टॉप 5 स्किल्स जो 2019 में दिलाएंगे आपको मनचाही जॉब

आजकल जॉब मार्केट का बहुत अधिक प्रतिस्पर्धी होने के कारण अपनी मनचाही जॉब प्राप्त करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गयी है.भारत जैसे सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश में जहाँ प्रतिवर्ष लाखों लोग नौकरी की तलाश में रहते हैं,नौकरी चाहने वालों को अपने अन्दर कुछ ऐसे स्किल्स विकसित करने होंगे जिनकी रिक्रूटर्स द्वारा सर्वाधिक मांग की जाती है तथा जो अनायास ही इन्टरव्यूअर को प्रभावित कर सकें. इन स्किल्स को विकसित कर उम्मीदवार अवश्य ही 2019 में अपनी मनचाही जॉब से जुड़े इन्टरव्यू को क्रैक करने में सफल होंगे.

भारत की पारम्परिक शिक्षा प्रणाली और जॉब की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों में जागरूकता की कमी के कारण कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्हें 2019 के नवीनतम कार्पोरेट ट्रेंड के अनुकूल अपने स्किल्स का पता ही नहीं है. जॉब की तलाश वाले उम्मीदवार अभी भी पुराने पारामीटर के अनुरूप तैयारी कर रहे हैं और इसका परिणाम उनकी अपेक्षाओं के बिलकुल बिपरीत आ रहा है और अमूमन वे सारे इन्टरव्यू में असफल होते जा रहे हैं. सही स्किल सेट का वर्णन नहीं होने के कारण इन्टरव्यू के लिए रिज्यूमे सेलेक्ट ही नहीं हो पा रही हैं. इसलिए अपने स्किल्स सेट को अपडेट करते रहिये तथा अपने अपडेटेड स्किल सेट्स को ही रेज्यूमे में दिखाएँ.नीचे 2019 के जॉब मार्केट के लिए जरुरी कुछ स्किल सेट्स का वर्णन किया गया है -

1. कम्युनिकेशन स्किल्स

अगर हम कार्पोरेट जगत की बात करें तो कार्पोरेट जगत में सफलता के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स का स्ट्रांग होना बहुत जरुरी है. इसके बिना तो इस जगत में सफल होना शायद नामुमकिन है. इसकी आवश्यकता जॉब इन्टरव्यू तथा ऑफिस में अपने जॉब प्रोफाइल से जुड़े कार्य करते समय प्रतिदिन के अपने दिनचर्या में भी इसकी बहुत अधिक उपयोगिता और आवश्यकता होती है. इसलिए कम्युनिकेशन स्किल एक ऐसा स्किल है जिसे हर रिक्रूटर्स उम्मीदवार में तलाशते हैं तथा यह अपेक्षा करते हैं कि उम्मीदवार का कम्युनिकेशन स्किल प्रभावी तथा जॉब मार्केट ट्रेंड के अनुरूप हो.

लेकिन जब कम्युनिकेशन स्किल की बात आती है तो हम इसका मतलब सिफ बोलचाल की भाषा अर्थात वर्बल कम्युनिकेशन से लगाते हैं लेकिन एक वर्किंग प्रोफेशनल को अपनी जॉब की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रिटेन तथा वर्बल दोनों ही कम्युनिकेशन को स्ट्रांग बनाना चाहिए.इन सबके अतिरिक्त प्रोफेशनल सक्सेस के लिए भी बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का होना अति आवश्यक है. यदि आप अपने विचारों को अपने बॉस तथा क्लाइंट के सामने स्पष्ट तरीके से रखने तथा उन्हें कन्विंस करने में पूरी तरह सक्षम हैं तो प्रोफेशनल फील्ड में सफल होने से आपको कोई नहीं रोक सकता है.

इसलिए किसी भी जॉब इन्टरव्यू से पहले कम्युनिकेशन स्किल्स के बारे में पूर्ण जानकारी रखते हुए उसमें अपने आप को प्रवीण बनाने की यथासंभव प्रयास करें और कम्युनिकेशन की कला में अपने आप को निष्णात बनायें. इस कम्युनिकेशन के अंतर्गत हर तरह की बातचीत चाहे वो ई मेल हो या फिर अपने दोस्तों से की जाने वाली छोटी मोटी बातें हर जगह इसका महत्व होता है.कम्युनिकेशन स्किल्स रिक्रूटर्स के लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है.

2. ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स

इन्टरव्यू के दौरान उम्मीदवारों के ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स का भी परीक्षण किया जाता. आपने जिस जॉब के लिए अप्लाई किया है उससे जुड़े ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स की जानकारी आपको इन्टरव्यू में अतिरिक्त मार्क्स दिलाएंगे. इन्टरव्यू में ऐसे उम्मीदवारों को वरीयता दी जाती है. यदि किसी कंपनी में काम करते हैं या करते थें तो आपके पास आवश्यक ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स तो होगा ही. इतना ही नहीं कंपनी में काम करने का मतलब है कि आपके कंधों पर बहुत सारी अलग-अलग जिम्मेदारियाँ होंगी. इन्टरव्यू के दौरान आपको अपने इस स्किल के महत्व का पता चलेगा.ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स  उम्मीदवारों को विभिन्न कार्यों और जिम्मेदारियों के बीच प्राथमिकता देने में मदद करते हैं और उम्मीदवारों की कार्यकुशलता और पारदर्शिता को भी प्रदर्शित करता है.ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स वर्क फ्लो को बेहतर ढंग से समझने और काम को समय पर पूरा करने वाली प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. साथ ही ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स उम्मीदवारों को उनकी कमजोरियों को बताकर उसमें सुधार करने का सुझाव भी देते हैं और इससे प्रोफेशनल फील्ड में सफलता मिलना आसान हो जाता है.

अब हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि अभी भी ऑर्गनाइजेशंस तथा रिक्रूटर्स बीच ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स की डिमांड क्यों है ?यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि आखिर वास्तव में ये हैं क्या ? ऑर्गनाइजेशनल स्किल्स में किसी भी काम को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन की गयी प्रक्रिया को शामिल किया जाता है. इसमें बहुत छोटी छोटी बातें जैसे अपने डेस्क को कैसे व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए ? से लेकर अपने सप्लायर्स को मैनेज करना अथवा मीटिंग करना या रिपोर्ट तैयार करना आदि जैसे कार्य शामिल होते हैं.इसमें मुख्य रूप से कंपनी की प्राथमिकताओं के साथ अपने प्रोफेशनल काम को और संगठित तरीके से किया जाता है.

3. टीम वर्क स्किल्स

यह कहने की कोई आवश्यकता ही नहीं है कि सभी नियोक्ताओं द्वारा टीम वर्क को कितना ज्यादा महत्व दिया जाता है ? एक कॉर्पोरेट वातावरण में एक कंपनी में काम करने का मतलब है कि आप कई अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ काम कर रहे होंगे. उनमें से कुछ आप के अनुकूल कार्य करने को तैयार होंगे तथा कुछ आपके बिलकुल विपरीत करने की दिशा में अग्रसर होंगे. लेकिन इन सभी विरोधी तथा विपरीत स्थितियों के बावजूद काम पूरा करने के लिए, आपको उनके साथ एकल टीम के रूप में काम करना होगा.

चाहे एक दूसरे से अपने विचार शेयर करने की बात हो या फिर कुछ प्रोजेक्ट्स में सहयोग की बात हर जगह टीम वर्क की जरुरत पड़ती है. इसलिए इन्टरव्यू में टीम वर्क स्किल्स की भी जाँच पड़ताल की जाती है. जो उम्मीदवार अपनी टीम वर्क स्किल्स से उन्हें प्रभावित करने में सक्षम होते हैं वे उनकी लिस्ट में सबसे ऊपर होते हैं.दूसरी ओर जिन लोगों को अपने व्यक्तिगत मतभेदों को भूलाकर दूसरों के साथ काम करने की कला मालूम नहीं है वे अवश्य ही इन्टरव्यू में अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर सकते तथा वे इन्टरव्यूअर को प्रभावित करने में भी सक्षम नहीं हो सकते हैं.विभिन्न व्यवसायों और कंपनियों के विकास और विस्तार के कारण आज के जॉब मार्केट में टीमवर्क की पहले की  वनिस्पत बहुत ज्यादा आवश्यकता है.आज, बहु-राष्ट्रीय कंपनियों और स्थानीय संगठनों के अलग-अलग कार्यालयों और प्रक्रियाओं को दुनिया भर में विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में उम्मीदवारों को  टीम से काम लेने के लिए क्लाउड-आधारित कोलेबोरेशन का लाभ उठाना चाहिए.

