मन पर विजय | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 14

अपने ‘मन पर विजय पाना’ शायद एक ऐसा विचार है जिसे हम अक्सर नजरंदाज़ कर देते हैं. लेकिन यह भी सच है कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए हमें अपने मन पर जरुर विजय हासिल करनी पड़ती है. इस वीडियो में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी हमें अपने मन पर विजय पाने के लिए अपने नकारात्मक विचारों को दूर हटाकर या अस्वीकार करके, सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इस मोटिवेशनल वीडियो में वे हमें अपने मन को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक तकनीक सिखा रहे हैं. लेकिन यह काम केवल एक-दो दिन में नहीं हो सकता है. आप अभ्यास के माध्यम से धीरे-धीरे एक सकारात्मक रवैया अपनाने वाले इंसान बन सकते हैं. इसके लिए शुरू-शुरू में आपको कुछ मिनट तक अपनी सकारात्मक सोच रखनी होगी जिसे आप धीरे-धीरे बढ़ाते चले जायें और फिर कुछ समय के बाद, आप एक सकारात्मक प्रवृत्ति वाले इंसान होंगे और कड़ी मेहनत करके अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल कर लेंगे.

इस वीडियो के शुरू में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमसे ‘मन पर नियंत्रण’ रखने के संबंध में अपने विचार साझा कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि बहुत बार हम ऐसे लोगों से मिलते हैं जो मानसिक तौर पर काफी मजबूत होते हैं. लेकिन अक्सर कई लोग शिव खेड़ा जी से पूछते हैं कि, उनका अपनी सोच पर काबू नहीं है जैसे ही वे कभी कहीं बैठते हैं तो उनके मन में पचास तरह के विचार आने लगते हैं. वे अपनी सोच को कैसे काबू कर सकते हैं?.  

अपनी बात को आगे जारी रखते हुए सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर खेड़ा जी हमें इस वीडियो में आगे कैंसर सोसाइटी में अपने एक मोटिवेशनल प्रोग्राम का उदाहरण दे रहे हैं. वे कह रहे हैं कि एक बार उन्हें कैंसर सोसाइटी ने कैंसर के ऐसे रोगियों को संबोधित करने के लिए बुलाया जिनके बचने की संभावना काफी कम थी. कैंसर सोसाइटी ने शिव खेड़ा जी से अनुरोध किया कि आप इन कैंसर रोगियों को सकारात्मक सोच रखने के लिये प्रेरित करें. शिव खेड़ा जी को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे वे ऐसे कैंसर के रोगियों को सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित करें, जिनके सिर पर मौत खड़ी हो? शिव खेड़ा जी ने काफी रिसर्च की और उन्हें कुछ ऐसे कैंसर रोगियों के भी उदाहरण मिले जिन्होंने कैंसर के रोग को हराकर जिंदगी की जंग जीत ली थी. इन कैंसर के रोगियों ने भी ये उदाहरण सुने हुए थे.  

इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें आगे कह रहे हैं कि, वे थोड़े परेशान थे. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे उन कैंसर के रोगियों को प्रेरित करें? तभी खेड़ा जी की बेटी ने उनसे परेशानी का कारण पूछा. जब खेड़ा जी ने अपने बेटी को अपनी इस परेशानी का कारण बताया कि, ‘कैसे इन कैंसर के रोगियों से यह कहा जाए कि जीवन के इस आखिरी मोड़ पर भी आप सकारात्मक विचार और सकारात्मक रवैया रखें?....क्योंकि विचार तो हमारे मन में अपने-आप आते ही रहते हैं.’ तब सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर खेड़ा जी की बेटी ने जवाब दिया कि, ‘आप बैठिये! मैं बताती हूं कि कैसे सकारात्मक विचार चुनें और कैसे मानसिक मजबूती हासिल की जाये?’

