वर्ष 2020 में इंटर्न फेस कर सकते हैं ये प्रमुख चुनौतियां

आजकल हमारे देश के अधिकतर कॉलेजों में स्टूडेंट्स को अपने कोर्स करिकुलम के साथ ही 6 महीने या एक साल की अवधि के लिए इंटर्नशिप करना जरुरी हो गया है. लेकिन जब स्टूडेंट्स किसी कंपनी या दफ्तर में इंटर्नशिप ज्वाइन करते हैं तो उन्हें कई किस्म की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. एक तो आप अपने कॉलेज में पढ़ रहे होते हैं और आपको दिन-भर में कई लेक्चर अटेंड करने होते हैं, प्रोजेक्ट्स बनाने होते हैं. दूसरी तरफ आपको अपनी इंटर्नशिप के दौरान अपने दफ्तर या कंपनी के वर्क टारगेट्स को भी पूरा करना पड़ता है. ऐसे में अगर आपको यह पता हो कि अपने कॉलेज के दौरान जब आप कोई इंटर्नशिप ज्वाइन करेंगे तब आपके सामने कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, तो आप उन समस्याओं और चुनौतियों से निपटने का रास्ता भी ढूंढ लेते हैं. इस आर्टिकल में आपके लिए कुछ ऐसे ही खास पॉइंट्स दिये जा रहे हैं:  

जब भी कोई इंटर्न ज्वाइन करता है तो शुरूआती दौर में वह जितना चाहता है उतना नहीं सीख पाता है. इसका मुख्य कारण उनको मिलने वाला कम समय भी हो सकता है. साथ ही कहीं कहीं उन्हें अपने निर्धारित समय से अधिक समय तक भी काम करना पड़ता है. कभी कभी अतिरिक्त काम के बोझ की वजह से भी इंटर्न परेशान रहने लगते हैं. ऐसे में आपके लिए यह बेस्ट रहेगा कि आप कोई इंटर्नशिप ज्वाइन करते समय ही अपने काम के घंटे निश्चित करने के बारे में ऑफिस के एचआर डिपार्टमेंट से साफ़ शब्दों में बात करें. ताकि आप अपनी इंटर्नशिप के साथ कॉलेज की पढ़ाई के लिए भी पर्याप्त समय निकाल सकें.

एक नए इंटर्न को एक रेगुलर तथा प्रोफेशनल कर्मचारी की तरह बहुत अधिक कार्य नहीं दिया जाता है क्योंकि चूँकि अभी वे इंटर्न है और अनुभव के अभाव में वे एक प्रोफेशनल की तरह परफॉर्म नहीं कर सकते हैं और सीनियर्स या अभी मैनेजर्स की ऐसी सोंच के कारण वो अपना शत प्रतिशत नहीं दे पाते हैं. ऐसा उन परिस्थितियों में विशेष रूप से होता है जब किसी इंटर्न के स्किल्स का इस्तेमाल किसी ऑर्गनाइजेशन द्वारा नहीं किया जाता है. किसी किसी ऑर्गनाइजेशन में इंटर्न को एक अनुभवी प्रोफेशनल्स के रूप में वरीयता दी जाती है और उन्हें कई कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाती है. वैसे तो इससे इंटर्न को अपने स्किल्स में वृद्धि करने का बड़ा ही सुनहरा अवसर उपलब्ध होता है. कभी कभी यह उनके लिए उबाऊ तथा बोझिल प्रक्रिया भी बन जाता है और इससे इंटर्न को कई बार बहुत अधिक परेशानी उठानी पड़ती है. लेकिन आप यह सोचकर ही अपनी इंटर्नशिप ज्वाइन करें कि आप सबद्ध कंपनी या दफ्तर में कुछ नया सीखने जा रहे हैं और वहां जो भी टास्क या प्रोजेक्ट्स आपको दिए जायेंगे उन्हें आप अपनी पूरी क्षमता से निपटायेंगे.

जानिये इंटर्नशिप से स्टूडेंट्स को मिलते हैं ये फायदे

यह उन इंटर्न्स के लिए एक बड़ी समस्या है जो बहुत संपन्न परिवार से नहीं होते हैं. ट्रांसपोर्टेशन और फूड पेमेंट के सही भुगतान के अभाव में कभी कभी वे अपना इंटर्नशिप बीच में ही छोड़ने को मजबूर होते हैं. कुछ कारणों से वे सीधे सीधे अपने लिए इसकी मांग भी अपने सुपरवाइजर से नहीं कर सकते हैं. लेकिन इन्टर्नशिप के लिए चयन के दौरान अगर इंटर्न अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इसकी मांग करते हैं और कंपनी द्वारा आपको आश्वसन दिया जाता है तो इंटर्न अपनी खर्च रिपोर्ट के माध्यम से अपने खर्च का दावा कर सकते हैं. इससे उनको कई तरह की समस्याओं से निजात मिल सकती है. पेड इंटर्नशिप में तो आपको ऐसी समस्या आती ही नहीं हैं लेकिन अनपेड इंटर्नशिप के दौरान आपके लिए यह बेहतर होगा कि आप इस विषय में इंटर्नशिप ज्वाइन करने से पहले ही एचआर डिपार्टमेंट से साफ शब्दों में सारी औपचारिकताओं के बारे में जरुरी जानकारी हासिल कर लें ताकि अपनी इंटर्नशिप के दौरान आपको कोई दिक्कत न हो.

