सोच बदलेगी तभी दिशा बदलेगी Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 6

इस मोटिवेशनल वीडियो में सुप्रसिद्ध लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर हमें अपने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए सबसे पहले अपनी सोच बदलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और अपना उदारहण हमारे सामने रखते हुए जोर देकर यह बात कह रहे हैं कि अगर हम अपनी सोच बदल लें तो हमारी दिशा भी बदल जायेगी और नतीजतन हमारी असफलता भी सफलता में बदल जायेगी. शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमें अन्य कई महत्वपूर्ण उदाहरण देते हुए पूरी मेहनत और ईमानदारी से अपना काम, कारोबार और नौकरी करने की प्रेरणा दे रहे हैं ताकि हम पैसा कमायें, पैसा बनाएं नहीं. अगर हम अपनी सोच को सकारात्मक और स्पष्ट रखते हैं, अपने काम को पूरी ईमानदारी और मेहनत से करते हैं, तो फिर हम किसी भी व्यवसाय में जरुर सफल होंगे. आइये इस वीडियो में देखें शिव खेड़ा जी कैसे कुछ खास उदाहरण देकर हमें अपनी सोच बदल कर अपने जीवन में सही दिशा की ओर बढ़ने और अंततः सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

इस वीडियो के शुरू में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी अपने जीवन का एक खास अमूल्य अनुभव हमसे साझा कर रहे हैं और बता रहे हैं कि कई वर्ष पूर्व जब वे जीवन बीमा पॉलिसी बेचने का काम करते थे तो एक दिन उनकी कंपनी के मैनेजर ने उनसे कहा कि, आप कोई काम-वाम नहीं कर रहे हो, आपके काम का कोई नतीजा नहीं निकल रहा, आप अपने पैसे पकड़ो और यहां से जाओ. तब शिव खेड़ा जी को अपने जीवन का सबसे बहुमूल्य सबक मिला कि, जिंदगी में बाहर कुछ नहीं बदलता, जब आपकी सोच बदल जाती है तो दिशा बदल जाती है. आगे वे अपनी बात के पक्ष में किसी विद्वान् का यह उदाहरण रख रहे हैं – नजर बदली तो नजारे बदले, कश्ती का रुख बदला तो किनारे बदले. इसी तरह, वे आगे कहते हैं कि, बाहर कुछ नहीं बदला, उनके भीतर बदला तो उनकी जिंदगी का रुख बदल गया. उस दिन के बाद खेड़ा जी का पॉलिसी का काम बहुत बढ़ गया, वे 3 कारोबारों में शामिल हुए और वहां पर उन्होंने एक कंपनी भी खरीदी. 

शिव खेड़ा जी आगे कह रहे हैं कि, उस हादसे से उन्हें अपने जीवन में एक खास सबक मिला. वे तो जीवन बीमा का काम कमीशन पर कर रहे थे अर्थात अगर वे पॉलिसी न बेचते तो उन्हें पैसा न मिलता......लेकिन वहां पर कई ऐसे भी लोग थे जो वेतन पर नौकरी कर रहे थे और वे लोग बिलकुल भी काम नहीं करते थे. अगर कमीशन पर काम कर रहे लोग काम न करें तो उन्हें पैसा नहीं मिलेगा लेकिन अगर वेतन पर काम करने वाले लोग काम न करें तो भी उन्हें वेतन तो मिलता ही है.

यह देखकर शिव खेड़ा जी को एक बात समझ में आई कि, पैसा कमाने में और पैसा बनाने में बहुत फर्क होता है. वे आगे कहते हैं कि, पैसा बनाना अपराध है लेकिन पैसा कमाना आध्यात्मिक है. पैसा बनाना चोरी है, पैसा कमाना ईमानदारी है. आज लोगों को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि बिना काम किए तनख्वाह लेना चोरी के समान है. अगर लोग तनख्वाह ले रहे हैं लेकिन काम नहीं कर रहे हैं, तो फिर ऐसे लोग चोरी नहीं कर रहे हैं तो और क्या कर रहे हैं?

