पॉज़िटिव इंडिया: शिव खेड़ा से जानिये एक विजेता में होते हैं कौन से खास गुण!

यह बिलकुल सच है कि किसी भी प्रतियोगिता या मैच में अनेक लोग हिस्सा लेते हैं लेकिन विजेता तो कोई एक ही होता है. इसी तरह, सभी छात्रों के अपनी परीक्षाओं में सौ-फीसदी मार्क्स नहीं आते हैं. मेरिट लिस्ट के टॉप पर तो किसी एक ही स्टूडेंट का नाम होता है. अब, स्वाभाविक रूप से हमारे मन में यह सवाल जरुर उठता है कि आखिर किसी विजेता में ऐसे कौन से खास गुण होते हैं जो उसे अपने हर एक प्रयास में विजयश्री दिलवाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं? बेशक किसी भी विजेता में यकीनन कुछ ऐसे खास गुण होते हैं जो उनकी जीत की पहली वजह बन जाते हैं. विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा बताते हैं कि, विजेता अपने सभी काम कुछ अलग अंदाज़ से करते हैं जिस वजह से उन्हें कदम-कदम पर जीत हासिल होती है. किसी भी संघर्षशील व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता पाने के लिए शिव खेड़ा के द्वारा बताये गये एक विजेता के ख़ास गुणों के बारे में जरुर जानकारी प्राप्त करनी चाहिए. आइये इस आर्टिकल को पढ़कर जानें शिव खेड़ा के मुताबिक किसी विजेता के खास गुणों के बारे में.

महत्त्वपूर्ण विशेषता - “विजेता कोई अलग काम नहीं करते बल्कि हर एक काम अलग ढंग से करते हैं.”

सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा के अनुसार, विजेता उन सभी कामों को करने की  आदत बना लेते हैं, जो हारने वाले लोग अपनी जिंदगी में कभी करना नहीं चाहते. आसान शब्दों में, विजेता अपना हर एक काम अन्य लोगों से बिलकुल अलग तरीके से करते हैं और यही बात उन्हें एक विजेता बना देती है.

विजेता का काम करने का रवैया भी होता है कुछ खास

वैसे तो हम सभी लोगों की आदतें आपस में काफी मिलती हैं जैसे, अक्सर हम लोग सुबह जल्दी नहीं उठाना चाहते या फिर, अपने जीवन में कड़ी मेहनत करने से घबराते हैं. लेकिन जो लोग विजेता होते हैं, वे हर रोज़ सुबह जल्दी भी उठते हैं और अपने प्रत्येक लक्ष्य को हासिल करने के लिए कठोर मेहनत भी करते हैं. इतना ही नही, जीतने के बाद भी विजेता अपनी कठोर मेहनत को जारी रखते हैं और इस वजह से उन्हें लगातार सफलता और विजयश्री मिलती ही रहती है. इसलिए, निस्संदेह विजेता का प्रत्येक काम करने का रवैया खास होता है लेकिन फिर भी हम लोग अक्सर यह कह देते हैं कि, इसकी किस्मत ऐसी है कि मिट्टी को हाथ लगाने पर सोना बन जाती है.

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अच्छी आदतें बनाती हैं विजेता का चरित्र मजबूत

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा के अनुसार, अक्सर लोगों का 90 फीसदी व्यवहार आदतन होता है. लेकिन, हम अक्सर ऐसा नहीं सोचते हैं. दरअसल, अगर हम अपने जीवन में अनुशासन के साथ अच्छी आदतें अपनाते हैं तो हमारा चरित्र भी अच्छा और मजबूत बन जाता है और हमारी बुरी आदतें हमारे चरित्र को कमज़ोर बना देती हैं. बेशक, अच्छी आदतें मुश्किल से आती हैं लेकिन हमारे जीवन को आसान बना देती हैं और हम जल्दी ही बुरी आदतों के शिकार बन जाते हैं. लेकिन, ये बुरी आदतें हमारे जीवन को मुश्किल बना देती हैं.

