अंधविश्वास छोड़ें, सफल बनें | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 3

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमें अंधविश्वास छोड़ने के लिए मोटीवेट कर रहे हैं. दरअसल, हम खुद, हमारा परिवार, रिश्तेदार या दोस्त कई किस्म के अंधविश्वासों से ग्रस्त हैं. इनमें से कुछ खास अंधविश्वास हैं – बिल्ली द्वारा आपका रास्ता काट जाना, छीक पड़ना, नजर लगना, शीशा टूटना, दूध उबल कर गिरना और आप की कुंडली पर राहू, केतु, शनि या मंगल का प्रकोप. शिव खेड़ा जी हमसे इस वीडियो में पूछ रहे हैं कि आखिर अमरीका में शनि का प्रकोप क्यों नहीं दिखता?... या फिर, हम शनि को पाकिस्तान भेजकर सारे आतंकवादियों का सफाया क्यों नहीं करवा लेते? शिव खेड़ा जी इस वीडियो में कुछ व्यक्तिगत और अन्य उदाहरण देकर हमें अंधविश्वास छोड़कर, अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय के बूते पर ‘सफलता की राह पर’ लगातार आगे बढ़ते रहने के लिए मोटीवेट कर रहे हैं. 

शिव खेड़ा जी शुरू में हमें बता रहे हैं कि असफल लोग कभी भी अपनी किसी असफलता की जिम्मेदारी खुद पर नहीं लेते हैं और सारा दोष दुनिया पर डालते हैं. ऐसे लोग अपने पेरेंट्स, टीचर्स या फिर, ग्रह-नक्षत्रों को दोषी मानते हैं या किसी अन्य व्यक्ति पर दोष लगाते हैं. लेकिन अपनी असफलता के लिए  कभी भी खुद को दोषी या जिम्मेदार नहीं मानेंगे. ऐसे ही लोग खाली बैठ कर पत्रियां मिलाते रहते हैं, नक्षत्र देखते रहते हैं और दुःख या परेशानी आने पर कहते हैं कि इस समय हमारे सितारे ही ख़राब चल रहे हैं. ज्योतिषी भी ऐसे ही लोगों से अपना कारोबार चलाते हैं. शिव खेड़ा जी के मुताबिक काफी हद तक हिंदुस्तान का मीडिया भी इस सबके लिए जिम्मेदार है जिसने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है. हरेक अख़बार और टीवी चैनल पर तिलक लगाकर होरोस्कोप या जन्मपत्री देखने वालों की कमी नहीं है जो आपका नाम, स्थान, जन्मतिथि और टाइम पूछकर, गणना करके आपको अपनी हर एक परेशानी या दुःख से बचने के लिए कई किस्म के उपाय बताते हैं जैसेकि: 

ये ज्योतिषी कभी पितृ दोष बताते हैं तो कभी पुत्री या पत्नी दोष. ऐसे कई किस्म के दोष बताने के बाद वे आपको शनि (ग्रह) के प्रकोप से डराकर, शनि से बचने के अजीबो-गरीब उपाय बताते हैं जैसेकि: - काला रुमाल लो, उसमें काली दाल डालो, उसे काजल लगाकर किसी काले बाल वाले की खोपड़ी में 6 बार घुमाओ. फिर, काला कुत्ता खोजो, फिर काला बर्तन खोजो आदि. शनि को उतारना-चढ़ाना तो जैसे उनके लिए खेल-तमाशा ही बन गया है. आगे शिव खेड़ा जी पूछते हैं कि, ये शनि आखिर अमरीका क्यों नहीं जाता है? इस शनि को उतारना-चढ़ाना अगर इतना आसान है तो शनि को पाकिस्तान भेज कर हम सारे आतंकवादियों का सफाया क्यों नहीं करवा देते हैं? इसमें क्या दिक्कत है?.

शिव खेड़ा जी आगे कहते हैं कि, टीवी पर एक बाबा अपने शिष्यों की समस्यायें सुनकर कभी जलेबी तो कभी गोलगप्पे या फिर, कभी खट्टी-मीठी चटनी खाने की सलाह देता है. लोग फिर भी ऐसे बाबाओं के पांव पकड़ते हैं और पैसे चढ़ाते हैं. एक बाबा प्रीत करने को कहता है. कोई बाबा हनी को प्रीत से मिला कर बेचता है. ऐसे लोगों को जेल होनी चाहिए और हम ऐसे लोगों के पांव पकड़ रहे हैं.

