जानिये एक सफल लॉयर बनने के कारगर टिप्स

गोपाल सुब्रामनियम, मुकुल रोहतगी, केके वेणुगोपाल, हरीश साल्वे और राम जेठमलानी के नाम तो आप जानते ही होंगे. जी हां! ये सभी हमारे देश के सुप्रसिद्ध लॉयर्स है. लॉ की फील्ड में इनकी तरह ही एक लॉयर के तौर पर करियर शुरू करना यंगस्टर्स के लिए हमेशा ही एक भरोसेमंद ऑप्शन रहा है और  न्याय के लिए जोश रखने वाले यंगस्टर्स इस पेशे की तरफ हमेशा से आकर्षित रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ  वर्षों में एक लॉयर के करियर पाथ और करियर ग्राफ में काफी बदलाव आये हैं. आइये चर्चा  करें.                                 

लॉयर का प्रोफेशन है एक सही करियर ऑप्शन

आपको यह जानकर काफी ख़ुशी होगी कि लॉयर का पेशा एक ऐसा प्रोफेशन है जिसके लिए कैंडिडेट्स के पास धैर्य और लॉजिकल स्किल्स अवश्य होने चाहिए. एक सफल लॉयर के तौर पर पहचान चंद दिनों में ही नहीं मिल पाती है क्योंकि इस काम के प्रति पूरी लगन और सफल लॉयर बनने के लिए शत-प्रतिशत प्रतिबद्धता बहुत जरुरी है. अगर कोई व्यक्ति अपने करियर की शुरुआत में किसी सीनियर लॉयर/ काउंसेल के अधीन ट्रेनिंग प्राप्त कर ले तो उसके लिए अपना लक्ष्य प्राप्त करना आसान हो जाता है. फ़्लूएंट कम्युनिकेशन स्किल्स और सीमित समय के भीतर संबद्ध केस को सही तरीके से एनालाइज करके उस केस को अच्छी तरह समझने और समझाने की काबिलियत लॉयर्स के लिए जरुरी शर्तें हैं. इसलिए, लॉयर के पेशे को अपने करियर ऑप्शन के तौर पर चुनने से पहले हरेक स्टूडेंट या कैंडिडेट को इन प्वाइंट्स पर अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए.

लॉयर के पेशे के लिए जरुरी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और लॉ कोर्सेज

अगर आप एक लॉयर बनना चाहते हैं तो लॉ की फील्ड में अपना करियर शुरू करने के लिए आप निम्नलिखित लॉ कोर्सेज कर सकते हैं:

लॉ की फील्ड में डिप्लोमा कोर्सेज

लॉ की फील्ड में इन डिप्लोमा कोर्सेज की अवधि 1 वर्ष होती है और इन कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबिलिटी 12वीं क्लास पास या किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. लॉ की फील्ड में महत्वपूर्ण डिप्लोमा कोर्सेज निम्नलिखित हैं:

  • टैक्सेशन लॉ - डिप्लोमा (डीटीएल)
  • साइबर लॉ - डिप्लोमा
  • लेबर लॉज़ और लेबर वेलफेयर - डिप्लोमा

लॉ की फील्ड में ग्रेजुएशन कोर्सेज

बैचलर ऑफ़ लॉज़ (एलएलबी)

हमारे देश में ग्रेजुएशन लेवल पर एलएलबी कोर्स करने के लिए 2 ऑप्शन्स उपलब्ध हैं. पहला ऑप्शन 3 वर्ष की अवधि का ग्रेजुएशन कोर्स है और इस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. दूसरा ऑप्शन अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स के लिए 5 वर्ष की अवधि का इंटीग्रेटेड कोर्स है.

बैचलर ऑफ़ लॉज़ (एलएलबी) (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स)

इस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है और यह एक 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है जिसके तहत 6 सेमेस्टर शामिल होते हैं.

लॉ की फील्ड में पोस्टग्रेजुएशन कोर्सेज

मास्टर ऑफ़ लॉ (एलएलएम)

इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से कम से कम 50% मार्क्स के साथ एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए. यह कोर्स 1 वर्ष या अधिक वर्षों की अवधि में पूरा किया जा सकता है जिसमें 4 या अधिक सेमेस्टर्स हो सकते हैं.