पॉज़िटिव एटीट्यूड

अक्सर हम विजेताओं के बारे में यह मान लेते हैं कि, वे (विजेता) अगर मिट्टी को छू लें तो वह मिट्टी  सोना बन जाती है. लेकिन, अगर हम उनके जीवन में झांक कर विजेताओं की आदतों को परखें तो हमें एक ख़ास बात यह पता चलती है कि, पॉज़िटिव एटीट्यूड ऐसे लोगों की आदत बन चुका होता है और यह एटीट्यूड उनके प्रत्येक काम और लेन-देन में झलकता है. ऐसे लोग अपना प्रत्येक काम ठीक तरीके से करते हैं और उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रियाएं बिलकुल सटीक होती हैं.

नेगेटिव एटीट्यूड

जो लोग अपनी किस्मत पर अपनी हार या असफलता का दोष डालते हैं, वे अक्सर अपने स्वाभाव या चरित्र की एक खास कमी को नज़रंदाज़ कर देते हैं. यह खास कमी है ऐसे लोगों का नेगेटिव एटीट्यूड. अगर हम अक्सर असफल रहने वाले लोगों के जीवन और उनके प्रत्येक काम का विश्लेषण करें तो हम यह पाते हैं कि उन लोगों का नेगेटिव एटीट्यूड ही उनकी आदत बन चुका होता है. ऐसे लोग अक्सर जब भी कोई काम करते हैं, तो पहले तो वे उस काम को करना ही नहीं चाहते या फिर, उस काम में आने वाली विभिन्न प्रॉब्लम्स या चुनौतियों की अनावश्यक चर्चा करने लगते हैं जिससे उनके अधिकतर काम गलत हो जाते हैं.  

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सही प्रैक्टिस से बन सकते हैं एक्सपर्ट

विजेता के खास गुणों की चर्चा करते हुए सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा ने जोर देकर हमें यह भी समझाया है कि, प्रैक्टिस और वह भी सही प्रैक्टिस ही विजेताओं को एक्सपर्ट बनाती है. अगर हम लोग किसी काम को गलत तरीके से करते रहते हैं तो हमें उस काम को गलत तरीके से करने की ही आदत बन जाती है. इसलिए, सफलता हासिल करने के लिए सही प्रैक्टिस और सही ट्रेनिंग लेना हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है. शिव खेड़ा ने हमें मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए यह समझाया है कि, मार्शल आर्ट में वाइट बेल्ट से ब्लैक बेल्ट लेने तक मार्शल आर्टिस्ट को ब्लॉक-पंच की इतनी ज्यादा स्वाभाविक आदत हो जाती है कि किसी से झगड़ा होने पर या अपनी रक्षा के लिए ब्लैक बेल्ट मार्शल आर्टिस्ट को सोचना नहीं पड़ता बल्कि अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया से वह बिलकुल सही ब्लॉक पंच मारता है.

विजेता सकारात्मक व्यवहार को बना लेते हैं अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया

शिव खेड़ा ने हमें आर्मी का सटीक उदाहरण देकर भी समझाया है कि, विभिन्न देशों के बीच में युद्ध को कभी-कभार ही होता है लेकिन सभी देशों की आर्मी रोज़ाना युद्ध की प्रैक्टिस करती है ताकि युद्ध होने पर उन्हें कुछ सोचना न पड़े और वे लोग स्वाभाविक तौर पर युद्ध कर सकें. अगर सैनिक रोज़ाना युद्ध करने की प्रैक्टिस न करें तो जब युद्ध होगा तो वे तुरंत मुकाबला नहीं कर सकेंगे और हार जायेंगे, ऐसे में, कई सैनिकों अपनी जान भी गंवानी पड़ेगी इसलिए, हम लोगों को प्रत्येक सकारात्मक व्यवहार को अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया जरुर बनाना चाहिए.

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इस श्रृंखला में अगली बार हम शिव खेड़ा से जानेंगे कि वे सफलता की आदत क्या है? आखिर वे हमारी कौन-सी आदतें हैं जो हमें सफलता पाने में मदद कर सकती हैं. हमारे साथ अपने विचार जरुर साझा करें. हम जल्दी लौटेंगे इस श्रृंखला की अगली कड़ी के साथ.

 

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