खेड़ा जी आगे हमें एक बेहतरीन सलाह देते हैं कि, अगर पांव ही पकड़ने हैं, सिर ही झुकाना है तो परमात्मा के आगे अपना सिर झुकाओ. अपने पेरेंट्स के सामने अपना सिर झुकाओ जिन्होंने तुम्हें जीवन दिया है. हमारी सेल्फ रिस्पेक्ट जरुर होनी चाहिए. वे आगे हमसे कुछ इस तरह से पूछते हैं कि, हम क्रिमिनल पॉलिटिशियन के पांव पकड़ लेते हैं.....हमारी कोई सेल्फ रिस्पेक्ट है भी या नहीं?.  

इस वीडियो में शिव खेड़ा जी अगर कहते हैं कि, ‘इंडियन ऑयल उनका क्लाइंट है और हरेक साल में 1 बार वे असम में इंडियन ऑयल की फैसिलिटी में लीडरशिप प्रोग्राम में शामिल होते हैं’. एक बार जब खेड़ा जी प्रोग्राम खत्म होने के बाद एयरपोर्ट जा रहे थे और एयरपोर्ट का फ़ासला 1 घंटे का था तो अचानक उनके ड्राईवर ने झटके से ब्रेक लगाकर कार रोक दी. पूछने पर ड्राईवर बोला कि, बिल्ली रास्ता काट गई है, अब हमें तब तक रुकना पड़ेगा जबतक कोई दूसरा वाहन यहां से न गुजर जाए, नहीं तो कोई नुकसान हो जायेगा. तब शिव खेड़ा जी ने पूछा कि ‘क्या दूसरे ड्राईवर को नुकसान नहीं होगा?’. यह सुनकर ड्राईवर ने जवाब दिया कि ‘यह उसकी प्रॉब्लम है, हमारी नहीं’. अब खेड़ा जी ने आगे पूछा कि, ‘मान लो तुम ही बिल्ली को देख नहीं पाते और अपनी कार यहां से गुजार लेते तो क्या होता?.’ तिस पर  भी ड्राईवर अपने अंधविश्वास युक्त तर्क से पीछे नहीं हटा, मानों रिसर्च वर्क करके उसने अपना जवाब तय किया था..... ड्राईवर बोला कि, ‘उस हालत में बिल्ली की पॉवर कम हो जाती है’.   

इस वीडियो में आगे खेड़ा जी अंधविश्वासों के खिलाफ़ गुरु नानकदेव जी का बड़ा ही सशक्त उदाहरण दे रहे हैं. एक बार गुरु नानकदेव जी हरीद्वार गए और उन्होंने देखा कि लोग एक तरह मूंह करके पानी चढ़ा रहे हैं. उनके  पूछने पर लोगों ने बताया कि हमारे पूर्वज दूसरे लोक में प्यासे हैं इसलिए हम उन्हें पानी पिला रहे हैं. इतना सुनते ही गुरु नानकदेव जी दूसरी तरफ अपना मूंह घुमाकर पानी चढ़ाने लगे और जब लोगों ने हैरान होकर पूछा कि आप यह क्या कर रहे हैं?.....तो गुरु नानकदेव जी ने जवाब दिया कि मैं अपने खेतों को पानी दे रहा हूं. लोगों ने हैरानी से पूछा कि आपके खेत कहां हैं? गुरु नानक ने जबाव दिया कि, ‘पंजाब में’. वे लोग फिर बोले कि, यहां से आपके खेतों तक पानी कैसे जाएगा? तब गुरु नानकदेव जी ने जवाब दिया कि, ‘जब आपका पानी दूसरे लोक तक पहुंच सकता है तो क्या मेरा पानी मेरे खेतों तक नहीं पहुंच सकता?’ वास्तव में गुरु नानकदेव जी ने अपने समय में समाज में फैले सभी अंधविश्वासों का जोरदार विरोध किया था.

खेड़ा जी आगे कहते हैं कि सरदार परिवारों में न कोई पत्रियां मिलाते हैं, न कोई मंगलिक होता है. शादी के लिए भी कोई महूर्त नहीं निकालते. हर शादी सहूलियत और परिस्थिति के मुताबिक संडे, सैटरडे या फिर फ्राइडे को हो जाती है. उनका सब बढ़िया चल रहा है. 

