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कामयाबी का रास्ता

अक्सर कहा जाता है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। यह सही भी है आपको सफलता पाने के लिए अपने हुनर में माहिर होना पड़ेगा और इसके लिए समय भी लगेगा। भले ही सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, लेकिन जो भी रास्ता होता है, वह रास्ता पॉजिटिविटी का होता है। अगर आपने नकारात्मकता यानी निगेटिविटी का रास्ता पकड़ लिया है, तो तय जानिये कि अब रास्ता भूल गए हैं। यह रास्ता आपको सफलता की ओर तो नहीं ही ले जाएगा, उलटे हो सकता है कि आप विफलता के दरवाजे तक पहुंच जाएं...।

नकारात्मकता के दुष्प्रभाव

जब भी आप जीवन में या अपने प्रोफेशन में अपनी मंजिल तय करने निकलें, तो इस बात के लिए आश्वस्त हो जाएं कि आपने रास्ता सही अपनाया है या नहीं। नकारात्मक रास्ते पर चल कर यदि आपने स्वयं ही विफलता का वरण कर लिया, तो आप भावनात्मक रूप से टूट भी सकते हैं, जिसका प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर भी पड़ता है। यदि आप अवसाद में चले गए, तो विफलता से सबक लेकर अगली बार सफलता का वरण करने के योग्य भी नहीं बचेंगे।

खुद पर भरोसा

पॉजिटिविटी के रास्ते पर अगर आप चल पड़े हैं, तो निश्चित है कि सफलता की मंजिल तक पहुंचेंगे, लेकिन हर चौराहे पर आपको निगेटिविटी के रास्ते मिलेंगे और वे आपको उन पर मुड़ जाने के लिए लुभाएंगे भी। इस बात के लिए आपको सतर्क रहना होगा कि निगेटिविटी के आकर्षक रास्ते कहीं आपको सफलता से डिगा न दें। कहने का अर्थ है कि आपको सकारात्मकता का दामन मजबूती से पकड़े रहना होगा। क्योंकि प्रोफेशनल दुनिया में तो पॉजिटिविटी का बहुत ज्यादा महत्व है। लेकिन आप पॉजिटिव तभी रह सकेंगे, जब आप खुद पर भरोसा करेंगे। कई अवसर आपके काम के बीच आएंगे, जब आपका मन डांवाडोल होगा और आप नकारात्मकता की ओर बढ़ने लगेंगे, जैसे-कहीं क्लाइंट मेरे प्रपोजल को न ठुकरा दे। कहीं मीटिंग में अपनी बात समझा न पाने के कारण मेरी किरकिरी न हो जाए। कहीं बॉस को मेरा आइडिया न पसंद आए। ये सवाल अगर आपके दिमाग में आ रहे हैं, तो तय जानिये आपका खुद पर भरोसा नहीं है। आपके मन में ये प्रश्न नहीं उठने चाहिए। क्योंकि आपको पूरा फोकस अपने आइडिया पर भरोसा करते हुए काम पर करना है। फिर भी यदि ऐसे सवाल आ ही रहे हैं, तो उनकी तह में जाकर उनके कारणों की तलाश करें और उन कारणों को सुधार लें।

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