगरी बढ़ती रहती है।

आवेदन की पात्रता

केवीपीवाई छात्रवृत्ति केवल भारतीय छात्रों के लिए है। इस परीक्षा में हर साल लाखों की संख्या में छात्र आवेदन करते हैं, लेकिन करीब 2500 छात्रों को ही चुना जाता है, जिन्हें यह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस फेलोशिप प्रोग्राम के लिए 11वीं, 12वीं तथा स्नातक प्रथम वर्ष (बीएससी/बीएस/बी-स्टैटिस्टिक्स/बी मैथ्स/इंटीग्रेटेड एमएससी) में विज्ञान (गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा जीव-विज्ञान) की पढ़ाई कर रहे छात्र आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए 2018-19 में 10वीं के मान्य बोर्ड में गणित एवं विज्ञान के विषयों में कुल मिलाकर न्यूनतम 75 प्रतिशत या 12वीं में 60 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है। पर दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के तहत पढ़ाई कर रहे छात्र इसके लिए पात्र नहीं हैं।

ध्यान रखने वाली बातें

केवीपीवाई स्ट्रीम्स: एसए, एसबी एवं एसएक्स

एग्जाम केंद्र: यह परीक्षा देश के 54 शहरों में आयोजित होगी।

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 31अगस्त, 2018

शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि: 31 अगस्त, 2018

परीक्षा तिथि: 4 नवंबर, 2018

ईमेल: applications.kvpy@iisc.ac.in

कैसे होता है चयन?

भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु देश में विभिन्न केंद्रों पर इस परीक्षा को आयोजित कराता है। परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर छात्रों की एक लघु-सूची तैयार की जाती है और फिर उन्हें साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाता है। बाद में लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर छात्रों का शिक्षावृत्ति के लिए चयन किया जाता है। इस बारे में विस्तृत जानकारी के लिए केवीपीवाई की वेबसाइट देखी जा सकती है।

आकर्षक धनराशि

चयनित स्नातक छात्रों को प्रथम से तृतीय वर्ष के दौरान 5 हजार रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति तथा 20 हजार रुपये वार्षिक आकस्मिक अनुदान प्रदान किया जाता है। वहीं, स्नातकोत्तर के चौथे और पांचवें वर्ष के दौरान 7 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति तथा 28 हजार रुपये वार्षिक आकस्मिक अनुदान के रूप में मिलता है। इस छात्रवृत्ति में नवीनीकरण का भी प्रावधान है यानी छात्रवृत्ति के वार्षिक नवीनीकरण के लिए छात्र द्वारा प्रत्येक वर्ष में विज्ञान विषयों में प्रथम श्रेणी (60 प्रतिशत अंक) अथवा समतुल्य औसत ग्रेड (अ.जा./अ.ज.जा. आदि के लिए 50 प्रतिशत) प्राप्त करना आवश्यक है।

ऐसे बनाएं राह आसान

जो छात्र अभी जेईई मेन, ओलंपियाड्स जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि केवीपीवाई का पैटर्न भी कमोबेश इन्हीं परीक्षाओं की तरह है। आइए जानते हैं, विषयवार इस परीक्षा की तैयारी करके कैसे बनाएं अपनी राह आसान...

फिजिक्स: अगर आप केवीपीवाई के एसए लेवल के लिए अपीयर हो रहे हैं, तो 11वीं कक्षा का सिलेबस अच्छी तरह तैयार कर लें। इसमें ऑप्टिक्स, मैकेनिक्स, इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म जैसे टॉपिक्स पर ज्यादा फोकस रखें। अगर एसएक्स लेवल के छात्र हैं, तो न्यूमेरिकल प्रॉब्लम्स की अधिक से अधिक प्रैक्टिस करें।

मैथ्स: मैथ्स की बेसिक नॉलेज के लिए ज्योमेट्री तथा नंबर थ्योरी जरूरी मानी जाती है। इसमें ज्यादातर प्रश्न अल्जेब्रा, क्वाडरेटिक इक्वेशन, सीरीज ऐंड प्रोग्रेशन, पीऐंडसी और बेसिक ज्योमेट्री से आते हैं।

केमिस्ट्री: एसएक्स के अभ्यर्थी इनआर्गेनिक केमिस्ट्री के लिए एनसीईआरटी की किताबें ध्यानपूर्वक पढ़ लें।

बॉयोलॉजी: एसए के स्टूडेंट नौवीं तथा दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम की एनसीईआरटी की किताबों से तैयारी कर लें, साथ ही 11वीं और 12वीं के कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक्स भी तैयार कर लें।

लाइब्रेरी-लैब का लाभ

केवीपीवाई के तहत प्रत्येक छात्र को एक पहचान पत्र जारी किया जाता है, जिसे प्रस्तुत करके वे सभी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं/विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं आदि का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस प्रोग्राम के तहत ग्रीष्मकालीन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके अंतर्गत छात्रों को एक-दो सप्ताह के लिए वैज्ञानिक संस्थानों में भ्रमण कराया जाता है।

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