कंपनी के वर्किंग कल्चर से पूरी  तरह से वाकिफ नहीं होने के कारण अक्सर इंटर्न अपने सीनियर से कुछ भी पूछने से डरते हैं. जब काम का प्रेशर बहुत अधिक होता है तो उस समय उन्हें बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और चाहते हुए भी वे बहुत अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाते हैं. ऐसे में, आप अपनी इंटर्नशिप के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखें कि जैसे ही आपके मन में अपनी कंपनी या ऑफिस के कामकाज को लेकर कोई संशय आये या फिर, आप अपने काम के संबंध में कोई प्रश्न पूछना चाहें तो बिलकुल भी न हिचकिचाएं और अपने सीनियर या कंसर्न्ड अथॉरिटी से सूटेबल शब्दों में अपना सवाल जरुर पूछें. ऐसा करने पर आपके काम की पर्फोर्मांस में भी काफी सुधार होगा.

जानिए एक बेस्ट इंटर्न बनने के ये हैं कारगर टिप्स

क्या मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं? काम करने का मेरा यह तरीका सही है? क्या मैंने यह काम किया है? मुझे और अधिक काम करने की आवश्यकता है? इन सवालों का जवाब देना अति आवश्यक होता है विशेष रूप से इंटर्न के लिए तभी आपकी बेहतर इमेज किसी भी ऑर्गनाइजेशन में बन पायेगी. लेकिन अक्सर अपनी इंटर्नशिप के दौरान अधिकतर इंटर्न्स फीडबैक देने से बचते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि वे अपना पॉइंट ठीक से नहीं रख पायेंगे. ऐसे में इंटर्न्स कई बार अपने डाउट्स भी नहीं पूछ सकते हैं. इसलिए, इंटर्न्स का यह फर्ज है कि वे हरेक परिस्थिति में अपना फीडबैक तैयार रखें और मन में आने वाले हरेक किस्म के प्रश्न पूछ लें ताकि आप अपनी इंटर्नशिप के दौरान ठीक तरीके से अपना काम कर सकें.

हरेक कंपनी या ऑफिस में अधिकांश इंटर्न बहुत कुछ सीखते हैं, कुशलता पूर्वक कार्य करते हैं तथा अपने दिए गए प्रोजेक्ट्स को ईमानदारी से पूरा करते हैं. लेकिन कभी कभी कॉम्पीटिशन त्मक माहौल में उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने में दिक्कत महसूस होती है. लेकिन कभी भी इस कॉम्पीटिशन के माहौल से भागने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. हो सके तो धैर्य पूर्वक इस कॉम्पीटिशन का सामना करते हुए सकारात्मक रिजल्ट देने की कोशिश करनी चाहिए. आप एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपके निजी जीवन सहित करियर के विकास के लिए हेल्दी कॉम्पीटिशन बहुत फायदेमंद रहता है. वैसे भी आज के अन्य इंटर्न्स आपको भविष्य के ऑफिस कलीग्स के साथ व्यवहार करने का हुनर सिखाते हैं.

इंटर्नशिप के दौरान मिलेंगे आपको कई किस्म के लोग

कॉलेज की पढ़ाई समाप्त करने के तुरंत बाद एक इंटर्न की जिम्मेदारी संभालते समय इंटर्न का परिचय बिलकुल एक नए माहौल, परिवेश तथा जीवन शैली से होता है तथा उसे इसे हरके परिस्थिति में अपनी  तरक्की के लिए जरुर अपनाना चाहिए. कॉलेज के दिनों में किसी भी तरह का बोझ, किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी और किसी भी तरह का दबाव नहीं होता है, लेकिन इस समय नौकरी पाने का दबाव एक इंटर्न की जीवन शैली को पूरी तरह बदल देता है. जीवन में विकास की प्रक्रिया से उनका पहला सामना यहीं से होता है. ऑफिस जाने के लिए सुबह जल्दी उठाना, निर्धारित समय पर कार्यालय जाना और दिए गए असाइंमेंट को पूरा करना आदि कार्य अब उनके जीवन के जरुरी हिस्से बन जाते हैं जिससे उन्हें हर परिस्थिति में एडजस्टमेंट करना पड़ता है.अतः प्रारम्भिक अवस्था में नई जीवन शैली को अपनाना वाकई चुनौतीपूर्ण कार्य होता है लेकिन आगे चलकर धीरे धीरे यह इंटर्न के जीवन शैली का एक अंग बन जाता है.

किसी भी तरह की प्रोफेशनल डिग्री प्राप्त करने के बाद छात्रों को नौकरी की तलाश में पहले एक इंटर्न के रूप में विभिन्न कंपनियों, ऑर्गनाइजेशंस और कार्यालयों में कार्य करना पड़ता है. प्रत्येक ऑफिस, कंपनी और ऑर्गनाइजेशन का वातावरण एक दूसरे से बिलकुल भिन्न भिन्न  होता है. छात्रों को एक इंटर्न के रूप में  विभिन्न वर्क कल्चर्स,चुनौतियों और अन्य तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.शुरू शुरू में एक इंटर्न का इस तरह के अपरिचित माहौल से परेशान होना साधारण-सी बात है लेकिन फिर भी, कुछ इंटर्न तो अपनी इंटर्नशिप जारी ही नहीं रख सकते हैं. अगर आप थोड़ी समझदारी और धैर्य के साथ काम लें तो आत्मविश्वास के साथ काम करने तथा सही रिजल्ट देने की कला सीख कर इन परेशानियों और चुनौतियों को बड़ी आसानी से दूर किया जा सकता है.

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