शिव खेड़ा जी आगे कहते हैं कि अमरीका में स्थित एक बहुत बड़ी कंपनी में विश्व स्तर पर एक सर्वे किया गया जिसमें बताया गया कि दुनिया में 63% लोग जो काम करने के लिए किसी दफ्तर या कम्पनी में जाते हैं, वे अपना काम नहीं करते. अन्य 24% लोग जान-बूझकर अपना काम नहीं करते और दूसरों को भी अपना काम नहीं करने देते. दरअसल जो लोग किसी काम पर जाते हैं, उनमें से सिर्फ 13% लोग अपना काम ईमानदारी से करते हैं. वे हमसे आगे पूछते हैं कि, यह ईमानदारी का मुद्दा है या नहीं? इसका तो सीधा-सा यही मतलब है कि बिना काम के तनख्वाह लेना चोरी के समान है.

शिव खेड़ा जी हमें आगे कहते हैं कि, अक्सर कोई भी इंसान अपने काम की जिम्मेदारी नहीं लेता. एक कर्मचारी अपने नियोक्ता को सिर्फ एक वेतन चेक की तरह समझता है. अगर कोई इंसान सिर्फ पैसे कमाने का जरिया समझकर ही अपना काम या नौकरी करता है तो वह कभी अच्छा इंसान नहीं बन सकता. ऐसा इंसान कभी काम नहीं करेगा.

शिव खेड़ा जी आगे फिर हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का एक बढ़िया उदाहरण पेश कर रहे हैं कि, अगर आप किसी दुकान से कोई समान खरीदें और वह समान खराब निकल जाए तो ऐसे में आप दुकान पर जाकर अगर लड़ने लगेंगे. तब कई बार दुकानदार आपसे कहता है कि, आप मुझ पर क्यों बिगड़ते हैं, मैं तो सिर्फ यहां नौकरी करता हूं. यह बात हममें से अधिकतर लोगों ने सुनी है. उसके कहने का दरअसल यह मतलब होता है कि, मुझे यहां से कोई लगाव या अपनापन महसूस नहीं होता है. मैं तो सिर्फ यहां नौकरी करने आता हूं.

शिव खेड़ा जी इस वीडियो में आगे कहते हैं कि, 40-45 साल पहले अमरीका की एक कंपनी में दोपहर के समय गर्मी में मजदूर काम कर रहे थे, तभी वहां उस कंपनी का मालिक एक बड़ी कार में आया और उसने स्टीव नाम के एक मजदूर को पुकारा. स्टीव अपना काम छोड़कर कार के अंदर गया और बातचीत करके थोड़ी देर बाद कार से बाहर निकला और कार चली गई. वहां काम कर रहे सारे मजदूर हैरान होकर स्टीव से पूछने लगे कि यह तो इस कंपनी का मालिक है...आप इसे कैसे जानते हो? तब स्टीव ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर सारे मजदूर और भी हैरान हो गए. स्टीव ने कहा कि, आज से 30 साल पहले मैंने और इस कंपनी के मालिक ने एक ही दिन और एक समान पोस्ट पर इस कंपनी में नौकरी ज्वाइन की थी. तब हैरान होकर अन्य मजदूरों ने पूछा कि, फिर यह कैसे हुआ कि आज वह व्यक्ति इस कंपनी का मालिक है और तुम आज भी एक मजदूर ही हो? इस पर स्टीव ने जो जवाब  दिया वह गौर करने लायक है. स्टीव ने कहा कि, 30 साल पहले मैंने जब इस कंपनी में काम करना शुरू किया तो वह 1 डॉलर 28 सेंट के लिए किया लेकिन इसने कंपनी के लिए अपना काम शुरू किया.

