Positive India: पिता चलाते थे ऑटो रिक्शा, पैसों की थी किल्लत, रिश्तेदार कहते थे कि पढ़ाई मत करवाओ, फिर 21 साल की उम्र में बने IAS - जानें Ansar Shaikh की कहानी

पढ़ने की लगन और जीवन सुधारने की चाह ने अंसार शेख को वह सफलता हासिल कराई जिसकी कामना भारत के अधिकांश युवा करते हैं। यह उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि अंसर ने अपने पहले ही एटेम्पट में केवल 21 वर्ष की आयु में UPSC (IAS) 2015 की परीक्षा पास कर 361वी रैंक हासिल की। आइये जानते हैं इन होनहार अफसर की कहानी।

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पिता चलाते हैं ऑटो रिक्शा, माँ करती हैं मजदूरी 

अंसार का जन्म महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके के शेलगांव में हुआ। उनके पिता शेलगांव में ही ऑटो रिक्शा चलाते हैं और माँ खेत में मजदूरी करती हैं। अंसर के पिता ने 4 शादियाँ की जिसके कारण परिवार में अनेक लोग होने की वजह से हमेशा की राशन की किल्लत रहती थी। अंसार बताते हैं कि शिक्षा के अभाव के कारण उनकी सभी बहनों की शादी कम उम्र में कर दी गई थी और भाई छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर चाचा के गैराज में काम करने लगा था।

पिता चाहते थे पढ़ाई छुड़वाना 

अंसार बताते हैं कि जब वह चौथी कक्षा में थे तब रिश्तेदारों ने उनके पिता पर उनके पढ़ाई छुड़वाने का दबाव डाला। उनकी बातों से प्रभावित हो कर अंसार के पिता उनके स्कूल पहुंचे और शिक्षक से उनकी पढ़ाई रोकने की बात की। लेकिन अंसार के शिक्षक उनकी काबिलियत को पहचानते थे और उन्होंने उनके पिता से कहा की अंसार एक होनहार विद्यार्थी हैं और बड़े हो कर वह उनके परिवार के लिए ज़रूर कुछ अच्छा करेंगे। अंसर के पिता यह बात सुन कर हैरान रह गए और उन्होंने फिर कभी अंसार को पढ़ने से नहीं रोका। 

छोटे भाई ने दिए कॉलेज की फीस के पैसे 

अंसार ने मराठी मीडियम से 91% अंकों के साथ 12वी पास की। इसके बाद उन्हें पुणे के जाने माने फर्गुसन कॉलेज में दाखिला तो मिल गया परन्तु उनके पास आगे की फीस भरने के पैसे नहीं थे। ऐसे में उनके छोटे भाई अपने मासिक वेतन से रु 6000 हर महीने अंसर को भेजते थे। अंसार बताते हैं कि जब उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया तब उनके पास केवल एक जोड़ी चप्पल और दो जोड़ी कपड़े थे। मराठी माध्यम से पढ़ाई करने और पिछड़े माहौल में रहने के कारण वह अंग्रेजी से डरते थे परन्तु उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

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कॉलेज प्रोफेसर ने दी UPSC सिविल सेवा की तैयारी करने की सलाह

कॉलेज के फर्स्ट ईयर में ही अंसर के प्रोफेसर ने उन्हें UPSC सिविल सेवा की तैयारी करने की सलाह दी। इस पर अमल करते हुए अंसार ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ साथ ही UPSC की कोचिंग लेने का फैसला किया। परन्तु कोचिंग की फीस देने के पैसे उनके पास नहीं थे। उन्होंने कोचिंग के हेड से अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बात की। कोचिंग हेड ने एक मुलाकात में ही अंसार की काबिलियत और आगे बढ़ने की लगन को पहचान लिया और उनकी आधी फीस माफ़ कर दी। अंसार बताते हैं कि जब वह कोचिंग क्लास जाते थे तो वहाँ सभी लोग उनसे उम्र में बड़े थे। जब वह फैकल्टी से कोई टेढ़ा सवाल पूछते थे तो क्लास के लोग उनका मज़ाक भी बनाते थे परन्तु अंसर ने कभी इस बात को दिल से नही लगाया। उनका ध्यान केवल अपने लक्ष्य पर था। 

पहले ही एटेम्पट में सबसे युवा IAS अफसर बने अंसार 

अंसार का नाम उन चुनिंदा IAS ऑफिसर्स की लिस्ट में शामिल है जिन्होंने केवल 21 वर्ष की आयु में ही UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की। पर अंसार का यह सफर आसान नहीं था। वह बताते हैं की किताबे खरीदने के पैसे ना होने के कारण अंसर ने दोस्तों के नोट्स और किताबें फोटोकॉपी करा कर पढ़ाई की। वह प्रत्येक दिन 12-14 घंटे पढ़ते थे। वह बताते हैं की उन्होंने कई बार पूरा दिन केवल वड़ा पाव खा कर निकाले। परन्तु उनकी सच्ची लगन और कड़ी मेहनत रंग लाइ और उन्होंने 2015 में UPSC की सिविल सेवा परीक्षा पहले ही एटेम्पट में 361वी रैंक के साथ पास की। 

अंसार हर उस युवा के लिए एक प्रेरणा हैं जो आर्थिक स्थिति, पिछड़े समाज और अपने धर्म और जाति को एक कठिनाई के रूप में देखते हैं। अंसर ने ना केवल इन सब मुश्किल परिश्थितियों का सामना किया बल्कि अपनी मेहनत और एकाग्रता से अपना लक्ष्य भी हासिल किया। 21 वर्ष की आयु में IAS बन अंसार ने ये साबित किया कि यदि आपके अंदर प्रतिभा है और कुछ कर दिखाने का जूनून है तो कोई भी परिस्थिति आपके हौसले से बड़ी नहीं। 

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