2019 में करना पड़ सकता है एक इंटर्न को इन चुनौतियों का सामना

अभी हाल फिलहाल में नए जॉब ज्वाइन करने तथा इंडस्ट्री के उतार चढ़ाव से पूरी तरह वाकिफ नहीं होने के कारण नई और अप्रत्याशित चुनौतियां, कठिनाइयां और समस्याएं एक इंटर्न को अपना इंटर्नशिप छोड़ने के लिए विवश कर सकती हैं.यह स्थिति कभी भी उत्पन्न हो सकती है.संभव है कि एक इंटर्न के रूप में ज्वाइन करने के कुछ दिन बाद ही यह घटित हो या फिर बहुत अर्से बाद. इसलिए यह जानने के लिए कि किसी संगठन में इंटर्नशिप के प्रारंभ होने के बाद एक इंटर्न को किस तरह की कठिनाइयों, समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है ? इसका विवरण नीचे दिया गया है.

वर्किंग आवर

जब भी कोई इंटर्न ज्वाइन करता है तो शुरूआती दौर में वह जितना चाहता है उतना नहीं सीख पाता है. इसका मुख्य कारण उनको मिलने वाला कम समय भी हो सकता है. साथ ही कहीं कहीं उन्हें अपने निर्धारित समय से अधिक समय तक भी काम करना पड़ता है. कभी कभी अतिरिक्त काम के बोझ की वजह से भी इंटर्न परेशान रहने लगते हैं.

लर्निंग कैपेबिलिटी,टास्क और प्रोजेक्ट्स

एक नए इंटर्न को एक रेगुलर तथा प्रोफेशनल कर्मचारी की तरह बहुत अधिक कार्य नहीं दिया जाता है क्योंकि चूँकि अभी वे इंटर्न है और अनुभव के अभाव में वे एक प्रोफेशनल की तरह परफॉर्म नहीं कर सकते हैं और सीनियर्स या अभी मैनेजर्स की ऐसी सोंच के कारण वो अपना शत प्रतिशत नहीं दे पाते हैं. ऐसा उन परिस्थितियों में विशेष रूप से होता है जब किसी इंटर्न के स्किल्स का इस्तेमाल किसी ऑर्गनाइजेशन द्वारा नहीं किया जाता है. किसी किसी ऑर्गनाइजेशन में इंटर्न को एक अनुभवी प्रोफेशनल्स के रूप में वरीयता दी जाती है और उन्हें कई कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाती है.वैसे तो इससे इंटर्न को अपने स्किल्स में वृद्दि करने का बड़ा ही सुनहरा अवसर उपलब्ध होता है लेकिन कभी कभी यह उनके लिए उबाऊ तथा बोझिल प्रक्रिया भी बन जाता है और इससे इंटर्न को कई बार बहुत अधिक परेशानी उठानी पड़ती है.

ट्रांसपोर्टेशन और फूड पेमेंट

कभी कभी यह उन इंटर्न को बहुत संघर्षरत स्थिति में ला देता है जो बहुत संपन्न परिवार से नहीं होते हैं. ट्रांसपोर्टेशन और फूड पेमेंट के सही भुगतान के अभाव में कभी कभी वे अपना इंटर्नशिप बीच में ही छोड़ने को मजबूर होते हैं. कुछ कारणों से वे सीधे सीधे अपने लिए इसकी मांग भी अपने सुपरवाइजर से नहीं कर सकते हैं. लेकिन इन्टर्नशिप के लिए चयन के दौरान अगर इंटर्न अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इसकी मांग करते हैं और कम्पनी द्वारा आपको आश्वसन दिया जाता है तो इंटर्न  अपने व्यय रिपोर्ट के माध्यम से अपने खर्च का दावा कर सकते हैं. इससे उनको कई तरह की समस्याओं से निजात मिल सकती है.

मन में उठ रहे सवालों को क्लियर न कर पाना

कंपनी के वर्किंग कल्चर से पूरी  तरह से वाकिफ नहीं होने के कारण अक्सर इंटर्न अपने सीनियर से कुछ भी पूछने से डरते हैं. जब काम का प्रेशर बहुत अधिक होता है तो उस समय उन्हें बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और चाहते हुए भी वे अपना परफॉरमेंस  बहुत अच्छा नहीं कर पाते हैं.

