परफेक्शन सिंड्रोम: क्या हरेक काम में परफेक्ट होना है बहुत जरुरी?

आजकल के इस बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धी विश्व में क्या हरेक काम में परफेक्ट होना जरुरी है?..... या फिर, ऐसा जरुरी नहीं है. टीन लाइफ कोच रजत सोनी ने परफेक्शन (पूर्णता) सिंड्रोम की व्याख्या की है और यह भी बताया है कि परफेक्शन सिंड्रोम कैसे यंगस्टर्स और स्टूडेंट्स को उनकी रोजाना की जिंदगी में प्रभावित करता है?

हरेक व्यक्ति परफेक्ट बनना चाहता है. यह 21वीं सदी में सोशल मीडिया और ऐसे कई चैनल्स की  निरंतर निगरानी में रहने वाले मिलेनियल्स या आज की यंग जनरेशन की सच्चाई है. यद्यपि परफेक्ट होने या हरेक काम में परफेक्ट बनने के लिए लगातार कोशिश करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन वैचारिक तौर पर इसकी अमूर्त प्रकृति के कारण, परफेक्ट बनने की कोशिश अक्सर सभी लोगों पर बहुत तनाव और दबाव डालती है. चाहे आप अपने एकेडेमिक स्कोर्स पर एक नज़र डालें या फिर आप अपनी छुट्टियों को लेकर ही कुछ प्लान करें, आप अपने जीवन के हरेक क्षेत्र में परफेक्शन पाने के लिए पूरी कोशिश करते हैं. इस वजह से अक्सर लोग ‘परफेक्शन सिंड्रोम’ का शिकार बन जाते हैं. इस वीडियो में, टीन लाइफ कोच और मोटिवेशनल स्पीकर रजत सोनी परफेक्ट बनने से जुड़े सभी मिथकों को ख़त्म करते हैं और बताते हैं कि क्यों हरेक काम में परफेक्ट न होना भी हमारे लिए ठीक है? आइये इस आर्टिकल को पढ़कर इस संबंध में और ज्यादा जानकारी हासिल करें:

परफेक्ट बनने का प्रेशर

चाहे वह एकेडेमिक्स, स्पोर्ट्स या एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज हों, मिलेनियल और यंगस्टर्स पर परफेक्ट बनने का काफी ज्यादा प्रेशर होता है. लोगों पर अक्सर कुछ प्रेशर तो समाज के लोग या उनके पीअर ग्रुप्स डालते हैं लेकिन, ज्यादातर प्रेशर तो हम लोग खुद अपने ऊपर डालते हैं. लेकिन परफेक्ट बनने की कोशिश करते समय, स्टूडेंट्स अक्सर यह नहीं सोचते हैं कि परफेक्ट होने की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. वास्तव में, एक परफेक्ट व्यक्ति बनने की दौड़ में, स्टूडेंट्स अक्सर एक-दूसरे की नकल करना या अन्य लोगों के काम की नकल करना शुरू कर देते हैं. स्टूडेंट्स को यह समझना चाहिए कि जिस समय वे परफेक्ट बन जाते हैं, ठीक उसी समय उनका विकास रुक जाता है और वे कुछ नया नहीं सीख पाते हैं.

नीचे ऐसे 5 महत्वपूर्ण टिप्स दिए जा रहे हैं जो आपको परफेक्शन सिंड्रोम और प्रेशर से बचने में सहायता करने के साथ ही आसानी से परफेक्ट बनने में भी आपकी सहायता करेंगे.

टिप #1: खुद को दें बधाई

सबसे पहले, खुद को बधाई दें, अपने से यह अक्सर पूछें कि क्या आप पिछले साल, पिछले महीने या बीते हुए कल के दिन से आज एक ज्यादा अच्छे इंसान बन चुके हैं? अगर हां! .....तो आप बड़ा अच्छा काम कर रहे हैं. खुद को इस नेक काम की बधाई दें. आपको पूरे जीवन एक स्टूडेंट्स बनकर कुछ-न-कुछ सीखते रहना चाहिए और अपने परिवार, समाज और देश में अपना सकारात्मक योगदान देते हुए लगातार अपने व्यक्तित्व का विकास भी करना चाहिए.

