# UP Board 2018: Class 12th Physics(II) Guess Paper Solved

In this article, we present you the UP Board Class 12th Physics (second) solved guess paper to prepare for the upcoming board exam 2018. With this guess paper, students can easily understand the latest examination pattern of UP Board class 12 Physics (second) paper. UP Board class 12 Physics (second) board exam 2018 is scheduled to be held on 17 February. It means you have only few days to prepare for this exam.

Physics is one such subject in which students can score maximum marks by following the right preparation technique and exam writing skills. You cannot learn Physics by just memorizing a set of formulae given in the book. You need to understand how to use those formulae, for which you would require more and more practice. So, it’s very important to solve practice papers, guess papers, sample papers. This will help you track your preparedness for the exam, letting you know your weak areas which you may improve later.

UP Board Class 12th Physics (second) solved guess paper 2018, has been specially prepared by the subject experts after the brief analysis of previous year question papers and the latest examination format. Practicing these questions will definitely help to fine-tune your preparations for the board exam 2018.

Salient features of this Solved Guess Paper are:

• Strictly follows latest UP Board Class 12th Physics second syllabus,

• Based on latest examination pattern,

• Focuses upon topics from which questions are likely to be asked,

• Offers detailed solutions for each and every question,

• Perfect for practice & revision.

Some questions from the solved guess paper are given below:

प्रश्न :चुम्बकीय प्रवृति का मान कम परन्तु धनात्मक होता है –

(i) अनुचुम्बकीय पदार्थो के लिए

(ii) लौह चुम्बकीय पदार्थो के लिए

(iii) प्रति चुम्बकीय पदार्थो के लिए

(iv) सभी पदार्थो के लिए

उत्तर. (i) अनुचुम्बकीय पदार्थो के लिए

प्रश्न : प्राउनहॉफर रेखायें उदहारण है –

(i) सतत स्पेक्ट्रम की

(ii) बैण्ड स्पेक्ट्रम की

(iii) अवशीषण स्पेट्रम की

(iv) उत्सर्जन स्पेट्रम की

उत्तर. (iv) उत्सर्जन स्पेट्रम की

प्रश्न : किसी तार का प्रतिरोध 500W है उसकी वैधुत-चालकता होगी -

(i) 0.002 ओम-1

(ii) 0.02 ओम-1

(iii) 50 ओम-1

(iv) 500 ओम-1

उत्तर. (ii) 0.02 ओम-1

प्रश्न : युग्म उत्पादन के लिय गामा-फोटॅान की न्यूनतम ऊर्जा है -

(i) 931 MeV

(ii) 9.31 MeV

(iii) 102 MeV

(iv) 1.02 MeV

उत्तर. (iv)1.02 MeV

प्रश्न : प्रति - कण से क्या तात्पर्य है?

उत्तर. किसी भी कण संबंध प्रतीकण भी होता जिसका द्रव्यमान अभिन्न होता है लेकिन विधुत आवेश विपरीत होता है| उदहारण के लिए इलेक्ट्रॉन का प्रति – कण प्रति – इलेक्ट्रॉन एक धनावेशित कण जिसे पोजीस्ट्रॉन कहते है, सामान्यत: इसे रेडिओ धर्मी पदार्थो के क्षय से बनाया जाता है|

UP Board exam 2018: Syllabus, Exam pattern, Chapter notes, Mock papers and Previous year papers

प्रश्न : भँवर धाराएँ क्या होती हैं?

उत्तर. जब कोई धातु का टुकड़ा किसी परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित होता है अथवा किसी चुबम्कीय क्षेत्र में इस प्रकार गति करता है कि उससे बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो, तो धातु में सम्पूर्ण आयतन में प्रेरित धाराएँ उत्पन्न हो जाती है जो कि धातु के टुकड़े की गति का विरोध करती हैं| यें धाराएँ जल में उत्पन्न हुई भंवर धाराओं के समान चक्करदार होती हैं| अतः इन धाराओं को ‘भंवर धाराएँ कहते हैं|

प्रश्न : किसी अर्धचालक को मादित करने से क्या तात्पर्य है| इस क्रिया से अर्धचालक की चालकता पर पड़ने  वाले प्रभाव की व्याख्या कीजिए|

उत्तर.  जब किसी अर्धचालक में कोई अशुद्धता मिलाई जाती है तब अर्धचालक को मादित करना कहा जाता है| सामान्यतः मादन में दो प्रकार की अशुद्धियाँ प्रयुक्त होती है-

(i) पंचसंयोजी अशुद्धियाँ जैसे एन्टीमनी (sb), आर्सेनिक (As), इत्यादि|

(ii) त्रिसंयोजी अशुद्धियाँ जैसे इंडियम (In), गैलियम (Ga), इत्यादि|

किसी अर्धचालक को मादित करने से उसकी चालकता बढ़ जाती है|

प्रश्न : वोल्टता नियंत्रण के रूप में जेनर डायोड का उपयोग ?

उत्तर.  हम जानते हैं की किसी दिष्टकारी की निवेश वोल्टा में घट-बढ़ होती है तो उसकी दृष्टकृत वोल्टता में भी घट-बढ़ हो जाती है| किसी दृष्टकारी के निर्गत से प्राप्त अनियंत्रित dc वोल्टता से स्थाई dc वोल्टता प्राप्त करने के लिए हम ज़ेनर डायोड का उपयोग करते हैं| किसी अनियंत्रित dc वोल्टता को श्रेणी क्रम में संयोजित प्रतिरोध Rs से होते हुए जेनर डायोड से इसप्रकार संयोजित करते हैं कि जेनर डायोड पश्चदिशिक बायस हो यदि निवेशी वोल्टता में वृद्धि होती है तो Rs जेनर डायोड से प्रवाहित धारा में भी वृद्धि होती है| इससे जेनर डायोड के सिरों पर वोल्टता में कोई भी परिवर्तन हुवे बिना Rs के सिरों में वोल्टता में वृद्धि हो जाती है| इसका कारण यह है की भंजन क्षेत्र में जेनर वोल्टा नियत रहती है| यद्दपि जेनर डायोड से प्रवाहित धारा में परिवर्तन होता है| इसी प्रकार यदि निवेशी वोल्टता घटती है Rs तथा जेनर डायोड से प्रवाहित धारा भी घात जाती है| जेनर डायोड के सिरों पर वोल्टा में कोई परिवर्तन हुवे बिना Rs के सिरों का विभवपात घट जाता है|हमें आवश्यक निर्गत वोल्टा के अनुसार ही जेनर डायोड तथा श्रेणी-प्रतिरोधक Rs का चयन करना होगा|

Practicing this paper will help the students in understanding the depth with which a topic should be studied in order to prepare in a more effective way to get the desired results.

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