इस अंधविश्वास ने हमें अपने जीवन में बहुत कमजोर बना दिया है और हमारी जिंदगी में जब भी कुछ गलत होता है तो उससे कुछ सीख लेने के बजाय हम अपने सितारों को दोषी मानते हैं. अपने जीवन से हम कुछ नहीं सीखते और वही गलती बार-बार आगे दोहराते जाते हैं.

खेड़ा जी आगे एक पत्रिका के हवाले से बताते हैं कि दक्षिण भारत के बड़े शहरों हैदराबाद, मद्रास और बैंगलोर में तकरीबन 80% बच्चों के जन्म भी मुहूर्त देख कर ऑपरेशन से हो रहे हैं. यह अंधविश्वास की हद है. पढ़े-लिखे होकर भी हम ऐसी गलतियां करते हैं.

हमने अपने देश के इतिहास से भी कुछ नहीं सीखा. पानीपत की लड़ाई हुई और कई लड़ाइयां हुईं. मुगलों से चार गुना ज्यादा फ़ौज होने पर भी राज-ज्योतिषी के कहने पर हमने पहले युद्ध नहीं किया और दुश्मन ने हमला करके हमें जीत लिया. हमने फिर भी कुछ नहीं सीखा.

इस वीडियो में फिर, शिव खेड़ा जी अपना एक कोटेशन पेश कर रहे हैं, ‘जीतने वाले कोई काम अलग नहीं करते बल्कि अपना हर काम अलग ढंग से करते हैं’. फिर शिव खेड़ा जी ने एक बड़ी ही रोचक और प्रेरक कहानी सुनाई कि, ‘एक कपड़ा व्यापारी अपने सिर पर कपड़ों की गठरी रखकर जगह-जगह घूमकर अपने कपड़े बेचता था. जब वह बूढ़ा हो गया तो रास्ते में रोज़ एक मंदिर में कुछ देर रूककर विश्राम करने लगा. उसे देखकर पुजारी को दया आई और उसने अपना एक गधा उस बुजुर्ग व्यापारी को दे दिया. बुजुर्ग खुश हो गया. कुछ दिन उसका कारोबार ठीक से चलता रहा. फिर एक दिन वह गधा मर गया.....

बूढ़े व्यापारी ने सोचा कि इस गधे ने मेरी बहुत सेवा की है तो इसका अंतिम संस्कार काफी सम्मान से होना चाहिए. बूढ़े व्यापारी ने उस गधे का अंतिम संस्कार करके वहां एक समाधि बना दी और धूप-अगरबत्ती, फूल आदि चढ़ाकर वहीँ बैठ गया. इतने में वहां से एक और व्यापारी गुजरा जो परेशान और दुखी था. समाधि देखकर उसने सोचा कि, ‘जरुर ये किसी महान आत्मा की समाधि है’ और उस व्यापारी ने एक मन्नत मांग ली जो संयोगवश पूरी हो गई. वह व्यापारी सारे गांव वालों को इस गधे की समाधि पर ले आया. भीड़ जुटने लगी और लोग खूब रुपये-पैसे चढ़ाने लगे. पहले मंदिर के पुजारी को जब यह समाचार मिला तो वह भी इस समाधि को देखने चला आया.

समाधि पर उस बूढ़े व्यापारी को देख कर पुजारी ने पूछा कि, आखिर यह किस की समाधि है? बूढ़े व्यापारी ने हाथ जोड़कर कहा कि, आप मेरे गुरु हैं. मैं आपसे झूठ नहीं बोल सकता. लेकिन आप चुप रहना, किसी को बताना नहीं. नहीं तो मेरे पेट पर लात लग जायेगी......यह उस गधे की समाधि है, जो आपने दिया था. फिर उस बूढ़े व्यापारी ने पुजारी से पूछा कि आपके मंदिर में किस की समाधि है? ....तो पुजारी ने जवाब दिया कि आप भी चुप रहना....वास्तव में वह इसकी मां की समाधि है.....हम दरअसल गधों की पूजा कर रहे हैं..... हमारे जीवन में इस हद तक अंधविश्वास बढ़ चुका है.

यह इंसान को कमजोर बना देता है. हमें भावना का सम्मान करना चाहिए, अंधविश्वास का नहीं. वे आगे हमसे पूछते हैं कि, क्या हम उनसे सहमत हैं?.....और वास्तव में हम सभी उनसे सहमत हैं.

ऐसे अन्य मोटिवेशनल वीडियो देखने के लिए आप हमारी वेबसाइट www.jagranjosh.com पर रेगुलरली विजिट करते रहें.  

Related Categories

NEXT STORY
Also Read +
x