शिव खेड़ा जी इस वीडियो में हमें आगे कह रहे हैं कि जीई के चेयरमैन जैक वेल्च की कहानी भी ऐसी ही प्रेरक कहानी है जिन्होंने केवल अपनी नौकरी नहीं की बल्कि अपनी कंपनी के लिए काम किया. अब शिव खेड़ा जी आगे कहते हैं कि, कुछ लोग ऐसा भी कह सकते हैं कि ऐसा सिर्फ अमरीका में ही हो सकता है, भारत में नहीं.....तो इस वीडियो में शिव खेड़ा जी आगे हमारे देश का एक उदाहरण पेश कर रहे हैं:

विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो में आगे कह रहे हैं कि, कुछ साल पहले वे एक ऐसे व्यक्ति से मिले जिन्होंनें आर्मी से जल्दी रिटायरमेंट लेकर अपना कारोबार शुरू किया और कुछ ही वर्षों में उनका कारोबार 1 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. एक दिन उनके कोई पुराने दोस्त आये जो आर्मी में उनके साथ थे और उन्होंने भी जल्दी रिटायरमेंट ले ली थी लेकिन अब बेरोजगार थे और काम खोज रहे थे. जब इस बेरोजगार दोस्त ने अपने कोरोबारी दोस्त से नौकरी मांगी तो उन्होंने तुरंत हां कर दी और बोले कि हमारी तो 30 साल पुरानी जान-पहचान है. फिर, एक दिन दफ्तर बंद हो जाने के बाद बाकी सब लोग अपने-अपने घर चले गए लेकिन ये दोनों दोस्त वहीँ बैठे थे. तब उस दफ्तर में काम करने वाले दोस्त ने अपने कारोबारी दोस्त से कुछ यूं बात की कि, तुझे याद है कि हम दोनों ने एक ही दिन आर्मी ज्वाइन की थी और हमें 1 हजार रुपये तनख्वाह मिलती थी. इस पर कारोबारी दोस्त ने जवाब दिया कि उसे अच्छी तरह यह सब याद है. पहला दोस्त कहता है कि, तू भी नौकर था, मैं भी नौकर था और 30 साल के बाद मैं आज भी नौकर हूं और तू 1 हजार करोड़ की कंपनी का मालिक है. यही तो किस्मत का खेल है......फिर उस फैक्ट्री के मालिक ने जो जवाब दिया वह बहुत महत्वपूर्ण था. फैक्ट्री के मालिक ने अपने दोस्त को यह जवाब दिया कि, वैसे तो मैं यह बात करना नहीं चाहता था लेकिन आज जब तूने यह बात छेड़ी है तो मैं तुझे इस बात का जवाब जरुर दूंगा. फिर अगर यह जवाब तुझे बुरा लगे तो भी यह तेरी सिरदर्दी है. अब तू मेरी बात ध्यान से सुन. मैं तुझे 30 साल पुरानी एक बात याद दिलाना चाहता हूं. एक दिन जब हम दोनों पूरा दिन दफ्तर में काम करके 2 मील चलकर रात को 9.30 बजे अपने बेरैक में सोने के लिए पहुंचे तो मुझे याद आया कि दफ्तर में बत्ती और पंखा बंद करना तो हम भूल गए. तब तूने कहा था कि, टाइम नहीं देख रहे....अभी 9.30 बज चुके हैं. कौन जाएगा वापिस 2 मील चलकर और फिर वापिस आएगा 2 मील? इस सब में 10.30 बज जायेंगे. क्या हमने आज दफ्तर में काम नहीं किया? फिर तूने मुझे कहा कि तू क्यों परेशान होता है? एक ही तो बत्ती है, एक ही तो पंखा है. क्यों परेशान हो रहे हो? एक ही रात की तो बात है भाई. तुम परेशान क्यों हो रहे हो..........ये अपना थोड़ी है, सरकारी है. फिर तू मुझे जाने के लिए मना करके सो गया. लेकिन मैं उस रात अपने दफ्तर वापिस गया और बत्ती–पंखा बंद करके आया. फिर उस कारोबारी दोस्त ने कहा कि अब ध्यान से मेरी बात सुन. तूने बिलकुल ठीक कहा कि 30 साल पहले मैंने और तूने 1 ही दिन फ़ौज में नौकरी ज्वाइन की थी और तुझे भी हजार रुपये मिलते थे, मुझे भी हजार रुपये मिलते थे. लेकिन तू  तब भी नौकर था और आज भी नौकर है.......मैं उस रात भी मालिक था और आज भी मालिक हूं. तेरी जैसी सोच है, तू मरेगा भी नौकर ही में.....इस वीडियो में शिव खेड़ा जी हमें सकारात्मक सोच रखकर अपनी नौकरी या कारोबार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

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