4. टाइम मैनेजमेंट

अधिकांश उम्मीदवार जो नौकरी के लिए इन्टरव्यू देने जाते हैं वे इस महत्वपूर्ण स्किल को इग्नोर कर देते हैं जबकि आज के समय में टाइम मैनेजमेंट जैसे स्किल्स की डिमांड सर्वाधिक है. कहा भी गया है “टाइम इज मनी”. बचपन में हमने कई बार यह पढ़ा है कि समय और लहरें किसी का इंतजार नहीं करती हैं. लेकिन इसे सुनना और सुनाना जितना आसान है उतना ही मुश्किल है अपने ऊपर लागू करना. ऑफिस में टाइम मैनेजमेंट से अभिप्राय है अधिकतम कार्य करने के उद्देश्य से अपने समय का सही उपयोग करना तथा कम समय में सही रिजल्ट देना. आप जिस स्पीड से अपना काम समाप्त करते हैं उसी स्पीड के आधार पर आपकी दक्षता निर्धारित की जाती है जिससे अंततः प्रोफेशनल जीवन में आपके द्वारा प्राप्त की गयी सफलता को मापा जाता है.इसलिए, टाइम मैनेजमेंट एक ऐसा स्किल है जो रिक्रूटर्स की लिस्ट में सबसे ऊपर रहता है एवं इसकी तलाश वे हर उम्मीदवार में करते हैं.

5. लिक से हटकर सोचना

2019 में जॉब मार्केट में बहुत ज्यादा कॉम्पिटीशन है, खासकर उन बिजनेस के लिए जो अपेक्षाकृत संतृप्त बाजार में वृद्धि और विस्तार की तलाश में हैं. मार्केट में हर जगह कॉम्पिटीशन ही है. इसलिए टॉप पर रहने तथा अपनी कंपनी को सफलता दिलाने के लिए उसके कर्मचारियों को स्मार्ट होने के साथ साथ आउट ऑफ बॉक्स सोचना चाहिए.

अब वे दिन नहीं रहे जब पुरानी तकनीकों का परीक्षण कर या गट फिलिंग अथवा बड़े बुजुर्गों की सलाह से व्यावसायिक जीवन में सफलता की कामना की जाती थी. अब नौकरी चाहने वालों को यूनिक आइडियाज के साथ लिक से हटकर सोचने की क्षमता भी विकसित करने की जरुरत पड़ती है, तभी वे इन्टरव्यूअर तथा रिक्रूटर्स को प्रभावित कर सकते हैं तथा कोई अच्छी जॉब प्राप्त कर सकते हैं. चूँकि आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोंच से उम्मीदवारों के क्रिएटिव थिंकिंग का पता चलता है तथा इससे बिजनेस डीलिंग,एग्जीक्यूटिव प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और नई स्ट्रेटेजी बनाने में बहुत मदद मिलती है.अतः लिक से हटकर सोचना एक ऐसा स्किल है जिसकी बहुत अधिक डिमांड 2019 के जॉब इन्टरव्यू में तथा रिक्रूटर्स द्वारा की जाएगी.

ऊपर वर्णित ये ऐसे पांच स्किल्स हैं जिनकी डिमांड जॉब इन्टरव्यू में खासतौर से 2019 में रहेगी. हो सकता है इनमें से कुछ आपको पुरानी टेक्नीक्स जैसा ही प्रतीत हो लेकिन समय के जरूरतों के अनुरूप उनमें भी परिवर्तन तथा विकास की आवश्यकता पड़ती है और उन्हें 2019 की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की कोशिश करें. यदि आप ऐसा करने में सक्षम हो जाते हैं तो निःसंदेह 2019 में आपको एक अच्छा ब्रेक मिलेगा.

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