आप कैसा कर रहे हैं ? इस तरह के सवाल पूछे जाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना

क्या मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं? काम करने का मेरा यह तरीका सही है? क्या मैंने यह काम किया है? मुझे और अधिक काम करने की आवश्यकता है? इन सवालों का जवाब देना अति आवश्यक होता है विशेष रूप से इंटर्न के लिए तभी आपकी बेहतर इमेज किसी भी ऑर्गनाइजेशन में बन पायेगी.

दूसरे इंटर्न के साथ प्रतिस्पर्धा

ऑफिस का वातावरण प्रत्येक इंटर्न के लिए भिन्न भिन्न होता है. कुछ के लिए सहयोगी वातावरण हो सकता है तो कुछ के लिए यह पूरी तरह से प्रतिस्पर्धात्मक हो सकता है. यह ऐसे इंटर्न के लिए विशेष महत्व रखता है जो अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए नौकरी पाने की इच्छा रखते हैं. अधिकांश इंटर्न बहुत कुछ सीखते हैं, कुशलता पूर्वक कार्य करते हैं तथा अपने दिए गए प्रोजेक्ट्स को ईमानदारी से पूरा करते हैं. लेकिन कभी कभी प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने में कठिनाई महसूस होती है. लेकिन कभी भी इन प्रतिस्पर्धात्मक माहौल से भागने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. हो सके तो धैर्य पूर्वक उसका सामना करते हुए सकारात्मक रिजल्ट देने की कोशिश करनी चाहिए.

नया माहौल एवं परिवेश

कॉलेज की पढ़ाई समाप्त करने के तुरंत बाद एक इंटर्न की जिम्मेदारी संभालते समय इंटर्न का परिचय बिलकुल एक नए माहौल,परिवेश तथा जीवन शैली से होता है तथा उसे इसे हर हाल में अपने प्रोग्रेस के लिए अपनाना होता है. कॉलेज के दिनों में किसी भी तरह का बोझ, किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी और किसी भी तरह का दबाव नहीं होता है, लेकिन इस समय नौकरी पाने का दबाव एक इंटर्न की जीवन शैली को पूरी तरह बदल देता है. जीवन में विकास की प्रक्रिया से उनका पहला सामना यहीं से होता है. ऑफिस जाने के लिए सुबह जल्दी उठाना, निर्धारित समय पर कार्यालय जाना और दिए गए असाइंमेंट को पूरा करना आदि कार्य अब उनके जीवन शैली का अंग बन जाते हैं जिससे उन्हें हर परिस्थिति में एडजस्टमेंट करना पड़ता है.अतः प्रारम्भिक अवस्था में नई जीवन शैली को अपनाना वाकई चुनौतीपूर्ण कार्य होता है लेकिन आगे चलकर धीरे धीरे यह इंटर्न के जीवन शैली का एक अंग बन जाता है.

निष्कर्ष

किसी भी तरह की प्रोफेशनल डिग्री प्राप्त करने के बाद छात्रों को नौकरी की तलाश में पहले एक इंटर्न के रूप में विभिन्न कंपनियों, ऑर्गनाइजेशंस और कार्यालयों में कार्य करना पड़ता है. प्रत्येक ऑफिस, कंपनी और ऑर्गनाइजेशन का वातावरण एक दूसरे से बिलकुल भिन्न भिन्न  होता है. छात्रों को एक इंटर्न के रूप में  विभिन्न वर्क कल्चर्स,चुनौतियों और अन्य तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.शुरू शुरू में एक इंटर्न का इस तरह के अपरिचित माहौल से परेशान होना स्वाभाविक है जिससे कुछ इंटर्न तो अपनी इंटर्नशिप जारी ही नहीं रख सकते हैं. लेकिन अगर थोड़ी से चतुराई तथा धैर्य के साथ काम किया जाय तो आत्मविश्वास के साथ काम करने तथा सही रिजल्ट देने की कला सीख कर इन परेशानियों और चुनौतियों को बड़ी आसानी से छू मंतर किया जा सकता है.

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