भारत में लॉ की फील्ड में प्रमुख एंट्रेंस टेस्ट्स

हमारे देश में किसी लॉ कोर्स में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स को निम्नलिखित एंट्रेंस टेस्ट्स में से कोई एक टेस्ट पास करना होता है. ये टेस्ट्स नेशनल और स्टेट लेवल पर आयोजित किये जाते हैं. नीचे आपकी सहूलियत के लिए प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम्स की जानकारी दी जा रही है:

एंट्रेंस एग्जाम

 लॉ इंस्टीट्यूट

सीएलएटी (क्लैट)

18 एनएलयूज के द्वारा रोटेशनल बेसिस पर आयोजित

एलएसएटी इंडिया

लॉ स्कूल एडमिशन काउंसिल (एलएसएसी)

एलएटी (लैट)

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी

जेएमआई लॉ एंट्रेंस एग्जाम

जामियामिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

आईपीयू सीईटी

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (जीजीएसआईपीयू)

एआईएलईटी

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू), नई दिल्ली

एआईबीई

बार काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली

आईएलआई कैट

इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट

डीयू एलएलबी एंट्रेंस एग्जाम

फैकल्टी ऑफ़ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी

बीएचयू यूईटी लॉ

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी

भारत के प्रमुख लॉ इंस्टीट्यूट्स और यूनिवर्सिटीज:

आइये अब हम भारत के कुछ प्रमुख लॉ इंस्टीट्यूट्स और यूनिवर्सिटीज के नाम जानते हैं जो निम्नलिखित हैं:

• फैकल्टी ऑफ़ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी
• एमिटी लॉ स्कूल, दिल्ली
• गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई
• नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया युनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बैंगलोर
• नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट युनिवर्सिटी (एनएलआईयू), भोपाल
• एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद
• गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू)
• सिम्बायोसिस सोसायटी लॉ कॉलेज (एसएसएलसी), पुणे
• आईएलएस लॉ कॉलेज, पुणे
• नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर
• बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
• अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़

भारत में लॉयर के तौर पर करियर के हैं ये शानदार अवसर

लॉ की फील्ड में डिग्री प्राप्त करने के बाद स्टूडेंट्स निम्नलिखित पेशेवरों के तौर पर अपना करियर शुरू  कर सकते हैं:

  • सरकारी वकील: ये लॉयर्स सरकार के लिए पुलिस विभाग के साथ मिलकर काम करते हैं.
  • डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग लॉयर: ये लॉयर्स डॉक्यूमेंट्स जैसेकि, टर्म्स एंड कंडीशन्स, एग्रीमेंट्स और केस मटीरियल की ड्राफ्टिंग में एक्सपर्ट होते हैं.
  • सिविल लिटिगेशन लॉयर: ये पेशेवर सिविल लॉज़ जैसेकि, टैक्सेशन लॉज़ और एक्सरसाइज लॉज़ के एक्सपर्ट होते हैं.
  • क्रिमिनल लॉयर: ये लॉयर्स क्रिमिनल लॉज़, आईपीसी, एविडेंस एक्ट और अन्य पीनल लॉज़ में एक्सपर्ट होते हैं.
  • लेबर लॉयर: कर्मचारियों के अधिकार एवं समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है. इन दिनों इस क्षेत्र से संबंधित समस्याएं अदालत में काफी संख्या में हैं.
  • कॉरपोरेट लॉयर: विभिन्न प्रकार के कॉर्पोरेट मामलों के दौरान टैक्स इश्यूज एवं अन्य संबद्ध  समस्याओं का समाधान करना इन लॉयर्स का मुख्य काम होता है.
  • एन्वॉयरनमेंटल लॉयर: एन्वॉयरनमेंट लॉ में प्रकृति की तरफ से प्राप्त हुई चीजों जैसेकि, जंगल, पहाड़, नदियां, पेड़-पौधे और पशु-पक्षी आदि को नष्ट होने से बचाने की बात की जाती है. इस संबंध में बहुत  बार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन दायर फाइल की जाती हैं जिसके लिए एन्वॉयरनमेंटल लॉयर्स की डिमांड होती है.
  • इंटरनेशनल लॉयर: इंटरनेशनल लॉ के तहत विभिन्न देशों  के राष्ट्रीय हितों के मध्य उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कानून के द्वारा सुलझाया जाता है. अगर आपकी इंग्लिश अच्छी है और आपकी इंटरनेशनल इवेंट्स में रुचि है तो यह फील्ड आपके लिए बढ़िया है.
  • जज: ये पेशेवर कोर्ट की सारी प्रोसीडिंग्स पूरी हो जाने और संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हैं.

भारत में लॉयर के पेशे के लिए सैलरी पैकेजेज

हमारे देश में लॉयर के पेशे को एक अच्छे सैलरी पैकेज वाला पेशा माना जाता है जिसमें कमाई की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की जा सकती है और इसके लिए लॉ की विभिन्न फ़ील्ड्स के स्टूडेंट्स के पास सही स्किल-सेट तथा किसी प्रसिद्ध कॉलेज से लॉ की डिग्री होनी चाहिए. ऐसे लॉ ग्रेजुएट्स जो किसी एडवोकेट के पास काम कर रहे हैं, उस एडवोकेट के लेवल के मुताबिक इन्हें शुरू में रु. 5000/- से रु. 45000/- तक मासिक स्टाइपेंड मिल सकता है. जो लॉयर्स लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग से संबद्ध विभिन्न काम कर रहे हैं, उन्हें रु. 25000/- से रु. 55000/- तक मासिक कमाई हो सकती है.

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