अब खेड़ा जी की बेटी ने उनसे कहा कि, ‘मान लीजिये कि आप एक शाकाहारी हैं और किसी रेस्टोरेंट में जाकर वेटर से शाकाहारी सैंडविच लाने के लिए कहते हैं. 10 मिनट के बाद वह वेटर आपको मासाहारी सैंडविच दे जाता है. ऐसे में आप क्या करेंगे?’ खेड़ा जी ने जवाब दिया कि वे वेटर को बुलाकर मासाहारी सैंडविच वापिस कर देंगे. यह सुनकर खेड़ा जी की बेटी ने जवाब दिया कि, ‘ठीक इसी तरह से हमें अपनी सोच को भी चुनना होता है. जब हमारे मन में नकारात्मक विचार आयें तो हम उन्हें अस्वीकार कर दें या  हटा दें और अपने मन में केवल सकारात्मक विचारों को ही आने दें.’

अब विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमें मानसिक मजबूती हासिल करने का तरीका समझा रहे हैं. वे कह रहे हैं कि, ‘मानसिक मजबूती वैसे ही बनती है जैसे शारीरिक मजबूती हासिल की जाती है.’ वे हमसे पूछ रहे हैं कि क्या वे 30 किलो का डंबल उठाकर आज 20 बार अभ्यास कर सकते हैं....शायद नहीं. अगर वे ऐसा करेंगे भी तो वे हफ्ते-भर के लिए बीमार हो जायेंगे और उनके सारे शरीर में दर्द होने लगेगा. फिर ऐसे में हम शारीरिक बल कैसे बढ़ा सकते हैं? फिर शिव खेड़ा जी हमें समझा रहे हैं कि, ‘इसके लिए आप जिम जाते हो और शुरू में 5 किलो का बट्टा उठाकर 10 बार, 20 बार, 30 बार, 50 बार या 100 बार अभ्यास करते हो. प्रत्येक अभ्यास से आपको ज्यादा बल मिलता है और आपको बार-बार अभ्यास करने का बल मिलता है. फिर धीरे-धीरे, आप अपने डंबल का वजन बढ़ाने लगते हैं क्योंकि आपका शारीरिक बल बढ़ने लगता है. ठीक इसी तरीके से आप अपना मानसिक बल भी बढ़ा सकते हैं.’    

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमें आगे समझा रहे हैं कि अगर आप एक-दो दिन में एक सकारात्मक इंसान बनना चाहें तो ऐसा नहीं हो सकता और निराशा ही आपके हाथ लगेगी. आप अपनी सारी जिंदगी के लिए एकदम सकारात्मक इंसान बनने की कोशिश कभी न करें. शुरू-शुरू में आप अपने दिमाग को कहें कि, ‘चाहे कुछ भी हो जाए, मैं अगले 10 मिनट के लिए सकारात्मक रवैया ही अपनाऊंगा/ अपनाऊंगी.’ पूरे जीवन के बजाय केवल 10 मिनट के लिए अपने विचारों को नियंत्रित करना आपके लिए कहीं आसान रहेगा. धीरे-धीरे आप इस समय को 10 मिनट से बढ़ाकर 15 मिनट, फिर 20 मिनट और फिर 25 मिनट कर सकते हैं. अगर आप अपना सकारात्मक सोच रखने का  यह अभ्यास लगातार जारी रखेंगे तो धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपकी सकारात्मक सोच रखने की क्षमता बढ़ती ही चली जायेगी. दरअसल, जिस तरीके से हम लोग अपना शारीरिक बल बढ़ाते हैं, ठीक उसी तरीके से मानसिक बल को भी बढ़ा सकते हैं.

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो के आखिर में हमें समझा रहे हैं कि हम नकारात्मक विचारों को अस्वीकार करने के माध्यम से अपनी सोच भी चुन सकते हैं. जो व्यक्ति सकारात्मक सोच और सकारात्मक रवैया रखते हैं, उनके मन में भी नकारात्मक विचार आते हैं. लेकिन वे अपने नकारात्मक विचारों को अस्वीकार कर देते हैं या महत्व नहीं देते. ऐसा केवल बार-बार अभ्यास करके ही संभव हो सकता है. जब हम एक बार ऐसा करना शुरू कर देते हैं तो आप देखेंगे कि हम अपने मन पर विजय हासिल कर लेते हैं और मानसिक रूप से एक मजबूत व्यक्ति बन जाते हैं. वास्तव में, हमारा यही गुण हमें सफलता हासिल करने के लिए अग्रसर करता है.

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