मशीन लर्निंग की दुनिया में ये हैं लेटेस्ट ट्रेंड्स

परिचय

हाल के वर्षों में हमारे जीवन में मशीनों के लगातार बढ़ते हुए प्रभाव को कौन नकार सकता है? आज के मानव को काफी हद तक मशीनी मानव कहा जा सकता है और इसका कारण हमारे दैनिक जीवन में मशीनों का बड़ी तेज़ गति से बढ़ता हुआ इस्तेमाल है. अब जब हमारे जीवन में मशीनें बढ़ी हैं तो स्वाभाविक रूप से मशीनों के बारे में समुचित जानकारी रखना या फिर, इन मशीनों में लगातार सुधार करते हुए इन्हें ज्यादा उपयोगी बनाना हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है. इस कारण, मशीन लर्निंग और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के साथ ही डिजिटलीकरण और इनफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी सेक्टर की फ़ील्ड्स में बदलाव और विकास आज देखते ही बनता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्ष 2020 तक लगभग 39 हजार एनालिटिक्स जॉब्स निर्मित होंगी. डाटा, मशीन लर्निंग और एनालिटिक्स की फ़ील्ड्स से जुड़े प्रोफेशनल्स को यह जानकर भी काफी ख़ुशी होगी कि हमारे देश में मौजूदा समय में, उक्त फ़ील्ड्स में 50 हजार पोस्ट से अधिक भर्तियां होनी अभी बाकी हैं.

आईटी सेक्टर जॉब्स और आईटी सेक्टर में पॉजिटिव बदलाव

अगर आप कंप्यूटर्स और कंप्यूटर लैंग्वेजेज में एक्सपर्ट हैं तो यह पेशा आपके लिए बढ़िया करियर ऑप्शन रहेगा. आईटी सेक्टर में विभिन्न जॉब्स करते हुए आप कंप्यूटर्स और आईटी की फील्ड से संबद्ध सभी काम करते हैं. आने वाले वर्षों में आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर्स के लिए इंडियन इकॉनमी और जॉब मार्केट में विकास की काफी संभावना है. आईटी प्रोफेशन के लिए शैक्षिक योग्यता के तौर पर कैंडिडेट्स ने कंप्यूटर साइंस, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या किसी संबद्ध फील्ड में बैचलर डिग्री हासिल की हो. कई कंपनियां पोस्टग्रेजुएट कैंडिडेट्स को इन जॉब्स के लिए वरीयता देती हैं.

इसी तरह, आईटी सेक्टर में लोग फाइल्स के माध्यम से रोजाना बेशुमार डाटा जनरेट और ट्रांसफर होता है. इस काम में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सर्वर एप्लीकेशन्स के साथ ऑपरेटिंग सिस्टम्स शामिल होते हैं. अब, सारा डाटा तो सभी लोगों और इंडस्ट्रीज आदि के लिए उपयुक्त और उपयोगी नहीं होता है. ऐसे में मशीन लर्निंग तकनीक क्लीन डाटा पर काम करते हुए आईटी सेक्टर के संचालन में निरंतर पॉजिटिव सुधार लाती है. इस कारण कोई भी आईटी एंटरप्राइज रिएक्टिव एप्रोच के बजाए प्रोएक्टिव एप्रोच अपना लेता है.

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस एक करियर बूस्टर

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के तहत आमतौर पर विजूअल परसेप्शन, स्पीच रिकग्निशन, डिसिजन मेकिंग और लैंग्वेज ट्रांसलेशन से संबंधित काम किये जाते हैं. हमारे देश में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल आजकल विशाल डाटा सेट्स को हैंडल करने के लिए किया जा रहा है. भारत में कई कंपनियां इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपनी गंभीर समस्याओं को सुलझाने के साथ-साथ सटीक परिणाम हासिल करने के लिए कर रही हैं. एक अध्ययन के मुताबिक भारत में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का स्कोप बड़ी तेज़ी से बढ़ रहा है. इस फील्ड में कैंडिडेट्स के लिए सरकारी और प्राइवेट सेक्टर्स में जॉब और करियर की काफी अच्छी संभावनाएं हैं. आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से संबद्ध प्रोफेशनल्स गेम प्रोग्रामिंग, रोबोटिक साइंस, कंप्यूटर साइंस और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की फ़ील्ड्स में बेहतर योगदान दे सकते हैं.

डाटा साइंस और डिजिटल दुनिया

अगर हम आज के जमाने को ‘डाटा युग’ कहें तो गलत नहीं होगा क्योंकि आजकल डाटा केवल इकोनॉमिक्स या स्टेटिस्टिक्स की फ़ील्ड्स तक ही सीमित नहीं रह गया है और इंटरनेट तथा कंप्यूटर्स ने डाटा को हमारे दैनिक जीवन का एक हिस्सा बना दिया है. मशीन लर्निंग और डाटा साइंस से संबद्ध सभी जॉब्स आजकल काफी डिमांड में हैं. ये प्रोफेशनल्स एनालिटिकल डाटा एक्सपर्ट्स की एक नई ब्रीड हैं जिनके पास कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए टेक्निकल स्किल्स होते हैं. ये पेशेवर मैथमेटिशियन, कंप्यूटर साइंटिस्ट और ट्रेंड-स्पॉटर का काम एकसाथ करते हैं क्योंकि इन पेशेवरों को बिजनेस और आईटी वर्ल्ड में महारत हासिल होती है, इसलिए इन प्रोफेशनल्स की हाई डिमांड होने के साथ ही यह एक वेल-पेड प्रोफेशन है.