टिप #2: दृढ संकल्प

हम खुद से जो कहते हैं, वह काफी महत्वपूर्ण होता है. हम अपने अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) में जो भी विचार बार-बार लाते हैं, वे विचार हमें अपनी कार्य-नीतियां बनाने में सहायता करते हैं और इससे हमें अपने लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलती है. इसलिए, अपने जीवन के मूल सिद्धांतों को बार-बार दोहराते रहें जैसेकि, आप सच्चे, ईमानदार और अपने लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं. एक परफेक्ट इंसान बनने के बजाय जीवन में आपका लक्ष्य नए-नए काम या स्किल्स सीखना होना चाहिए.  

टिप #3: जरूरत से ज्यादा सोच-विचार करने से बचें

क्या आपको पता है कि रोजाना हमारा दिमाग अधिक से अधिक 60,000 विचार सोचने में सक्षम है. इसके बावजूद, हम अक्सर एक या दो विचारों पर निर्भर रहना चाहते हैं और केवल उन्हीं विचारों पर अक्सर अपना सारा ध्यान केंद्रित कर देते हैं. यह जरूरत से ज्यादा सोच-विचार का कारण बन जाता है. इसलिए, केवल एक या दो मामलों पर जरूरत से ज्यादा सोचने के अलावा भी, आप अपने विचारों को ज्यादा अच्छे तरीके से व्यवस्थित कर सकते हैं. इससे आपको अपने दिमाग और मन को शांत, तनावमुक्त और व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी.

टिप #4: खुद अपने बेस्ट फ्रेंड बनें

खुद अपने प्रति दोस्ताना रवैया अपनाना काफी महत्वपूर्ण है. इससे आपको अपनी सारी कमजोरियों और ताकतों के साथ खुद को स्वीकार करने में मदद मिलेगी. खुद अपने दोस्त होने के कारण आप अपने जीवन में जोखिम उठाने के लिए खुद पर पूरा भरोसा रखते हुए लगातार आगे बढ़ते रहेंगे. आपको अपनी गलतियों से सीख लेने में मदद मिलेगी और आप अपनी असुरक्षा की भावना को दूर हटा कर एक खुश और संतुष्ट इंसान बन जायेंगे. ये सभी आस्पेक्ट्स केवल एक परफेक्ट व्यक्ति बनने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

टिप #5: विभिन्नताओं की सराहना करें और इन्हें स्वीकार करें  

जिस तरह आपकी अपनी खास पहचान और व्यक्तित्व होता है, अन्य लोगों की भी ठीक उसी तरह अपनी अलग पहचान और व्यक्तित्व होते हैं. परफेक्शन सिंड्रोम से बचने के लिए. लोगों के बीच मौजूद विभिन्नताओं और उनके विभिन्न दृष्टिकोणों को स्वीकार करने के साथ ही हमारे लिए इन विभिन्नताओं की सराहना करना भी बहुत महत्वपूर्ण है. हरेक व्यक्ति अपने में ‘खास’ होता है. हम में अपनी कुछ खास कमियां हैं जो हमें अन्य लोगों से अलग बनाती हैं. हम कई बार रंग, काबिलियत, शारीरिक आकृति, मानसिक संतुलन और ऐसी कई बातों को लेकर लोगों के बीच भेदभाव करने लगते हैं. हमें लोगों को उनके इम्परफेक्ट होने के बावजूद भी, जैसे वे लोग हैं, उन्हें वैसे ही रूप में स्वीकार करना सीखना चाहिए. हमें अपनी तरफ से लोगों को उनकी कमियां दूर हटाने में पूरी सहायता करनी चाहिए ताकि वे लोग भी अपने जीवन में कुछ नया सीखते हुए लगातार अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकें.

एक्सपर्ट के बारे में:

रजत सोनी एक टीन कोच और मोटिवेशनल स्पीकर हैं. इन्होंने राजत सोनी इंटरनेशनल संगठन की स्थापना की है. यह संगठन टीनएजर्स के समस्त व्यक्तिगत विकास के लिए काम करता है. रजत सोनी टीन्स और प्री-टीन्स को संकोच, सामाजिक चिंता, सीखने में आने वाली दिक्कतों और ऐसे कई कारकों पर काबू पाने में सहायता करते हैं जो कारक टीनएजर्स को उनकी पूरी क्षमता हासिल करने से रोकते हैं.

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