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रुकें नहीं, चलते रहें

शॉतनिक रॉय
सह-संस्थापक एवं सीईओ - हाइपर एक्सचेंज

भारत में स्मार्टफोन का बाजार करीब 45 बिलियन डॉलर के आसपास है। रिलायंस जियो एवं अन्य कंपनियों द्वारा अफोर्डेबल बजट में 4 जी सेवा शुरू करने के बाद इस बाजार के और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि बड़ी कंपनियां मार्केट के सिर्फ 7 से 8 फीसदी हिस्से को ही टैप कर पाई हैं। ऐसे में शॉतनिक रॉय एवं उनकी टीम ने स्मार्टफोन के प्री-ओन्ड मार्केट को एक्सप्लोर करने का फैसला लिया और लॉन्च हुआ ‘हाइपरएक्सचेंज’ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जिसे आइआइएम कोलकाता स्थित इनक्यूबेशन सेंटर ने मान्यता दी है। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के अलावा टेक महिंद्रा के सीईओ ने इसमें निवेश किया है। कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीईओ शॉतनिक कहते हैं कि लोगों के जीवन को स्पर्श करने के लिए उनकी मुस्कुराहट का कारण बनना जरूरी है। इसके लिए वे एक बिलियन भारतीयों तक इंटरनेट अफोर्डेबल फोन पहुंचाने का इरादा रखते हैं...  

मेरा बचपन संयुक्त परिवार में बीता है। मन में अनेक प्रकार के सपने संजोना, अपने कॉमिक सुपरहीरोज जैसा दिखने की चाहत रखना जैसे मेरे भी शौक रहे हैं। मैं ऐसी दुनिया का स्वप्न देखता था, जहां कुछ भी असंभव नहीं हो सकता। जहां कल्पना की कोई सीमा नहीं होती। खुशनसीब रहा कि बचपन में मुझे दौड़ने, सपने देखने की आजादी दी गई थी। बड़े होने पर एसआरएम यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग किया और फिर अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ‘इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप’ में पोस्ट ग्रेजुएशन।  

ग्राहकों को जोड़ने की चुनौती

मुझे एक मार्केट सर्वे से पता चला कि प्री-ओन्ड स्मार्टफोन का वैश्विक बाजार करीब 14 बिलियन डॉलर का है और भारत का महज 1.4 बिलियन डॉलर। क्योंकि यहां प्री-ओन्ड फोन की विश्वसनीयता, इसके इस्तेमाल एवं कीमत कोलेकर कई तरह के मसले हैं। पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहक इसे लेने से संकोच करते हैं। तभी मैं प्री-ओन्डगुड्स के बाजार की मुश्किलों को जान सका था। आखिर में हमने प्री-ओन्ड स्मार्टफोन के मार्केट में कदम रखने कानिर्णय लिया।

विजन में हो स्पष्टता

देश के आर्थिक विकास के बावजूद मैंने कभी गरीबी एवं पर्यावरण असंतुलन जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया। जब एहसास हुआ कि उद्यमिता के जरिये मैं इनमें बदलाव ला सकता हूं, तो इसमें कदम आगे बढ़ा दिए। एंटरप्रेन्योर का मतलब ही होता है नया क्रिएट करने वाला। पहले मैंने ‘एपोलिसस’ नामक टेक कंसल्टेंसी स्टार्टअप शुरू किया, जो ग्राहकों को वेबसाइट, एप, सॉफ्टवेयर एवं गेम डेवलपमेंट को लेकर सॉल्यूशंस देता था। इसके साथ ही ‘मैपटैग्स’ एवं ‘वॉयजर मैगजीन’ के तकनीकी सलाहकार के रूप में भी जुड़ा रहा हूं। मेरे लिए एंटरप्रेन्योरशिप का मतलब सिर्फ जोखिम लेना या सफलता हासिल करना नहीं है, बल्कि उद्यमिता को मैं एक ऐसे विकल्प के रूप में देखता हूं, जहां असीमित संभावनाएं हैं। इससे होने वाला बदलाव कई बार नाटकीय होता है, कई बार सूक्ष्म। लेकिन एक उद्यमी पूरे बाजार, उद्योग व संस्थान को बदल सकता है।

गलतियों से सबक

मैं मानता हूं कि प्रत्येक एंटरप्रेन्योर अपने सफर में किसी न किसी प्रकार की चुनौती का सामना जरूर करता है। यह अलग बात है कि एक गलती भी नाकामी की ओर ले जा सकती है। जो उससे सीखकर आगे बढ़ते हैं, सफलता उन्हें ही मिलती है। मेरी मानें, तो हर गलती को एक अवसर के रूप में लेना चाहिए। इससे मिलने वाला अनुभव अतुल्य होता है।

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