जानिये उन टॉप 10 स्किल्स के बारे में जिसकी तलाश हर नियोक्ता को होती है

किसी भी कंपनी या संस्थान में भर्ती अथवा नियुक्ति करते समय नियोक्ता कुछ विशेष गुणों की तलाश उम्मीदवार में करता है. जब भी कोई इन्टरव्यू लिया जाता है उसमें नियोक्ता खासतौर से यही देखना चाहता है कि उम्मीदवार उसकी जरूरतों तथा उम्मीदों की कसौटी पर खरा उतर सकता है या नहीं. सिर्फ इन्टरव्यू के दौरान ही नहीं बल्कि कर्मचारियों के प्रोमोशन के समय भी कुछ इसी तरह की उम्मीद नियोक्ता अपने कर्मचारी से रखते हैं. कई रिसर्च तथा सर्वे यह साबित करते हैं कि कंपनियों के नियोक्ता सिर्फ वोकेशनल या प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन या स्किल्स को ही नहीं देखती बल्कि इसके अतिरिक्त कंपनी अन्य विशेष योग्यताओं की तलाश करती हैं. अगर आपमें वे योग्यताएं हैं तो ये प्रोफेशनल डिग्रियां आपके लिए सोने पर सुहागा का काम करती हैं. अतः हर उम्मीदवार को अपने अन्दर नीचे दिए गए कुछ खास गुणों को अपने अन्दर विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए-

मन्त्र मुग्ध करने वाली संवाद शैली

ग्लोबलाइजेशन की वजह से हर कंपनी किसी दूसरे कंपनी तथा संस्थान में अपने कर्मचारियों को भेजती है. इसलिए ज्यादातर कंपनियों की मांग होती है कि उम्मीदवार  हर जगह कंपनी का प्रतिनिधित्व सही तरीके से करने में सक्षम हों. इसके लिए मन्त्र मुग्ध करने वाली संवाद शैली का ज्ञान जरुरी है.संवाद कौशल दुनिया में हर जगह सफलता के लिए जरूरी है. कार्पोरेट जगत में किसी से सामने अपनी बात को सही और स्पष्ट तरीके से रखने वाले लोगों को ही गंभीरता से लिया जाता है. सही संवाद शैली की वजह से ही आप अपने सीनियर तथा जूनियर के चहेता बन पाएंगे.

सामूहिक प्रयास

कार्पोरेट जगत में हर कंपनी यही चाहती है कि उसके सभी कर्मचारी किसी कार्य को करने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करें. वे हमेशा कोई भी काम टीम भावना से करें क्योंकि टीम के सामूहिक प्रयास से  किसी भी लक्ष्य को बड़ी आसानी से हासिल किया जा सकता है.

मार्केट अवेयरनेस

प्रतिस्पर्धा के इस युग में एक कर्मचारी को मार्केट के सभी अपडेट्स की जानकारी होनी चाहिए. उसे उन सभी व्यावसायिक गतिविधियों की सही सही जानकारी होनी चाहिए जो कि कंपनी की तरक्की को नुकसान पहुंचा सकती हैं या फिर उसकी प्रगति में सहायक हो सकती है. हमेशा उसे अपनी कंपनी के प्रतिद्वंदियों के बारे में सही और प्रमाणिक जानकारी रखने की जरुरत होती है. मार्केट में  कंपनी को लेकर क्या धारणा बन रही है, इसका भी पता लगाते रहना चाहिए.

समस्याओं के समाधान की क्षमता

किसी भी कर्मचारी में कार्य करते समय आने वाली समस्याओं को सहजता पूर्वक हल करने की उत्कृष्ट क्षमता होनी चाहिए. इसके साथ ही साथ उसमें डेटा एकत्रित कर, उसका सही और समुचित विश्लेषण कर सही निष्कर्ष तक पहुंच कर समस्या का समाधान निकालने की क्षमता होनी चाहिए.

मोटिवेशनल क्वालिटी

वैसे तो जीवन में सफलता के लिए  पग पग पर सेल्फ मोटिवेशन की जरुरत पड़ती है लेकिन किसी कंपनी में कार्यरत कर्मचारी का सेल्फ मोटिवेटेड होने के साथ साथ अपनी टीम, सीनियर तथा जूनियर को भी मोटिवेट करने की क्षमता होनी चाहिए.इससे न सिर्फ उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन दिनोंदिन बेहतर होता जाता है बल्कि पूरी टीम का प्रदर्शन बेहतर होता है. 

लीडरशिप क्वालिटी

किसी भी संस्थान तथा कंपनी में ग्रोथ तथा  कामयाबी के शिखर पर पहुँचने के लिए लीडरशिप क्वालिटी का होना अत्यंत जरुरी है. लीडरशिप क्वालिटी से अभिप्राय केवल बॉस बनना या प्रोमोशन पाकर किसी ऊँचे पद पर पहुंचना नहीं है बल्कि जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए पूरे टीम के साथ समन्वय बनाकर काम करने की कला में माहिर होना है. यह बात सही है कि हर किसी में लीडरशिप क्वालिटी नहीं होती है लेकिन हाँ इसे प्रयत्न करके अपने अन्दर आत्मसात किया जा सकता है.

लेखन शैली

अपने विचारों तथा भावनाओं को सही तरीके से अभिव्यक्त करने के दो मुख्य साधन मौखिक संवाद तथा लिखित संवाद में लिखित संवाद की किसी भी कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इसलिए किसी कर्मचारी का सिर्फ मौखिक संवाद ही नहीं उसकी लेखन शैली भी अपना प्रभाव छोड़ने वाली होनी चाहिए. आप कार्यालय में किस भाषा में और कितना सही मेल लिखते हैं,  यह कार्पोरेट जगत में काफी मायने रखता है. 

योजनाओं के क्रियान्वयन की क्षमता

किसी भी कंपनी में कार्य करने वाले कर्मचारी में अपनी कंपनी के हित में नई योजनाएं बनाने तथा उसके सही क्रियान्वयन की क्षमता होनी चाहिए, तभी एक कंपनी निरंतर प्रगति के राह पर अग्रसर हो सकती है.

परिवर्तन को स्वीकार करने की कला

आम तौर पर लोग किसी नए परिवर्तन को स्वीकार करने में समय लेते हैं. नित्य हो रहे नए नए परिवर्तन को जल्दी लोग आत्मसात नहीं कर पाते. इसलिए एक कर्मचारी को हमेशा परिवर्तन को स्वीकार करने की कला में प्रवीण होना चाहिए. हर कंपनी में काम करने का माहौल अक्सरहां बदलता रहता है जिसकी वजह से  काम का स्वरूप भी बदलता रहता है. इसके अतिरिक्त नेतृत्व में भी परिवर्तन होता रहता है. ऐसी परिस्थिति में एक कर्मचारी को  पूरे धैर्य के साथ बदलते माहौल में काम करने की कला आनी चाहिए.

समय का समुचित प्रबंधन

विकास तथा ह्रास सबकुछ टाइम मैनेजमेंट पर ही निर्भर करता है. अगर कोई कर्मचारी टाइम मैनेजमेंट करना नहीं जानता है तो आप उससे किसी अच्छे परिणाम की अपेक्षा नहीं कर सकते हैं. किसी भी कार्यालय में काम करने के वनिस्पत टाइम मैनेजमेंट करना ज्यादा मायने रखता है. अपने टास्क को एक निर्धारित समय में पूरा करने पर ही किसी को सफलता मिल पाती है. अतः इस कला में प्रवीणता ऑफिस में प्रोग्रेस की एक अनिवार्य शर्त है.

Related Categories

Popular

View More