डाटा साइंटिस्ट्स ऐसे डाटा एक्सपर्ट्स होते हैं जो विभिन्न डाटा प्वाइंट्स (स्ट्रक्चर्ड और अन-स्ट्रक्चर्ड) को मैनेज और ऑर्गनाइज करने के लिए मैथ्स, स्टेटिस्टिक्स और प्रोग्रामिंग के अपने विशेष स्किल्स का इस्तेमाल करते हैं. किसी डाटा साइंटिस्ट का प्रमुख काम उपलब्ध डाटा से मीनिंग निकालना और उस डाटा को इन्टरप्रेट करना होता है. इसके लिए डाटा साइंटिस्ट स्टेटिस्टिक्स और मशीन लर्निंग के टूल्स और मेथड्स की मदद से विभिन्न काम करता है.

आजकल के डिजिटल और इंटरनेट युग में डाटा साइंटिस्ट्स और एडवांस्ड डाटा एनालिस्ट्स की मांग निरंतर तेजी से बढ़ती ही जा रही है. ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2020 तक यह मांग तकरीबन 28% तक बढ़ सकती है. जॉब मार्केट में भी डाटा साइंटिस्ट्स और एनालिस्ट्स की जॉब्स के लिए सूटेबल और क्वालिफाइड कैंडिडेट्स की तलाश करना काफी चुनौतीपूर्ण काम है.

ऑटोमेशन और रोबोटिक इफेक्ट्स

जैसे-जैसे हम मशीन्स के इस्तेमाल के आदी होते जा रहे हैं ठीक उसी तरह, मशीन लर्निंग में हमारा कौशल और निर्भरता बढ़ने के साथ ही रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन में भी हमारी निर्भरता बढ़ती ही जा रही है और इसके अच्छे उदाहरण ड्रोन्स और रोबोट्स का हमारे दैनिक जीवन में बढ़ता हुआ इस्तेमाल है. आजकल फाइनेंस, हेल्थकेयर और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेसेज में रोबोट्स का इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि ये रोबोट्स हमारे रोज़मर्रा के एक जैसे या मुश्किल काम को काफी आसन बना देते हैं. मशीन्स भी अब मेन्युअली ऑपरेट होने के बजाए ऑटोमेटिक होती जा रही हैं. लेकिन, हाल-फिलहाल हमे घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इस बढ़ते हुए ऑटोमेशन और रोबोट्स के इस्तेमाल के बावजूद भी ये मशीनें मानव का स्थान नहीं ले सकती हैं क्योंकि इनका निर्माता और कंट्रोलर तो आखिर मानव का दिमाग ही है ना!    

साइबर क्राइम्स से सुरक्षा देगी साइबरसिक्यूरिटी  

अब साइबर क्राइम्स और लीगल या इल्लीगल हैकिंग से कौन परिचित नहीं है? आजकल इंटरनेट पर पूरे विश्व की बढ़ी हुई निर्भरता और रोजाना इंटरनेट से अनेक डिवाइसेज कनेक्ट होने के कारण इंटरनेट की दुनिया में साइबर क्राइम्स और हैकिंग का जोखिम काफी बढ़ गया है. यहां तक कि विभिन्न देशों की सरकारी वेबसाइट्स भी हैक हो जाती हैं और सोशल मीडिया पर साइबर क्राइम्स तो जैसे अब एक आम बात हो गई है. मशीन लर्निंग और साइबर सिक्यूरिटी आज के समय में पॉजिटिव और नेगेटिव तरीकों से इस्तेमाल की जा सकती हैं. असल बात तो यह है कि कौन लोग या पेशेवर किस मंशा से मशीन लर्निंग या साइबर सिक्यूरिटी का इस्तेमाल कर रहे हैं? इस फैक्ट पर ही हमारी साइबर सिक्यूरिटी का सारा दारोमदार टिका है. इल्लीगल हैकर्स इन टेक्नीक्स का दुरूपयोग कर सकते हैं और साइबर सिक्यूरिटी फर्म्स या पुलिस और मिलिट्री इन टेक्नीक्स का उपयोग लोक तथा देश हित में करते हैं. बेहतरीन साइबर सिक्यूरिटी के लिए हमें इन टेक्नीक्स को सुरक्षित रखना होगा. 

सारांश

उक्त प्वाइंट्स को ध्यान में रखते हुए हम सिर्फ यही कहना चाहते हैं कि आजकल रोजाना टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन्स हो रही हैं और इस टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट ने मशीन लर्निंग के कॉन्सेप्ट के महत्व को बढ़ा दिया है. हमारे दैनिक जीवन में मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजीज में होने वाला सुधार इंटरनेट, न्यूरो-लिंग्विस्ट प्रोग्रामिंग (एनएलपी) और सेल्फ-एजुकेशन की फ़ील्ड्स में नए रास्ते खोल देगा. हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात तो यह है कि अगर मशीन लर्निंग टेक्नीक्स का इस्तेमाल गलत इरादे से किया जाए तो मानव जीवन और सभ्यता को काफी नुकसान पहुंच सकता है लेकिन अगर मशीन लर्निंग का इस्तेमाल मानव के हित में किया जाए तो आने वाले समय में हमारे दैनिक जीवन में कई क्रांतिकारी और रचनात्मक बदलाव जैसेकि, ड्राईवरलेस कारें, इफेक्टिव वेब सर्च और रोबोटिक सर्विसेज आदि देखने को मिलेंगे.

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