जानें क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट बनने के लिए क्या है योग्यता, चयन प्रक्रिया, सैलरी और कहां मिलेगी नौकरी?

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट का पद केंद्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभागों के तहत चलाये जा रहे अस्पतालों (जैसे-एम्स, ईएसआइसी, आदि), मेडिकल शिक्षा संस्थानों, रक्षा मंत्रालय के अधीन अस्पतालों, केंद्र व राज्य के स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं, कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, आदि में होता है. स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी संगठन में क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट का पद ग्रुप ‘बी’ या ‘सी’ के स्तर का होता है. क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट का कार्य होता है कि वह अस्पताल के मनोरोग मनोचिकित्सा विभाग में दाखिल मरीजों को संबंधित डॉक्टर, आदि के निर्देशों के अनुसार साइको-डाइग्नोस्टिक टेस्ट करे, उनकी मानसिक तकलीफों का उपचार और काउंसलिंग करे और किसी भी इलाज की स्थिति में उनकी देखभाल और केयर करे.

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट की भूमिका अस्पतालों के संबंधित स्पेशियलाजेशन (मनोरोग) विभाग में मरीजों के उपचार और विभिन्न प्रकार के मनोरोग से सम्बन्धित लैब-टेस्ट करने के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण होती है. क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट को सुनिश्चित करना होता है कि संबंधित डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार मरीज को कौन सा टेस्ट किया जाना है और कितने दिन काउंसलिंग किस विधि से की जानी है. इसलिए क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट बनने के लिए आवश्यक स्किल्स में से जरूरी है कि आपको विभिन्न प्रकार के मनोरोगियों और उनको दिये जाने वाले उपचार की तकनीकों और विधियों की अच्छी नॉलेज होनी चाहिए.

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट के लिए कितनी होनी चाहिए योग्यता?

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट बनने के लिए जरूरी है कि उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से क्लिनिकल साइक्लॉजी/अप्लाईड साइक्लॉजी/साइक्लॉजी/स्ट्रेस मैनेजमेंट/रिहैबिलिटेशन साइक्लॉजी/काउंसलिंग साइक्लॉजी विषय में मास्टर्स डिग्री उत्तीर्ण होना चाहिए. किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान या अस्पताल में व्यवहारिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाती है.

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट के लिए कितनी है आयु सीमा?

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट बनने के लिए जरूरी है कि उम्मीदवार की आयु 21 वर्ष से 36 वर्ष के बीच हो. हालांकि, कुछ संस्थानों में पूर्व कार्य-अनुभव के साथ अधिकतम आयु सीमा अधिक भी हो सकती है. आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा सरकार के नियमानुसार छूट दी जाती है.

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट के लिए चयन प्रक्रिया

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट के पद पर उम्मीदवारों का चयन आमतौर पर शैक्षणिक रिकॉर्ड और इंटरव्यू के आधार पर किया जाता है. हालांकि, रिक्तियों के अनुरूप यदि संविदा के आधार पर नियुक्ति की जानी है तो संबंधित संस्थान उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के लिए लिखित परीक्षा का भी आयोजन कर सकता है.

कितनी मिलती है क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट को सैलरी?

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट के पद पर छठें वेतन आयोग के पे-बैंड-3 अर्थात रु.15600 – रु.42000 + (ग्रेड पे रु.5400) के अनुरूप सैलरी दी जाती है. इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के भत्ते (डीए, एचआरए, आदि) देय होते हैं. यदि क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट के पद पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की दशा में रु. 30000/- प्रतिमाह तक का वेतन दिया जाता है. वहीं, राज्य सरकारों के विभागों एवं संस्थानों में वेतनमान संबंधित राज्य के समकक्ष स्तर पर निर्धारित वेतनमान के अनुसार दिया जाता है जो कि राज्य के अनुसार अलग-अलग होता है.

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट को कहां मिलेगी सरकारी नौकरी?

क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट का पद केंद्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभागों के तहत चलाये जा रहे अस्पतालों (जैसे-एम्स, ईएसआइसी, आदि), मेडिकल शिक्षा संस्थानों, रक्षा मंत्रालय के अधीन अस्पतालों, केंद्र व राज्य के स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं योजनाओं, कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, आदि में होता है इसलिए इस पद के लिए रिक्तियां समय-समय पर इन्हीं संस्थानों में समय-समय पर निकलती रहती हैं. इन सभी रिक्तियों के बारे में भारत सरकार के प्रकाशन विभाग से प्रकाशित होने वाले रोजगार समाचार, दैनिक समाचार पत्रों एवं सरकारी नौकरी की जानकारी देने वाले पोर्टल्स या मोबाइल अप्लीकेशन के माध्यम से अपडेट रहा जा सकता है.

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