Supreme Court ने CBSE से माँगा जवाब!

CBSE: बची हुई परीक्षाओं को लेकर भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से 23 जून 2020 (मंगलवार) तक जवाब माँगा है। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने CBSE से बची हुई परीक्षाओं को रद्द करने और इंटरनल एसेसमेंट के आधार पर अंक देने की बात पर विचार कर अपना पक्ष 23 जून तक साफ़ करने को कहा। 

सर्वोच्च न्यायालय ने  कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों और अभिभावकों द्वारा बचे हुए पेपरों को रद्द (Scrap) करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका को मद्देनजर रखते हुए ये निर्देश CBSE को दिया। अभिभावकों द्वारा बचे हुए पेपरों को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होनी है। 

CBSE ने पूरे देश में 15,000 परीक्षा केंद्रों पर 1 July से 15 July तक बची हुई परीक्षाएं आयोजित करने की योजना बनाई है जिसके लिए बोर्ड ने नई डेटशीट के साथ-साथ कुछ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

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CBSE के COVID-19 महामारी के दौरान परीक्षाओं को जुलाई माह में आयोजित कराने के निर्णय के खिलाफ कुछ अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बचे हुए पेपरों को रद्द करने की मांग की और इन विषयों के अंक इंटरनल एसेसमेंट के आधार पर देने की बात कही।  

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इस याचिका में कहा गया कि जुलाई माह में CBSE Board Exams 2020 के आयोजन से कई छात्रों की जान जोखिम में पड़ सकती है क्योंकि उस दौरान COVID-19 के मामलों की संख्या चरम पर होने का अंदेशा है। इस याचिका में यह भी कहा गया कि CBSE Examination Centres की संख्या 3,000 से बढ़ाकर 15,000 कर दी गई है और हर केंद्र पर सभी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना व्यावहारिक नहीं है।

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इस याचिका में आगे ये भी दलील दी गई है कि पूरी आबादी के एक बड़े हिस्से में COVID-19 के कोई लक्षण नहीं दिखते है। इससे छात्र कोरोनावायरस के वाहक भी बन सकते हैं और इस वायरस से अन्य लोगो के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। 

याचिका में यह भी कहा गया है कि CBSE Board Exams 2020 के बचे हुए पेपरों को आयोजित करने का निर्णय मनमाना और भेदभाव पूर्ण है क्योंकि भारत के बाहरCBSE Schools में इस पेपरों को रद्द कर दिया गया है। अगले हफ्ते अब इस याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमे सर्वोच्च न्यायालय कोई फैसला दे सकती है जो CBSE बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। 

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